Online Champawat

Online Champawat Champawat is a town and a Nagar Palika Parishad in Champawat district in the state of Uttarakhand, India. The town was the former capital of the Kumaon Kingdom.

It is the administrative headquarters of Champawat district.

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15/08/2021

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संवेदनशील श्यामलाताल को कोई राहत नहीं .com/OnlineChampawatचंपावत जिले के पर्यटन स्थल श्यामलाताल में डेढ़ दशक से पहाड़ मे...
07/07/2016

संवेदनशील श्यामलाताल को कोई राहत नहीं

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चंपावत जिले के पर्यटन स्थल श्यामलाताल में डेढ़ दशक से पहाड़ में लगातार भूस्खलन हो रहा है, इससे कई गांव खतरे की जद में हैं और कई परिवार अन्यत्र जा चुके हैं, लेकिन सरकार न तो खतरे की जद में आए गांवों के परिवारों के विस्थापन की व्यवस्था कर रही है और न ही दरकती पहाड़ी को बचाने की कोशिश।

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जिले का पर्यटन स्थल श्यामलाताल आसपास की बिसोरिया नाले से लगी पहाड़ियों में सालों से हो रहे भूस्खलन से खतरे की जद में आ गया है। लंबे अर्से से दरक रही पहाड़ियों की और न तो शासन का ध्यान है और न ही प्रशासन गंभीर है। ऐसे में दरकते पहाड़ों से सहमे लोग अन्यत्र जाने को विवश हैं। हालिया बारिश से पहाड़ी इलाकों के लोगों में खौफ पैदा हो गया है।

भू-विज्ञान के लिहाज से कुमाऊं की पहाड़ियां कमजोर हैं और मामूली बारिश में भी पहाड़ी में भूस्खलन का खतरा आम बात है। चंपावत जिले में सूखीढांग क्षेत्र की श्यामलाताल की पहाड़ी वर्षों से दरक रही हैं, जिससे कई गांवों में भूमि धंस रही है और कई मकानों में दरार तक आ चुकी है। यहां तक कि पर्यटन स्थल श्यामलाताल तक भूस्खलन का असर दिखाई देने लगा है।

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पूर्णागिरि मार्ग पर बाटनागाड़ में आ रहा मलबा भी इसी दरकती पहाड़ी की देन है, मगर इसके ट्रीटमेंट की न तो शासन को चिंता है और ही प्रशासन को। भू-विज्ञानी यहां की पहाड़ियों पर भूस्खलन के खतरे से पहले ही आगाह करा चुके हैं, मगर ट्रीटमेंट के नाम पर अब तक सर्वे के सिवाय कुछ नहीं हुआ है।ग्राम प्रधान भगीरथी तिवारी का कहना है कि दरकती पहाड़ी से कोई अनहोनी हुई तो इसके कोई शक नहीं की यह शासन-प्रशासन की अनदेखी का ही नतीजा होगी।

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पूर्णागिरि (टनकपुर) तहसील के एसडीएम नरेश दुर्गापाल ने बताया कि श्यामलाताल के बिसोरिया नाले से लगी पहाड़ियों में हो रहे भूस्खलन से आसपास के गांवों में खतरे का भू-गर्भीय सर्वे कराने के लिए जिलाधिकारी से सिफारिश की गई है। सर्वे में यदि खतरे की बात सामने आई तो इससे प्रभावित होने वाले परिवारों को अन्यत्र विस्थापित करने की कार्रवाई की जाएगी।

एक वर्ष पहले बिछड़ा नेपाली बालक पहुंचा घर .com/OnlineChampawatबनबसा (चंपावत)। एक वर्ष बाद नेपाली बालक को उसके परिजन मिल ...
30/06/2016

एक वर्ष पहले बिछड़ा नेपाली बालक पहुंचा घर

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बनबसा (चंपावत)। एक वर्ष बाद नेपाली बालक को उसके परिजन मिल गए। बुधवार को बनबसा स्थित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की मदद से उसे माईते नेपाल संस्था के सुपुर्द किया गया। संस्था नेपाली बालक को उसके परिजनों के सुपुर्द करेगी।

करीब एक वर्ष पहले नेपाल के ग्राम बिस्खेत मान्मा बाजार वार्ड संख्या 4 जिला कालीकोट, कर्णाली अंचल निवासी रमेश टम्टा (12) पुत्र स्व. हरीश टम्टा को उसके जीजी का भाई नेपाल से भारत ले आया। उसने बालक को भीमताल विकास खंड के एक ग्रामप्रधान के घर पर बाद में ले जाने की बात कहकर घरेलू काम पर लगा दिया।

