MCBU CHHATARPUR

MCBU CHHATARPUR Official Handle Of MCBU
MCBU is the state University located at Chhatarpur (M.P.)

Maharaja Chhatarsal Bundelkhand University (MCBU) is the largest state University in respect of students' enrolment and area of land in Madhya Pradesh, India. The University aims to nurture excellence in education and research in the catchment area of Bundelkhand. The University lays its emphasis on fostering quality human resource and promoting productive research that benefit both local communit

ies and humanity at large. The University was established on 09/07/ 2014 by the Act of the State Legislature of Madhya Pradesh. The eponymous university is named after Maharaja ChhatrasalBundela who established the kingdom and the town.The motto of the university is ‘savidhyayavimuktaye’(knowledge is the one that liberates) and it is steadily stepping towards it, vitalizing all the stakeholders with the process of gaining the best knowledge and its practices. A new dimension was added to the University on September 29, 2021 when the University started functioning after the merger of Govt. Maharaja Postgraduate Autonomous College, Chhatarpur into it in compliance of the order of the Department of Higher Education, issued vide its letter no: f-73-4/2021/38-3, dated 24/09/2021 and as such all the infrastructure and assets of the college were transferred to the University. At present, it has 22 University Teaching Departments: Botany, Chemistry, Commerce and Management Studies, Computer Science, English, Hindi, History, Political Science, Mathematics, Philosophy, Physics, Physical Education, Sanskrit, Zoology, Geology, Sociology, Economics, Fine Art, Geography, Music, Industrial Microbiology and Urdu; 3 faculties and 21 research centers. It offers Post-graduate courses in 21 subjects along with certificate, diploma and graduate courses; it has become a beacon of hope and enlightenment for thousands of young men and women in the region of Bundelkhand, Madhya Pradesh. The University is privileged to affiliate 196 collegesout of which 55 are located in Chhatarpur, 25 in District, 28 in Panna, 65 in Sagar, 17 in Damohand 6 in Niwari. The campus of the University covers an area of 24.11 acre and itis located at the centre of Chhatarpur city on the NH-75. Keeping in view of the expansion of the University, a land of 400 acre was allotted by the government that will house all the amenities in the times to come. To meet the challenges of the emerging fields of knowledge, the University is offering both conventional and advanced programmes of studies and research opportunities under the same umbrella. It houses administration through e-Governance, computerization of examinations, establishment of smart class rooms and well-equipped laboratories. Extension lectures by renowned scholars and scientists are some of the innovative activities that are executed after a regular interval. Inclusive growth towards excellence and ensuring opportunities to the underprivileged and marginalized section of the society is our primary objective and we are leaving no stone unturned to translate it into reality.

*शोधार्थी अरविंद त्रिपाठी एवं वरुण बोहरे ने पी-एच.डी. उपाधि हेतु दी सटीक प्रस्तुति**बाह्य परीक्षक डॉ. शैलेन्द्र सिंह भदौ...
26/08/2026

*शोधार्थी अरविंद त्रिपाठी एवं वरुण बोहरे ने पी-एच.डी. उपाधि हेतु दी सटीक प्रस्तुति*

*बाह्य परीक्षक डॉ. शैलेन्द्र सिंह भदौरिया ने किया शोधकार्यों का अकादमिक मूल्यांकन*

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर के वाणिज्य विभाग के शोधार्थीद्वय अरविंद कुमार त्रिपाठी एवं अरुण बोहरे की पी-एच.डी. की अंतिम मौखिक परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई,जिसमें दोनों शोधार्थियों ने विषय पर सटीक प्रस्तुति दी।
पहले शोधार्थी सिद्धार्थ अरविंद कुमार त्रिपाठी ने “पन्ना जिले में जिला उद्योग केन्द्र के माध्यम से बैंकों द्वारा हितग्राहियों को दिए गए ऋण का स्वरोजगार एवं आर्थिक विकास में योगदान” विषय पर डॉ. ओ. पी. अरजरिया के मार्गदर्शन में शोधकार्य किया है। वहीं दूसरे शोधार्थी वरुण बोहरे ने “जबलपुर संभाग में मध्यप्रदेश शासन की चयनित आर्थिक योजनाओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन” विषय पर डॉ. बी. के. अग्रवाल के मार्गदर्शन में शोधकार्य किया है।अंतिम मौखिक परीक्षा में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक के वाणिज्य विभाग के डीन एवं विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र सिंह भदौरिया बाह्य परीक्षक के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दोनों शोधार्थियों से शोध विषय, शोध-पद्धति एवं प्रमुख निष्कर्षों से संबंधित प्रश्न करते हुए शोधकार्यों का अकादमिक मूल्यांकन किया तथा महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन एवं अतिथि परिचय डॉ. बी. के. अग्रवाल द्वारा दिया गया। इस अवसर पर वाणिज्य विभाग की डीन डॉ. मुक्ता मिश्रा भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ.डी. पी.शुक्ला, प्राध्यापक डॉ.सुमति प्रकाश जैन, डॉ.ओ.पी.अरजरिया, डॉ. एम. एस. यादव, डॉ.बी.के. अग्रवाल, विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक निगम सहित शिक्षकगण एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।बाह्य परीक्षक डॉ. शैलेन्द्र सिंह भदौरिया ने दोनों शोधकार्यों की सराहना करते हुए महत्वपूर्ण अकादमिक टिप्पणियाँ की एवं सुझाव दिए। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अशोक निगम ने सभी का आभार व्यक्त किया।
अंत में शोधार्थियों द्वारा उपस्थित विद्वतजनों का शॉल एवं श्रीफल से सम्मान किया गया। उपस्थित विद्वानों एवं शिक्षकों ने दोनों शोधार्थियों को उनके शोधकार्य एवं आगामी अकादमिक जीवन के लिए शुभकामनाएँ प्रदान कीं।

