छत्रसाल स्टडी सर्कल

छत्रसाल स्टडी सर्कल knowledge, Character, Unity

03/11/2023
देवी अहिल्याबाई होलकरअंधकार में प्रकाश की किरण के समान प्रदीप्त होने वाली महारानी अहिल्या बाई होलकर का जन्म 31 मई, 1725 ...
31/05/2023

देवी अहिल्याबाई होलकर

अंधकार में प्रकाश की किरण के समान प्रदीप्त होने वाली महारानी अहिल्या बाई होलकर का जन्म 31 मई, 1725 को महाराष्ट्र के चौंढी ग्राम में हुआ था.

भारत की महान वीरांगनाओं में से एक देवी अहिल्याबाई होलकर ने मराठा साम्राज्य की कमान संभाली एवं माहेश्वर को अपनी राजधानी बनाकर अपने राजक्षेत्र का विस्तार किया.

देवी अहिल्याबाई ने अपने राज्य समेत देश के विभिन्न स्थानों में धर्म कार्य किए. वंचितों एवं निर्धनों के लिए उन्होंने अन्नसत्र की व्यवस्था की. उनके लिए घाटों एवं बावड़ियों का निर्माण करवाया.

विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ के मंदिर का निर्माण भी देवी अहिल्याबाई ने करवाया था. समाज कल्याण, धर्म उत्थान एवं न्यायोचित कार्य करने के कारण अहिल्याबाई को 'देवी' के रूप में सम्मान प्राप्त हुआ.
#अहिल्याबाई

15/09/2022

मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की बायोमेट्रिक एटेंडेंड्स लागू करने से पहले सरकार विश्वविद्यालयो को पूरी ग्रांट और इन्फ्रास्ट्रक्चर मुह्या कराए। sukhadia

विश्विद्यालय प्रवेश के नए नियम, अब होगी पूरे देश की एक परीक्षा
24/03/2022

विश्विद्यालय प्रवेश के नए नियम, अब होगी पूरे देश की एक परीक्षा

 सीयूईटी परीक्षा पैटर्न के ब्लूप्रिंट के मुताबिक, प्रश्न पत्रों को तीन खंडों में बांटा जाएगा

 #सम्राट_पौरस_vs_सिकंदर_युद्ध ई0पु0 315 -21 #महान_कौन. . . . ? ? ? मकदूनिया में स्त्रियों को कतार बद्ध खड़ा कर दिया गया स...
06/11/2021

#सम्राट_पौरस_vs_सिकंदर_युद्ध
ई0पु0 315 -21
#महान_कौन. . . . ? ? ?

मकदूनिया में स्त्रियों को कतार बद्ध खड़ा कर दिया गया सौंदर्य - कमयिता के इस प्रदर्शन में जो सबसे खूबसूरत होगी उसे यूनान के शासक सिकंदर को दिया जायेगा बाकी सैनिकों को बाँट दिया जायेगा ।

पर्शिया कि इस हार ने एशिया के द्वार खोल दिया
भागते पर्शियन शासकों का पीछा करते हुये सिकंदर हिंदुकुश तक पहुँच गया
चरवाहों , गुप्तचरों ने सूचना दी इसके पार एक महान सभ्यता है ।
धन धान्य से भरपूर
सन्यासियों , आचार्यों , गुरूकुलों , योद्धाओं , किसानों से विभूषित सभ्यता जो अभी तक अविजित है ।
सिकंदर ने जिसके पास अरबी , फ़रिशर्मिंन घोड़ों से सुसज्जित सेना थी ने भारत पर आक्रमण का आदेश दिया , झेलम के तट पर उसने पड़ाव डाल दिया आधीनता का आदेश दिया ।

महाराज पोरस कि सभा लगी थी
गुप्तचरों ने सूचना दी आधे विश्व को परास्त कर देने वाला यूनान का सम्राट अलक्क्षेन्द्र भारत विजय हेतु सीमा पर पड़ाव डाल दिया ।

महामंत्री का प्रस्ताव था ; राजन तक्षशिला के आम्भीक ने आधीनता स्वीकार कर ली है
यह विश्व विजेता है , भारत के सभी महाजनपदों से वार्ता करके ही कोई उचित निर्णय ले ।

