11/01/2022
धर्म और ईमान
हक़ीक़त है हम धार्मिक नियम करते रहते है पूरी ज़िंदगी और धार्मिक समझते है ख़ुद को पर ईश्वर की बातें समज नहीं पाते ना ईश्वर से प्रेम
धार्मिक होने के आगे भी कुछ है ....
कुआँ जग में एक है (ईश्वर)
पानी भरे अनेक... (इंसान)
बर्तन का ही भेद है। (धर्म)
पानी सब में एक... (प्रभु कृपा)
ईमान क्या है?
ईमान ,faith,आस्था .....
आस्था है वहाँ कोई भी सोच नहीं....सम्पूर्ण समरपन
धर्म का असली सम्बंध ईमान से है,जो ईमान के पक्के नहीं ,वो किसी धर्म के लायक़ नहीं
फ़क़ीर भी चौखट लाँघ सके,ख़ुद को इतना अर्जा(सस्ता)रखना
अमीर,ईमान ख़रीद न सके,क़ीमत को इतना ऊँचा रखना
सोच कैसी है?
ईमान कैसा है?
हरकतें बता देता है
इंसान कैसा है....
आशिक, चोर, फ़कीर, खुदा तोन मांगदे घुप्प हनेरा...
एक लूटावे, एक लूटे, एक कह दे सब कुछ तेरा ....
बल्ले शाह
अनुसरण किस चीज़ को हमें करना है?
अनुसरण हमें अपने दिल को करना है
करीब ईश्वर के आओ तो कोई बात बने
सब गोविंद है,सब राम है....
शंख से आकाशगंगा से पूरा ब्रह्माण्ड सब समक्रमिकता से चल रहा है उसने एक चींटी के खाने का बंदोबस्त किया है उसने तुम्हारे लिये भी योजना किया है
प्रार्थना ऐसे करो जैसे सब उस पे निर्भर है
काम ऐसा करो जैसे सब ख़ुद पे निर्भर है
आपको अपने भीतर से ही विकास करना होता है। कोई आपको सीखा नहीं सकता, कोई आपको आध्यात्मिक नहीं बना सकता। आपको सिखाने वाला और कोई नहीं, सिर्फ आपकी आत्मा ही है।
एक बार एक गाँव में पंचायत लगी थी | वहीं थोड़ी दुरी पर एक संत ने अपना बसेरा किया हुआ था|जब पंचायत किसी निर्णय पर नहीं पहुच सकी तो किसी ने कहा कि क्यों न हम महात्मा जी के पास अपनी समस्या को लेकर चलें अतः सभी संत के पास पहुंचे | जब संत ने गांव के लोगों को देखा तो पुछा कि कैसे आना हुआ? तो लोगों ने कहा 'महात्मा जी गाँव भर में एक ही कुआँ हैं और कुँए का पानी हम नहीं पी सकते, बदबू आ रही है । मन भी नहीं होता पानी पीने को।
संत ने पुछा--हुआ क्या?पानी क्यों नहीं पी सक रहे हो?
लोग बोले--तीन कुत्ते 🐶🐶🐶लड़ते लड़ते उसमें गिर गये थे । बाहर नहीं निकले, मर गये उसी में । अब जिसमें कुत्ते मर गए हों, उसका पानी कौन पिये महात्मा जी ?
संत ने कहा -- 'एक काम करो ,उसमें गंगाजल डलवाओ,
तो कुएं में गंगाजल भी आठ दस बाल्टी छोड़ दिया गया ।
फिर भी समस्या जस की तस !
लोग फिर से संत के पास पहुंचे,अब संत ने कहा"
भगवान की कथा कराओ"।
लोगों ने कहा ••••ठीक है ।
कथा हुई , फिर भी समस्या जस की तस
लोग फिर संत के पास पहुंचे !
अब संत ने कहा
उसमें सुगंधित द्रव्य डलवाओ।
लोगों ने फिर कहा ••••• हाँ, अवश्य ।
सुगंधित द्रव्य डाला गया|
नतीजा फिर वही...ढाक के तीन पात
लोग फिर संत के पास
अब संत खुद चलकर आये ।
लोगों ने कहा-- महाराज ! वही हालत है, हमने सब करके देख लिया । गंगाजल भी डलवाया, कथा भी करवायी, प्रसाद भी बाँटा और उसमें सुगन्धित पुष्प और बहुत चीजें डालीं; लेकिन महाराज ! हालत वहीं की वहीं ।अब संत आश्चर्यचकित हुए कि अभी भी इनका मन कैसे नहीं बदला।
तो संत ने पुछा-- कि तुमने और सब तो किया, वे तीन कुत्ते 🐶🐶🐶मरे पड़े थे, उन्हें निकाला कि नहीं?
लोग बोले -- उनके लिए न आपने कहा था न हमने निकाला, बाकी सब किया । वे तो वहीं के वहीं पड़े हैं ।
संत बोले -- जब तक उन्हें नहीं निकालोगे, इन उपायों का कोई प्रभाव नहीं होगा।
*👉सही बात यह है कि हमारे आपके जीवन की यह कहानी है । इस शरीर नामक गाँव के अंतःकरण के कुएँ में ये काम, क्रोध और लोभ के तीन कुत्ते🐶🐶🐶 लड़ते झगड़ते गिर गये हैं । इन्हीं की सारी बदबू है ।*
*हम उपाय पूछते हैं तो लोग बताते हैं-- *तीर्थयात्रा कर लो, थोड़ा यह कर लो, थोड़ा पूजा करो, थोड़ा पाठ। सब करते हैं, पर बदबू उन्हीं दुर्गुणों की आती रहती है ।*
*तो पहले इन्हें निकाल कर बाहर करें तभी जीवन उपयोगी होगा
*मंदिरों में चाहे जितने सिर झुका लो, घण्टे चाहे जितने भी बजा लो... जब तक आपका "हृदय" और "मन" परमात्मा के आगे नहीं टिकेगा, तब तक सब बेकार है।*
🙏🏻आपका दिन मंगलमय हो🙏🏻
🌹🙏जय श्री राम 🙏🌹
🌹🙏जय हनुमान 🙏BK'S🌹