*गणित विभाग के शोधार्थी ने दिया शोध प्रबंध पूर्व प्रस्तुतीकरण* छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर क...
25/08/2026

*गणित विभाग के शोधार्थी ने दिया शोध प्रबंध पूर्व प्रस्तुतीकरण*

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर के गणित विभाग के शोधार्थी अभिषेक कुलश्रेष्ठ ने “ some concepts of fuzziness in game theory” विषय पर शोध प्रबंध पूर्व प्रस्तुतीकरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । शोध निर्देशक डॉ. एके सक्सेना प्राध्यापक, गणितअध्ययनशाला एवं शोध केन्द्र, के मार्गदर्शन में अपना शोधकार्य प्रस्तुत किया है। शोधार्थी ने अपने शोध की पृष्ठभूमि, उद्देश्य, शोध-पद्धति, प्रमुख निष्कर्ष एवं सुझावों का प्रस्तुतीकरण किया।

इस अवसर पर विज्ञान संकाय की अध्यक्ष डॉ अर्चना जेन प्रोफेसर एनपी प्रजापति परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर बी एल कुमार डॉक्टर राहुल देव awsthi श्री राजकुमार विश्वकर्मा डॉ पीके जैन एवं शोध छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों एवं शिक्षकों ने शोधार्थी को उनके शोधकार्य के लिए शुभकामनाएँ प्रदान कीं।

*अर्थशास्त्र विभाग के शोधार्थी ने दिया शोध प्रबंध पूर्व प्रस्तुतीकरण* छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छ...
25/08/2026

*अर्थशास्त्र विभाग के शोधार्थी ने दिया शोध प्रबंध पूर्व प्रस्तुतीकरण*

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर के अर्थशास्त्र विभाग के शोधार्थी उत्कर्ष खन्ना ने “IMPACT OF FORMAL CREDIT ACCESS ON MSME GROWTH - A CASE STUDY OF MADHYA PADESH” विषय पर शोध प्रबंध पूर्व प्रस्तुतीकरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । शोध निर्देशक डॉ. अंजना चतुर्वेदी, प्राध्यापक, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला एवं शोध केन्द्र, शासकीय स्वशासी कन्या स्नातकोत्तर उत्कृष्ट महावि‌द्यालय, सागर, मध्यप्रदेश के मार्गदर्शन में अपना शोधकार्य प्रस्तुत किया है। शोधार्थी ने अपने शोध की पृष्ठभूमि, उद्देश्य, शोध-पद्धति, प्रमुख निष्कर्ष एवं सुझावों का प्रस्तुतीकरण किया।

इस अवसर पर सामाजिक विज्ञान संकाय की अध्यक्ष डॉ मुक्ता मिश्रा, विभागाध्यक्ष डॉ. विभा वासुदेव, डॉ जे.पी. मिश्रा पूर्व कुलसचिव महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर, डॉ मंजूषा सक्सेना, प्राध्यापक डॉ. सी. एल. प्रजापति, श्री आनंद प्रताप यादव, डॉ सीताराम अहिरवार, श्री ज्योति प्रकाश नीरज, डॉ. आर. एस. साकेत एवं शोधार्थी के माता-पिता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों एवं शिक्षकों ने शोधार्थी को उनके शोधकार्य के लिए शुभकामनाएँ प्रदान कीं।

*सफलता संयोग से नहीं मिलती,बल्कि हम उसका चुनाव करते हैं- डा शैलेन्द्र भारल,उज्जैन**करियर अवसर एवं सफलता प्राप्ति के प्रय...
22/08/2026