महाराज पोरस जो सात फिट लंबे थे जिनकी भुजाओंओ में इतना बल था कि सौ बलशाली योद्धा एक साथ युद्ध करने का साहस नहीं कर सकते थे !
ने महामंत्री को फटकार लगाई हम भारत के सीमांत क्षेत्र के शासक है यदि हम ही पराजय स्वीकार कर लिये तो भारत कैसे सुरक्षित रहेगा
अपने पुत्र को सिकंदर कि शक्ति पता करने भेजेते है ।
साहसी पुत्र ने सिकंदर पर हमला कर दिया
23 वर्ष कि अवस्था में वीर बालक युद्ध भूमि में मारा गया ,
इस समाचार से महाराज पोरस विचलित नहीं हुये
उन्होंने सेनापति को झेलम तट पर पड़ाव का आदेश दिया यूनानी सैनिक इतनी छोटी सेना देखकर हैरान थे ।
21 दिन की प्रतीक्षा के बाद सिंकदर ने पोरस कि सेना पर हमला कर दिया अनुपात में कम क्षत्रिय हारने का नाम नहीं ले रहे थे ।
सेनापति महाराज पोरस को सूचना देता है
सिकंदर तेज घोड़ों और बारूद के सामने क्षत्रिय योद्धा वीरगति को पा रहे है
शिवभक्त पोरस महादेव कि आराधना कर रहे थे
पोरस ने दोपहर तक सिकंदर को रोक रखने का आदेश दिया !
दोपहर तक पोरस कि आधी से अधिक सेना खत्म हो चूंकि थी यूनानी सैनिक जीत के जश्न में डूबने वाले ही थे !
तभी पूर्व से भगवा पताका से आसमान लाल हो गया ,
हर हर महादेव के शंखनाद से पृथ्वी कांप उठी झेलम का पानी उफान मारने लगा जैसे अपने राजा का चरण छूने को व्याकुल हो
10 हजार हाथियों से घिरे महाराज पोरस ऐसे लग रहे थे हाथी के उपर कोई सिंह युद्ध करने को आ रहा है बची सेना अपने राजा को देखकर पागल हो गई ।
सिकंदर अपने अभियान में बहुत से बड़े योद्धा को पराजित किया था लेकिन ऐसा दृश्य उसने कभी नहीं देखा था!
क्या कोई व्यक्ति इतना भी विशाल और गर्वित हो सकता है ?
पोरस के एक संकेत पर हाथियों पर सुसज्जित योद्धा टूट पड़े यूनानी सैनिक मूली तरह काट दिये जा रहे थे हाथियों ने सैनिकों को फाड़ दिया ।

लेकिन महाराज पोरस कि निगाह कुछ और खोज रही थी उस दुष्ट को जिसने भारत से गद्दारी की थी आम्भीक को ;
जैसे ही वह सामने से निकला पोरस ने बरछी फेंक कर मारा लेकिन आम्भीक सिकंदर के सेनापति कि आड़ में छुप गया सेनापति का शरीर छलनी हो गया ।

पोरस ने अपने भाले से एक यूनानी के घोड़े पर वार किया उस घोड़े के चार खंड हो गये
सिकंदर समझ गया जब तक पोरस युद्ध भूमि है भारतीय सेना को हराया नहीं जा सकता ।

अभी भी यूनानी सैनिकों की संख्या पोरस के सैनिकों से अधिक थी लेकिन जिस तरह पोरस भीष्म कि तरह काट रहे है चारो तरफ भय का वातावरण है ।
सिकंदर ने सुनिश्चित किया अब पोरस को ही मारना होगा अपने विश्वसनीय घोड़े और 20 योद्धाओं के साथ सिकंदर पोरस कि तरफ बढ़ा
अपने राजा कि सुरक्षा में भारतीय सैनिकों ने मोर्चा संभाल लिया 20 में से 10 यूनानी योद्धा मार दिये गये लेकिन विश्व विजेता सिकंदर पोरस कि तरफ बढ़ता ही जा रहा था ।

अब सिकंदर और पोरस आमने सामने थे
उपर महादेव अपने भक्त कि वीरता देख रहे थे
हाथी के हौदे से एक बिजली चमकी जैसे लगा शिव का त्रिशूल हो !
महाराज पोरस अपने भाले को संधान कर चुकें थे
भाला सिकंदर कि तरफ बढ़ा चला आ रहा था

घोड़े ने स्वामी भक्ति दिखाई वह भाले के सामने आ गया , चीरता भाला घोड़े के टुकड़े टुकड़े कर दिया ,घायल - मूर्छित सिकंदर जमीन पर गिर पड़ा
उसने पहली बार खुले में आसमान देखा था
घायल सिकंदर को लेकर उसके योद्धा शिविर की तरफ भागे ।

इधर झेलम का उफान धम सा गया
अपने राजा के चरणों को छूकर झेलम थम गई वापस सामान्य वेग से बहने लगी आखिर क्यों न उन्हें गर्व हो आज उनके सम्राट ने विश्व विजेता को पराजित किया है ।

जय हो सम्राट पौरस कटोच (यदुवंशी )

( स्रोत -प्लुकार्ड , पर्शियन इतिहासकार )

 # परमाणु कार्यक्रमों के प्रणेता  #डा_होमी_भाभा जी की आज जयन्ती है। # विश्व में परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों में भारत का भ...
30/10/2021

