Maharaja Multipurpose HS School No.1

Maharaja Multipurpose HS School No.1 One of prestigious Higher Secondary School at Chhatarpur. Well No. 1 was menat for science and maths, where as no. 2 was for arts and commerce.

Almost all the places and buildings i Chhatarpur were named after Maharaja (Chhatrasal) who founded the city. So much so that two boys hogher secondary school were also named as Maharaja Multi Purpose Higher Secondary School No. 1 & 2.

Some thoughts on the eve of Diwali. I have started implementing them, how about you?
08/11/2020

Some thoughts on the eve of Diwali. I have started implementing them, how about you?

05/09/2020

“ऑनलाइन या ऑफ़लाइन”

कक्षा में शिक्षक सीख देते
कठिनाई पर तुम मात करना

फिर आए आज के ये दिन
जब हो रहा कठिनाई से सामना

ब्लैक बोर्ड छोड़, कंप्यूटर सीखा
नए तरीक़े से शुरू किया पढ़ाना

खुद सीख, बच्चों को सिखाया
घर रहकर भी कैसे कक्षा लगाना

नमन आज उन सभी शिक्षकों का
सिखाया समय के साथ बदलना

चाहे ऑनलाइन या हो ऑफ़लाइन
आज है शिक्षकों का सम्मान करना

ऋषिकेश
५ सितम्बर २०२०

03/04/2020
उत्कृष्ट विद्यालय Had requested a friend , who visits Chhatarpur frequently, for some pictures of school. Here they are....
29/06/2018

उत्कृष्ट विद्यालय
Had requested a friend , who visits Chhatarpur frequently, for some pictures of school. Here they are. The pic also suggests that Maharaja School is now a “उत्कृष्ट स्कूल”. Something nice to know

More picture of school are welcome , in anyone had them

14/11/2017

A small milestone...
Had started this page to reach out to alumni of Maharaja School No. 1 at Chhatarpur. Looks like there are very few active alumni on Facebook, it crossed milestone of 50 people who liked this page recently.

One request- if anyone has a picture of the school, please post here or inbox through messenger

One of prestigious Higher Secondary School at Chhatarpur.

14/11/2017

बाल दिवस की शुभकामनाएं 👶🧑👵👴👫👭

आप सभी को अपने स्कूल के दिन तो याद होंगे जब बाल दिवस बड़े ही जोर शोर से मनाया जाता था। कई कार्यक्रम होते थे बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू की याद में। चलिए आज भी हम मनाएं, पर कुछ फिल्मी अंदाज़ में.

हिंदी फ़िल्मों में और खासतौर पर पुरानी फ़िल्मों में बच्चों के रोल के साथ बड़ी ही नाइंसाफी होती थी। बच्चों के रोल हीरो या हीरोईन का बचपन दिखाने के लिए लिखा जाता था और उनके मुंह बड़े लोगों जैसे संवाद होते थे। जैसे “माँ में तेरे इस अपमान का बदला लूंगा”। गाने भी होते थे तो जैसे “क्या हुआ तेरा वादा.... “ या “जब हम तुम जवाँ होंगे ... “। फ़िर अमिताभ बच्चन के बचपन का रोल करने वाला मास्टर अलंकार (सेठ पैसा उठा कर दो...), सारे दर्शक राह देखते थे कि कब यह बड़ा हो और अमिताभ परदे पर आये। बचपन का एकदम ही कचरा।

पर कुछ फ़िल्मों में बच्चों के रोल, बच्चों जैसे थे। खिलखिलाते हुए, शैतानी करने वाले और बच्चों जैसी बातें करने वाले। चलिए आज के दिन उन फ़िल्मों को याद करें, बाल दिवस के अवसर पर। अपनी पसंद की एक फ़िल्म के बारे में लिखिए जिसमें , बच्चे , बच्चों जैसे थे। सबसे पहले मुझे याद पड़ती है, परिचय, जो साऊंड ऑफ़ म्युजिक पर आधारित थी, छोटे बच्चों का काम लाजवाब था , खासकर मास्टर राजू और बेबी पिंकी।

अब आपका नंबर है..

02/10/2017

में गांधी बन जाऊँ ..

कुछ कविताएँ मन पर अमिट छाप छोड़ जाती हैं। यह कविता शायद दूसरी क्लास की बाल भारती में थी।

माँ, खादी का कुर्ता दे दे, मैं गाँधी बन जाऊँ,
सब मित्रों के बीच बैठ फिर रघुपति राघव गाऊँ!

निकर नहीं धोती पहनूँगा, खादी की चादर ओढूँगा,
घड़ी कमर में लटकाऊँगा, सैर सवेरे कर आऊँगा!

मैं बकरी का दूध पिऊँगा, जूता अपना आप सिऊँगा!
आज्ञा तेरी मैं मानूँगा, सेवा का प्रण मैं ठानूँगा!

मुझे रुई की पूरी दे दे, चर्खा खूब चलाऊँ,
माँ, खादी की चादर दे दे, मैं गाँधी बन जाऊँ!

कमला चौधरी

तब कवि का नाम मालूम नहीं था, आज ढूँढा तो पता चला, कवियत्री कमला चौधरी हैं (1908-1970)

क्या आप को याद है ?

05/09/2017

नमन उन शिक्षकों को

स्कूल के आख़री घंटे में पहाड़े का समय होता, अगर पहाड़ा ग़लत हो जाए तो मास्टर साहब की संटी पड़ती। बड़ा ग़ुस्सा आता, पर आज उसी वजह से बिना कैल्क्युलेटर के हिसाब कर लेते हैं, बीस तक पहाड़े भी याद हैं।

सुलेख के पिरीयड में , दवात और बर्रु लाना भूल जाओ तो डाँट पड़ती। पर आज उसी वजह से , कीड़े मकोड़े जैसी नहीं अपनी हैंड रायटिंग, अपना लिखा, पढ़ लेते हैं लोग।

हिंदी और अंग्रेज़ी की क्लास में , व्याकरण की ग़लती पर उलाहना मिलती, लगता क्या फ़र्क़ पड़ता है। पर आज उसी के चलते स्पेलिंग और ग्रामर चेक के बिना भी लिख लेते हैं। प्रकाशित भी कर पाते हैं।

कॉलेज में पहले साल में प्रोफ़ेसर से हिंदी में बात करो तो जवाब नहीं देते थे, उनके देश प्रेम पर शंका आती। पर आज उसी वजह से अंग्रेज़ी में आत्मविश्वास से बड़ी बड़ी मीटिंग और अंतराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा कर पाते हैं।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन तो एक शिक्षक से भारत के राष्ट्रपति तक पहुँचे। हमारे कई शिक्षक , वहीं रहे, पर हमें आज यहाँ तक पहुँचाया।

उन सभी को इस शिक्षक दिवस पर नमन
ऋषिकेश
५ सितंबर २०१७

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471201

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