*सफलता संयोग से नहीं मिलती,बल्कि हम उसका चुनाव करते हैं- डा शैलेन्द्र भारल,उज्जैन*

*करियर अवसर एवं सफलता प्राप्ति के प्रयत्न पर हुआ विशेष व्याख्यान*

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर के वाणिज्य विभाग में विद्यार्थियों के मार्गदर्शन एवं उनके करियर निर्माण के उद्देश्य से “करियर अवसर एवं सफलता प्राप्ति के प्रयत्न” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के वाणिज्य विभाग के डीन एवं विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र कुमार भारल उपस्थित रहे।
अपने व्याख्यान में डॉ. भारल ने वाणिज्य के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध विभिन्न रोजगार एवं करियर अवसरों, प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा, अध्यापन, शोध तथा व्यवसाय के क्षेत्र में उभरती संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सफलता संयोग से नहीं,बल्कि हम उसका चुनाव करते हैं। सफलता केवल डिग्री प्राप्त करने से नहीं मिलती, बल्कि इसके लिए निरंतर सीखने, अपनी क्षमताओं को पहचानने, कौशल विकसित करने और सही दिशा में निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता होती है।उन्होंने बदलते रोजगार बाजार के संदर्भ में विद्यार्थियों को विषयगत ज्ञान के साथ संचार कौशल, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता, व्यावहारिक ज्ञान तथा समसामयिक आर्थिक एवं व्यावसायिक घटनाओं की समझ विकसित करने के लिए प्रेरित किया।आपने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में वही विद्यार्थी आगे बढ़ सकते हैं जो स्वयं को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप निरंतर विकसित करते रहें। डॉ. भारल ने कहा कि करियर का चुनाव केवल नौकरी प्राप्त करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपनी रुचि, क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने सफलता के लिए लक्ष्य निर्धारण, समय प्रबंधन, अनुशासन, निरंतर अध्ययन और सकारात्मक दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विभागाध्यक्ष डा अशोक निगम ने स्वागत उद्बोधन देते हुए विषय की महत्ता स्पष्ट की।कार्यकम में वाणिज्य विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ.डी.पी.शुक्ला,सेनि प्राध्यापक डा बीकेअग्रवाल,डॉ.सुमति प्रकाश जैन,डॉ.ओ.पी.अरजरिया, डॉ.एम.एस.यादव तथा विभागाध्यक्ष डॉ.अशोक निगम सहित विभाग के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में श्री संजय जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम का संचालन डा नीतेश मिश्रा ने किया।विद्यार्थियों ने भी उनके उपयोगी एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

*महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत प्राध्यापकों की समस्याएं हैं कई वर्षों से लम्बित...
21/08/2026

*महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत प्राध्यापकों की समस्याएं हैं कई वर्षों से लम्बित।*