# परमाणु कार्यक्रमों के प्रणेता #डा_होमी_भाभा जी की आज जयन्ती है।
# विश्व में परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों में भारत का भी नाम है। इसका श्रेय प्रसिद्ध वैज्ञानिक डा. होमी जहाँगीर भाभा को जाता है। वे सामरिक और शान्तिपूर्ण कार्यों में इसकी उपयोगिता को समझते थे। उनका जन्म 30 अक्तूबर, 1909 को मुम्बई के एक प्रतिष्ठित पारसी परिवार में हुआ था। बचपन से इनकी बुद्धि बहुत तीव्र थी। यह देखकर इनके अभिभावकों ने घर में ही एक पुस्तकालय बना दिया। इससे इनकी प्रतिभा तेजी से विकसित हुई।
# इनके पिता इन्हें अभियन्ता बनाना चाहते थे; पर इनकी रुचि भौतिक विज्ञान में थी। फिर भी भाभा ने उनकी इच्छा का सम्मान कर 1930 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अभियन्ता की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके बाद वे फिर अपने प्रिय विषय भौतिक शास्त्र में शोध करने लगे।
# डा. भाभा की योग्यता को देखकर उन्हें विश्व के अनेक देशों ने मुँहमाँगे वेतन पर काम के लिए आमन्त्रित किया; पर उनका निश्चय अपने देश के लिए ही काम करने का था। 1940 में उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलौर में कार्य प्रारम्भ किया। 1941 में उन्हें 'रॉयल सोसायटी' का सदस्य बनाया गया। इतनी छोटी अवस्था में बहुत कम लोगों को यह सम्मान मिल पाता है।
# डा. भाभा के मन में विकसित और शक्तिशाली भारत का एक सुन्दर सपना था। उस समय यहाँ अणु भौतिकी के अध्ययन की पर्याप्त सुविधाएँ नहीं थीं। अतः उन्होंने 1944 में ‘दोराबजी टाटा न्यास’ से सहयोग की अपील की। इसके फलस्वरूप 1945 में ‘टाटा इन्स्टीट्यूट ऑफ़ फण्डामेण्टल रिसर्च’ की स्थापना हुई। डा. भाभा को इसका प्रथम निर्देशक बनाया गया।
# प्रारम्भ में यह संस्थान किराये के भवन में चलता था; पर देश स्वतन्त्र होने पर साधन बढ़ते गये। आज तो ट्राम्बे की पहाड़ियों पर स्थित यह संस्थान उच्च शोध का विश्व स्तरीय केन्द्र बन गया है। प्रधानमन्त्री नेहरू जी का इन पर बहुत विश्वास था। उन्होंने डा. भाभा के नेतृत्व में 1948 में अणुशक्ति आयोग तथा 1954 में सरकार में अणुशक्ति विभाग बनाकर इस कार्य को गति दी।
# डा. भाभा के आह्नान पर कई वैज्ञानिक विदेश की आकर्षक वेतन और सुविधापूर्ण नौकरियाँ छोड़कर भारत आ गये। डा. भाभा का मत था कि विज्ञान की प्रगति में ही देश का भविष्य छिपा है। अतः विज्ञान के किसी भी क्षेत्र में काम करने वाले संस्थान को वे सहयोग देते थे। वे अपने सहयोगियों की गलती को तो क्षमा कर देते थे; पर भूल या मूर्खता को नहीं। उन्हें अपने काम से इतना प्रेम था कि उन्होंने विवाह भी नहीं किया। विज्ञान के साथ ही उन्हें चित्रकला, संगीत तथा पेड़ पौधों से भी अत्यधिक लगाव था।
# डा. भाभा को प्रायः विदेश जाना पड़ता था। ऐसे ही एक प्रवास में 24 जनवरी, 1966 को उनका विमान एक बर्फीले तूफान की चपेट में आकर नष्ट हो गया। कुछ लोगों का मत है कि वे भारत की सीमाओं की स्थायी सुरक्षा के लिए ‘लक्ष्मण रेखा’ जैसे एक महत्वपूर्ण प्रकल्प पर काम कर रहे थे। इससे भयभीत देशों ने षड्यन्त्र कर उस विमान को गिरा दिया। इसमें अनेको सन्देह भी किया जाता है।
# डा. भाभा किसी की मृत्यु पर काम बन्द करने के विरोधी थे। इसी कारण जब ट्राम्बे में उनके देहान्त का समाचार मिला, तो उनके सहयोगियों ने काम करते करते ही उन्हें श्रद्धांजलि दी।

युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, देशभक्ति, शौर्य और पराक्रम के अद्वितीय प्रतीक अमर शहीद सरदार भगत सिंह जी की जयंती पर उन्हें को...
28/09/2021

युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, देशभक्ति, शौर्य और पराक्रम के अद्वितीय प्रतीक अमर शहीद सरदार भगत सिंह जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।

"राख का हर कण मेरी गर्मी से गतिमान है। मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आजाद है।" मातृभूमि को अंग्रेजों की गुलामी की जं...
28/09/2021

"राख का हर कण मेरी गर्मी से गतिमान है। मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आजाद है।"

मातृभूमि को अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों से मुक्त करने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारी व अमर बलिदानी भगत सिंह जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन।

मातृभूमि के लिए अमर बलिदानी भगत सिंह का प्रेम,‌ त्याग और समर्पण सदैव प्रत्येक भारतवासी को प्रेरित करता रहेगा।

Address

Chhatarpur
471001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when छत्रसाल स्टडी सर्कल posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The School

Send a message to छत्रसाल स्टडी सर्कल:

Shortcuts

Share