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28/12/2025

राजकीय इंटर कॉलेज मेलखेत में लोक संस्कृति दिवस का भव्य आयोजन हुआ। लोक नृत्य, लोक गीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने मंच को जीवंत कर दिया और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
युवा प्रतिभाओं ने अपनी कला के माध्यम से यह सिद्ध किया कि लोक संस्कृति आज भी हमारी पहचान, गौरव और विरासत है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी परंपराओं को सहेजने और आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम हैं।
परंपरा | कला | युवा ऊर्जा का सुंदर संगम

📷विडियो साभार- टीम मेलखेत (विद्यालय परिवार)
#लोकसंस्कृतिदिवस
#राजकीय_इंटरकॉलेज_मेलखेत
#लोकसंस्कृति


जब धरती ने पहली बार साँस ली थी, उस समय न इंसान था, न सभ्यता, न सीमाएँ। तब भी अरावली पर्वतमाला मौजूद थी। माना जाता है कि ...
24/12/2025

जब धरती ने पहली बार साँस ली थी, उस समय न इंसान था, न सभ्यता, न सीमाएँ। तब भी अरावली पर्वतमाला मौजूद थी। माना जाता है कि लगभग 200 करोड़ वर्ष पहले धरती के भीतर हुए भूगर्भीय हलचलों से अरावली का निर्माण हुआ। यह दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है और राजस्थान की प्राकृतिक सुरक्षा दीवार भी।
अरावली कभी बहुत ऊँची नहीं रही, लेकिन इसकी भूमिका हमेशा बहुत बड़ी रही। इसने पश्चिम की ओर फैलते रेगिस्तान को रोके रखा, तेज़ आँधियों को थामा और ज़मीन के नीचे जलस्रोतों को जीवित बनाए रखा। सदियों तक यह पहाड़ बिना कुछ कहे धरती की रक्षा करता रहा।
समय बदला, राजा आए साम्राज्य बने और मिट गए। इंसान ने विकास के नाम पर पहाड़ों को मापना शुरू किया। आज सवाल उठाया जा रहा है कि अगर किसी पहाड़ की ऊँचाई 100 मीटर से कम है, तो क्या उसे पहाड़ माना जाए या नहीं। इसी सोच के साथ कहा जा रहा है कि छोटे पहाड़ काटे जा सकते हैं।
लेकिन यह सवाल कोई नहीं पूछ रहा कि यही छोटे पहाड़ हमारे लिए कितने ज़रूरी हैं। अगर अरावली नहीं रही तो रेगिस्तान शहरों तक पहुँच जाएगा, ज़मीन के नीचे का पानी सूख जाएगा और हवा की गुणवत्ता और खराब होती चली जाएगी। यह पहाड़ सिर्फ पत्थरों का ढेर नहीं है, बल्कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने वाला आधार है।
अरावली बूढ़ी है, लेकिन कमजोर नहीं। करोड़ों सालों से खड़ी यह पर्वतमाला आज पहली बार असुरक्षित महसूस कर रही है। वजह यह नहीं कि वह टूट रही है, बल्कि वजह यह है कि हम उसे बचाने में चुप हैं।
अगर आज हमने अरावली को खो दिया, तो आने वाली पीढ़ियाँ हमसे यही पूछेंगी कि जब यह हमें बचा रही थी, तब हमने इसे क्यों नहीं बचाया।
यह सिर्फ अरावली की कहानी नहीं है, यह हमारे भविष्य का सवाल है। अब भी समय है कि हम समझें, सोचें और अरावली के साथ खड़े हों।

📷फोटो साभार Anoop Nautiyal

#अरावली

#राजस्थानगौरव
#पर्यावरण_संरक्षण
#धरती_की_ढाल

दुःखदकोई घर लौट रहा था, कोई नौकरी पर जा रहा था, कोई शादी घर, तो कोई कॉलेज, तो कोई हॉस्पिटल जा रहे थे, पर अफसोस वो नहीं प...
05/06/2023

दुःखद

कोई घर लौट रहा था, कोई नौकरी पर जा रहा था, कोई शादी घर, तो कोई कॉलेज, तो कोई हॉस्पिटल जा रहे थे, पर अफसोस वो नहीं पहुंच पाए..... 😢

*उत्तराखंड के बाल पर्व फूलदेई की बधाई* *इस बार धाद के साथ फूलदेई के साथी बनियेगा**धाद द्वारा फूलदेई बाल पर्व का आयोजन 10...
15/03/2023