*प्राध्यापक संघ ने विश्वविद्यालय के कुलगुरु को सौंपा ज्ञापन।*

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत प्राध्यापकों की कई वर्षों से लम्बित समस्याओं के विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग से शीघ्र हल हेतु विश्वविद्यालय प्राध्यापक संघ ने महाविद्यालयीन इकाई के अध्यक्ष प्रो पी के खरे के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के कुलगुरु को ज्ञापन सौंपा है। प्राध्यापक संघ ने ज्ञापन देकर विश्वविद्यालय के कुलगुरु को अवगत कराया कि विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत सभी प्राध्यापकों की गोपनीय चारित्रावली (प्रतिवेदन) पिछले पाँच वर्षों से उच्च शिक्षा विभाग को प्रेषित नहीं किए गए हैं तथा ईआर शीट एवं ई एच आर एम एस पोर्टल पर प्राध्यापकों की सेवा संबंधी जानकारी अद्यतन नहीं की गई है, जिस कारण से प्राध्यापकों को पदोन्नति एवं उच्च वेतनमान संबंधी लाभ नहीं मिल पा रहे रहे हैं। अभी हाल ही में प्राध्यापक पद के लिए शासन के द्वारा रु 10000/- एजीपी स्वीकृत किया गया है एवं प्राध्यापक पद पर नवीन पदोन्नति की गई हैं। इस संबंध में ज्ञापन के माध्यम से निवेदन किया गया है कि जिन प्राध्यापकों को रु 10000/- एजीपी के आधार पर वेतनमान नहीं दिया गया है, उन्हें उक्त वेतनमान तथा अन्य सभी प्राध्यापकों को समय पर एरियर दिए जाने की कार्यवाही की जाए। शासकीय महाराजा महाविद्यालय छतरपुर का इस विश्वविद्यालय में संविलियन होने पर डी डी ओ आधारित कोषालय से मिलने वाली सभी सुविधाएं समाप्त कर दी गई थीं, जिस कारण से प्राध्यापकों के स्वयित्व के भुगतान में परेशानी आती है। प्राध्यापकों के सेवानिवृत्त होने पर उनके स्वयित्व के भुगतान में कई महीनों का विलंब होता है। डी डी ओ सुविधा समाप्त हो जाने के कारण प्राध्यापक शासन के पी एफ एम एस पोर्टल पर मैप नहीं है, जिस कारण से प्राध्यापक ऑनलाइन माध्यम से गोपनीय प्रतिवेदन नहीं भर पा रहे हैं। इसलिए ज्ञापन के माध्यम से निवेदन किया गया है कि शासकीय महाराजा महाविद्यालय छतरपुर का डी डी ओ पुन: चालू कराए जाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग एवं वित्त विभाग मध्य प्रदेश को पत्र प्रेषित किए जाएं, जिससे प्राध्यापकों के स्वयित्वों का भुगतान समय से होगा, साथ ही ऑनलाइन माध्यम से गोपनीय प्रतिवेदन भी भरे जा सकेंगे।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो राकेश कुशवाह ने ज्ञापन में उल्लेखित सभी समस्याओं का तत्परता से तथा यथासंभव निराकरण कराने का आश्वान दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्था के लिए शिक्षक महत्वपूर्ण स्तम्भ होते हैं। इस विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक अध्ययन-अध्यापन एवं अकादमिक गतिविधियां के सुचारु रूप से संचालन तथा विश्वविद्यालय के उत्तरोत्तर विकास हेतु प्रतिबद्ध। शिक्षकों के द्वारा निवेदन पत्र के माध्यम से संज्ञान में लाई गईं प्राध्यापकों की समस्याओं का समाधान तुरंत कराए जाने का प्रयास किया जाएगा।

ज्ञापन सौंपने के समय प्राध्यापक संघ की महाविद्यालयीन इकाई के उपाध्यक्ष डॉ बी एल कुम्हार, सचिव डॉ के बी अहिरवार, कोषाध्यक्ष डॉ बी डी नामदेव, परीक्षा नियंत्रक डॉ एन पी प्रजापति, डी एस डब्ल्यू डॉ आर एस सिसोदिया, वरिष्ठ पराध्यक प्रो अशोक निगम, प्रो पी के जैन, प्रो पी एल प्रजापति, डॉ कल्पना वैश्य, डॉ योगेश चतुर्वेदी, डॉ पूजा तिवारी एवं बड़ी संख्या में अन्य प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।

*शोधार्थी रश्मि पारासर ने पी-एच.डी. डिग्री हेतु दी सफल प्रस्तुति**सागर जिले के कृषि विकास में मध्यांचल ग्रामीण बैंक के य...
21/08/2026

*शोधार्थी रश्मि पारासर ने पी-एच.डी. डिग्री हेतु दी सफल प्रस्तुति*

*सागर जिले के कृषि विकास में मध्यांचल ग्रामीण बैंक के योगदान पर किया है शोध*

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर के वाणिज्य विभाग की शोधार्थी रश्मि पारासर की पी-एच.डी. की अंतिम मौखिक परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।रश्मि पारासर ने “मध्यांचल ग्रामीण बैंक का सागर जिले के कृषि विकास में योगदान का विश्लेषणात्मक अध्ययन” विषय पर डा. बीके अग्रवाल के मार्गदर्शन में अपना शोधकार्य प्रस्तुत किया है। शोधार्थी ने अपने शोध की पृष्ठभूमि, उद्देश्य, शोध-पद्धति, प्रमुख निष्कर्ष एवं सुझावों का प्रस्तुतीकरण किया।
शोधार्थी रश्मि पाराशर वायवा के लिए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के वाणिज्य विभाग के डीन एवं विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र कुमार भारल बाह्य परीक्षक के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने शोधार्थी से शोध विषय से संबंधित प्रश्न किए तथा शोधकार्य का अकादमिक मूल्यांकन किया।
इस अवसर पर वाणिज्य विभाग की डीन डॉ मुक्ता मिश्रा, पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. डी. पी. शुक्ला, सेनि प्राध्यापक डॉ. एस. पी. जैन,डॉ. ओ. पी. अरजरिया, डॉ. एम. एस. यादव, शोध निर्देशक डॉ. बी. के. अग्रवाल तथा विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक निगम सहित विभाग के शिक्षकगण एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
बाह्य परीक्षक डॉ. शैलेन्द्र कुमार भारल ने शोधकार्य के संबंध में अपनी महत्वपूर्ण अकादमिक टिप्पणियाँ एवं सुझाव प्रस्तुत करते हुए कहा कि शोध समाजोपयोगी एवं गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। शोध निर्देशक डॉ. बी.के. अग्रवाल ने भी शोधार्थी की शोध यात्रा एवं कार्य के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के अंत में शोधार्थी रश्मि पारासर द्वारा उपस्थित विद्वतजनों का शॉल एवं श्रीफल से सम्मान किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों एवं शिक्षकों ने शोधार्थी को उनके शोधकार्य के लिए शुभकामनाएँ प्रदान कीं।