छह माह तक नेपाली बालक ग्रामप्रधान के घर पर बर्तन धोने जैसे कार्य करता रहा, जिसके एवज में उसे केवल दो वक्त का खाना मिलता था। लगभग छह माह बाद वह प्रधान के घर से भाग गया और भीमताल में पैराशूट पैकिंग का कार्य करने लगा।

यहां भी उसे पैसे नहीं मिलते थे। इसके बाद वहां से वो हल्द्वानी पहुंचा। हल्द्वानी में वो रोते हुए बनबसा के लिए बस की तलाश कर रहा था। इसी बीच किसी व्यक्ति ने चाइल्ड हेल्पलाइन पर बालक के बारे में जानकारी दी। हेल्पलाइन उसे अपने साथ नैनीताल ले गई और काउंसलिंग की।

बाद में हेल्पलाइन ने उसे घर पहुंचाने के लिए ऊधम सिंह नगर की चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंप दिया। बुधवार को चाइल्ड हेल्पलाइन के काउंसलर रहमत हुसैन उसे लेकर बनबसा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट पहुंचे, जहां उक्त नेपाली बालक को नेपाल पुलिस की मौजूदगी में नेपाली संस्था माईते के सुपुर्द कर दिया गया।

गरीबी और हालात किसी को भी भटका देते हैं। ऐसा ही नेपाली बालक रमेश के साथ हुआ। रमेश स्कूल में पढ़ रहा था। उसने चौथी कक्षा तक पढ़ाई की। अचानक पिता की मौत के बाद उसकी मां ने दूसरा विवाह कर लिया। उसकी परवरिश तरीके से नहीं हो पा रही थी।

तंगी और परेशानी के हालातों में वो अपने जीजा के भाई की बातों में आ गया। एक दिन उसके जीजा का भाई उसे बहला फुसलाकर भारत ले आया। रमेश ने अमर उजाला को बताया कि उसे भारत में अच्छा नहीं लग रहा था। पढ़ाई उसे रास आती थी। भारत में भी काम के बदले पैसा नहीं मिला।

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जिले में 21,893 से अधिक लाभार्थियों को मिलेगा लाभ .com/OnlineChampawatजिले में समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित सभी प्...
23/06/2016

जिले में 21,893 से अधिक लाभार्थियों को मिलेगा लाभ

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जिले में समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित सभी प्रकार की पेंशन और छात्रवृत्ति योजनाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है, इसके बाद विभिन्न पेेंशन योजनाओं के 21,893 से अधिक लाभार्थियों और छात्रों को लाभ मिल सकेगा। अब लाभार्थियों को पेंशन भुगतान संबंधी जानकारी के लिए बैंक अथवा डाकघर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लाभार्थी कहीं से भी ऑनलाइन अपने पेंशन भुगतान संबंधी जानकारी का विवरण हासिल कर सकेंगे।

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जिला समाज कल्याण अधिकारी पीसी जोशी ने बताया कि सभी पेंशन योजनाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है, जिसमें वृद्धावस्था पेंशन के 12,867 लाभार्थी, विधवा पेंशन के 5004, विकलांग पेंशन के 1913, किसान पेंशन के 1687, तीलू रौतेली पेंशन के 212 और परित्यक्ता विवाहित महिला पेंशन के 210 लाभार्थियों को लाभ मिलेगा।

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उन्होंने बताया कि पेंशन योजनाओं के अतिरिक्त राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, शादी अनुदान, विधवाओं की पुत्री की शादी के लिए अनुदान, विधवा पुनर्विवाह, विकलांग विवाह प्रोत्साहन, गौरादेवी कन्याधन योजना, अनुसूचित जाति उपयोजना, जनश्री बीमा योजना, अनुसूचित जाति छात्रवृत्ति, पिछड़ी जाति छात्रवृत्ति, विकलांग छात्रवृत्ति और वृद्ध पुरोहितों के लिए भरण-पोषण अनुदान योजनाओं को भी ऑनलाइन कर दिया गया है।

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लाभार्थियों को भेजा जाएगा एसएमएस से संदेश
जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत पेंशन और छात्रवृत्ति से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी अथवा अपडेट का लाभार्थियों को मोबाइल पर एसएमएस संदेश भेजा जाएगा। इसके लिए अलग से कंप्यूटर साफ्टवेयर स्थापित कर दिया गया है।

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विभाग ने गठित किया आईटी प्रकोष्ठ
समाज कल्याण विभाग की ओर से पेंशन और छात्रवृत्ति योजनाओं को ऑनलाइन करने के साथ इसके लिए बनाए गए साफ्टवेयर के संचालन के लिए अलग से आईटी (इनफोर्मेशन टेक्नॉलाजी) प्रकोष्ठ गठित किया गया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी पीसी जोशी के अनुसार इसके अलावा लाभार्थियों की सुविधा के लिए टोल फ्री नंबर 18001804094, टेलीफोन और टेलीफैक्स सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