*उत्तराखंड के बाल पर्व फूलदेई की बधाई*
*इस बार धाद के साथ फूलदेई के साथी बनियेगा*
*धाद द्वारा फूलदेई बाल पर्व का आयोजन 10 हजार बच्चों के लिए 14 मार्च से 14 अप्रैल तक होगा*
■ फूलदेई उत्त्तराखण्ड में नौनिहालों का ऐसा पर्व है जिसमें बच्चे दहलीजों पर फूल डालते हैं गीत गाते हैं और उनके बड़े इसके एवज में उन्हें कुछ भेंट देते हैं। बच्चों की गतिविधियों के इस पर्व को उनकी अभिव्यक्ति और रचनात्मक प्रवृत्तियों के साथ जोड़ते हुए धाद का सार्वजनिक शिक्षा में समाज की रचनात्मक भूमिका का कार्यक्रम कोना कक्षा का हर वर्ष फूलदेई को बाल रचनात्मकता के पर्व के रूप में मनाता है। जिसमें हर स्कूल को फूलदेई शीट उपलब्ध करवाई जाती हैं जिसमें बच्चे ड्राइंग पेंटिंग और कहानी कविता करके भाग लेते हैं।
■ 14 मार्च फूलदेई पर्व से प्रारम्भ होने वाले इस मासिक आयोजन में प्रदेश के -10000 बच्चों के लिए प्रतिभाग कार्यक्रम का लक्ष्य रखा गया है।फूलदेई के माह निमित्त विभिन्न गतिविधियों (बाल कवि सम्मेलन, बाल साहित्य पर चर्चा,फूलदेइ ओपन कॉम्पिटिशन, मातृभाषाओँ में बालसाहित्य) का भी आयोजन किया जाता है।
◆ फूलदेई आयोजन में आप फूलदेई शीट के प्रयोजन के साथ जुड़ सकते हैं शीट की सहयोग राशि रु 15/- है प्रयोजन प्राइमरी स्कूल (15शीट-₹225/-) जूनियर (25शीट-₹375/-) इंटर (25शीट-₹1125/-) के साथ किया जा सकता है
◆ फूलदेई 2023 (14 मार्च- 14अप्रैल) का मुख्य प्रयोजन ₹25000/- और सह प्रयोजन ₹10000/- के साथ किया जाएगा। यदि आप य आपके परिचय में कोई संस्थागत रूप से जुड़कर का प्रायोजन करने का इच्छुक हो तो संपर्क कर सकता है।
■ फूलदेई उत्तराखंड की अद्भुत लोक परम्परा है उसको बनाये रखना और विस्तार देना हमारी जिम्मेदारी है। घाद का मानना है कि कार्यक्रम आम समाज में और आम समाज के सहयोग से ही आगे बढ़ना चाहिए इसलिए इसके प्रयोजन के लिए हम सबसे अपील कर रहे हैं। आप किसी भी स्कूल में फूलदेई पर्व आयोजन के लिए सहयोग कर सकते हैं।
धन्यवाद!

पोस्ट अच्छी लगी तो साथियों से जरूर शेअर करे क्या पता वह इस विचार (आपदा) पर कुछ कहना चाहता हो कोई और!देखो यार समाज में ऐस...
22/01/2023

पोस्ट अच्छी लगी तो साथियों से जरूर शेअर करे क्या पता वह इस विचार (आपदा) पर कुछ कहना चाहता हो कोई और!

देखो यार समाज में ऐसे मुद्दों पर चर्चा करने का सभी का अधिकार है! सब लोग जानते है कि उत्तराखंड में समय समय पर प्राकृतिक और कृत्रिम आपदाएं आती रहती हैं। जिसका पूरा सामना आम समाज और पूरे पर्यावरण (जीव जंतु, पेड़ पौधे, अपनी सार्वजनिक संपत्ति) को करना पढ़ता है। जो कि एक बड़ी चुनौती और समस्या है। हम अक्सर जानते इस मुद्दे को क्या क्या दुःख झेलना पड़ता इस समस्या से। तो हमें इस बारे में विचार और जानकारी रखनी चाहिए और मिलकर इसका सामना करना चाहिए। तो वर्तमान समय में इसका एक बड़ा उदाहरण हमारे उत्तराखण्ड के चमोली में दिख रहा, जिससे सभी लोग रूभरु है। कोई कहता है कि एक प्राकृतिक आपदा है और कोई कहता है की यह मानवीय (कृत्रिम) पर सभी लोग जानते है कि यह कैसी आपदा है? सब एक दूसरे को प्रश्न कर रहे है। तो इस मुद्दे को लेकर और समस्या को लेकर सभी चिंतित और परेशान है कि क्या करें? वास्तविक रूप से देखे तो इस बारे में आम समाज को सोच समझकर कर कदम उठाना चाहिए कि हम कोई कार्य कर रहे उसका परिणाम क्या होगा? ताकि कभी भी किसी को भविष्य में इस तरह कि समस्या का सामना न करना पड़े। हमारी सरकारों को भी इस तरह के मुद्दो पर बहुत विचार और समस्या का समाधान करना चाहिए। आम आदमी अधिकतर सरकार के भरोसे चलता है अंत में। सरकार को आपदा प्रबंधन को लेकर कठोर कदम उठाना और विचार और सुझाव रखने चाहिए।
तो इस मुद्दे को लेकर आज #धाद ने विचार किया और सभी साथियों से निवेदन है आप लोग भी ऐसे मुद्दों पर चर्चा करें और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें कि क्या करें सुझाव के साथ। इस तरह की बात पर हमें अपने विचार और कर्तव्य का प्रतिनिधित्व करना चाहिए।
अकसर लोग आमतौर पर अधिकार कि बात तो कर लेते हैं, लेकिन कर्तव्य का नही, जिसका अंत में परिणाम दिख जाता है। अपने शब्दों में कहूं तो आदमी को सदैव एक दूसरे के बारे में सोचना चाहिए। नही सोचने पर परिणाम देख ही लेते हैं लोग अक्सर बुरा और अच्छा!

धन्यवाद आपका समय निकाल कर पढ़ा और सोचा इस मुद्दे पर।

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