*पूरक परीक्षाओं की बदली व्यवस्था से लेकर विद्यार्थियों की डिग्री तक, कुलगुरु ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश* छतरपुर। महाराजा ...
19/08/2026

*पूरक परीक्षाओं की बदली व्यवस्था से लेकर विद्यार्थियों की डिग्री तक, कुलगुरु ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश*

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. राकेश सिंह कुशवाह की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय से संबद्ध समस्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में डीसीडीसी प्रो. पुष्पेंद्र कुमार खरे, एग्जाम कंट्रोलर प्रो. एन.पी. प्रजापति, डीएसडब्ल्यू डॉ. आर.एस. सिसोदिया, फाइनेंस ऑफिसर श्री के. डी. अहिरवार, यूजीसी प्रभारी प्रो. पी.के. जैन, , मीडिया प्रभारी श्री मती पूजा तिवारी, डॉ हिमांशु अग्रवाल सहायक कुलसचिव श्री हर्षित ताम्रकार एवं श्री अमन अग्रवाल सहित विश्वविद्यालय से संबद्ध समस्त शासकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे। बैठक में विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था, पूरक परीक्षाओं, परीक्षा फॉर्म, सीसीई एवं प्रैक्टिकल अंकों, विभिन्न स्कीमों, वित्तीय फाइलों के समायोजन, विद्यार्थियों की कॉशन मनी एवं डिग्री से संबंधित विषयों की समीक्षा की गई तथा सामने आ रही समस्याओं का निराकरण भी किया गया।

बैठक में मुख्य रूप से 1 सितंबर से प्रारंभ होने वाली पूरक परीक्षाओं की तैयारियों की समीक्षा की गई। पूरक परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या कम की गई है तथा प्रत्येक केंद्र के अंतर्गत परीक्षा देने वाले महाविद्यालयों की सूची जारी कर दी गई है। प्राचार्यों को निर्देशित किया गया कि विद्यार्थियों को इसकी व्यापक जानकारी दें, ताकि वे निर्धारित समय पर सही परीक्षा केंद्र पर पहुंच सकें। पूरक परीक्षाओं का समय अब दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक रहेगा।

दिसंबर 2026 की मुख्य परीक्षाओं से पूर्व इंटरनल परीक्षा के अंक अनिवार्य रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए गए। सीसीई एवं प्रैक्टिकल के अंकों की प्रविष्टि में विशेष सावधानी बरतने तथा किसी भी प्रकार की त्रुटि न होने के निर्देश दिए गए, ताकि विद्यार्थियों को परीक्षा एवं परिणाम के समय परेशानी न हो। परीक्षा फॉर्म अप्रूवल के समय विद्यार्थियों के विषय एवं अन्य विवरणों का विशेष रूप से परीक्षण कर गलत फॉर्म किसी भी स्थिति में अप्रूव न करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में स्पष्ट किया गया कि जिस विद्यार्थी की स्कीम 14ए है, वह आगे की परीक्षा 14ए की स्कीम के अनुसार ही देगा और उसे 14-1 में मर्ज नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार 14-1 के विद्यार्थी 14-1 की स्कीम के अनुसार ही आगे परीक्षा देंगे। किसी विद्यार्थी की वर्तमान स्कीम में परिवर्तन नहीं किया जाएगा। नए सिरे से प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी लागू नई स्कीम के अंतर्गत आएंगे।
कॉशन मनी एवं डिग्री को लेकर भी दिए आवश्यक निर्देश देते हुए कहा गया कि काउटरफाइलों में छात्र संख्या के साथ संबंधित सेशन, कक्षा एवं आवश्यक विवरण स्पष्ट रूप से अंकित किए जाएं। अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की कॉशन मनी वापस करने के लिए परीक्षा फॉर्म में आवश्यक जानकारी दर्ज कराने तथा शासन के निर्देशों के अनुसार राशि वापस करने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने को कहा गया। विद्यार्थियों को डिग्री के लिए अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े, इसके लिए परीक्षा फॉर्म में ही डिग्री संबंधी जानकारी लेने तथा डिग्री तैयार होने के बाद संबंधित महाविद्यालय के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। महाविद्यालय की संबंद्धता एवं निरन्तरता शुल्क समय से जमा करें और यदि इस संबंध में शासन से अथवा अग्रणी महाविद्यालय से पत्राचार किया जाता है तो उसकी एक प्रति विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
समयबद्ध एवं पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है l
बैठक में विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए बताया गया कि इस बार विश्वविद्यालय में किसी भी विद्यार्थी का परिणाम विदहेल्ड नहीं रहा तथा सभी विद्यार्थियों के परिणाम समय पर घोषित किए गए। कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंह कुशवाह ने सभी प्राचार्यों से परीक्षा संबंधी कार्यों में पूर्ण सावधानी, पारदर्शिता एवं विश्वविद्यालय के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने का आह्वान किया। बैठक के अंत में डीसीडीसी प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार खरे ने सभी उपस्थित सम्माननीय प्राचार्यों का आभार व्यक्त किया।

महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में मनाई गई महाकवि तुलसीदास की 529वीं जयंतीरामचरितमानस भारतीय ज्ञान परंपरा का सर...
19/08/2026

महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में मनाई गई महाकवि तुलसीदास की 529वीं जयंती
रामचरितमानस भारतीय ज्ञान परंपरा का सर्वोत्तम ग्रंथ:प्रो. गायत्री बाजपेई ।
तुलसी का साहित्य जीवन मूल्यों को करता है अंकुरित : प्रो. बहादुर सिंह परमार

महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (एमसीबीयू), छतरपुर के हिंदी विभाग द्वारा बुधवार, 19 अगस्त को महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी की 529वीं जयंती के अवसर पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में तुलसीदास जी के साहित्य, उनके जीवन दर्शन और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बहादुर सिंह परमार, वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. गायत्री बाजपेई एवं कला संकाय की अधिष्ठाता (डीन) प्रो. उषा शुक्ला उपस्थित रहीं।
सरस्वती पूजन और स्वागत सत्कार से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत प्रारंभ उपस्थित गुरुजनों द्वारा माँ सरस्वती एवं गोस्वामी तुलसीदास जी के चित्र पर माल्यार्पण व पूजन के साथ किया गया। इसके पश्चात् शोधार्थी हरिओम सिंह ने विभागाध्यक्ष प्रो. बहादुर सिंह परमार का और शोधार्थी सुरभि जैन ने वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. गायत्री बाजपेई का स्वागत किया। संपूर्ण कार्यक्रम का सफल संचालन हिंदी विभाग की अतिथि विद्वान स्वेच्छा पाठक द्वारा किया गया।
निराश भारत में आशा का संचार है तुलसी का साहित्य
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. बहादुर सिंह परमार ने कहा कि तुलसीदास ऐसे महाकवि हैं, जिन्होंने अपने साहित्य से तत्कालीन निराश भारत में आशा का संचार किया। रामचरितमानस, कवितावली, दोहावली और विनय पत्रिका जैसी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने समाज को जो अमूल्य निधि दी है, उसके लिए हम सदैव उनके आभारी रहेंगे। उन्होंने कहा कि तुलसीदास जी का अध्ययन एकांगी दृष्टिकोण से न करके समग्र भाव से करना चाहिए। रामचरितमानस की प्रत्येक चौपाई में जीवन मूल्यों की संपूर्णता मिलती है और एक अच्छा साहित्य वही है जो जीवन मूल्यों को अंकुरित करे, जिसमें तुलसी की अमृतमय स्वर्ण वाणी पूरी तरह खरी उतरती है।
रामचरितमानस आचरण की सुचिता का ग्रंथ है: प्रो. गायत्री बाजपेई
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रो. गायत्री बाजपेई ने श्रोताओं को तुलसीदास जी के बारे में समग्रता से बताया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस में राम केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संपूर्ण आदर्श व्यक्तित्व हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में रामचरितमानस को सर्वोत्तम ग्रंथ कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, "यह केवल एक साहित्यिक कृति नहीं है, बल्कि धर्मनिष्ठ के लिए धर्म ग्रंथ, नीतिनिष्ठ के लिए नीति ग्रंथ और आचरण की सुचिता में विश्वास रखने वालों के लिए एक आदर्श आचरण संहिता है।" तुलसीदास सदैव यथार्थ पर आदर्श की विजय दिखाते हैं, जहाँ राम एक आदर्श पुत्र, भाई, पति, सखा और राजा के रूप में लोक आराधना का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
शोधार्थियों और अतिथि विद्वानों ने दी भावांजलि
कार्यक्रम के दौरान हिंदी विभाग के अतिथि विद्वानों और शोधार्थियों ने भी अपने विचार रखे:
अतिथि विद्वान दिनकर साकेत ने तुलसीदास जी का विस्तृत जीवन परिचय देते हुए बताया कि उनका जीवन अत्यंत संघर्षों में बीता, जिसकी करुणा उनके साहित्य में स्पष्ट झलकती है।
अतिथि विद्वान हरिकांत साहू ने कहा कि भारतीय जनमानस की आत्मा में बसने वाले ग्रंथ रामचरितमानस के जरिए तुलसीदास ने करुणा और शांति जैसे आदि मूल्यों की शिक्षा दी। वर्तमान के तनावपूर्ण समाज में यह साहित्य और भी प्रासंगिक हो गया है।
शोधार्थी विकास शर्मा ने बताया कि तुलसीदास ने तत्कालीन रूढ़िवादी समाज में रहते हुए भी आधुनिक समाज के मूल्यों की नींव डाली। उनका मूल्यांकन तत्कालीन और वर्तमान परिस्थितियों की तुलना किए बिना नहीं किया जा सकता।
शोधार्थी साधना जैन ने कहा कि बचपन से ही विषम परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद तुलसीदास जी के मूल्यों में कभी डगमगाहट नहीं आई और सनातन धर्म के प्रति उनका विश्वास अडिग रहा।
शोधार्थी कल्याण सत्यगामी ने तुलसीदास जी के जीवन से जुड़ी तीन चमत्कारिक घटनाओं (प्रेतों द्वारा हनुमान जी का पता बताना, मृत व्यक्ति को जीवित करना और अकबर की कैद से स्वतः बाहर आ जाना) का रोचक वर्णन किया।
कार्यक्रम में बुंदेली संस्कृति की छटा भी देखने को मिली जब शोधार्थी रानी पटेल ने सुमधुर बुंदेली लोकगीत "खोज जानकी की करबे की आज्ञा हती हमाई, लंका तुमने काय जराई..." का गायन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर हिंदी विभाग के सभी विद्यार्थी, शोधार्थी एवं प्राध्यापकगण उपस्थित रहे।