उफनाए किरोड़ा से ढाई घंटा ठप रहा मार्ग .com/OnlineChampawat/मंगलवार सुबह मूसलाधार बारिश से पूर्णागिरि मार्ग के बाटनागाड़...
22/06/2016

उफनाए किरोड़ा से ढाई घंटा ठप रहा मार्ग

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मंगलवार सुबह मूसलाधार बारिश से पूर्णागिरि मार्ग के बाटनागाड़ में भारी मलबा आने से मार्ग बंद हो गया है। टैक्सी और यात्रियों के पचास से ज्यादा वाहन फंसे रहे। लोनिवि की टीम जेसीबी से मलबा हटाने में जुटी है। इधर, उफनाए किरोड़ा नाले ने भी करीब ढाई घंटे तक मार्ग बाधित रखा।
मंगलवार की बारिश से बाटनागाड़ में भारी मलबा आया है। जिसके चलते बूम से आगे पूर्णागिरि मार्ग पर दिनभर यातायात बाधित रहा। एसडीएम नरेश दुर्गापाल के साथ ही सीओ आरएस रौतेला ने बाटनागाड़ का निरीक्षण कर बारिश थमने और मलबा कम आने तक यात्रियों के पैदल आवाजाही पर रोक लगाए रखी।

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एसडीएम ने बताया कि मलबा आने से पूर्णागिरि के दर्शन को आए यात्रियों के वाहनों के साथ ही करीब पचास से ज्यादा टैक्सी वाहन बाटनागाड़ के पास फंसे हुए है। हालांकि दोपहर बाद बारिश थमने और मलबा हटाने पर यात्रियों को बाटनागाड़ में पैदल आवाजाही की इजाजत दे दी गई। लोनिवि के एई एपीएस बिष्ट और जेई वीएस पोखरिया की देखरेख में लोनिवि ने मलबा हटाने के लिए दो जेसीबी लगाई गई है।

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तीर्थयात्री ने किया श्रमदान19 मई से शुरू होने वाले श्रीरीठा साहिब के तीन दिनी जोड़ मेले में अब सिर्फ एक दिन बाकी है। प्र...
18/05/2016

तीर्थयात्री ने किया श्रमदान

19 मई से शुरू होने वाले श्रीरीठा साहिब के तीन दिनी जोड़ मेले में अब सिर्फ एक दिन बाकी है। प्रशासन की हील हवाली से अब खुद श्रद्धालु व्यवस्था को दुरुस्त करने में जुटे हैं। दूरदराज से आए तीर्थयात्रियों ने मंगलवार को कार सेवा की।
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पीलीभीत, पूरनपुर, नानकमत्ता आदि से आए तीर्थयात्रियों ने दादा महेंद्र सिंह, बाबा श्याम सिंह, बाबा सत्येंद्र सिंह, बाबा वीरेंद्र सिंह के साथ श्रमदान किया। गुरुद्वारा परिसर और परिसर के बाहर साफ-सफाई अभियान चलाया गया। पुराने पार्किंग स्थल पर लकड़ी और पत्थर पड़े होने से नए पार्किंग स्थल को तैयार किया जा रहा है।
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लधिया नदी के पास की जगह को समतल कर इस स्थान पर पार्किंग बनाई जा रही है। वहीं प्रशासन का कहना है कि मेले के लिए व्यवस्थाओं को ठीक किया जा रहा है। बुधवार तक तीर्थयात्रियों के सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध करा दी जाएंगी।
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29/04/2016

पंचेश्वर मार्ग में दावाग्नि

लोहाघाट/पाटी (चंपावत)। दावाग्नि के चलते चीड़ के जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। बृहस्पतिवार को चौकुड़ी के पास धधकी जंगल की आग ने यहां काफी बड़े क्षेत्र की हरियाली को लील लिया है। फायरब्रिगेड ने आग पर काबू पाने के लिए घंटों प्रयास किया। आग के कारण पुलहिंडोला-पंचेश्वर मार्ग पर अफरा-तफरी मच गई, जिसके चलते इस मार्ग पर लगभग तीन घंटे यातायात ठप रहा। इस मार्ग से रोज सैकड़ों बच्चे और शिक्षक विद्यालयों को जाते हैं। जंगलों में लगी आग फैलकर चौकड़ी में आ गई, तेज हवाओं के चलते आग और धुंध से लोगों का जीना मुश्किल बना था। आग की लपटें सड़क पर पहुंचने से यातायात ठप हो गया।

