24/12/2025
जब धरती ने पहली बार साँस ली थी, उस समय न इंसान था, न सभ्यता, न सीमाएँ। तब भी अरावली पर्वतमाला मौजूद थी। माना जाता है कि लगभग 200 करोड़ वर्ष पहले धरती के भीतर हुए भूगर्भीय हलचलों से अरावली का निर्माण हुआ। यह दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है और राजस्थान की प्राकृतिक सुरक्षा दीवार भी।
अरावली कभी बहुत ऊँची नहीं रही, लेकिन इसकी भूमिका हमेशा बहुत बड़ी रही। इसने पश्चिम की ओर फैलते रेगिस्तान को रोके रखा, तेज़ आँधियों को थामा और ज़मीन के नीचे जलस्रोतों को जीवित बनाए रखा। सदियों तक यह पहाड़ बिना कुछ कहे धरती की रक्षा करता रहा।
समय बदला, राजा आए साम्राज्य बने और मिट गए। इंसान ने विकास के नाम पर पहाड़ों को मापना शुरू किया। आज सवाल उठाया जा रहा है कि अगर किसी पहाड़ की ऊँचाई 100 मीटर से कम है, तो क्या उसे पहाड़ माना जाए या नहीं। इसी सोच के साथ कहा जा रहा है कि छोटे पहाड़ काटे जा सकते हैं।
लेकिन यह सवाल कोई नहीं पूछ रहा कि यही छोटे पहाड़ हमारे लिए कितने ज़रूरी हैं। अगर अरावली नहीं रही तो रेगिस्तान शहरों तक पहुँच जाएगा, ज़मीन के नीचे का पानी सूख जाएगा और हवा की गुणवत्ता और खराब होती चली जाएगी। यह पहाड़ सिर्फ पत्थरों का ढेर नहीं है, बल्कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने वाला आधार है।
अरावली बूढ़ी है, लेकिन कमजोर नहीं। करोड़ों सालों से खड़ी यह पर्वतमाला आज पहली बार असुरक्षित महसूस कर रही है। वजह यह नहीं कि वह टूट रही है, बल्कि वजह यह है कि हम उसे बचाने में चुप हैं।
अगर आज हमने अरावली को खो दिया, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमसे यही पूछेंगी कि जब यह हमें बचा रही थी, तब हमने इसे क्यों नहीं बचाया।
यह सिर्फ अरावली की कहानी नहीं है, यह हमारे भविष्य का सवाल है। अब भी समय है कि हम समझें, सोचें और अरावली के साथ खड़े हों।
📷फोटो साभार Anoop Nautiyal
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