*1 सितंबर से होंगी स्नातक पूरक परीक्षाएं*  *छतरपुर जिले में तीन परीक्षा केंद्र निर्धारित, दोपहर 12 से 3 बजे तक एक ही पाल...
18/08/2026

*1 सितंबर से होंगी स्नातक पूरक परीक्षाएं*

*छतरपुर जिले में तीन परीक्षा केंद्र निर्धारित, दोपहर 12 से 3 बजे तक एक ही पाली में होंगी परीक्षाएं*

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर द्वारा सत्र 2025-26 की स्नातक पूरक परीक्षाएं 1 सितंबर 2026 से आयोजित की जाएंगी। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंह कुशवाह के कुशल मार्गदर्शन, कुलसचिव श्री यशवंत सिंह पटेल के निर्देशन एवं परीक्षा नियंत्रक प्रो. एन.पी. प्रजापति की कुशल कार्यप्रणाली के परिणामस्वरूप पूरक परीक्षाओं के लिए परीक्षा केन्द्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बीए, बीएससी, बीएचएससी, बीकॉम, बीबीए एवं बीसीए सहित स्नातक स्तर के विभिन्न वर्षों की पूरक परीक्षाएं आयोजित होंगी तथा परीक्षाएं एक ही पाली में *समय दोपहर 12 बजे से 3 बजे* तक संपन्न कराई जाएंगी। छतरपुर जिले में पूरक परीक्षाओं के लिए तीन परीक्षा केन्द्र निर्धारित किए गए हैं, जिनमें परीक्षा केन्द्र क्रमांक 101 महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, छतरपुर (शासकीय महाराजा ऑटोनॉमस पीजी कॉलेज, छतरपुर), परीक्षा केन्द्र क्रमांक 105 शासकीय महाविद्यालय, लवकुशनगर तथा परीक्षा केन्द्र क्रमांक 107 शासकीय महाविद्यालय, बड़ामलहरा शामिल हैं। केन्द्र क्रमांक 101 के अंतर्गत शासकीय महाविद्यालय राजनगर, छतरपुर लॉ कॉलेज, शासकीय मॉडल कॉलेज छतरपुर, शासकीय गर्ल्स पीजी कॉलेज छतरपुर, शासकीय छत्रसाल महाराजा कॉलेज महाराजपुर, शासकीय महाविद्यालय हरपालपुर, शासकीय महाविद्यालय बिजावर, स्वामी प्रणवानंद कॉलेज सागर रोड छतरपुर, शासकीय नवीन कॉलेज नौगांव, महार्षि दयानंद एजुकेशन कॉलेज महाराजपुर, वीरांगना अवंतीबाई कॉलेज, तक्षशिला कॉलेज, डिजिटल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, सनराइज कॉलेज नौगांव, राजा बलवंत सिंह कॉलेज राजनगर, विद्यावती चतुर्वेदी एजुकेशन कॉलेज, महाराजा छत्रसाल एजुकेशन कॉलेज, यूटीडी एमसीबीयू, ए.के. इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कॉलेज तथा स्वामी प्रणवानंद कॉलेज डुमरा के परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। केन्द्र क्रमांक 105 शासकीय महाविद्यालय लवकुशनगर के अंतर्गत पी.टी. डीडी पाठक महाविद्यालय लवकुशनगर, आर.के. कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, सृजन कॉलेज लवकुशनगर, शासकीय नवीन कॉलेज चंदला तथा पी.टी. अशोक नायक महाविद्यालय गौरिहार के परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। वहीं केन्द्र क्रमांक 107 शासकीय महाविद्यालय बड़ामलहरा के अंतर्गत शासकीय महाविद्यालय घुवारा, शासकीय नवीन कॉलेज बकस्वाहा, बुन्देलखण्ड कॉलेज बकस्वाहा तथा श्री गणेश प्रसाद वर्णी पीजी कॉलेज घुवारा के परीक्षार्थी शामिल होंगे। विश्वविद्यालय द्वारा सभी संबंधित महाविद्यालयों एवं परीक्षार्थियों से निर्धारित परीक्षा केन्द्र तथा परीक्षा कार्यक्रम की जानकारी समय से प्राप्त करने की अपील की गई है।