नरेश गिरि, रिचा राय, नरेश फर्त्याल, फरजाना सलीम, चंद्र किशोर पांडेय, रमेश देव, जनार्दन पांडेय, मुन्नी फर्त्याल आदि शिक्षकों ने आग बुझाने का प्रयास किया। वनकर्मी भी आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे थे। इधर बलांई, भुमलाई, बराकोट, रौंसाल, पंचेश्वर, सिंगदा, पाटी के गर्सलेख, किमाड़ीधार, तोली धार, पटनगांव, मूलाकोट, साल, टांण, रमक आदि स्थानों के जंगल भी धू-धूू कर जल रहे हैं। सड़क से जुडे़ जंगलों में आग लगने से ऊपर की ओर से पत्थर लुड़ककर आ रहे हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए काफी खतरा बना है। दिन में ही जंगली जानवर आबादी की ओर आ रहे हैं।

जंगलों को आग से बचाने में जहां वन विभाग पूरी तरह असफल रहा है, वहीं ग्रामीण भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। अलबत्ता अंडोली गांव में लगी आग को गांव के ही लोगों ने रातभर मशक्कत कर काबू कर लिया है। जंगल की आग के कारण पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ अब व्यापक स्तर पर बीमारियां फैलने लगी हैं। वातावरण में फैली जबरदस्त धुंध के चलते जहां सांस की बीमारी, आंखों में जलन के अलावा शरीर का तापमान बढ़ने की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। वहीं इससे लोगों के जीवन को भी प्रभावित कर दिया है।

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Champawat is a town and a Nagar Palika Parishad in Champawat district in the state of Uttarakhand, India. It is the administrative headquarters of Champawat district. The town was the former capital of the Kumaon Kingdom.

पृथ्वी दिवस पर चंपावत में जागरूकता रैली निकालती जीजीआईसी की छात्राएं।विश्व पृथ्वी दिवस पर यहां गोष्ठी और रैली निकाली गई।...
24/04/2016

पृथ्वी दिवस पर चंपावत में जागरूकता रैली निकालती जीजीआईसी की छात्राएं।

विश्व पृथ्वी दिवस पर यहां गोष्ठी और रैली निकाली गई। विजन पब्लिक स्कूल के बच्चों ने पोस्टरों के माध्यम से जागरूकता फैलाई।
बच्चों ने परिवहन कार्यालय में एआरटीओ रश्मि भट्ट को पोस्टर भेंट किया। जीआईसी में अखरोट, माल्टा, नींबू, संतरे के पौधे रोपे गए। बाद में कई प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रधानाचार्य सीपी गहतोड़ी ने पुरस्कृत किया। भाषण में प्रभा जोशी, सतीश सिंह, पवन बोहरा, जूनियर वर्ग में सपना भंडारी, मोहित भट्ट, कोमल बिष्ट, सूरज राना, पेंटिंग में सतीश सिंह, नीरज पांडेय, जूनियर वर्ग में ज्योति जोशी, ज्योति महर, कंचन कुमारी, निशा अंसारी, स्लोगन प्रतियोगिता में राहुल कुमार, कमल जोशी, रोहित पंगरिया, जूनियर वर्ग में मनीष सिंह, काजल कुमारी, नीरज कुमार, प्रियंका महर, निबंध में प्रभा जोशी, आरती बिनवाल, रमेश महरा, मनोज बोहरा, जूनियर वर्ग में काजल खाती, सपना भंडारी, ऋषभ पंत, सुभाष पालीवाल विजयी रहे। निर्णायक डा.केबी सक्टा, डीएन भट्ट, बीना चौधरी, एके खर्कवाल, सुरेश आर्या थे। भवान मेहता, शंकर गिरि गोस्वामी, भुवन शर्मा, मदन राम आर्य ने सहयोग किया।

जीजीआईसी की छात्राओं ने रैली निकाली। प्रधानाचार्या हेमंती बोरा ने पौधों को बचाने की शपथ दिलाई। एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी भुवनेश्वरी नेगी के नेतृत्व में पौधों की निराई-गुड़ाई की। डिप्टेश्वर मंदिर और गंडक नदी के आसपास सफाई अभियान भी चला। भिंगराड़ा के बालातड़ी गांव में ग्रामीणों ने पौधरोपण कर पर्यावरण बचाने का संकल्प लिया। बुजुर्ग प्रेमबल्लभ भट्ट ने पौधरोपण की शुरुआत की। इस दौरान ग्रामीणों ने 50 फलदार और छायादार पौधे रोपे गए। पीबी भट्ट, आनंद भट्ट, हेम भट्ट, सुरेश भट्ट आदि ने रोपित पौधों की सुरक्षा का संकल्प लिया।

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