08/08/2025
मेरा नवोदय" 🌿🏫
हरी-भरी वादियों में बसा,
ज्ञान का मंदिर प्यारा,
जहाँ सपनों के दीप जले,
हर दिल को लगा सहारा।
सुबह की प्रार्थना की धुन में,
सूरज भी संग मुस्काए,
गुरुओं के आशीर्वाद से,
नए रास्ते खुल जाएं।
होस्टल के वो प्यारे कमरे,
दोस्ती की मीठी बातें,
कभी किताबों में डूब जाना,
कभी मैदान की सौगातें।
दूर घर से आए हम सब,
एक परिवार बन जाते,
खुशियों के संग मुश्किलों में,
साथ निभाने लग जाते।
नवोदय के आँगन में खिलते,
हिम्मत, मेहनत, उम्मीद के फूल,
ये सिर्फ़ स्कूल नहीं है,
ये है सपनों का असली उसूल।