*शोध में सत्यनिष्ठा और समन्वय आवश्यक — कुलगुरु प्रो. राकेश कुशवाह* “ *ज्ञान ही सबसे बड़ा अस्त्र है” — प्रो. बहादुर सिंह ...
17/08/2026

*शोध में सत्यनिष्ठा और समन्वय आवश्यक — कुलगुरु प्रो. राकेश कुशवाह*

“ *ज्ञान ही सबसे बड़ा अस्त्र है” — प्रो. बहादुर सिंह परमार*

*“कोर्स वर्क शोध की आधारशिला” — डॉ. के.बी. अहिरवार*

*विश्वविद्यालय में पीएच.डी. सत्र 2026-27 का उन्मुखीकरण कार्यक्रम संपन्न*

छतरपुर। महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय के शोध एवं विकास प्रकोष्ठ द्वारा 17 अगस्त 2026 को आलेख भवन में पीएच.डी. सत्र 2026-27 के नव-प्रवेशित शोधार्थियों हेतु उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम दोपहर 12:30 बजे विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राकेश कुशवाह की गरिमामयी उपस्थिति एवं मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलगुरु प्रो. राकेश कुशवाह, शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. बहादुर सिंह परमार, कला संकायाध्यक्ष प्रो. उषा शुक्ला, जीवन विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. गौरी सनागो, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. विभा वासुदेव, संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. शीला नायक, विधि अध्ययन मंडल अध्यक्ष डॉ. राम सिंह पटेल तथा उपनिदेशक डॉ. के.बी. अहिरवार द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया।
इसके पश्चात मंचासीन अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।

शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. बहादुर सिंह परमार ने अतिथियों एवं शोधार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि ज्ञान ही सबसे बड़ा अस्त्र है। उन्होंने शोध एवं विकास प्रकोष्ठ की गतिविधियों तथा अध्यादेश-11 के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी देते हुए शोधार्थियों को शोध कार्य के प्रति गंभीर एवं अनुशासित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।

शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के उपनिदेशक डॉ. के.बी. अहिरवार ने छह माह के पीएच.डी. कोर्स वर्क से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोर्स वर्क केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी शोध कार्य की आधारशिला है। इसी चरण में शोधार्थी अपने शोध विषय एवं उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझते हैं। उन्होंने कोर्स वर्क के ऑफलाइन एवं विशेष परिस्थितियों में ऑनलाइन संचालन तथा नियमानुसार छूट के प्रावधानों की भी जानकारी दी।

कुलगुरु प्रो. राकेश कुशवाह ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि शोध में सत्यनिष्ठा तथा शोधार्थी और शोध निर्देशक के बीच बेहतर समन्वय शोध कार्य की वास्तविक नींव है। उन्होंने शोध के दौरान आवश्यक सावधानियों एवं अनुशासन पर प्रकाश डालते हुए नव-प्रवेशित शोधार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के अंत में शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. बहादुर सिंह परमार ने मंचासीन अतिथियों, प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं उपस्थित सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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