30/07/2026
वो ईंटों-गारे की दीवारें,
कहती हैं ढेरों कहानियाँ प्यारी।
हर बेंच पर अंकित है नाम हमारा,
वो छोटी-छोटी शरारतें, वो यारी।
लाइब्रेरी की खामोशी में छुपे राज़,
वो क्लासरूम में टीचर का डाँटना।
लंच के समय टिफिन का खुलना,
मिल-बाँट कर सब कुछ खाना।
आज भी गूँजती है असेंबली की आवाज़,
वो खेल के मैदान में पसीने बहाना।
हर कोने में बसा है बचपन हमारा,
दिल चाहता है फिर वहीं लौट जाना।
जी.एम.एस.एस. 35, तुम सिर्फ एक स्कूल नहीं,
तुम हो यादों का एक अनमोल ख़ज़ाना।
दूर हैं भले ही हम आज तुमसे,
पर रूह में बसता है तुम्हारा हर कोना।