Sanatan Dharm Sanskrit Sansthan Chamba

Sanatan Dharm Sanskrit Sansthan Chamba भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए प्रयास करना, खासकर वैश्वीकरण और आधुनिकता के दौर में।

तुलसी पूजन दिवस:         इस बात से तो सब वाकिफ ही हैं कि 25 दिसंबर के दिन क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है। लेकिन इस बात...
25/12/2025

तुलसी पूजन दिवस:
इस बात से तो सब वाकिफ ही हैं कि 25 दिसंबर के दिन क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है। लेकिन इस बात को शायद बहुत कम लोग जानते होंगे कि इस दिन तुलसी पूजन दिवस भी मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इसे पूजनीय माना गया है और आयुर्वेद में तुलसी को अमृत कहा गया है, क्योंकि ये औषधि का काम भी करती है। बता दें कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां हमेशा सुख-शांति का वास होता है। शास्त्रों के अनुसार तुलसी के पत्ते के बिना भगवान श्री हरि भोग स्वीकार नहीं करते हैं।

तुलसी के नाम:
वृंदा, वृंदावनी, विश्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी ।

तुलसी पूजन का महत्व बहुत गहरा है, क्योंकि इसे
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है, यह घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती है, वास्तु दोष दूर करती है, और इसके औषधीय गुण स्वास्थ्य के लिए वरदान हैं, जिससे सुख-समृद्धि, शांति और रोगों से मुक्ति मिलती है; खासकर भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के पत्तों के बिना अधूरी है।

जयतु संस्कृतं ।। जयतु भारतम ।।

भगवान परशुराम जयंती हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जो इस साल 29 अप्रैल को है. यह दिन अक्...
29/04/2025

भगवान परशुराम जयंती हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जो इस साल 29 अप्रैल को है. यह दिन अक्षय तृतीया के साथ भी मनाया जाता है, जो एक शुभ तिथि है.

परशुराम जयंती पर लोग भगवान परशुराम की पूजा करते हैं, शोभायात्राएं निकालते हैं और दान-पुण्य करते हैं. यह दिन शक्ति, न्याय और धर्म का प्रतीक माना जाता है.

परशुराम, जो विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं, एक शक्तिशाली और वीर व्यक्ति थे। उनका जन्म ऋषि जमदग्नि और रेणुका के घर हुआ था। उनके पिता ने उन्हें क्षत्रियों के विनाश के लिए प्रशिक्षित किया था। एक बार उन्होंने अपनी माता का वध भी कर दिया था, लेकिन बाद में पिता ने उन्हें वरदान दिया, जिससे वे अपनी माता को जीवित कर सके। परशुराम ने अपने परशु (परशु) से अनेक क्षत्रियों का विनाश किया था।

परशुराम की कहानी:

जन्म:
परशुराम का जन्म ऋषि जमदग्नि और रेणुका के घर हुआ था।

शिक्षा:
परशुराम को उनके पिता ने वेदों और धनुर्विद्या का ज्ञान दिया।

शिव का वरदान:
परशुराम ने भगवान शिव की तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें एक शक्तिशाली परशु (अस्त्र) दिया।

क्षत्रियों का विनाश:
परशुराम को क्षत्रियों के अत्याचारों से बहुत क्रोध आया और उन्होंने पृथ्वी से 21 बार क्षत्रियों का विनाश किया।

माता का वध:
परशुराम ने पिता की आज्ञा से अपनी माता रेणुका का वध कर दिया था।

वरदान:
पिता से खुश होकर परशुराम को तीन वरदान मिले, जिनमें से उन्होंने माता को जीवित करने का वरदान मांगा।

गुरु:
परशुराम के गुरु शिव और विश्वामित्र थे।

शिष्य:
भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण परशुराम के शिष्य थे।

अमरता:
परशुराम को सात चिरंजीवी में से एक माना जाता है।

अन्य महत्वपूर्ण बातें:
परशुराम ने भगवान राम को शारंग नामक धनुष और भगवान कृष्ण को सुदर्शन चक्र दिया था।
परशुराम ने धर्म की स्थापना के लिए भगवान राम और कृष्ण की सहायता की थी।

परशुराम का जन्मस्थान मध्य प्रदेश के जानापाव पर्वत बताया जाता है।

परशुराम के पिता का नाम जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था।

सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय जो कि अब राजकीय सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय है में प्राचार्य कार्यभार ग्रहण  करते हुए ...
24/09/2022

सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय जो कि अब राजकीय सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय है में प्राचार्य कार्यभार ग्रहण करते हुए डॉ शिवदयाल शर्मा जी ।

हिमाचल प्रदेश सरकार का एक बार फिर से धन्यवाद ।

सूर्य कांत शर्मा
अध्यक्ष
सनातन धर्म शैक्षणिक सभा, चम्बा

जयतु संस्कृतं ।। जयतु भारतम ।।

सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय चम्बा का अधिग्रहण  होने पर प्रदेश सरकार का हार्दिक धन्यवाद।।प्रदेश सरकार का  संस्कृत विका...
15/09/2022

सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय चम्बा का अधिग्रहण होने पर प्रदेश सरकार का हार्दिक धन्यवाद।।

प्रदेश सरकार का संस्कृत विकास के लिए एक और कदम ।।जयतु संस्कृतं जयतु भारतम।।

सूर्य कान्त शर्मा
प्रधान
सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय चम्बा

राक्षबन्धन क्यों मनाया जाता है?*लक्ष्मी-राजा बलि की कथा*पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया है....
11/08/2022

राक्षबन्धन क्यों मनाया जाता है?

*लक्ष्मी-राजा बलि की कथा*
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया है. इस दौरान भगवान विष्णु ने वामन अवतार में असुरों के राजा बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा. इसके लिए राजा बलि मान गया. वामन ने पहले ही पग में धरती नाप ली तो राजा बलि को समझ आया कि ये स्वयं भगवान विष्णु हैं. राजा बलि ने भगवान को प्रणाम किया. राजा बलि ने इसके बाद वामन के सामने अगला पग रखने के लिए अपनी शीश को प्रस्तुत किया. इससे भगवान बहुत प्रसन्न हुए. भगवान ने राजा बलि से वरदान मांगने को कहा. असुर राज बलि ने वरदान में भगवान को अपने द्वार पर ही खड़े रहने का वरदान मांगा. इससे भगवान अपने ही वरदान में फंस गए. ऐसे में माता लक्ष्मी ने नारद मुनि की सलाह ली. माता लक्ष्मी राज बलि को राखी बांधी और उपहार के रूप में भगवान विष्णु को मांग लिया था.....तभी से राखी का त्यौहार मनाया जाता है।

*भद्रा में क्यों नहीं बांधी जाती राखी?*
रक्षाबंधन पर भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। लंकापति रावण की बहन ने भद्राकाल में ही उनकी कलाई पर राखी बांधी थी भद्रा को ब्रह्मा जी से यह श्राप मिला था कि जो भी भद्रा में शुभ या मांगलिक कार्य करेगा, उसका परिणाम अशुभ ही होगा।

जयतु संस्कृतं ।। जयतु भारतम ।।

सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय में सत्र 2022 -23 का प्रवेश प्रारंभ हो गया है।। प्रवेश लेने के लिए संपर्क करें।।     जयतु...
09/05/2022

सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय में सत्र 2022 -23 का प्रवेश प्रारंभ हो गया है।। प्रवेश लेने के लिए संपर्क करें।।

जयतु संस्कृतं ।। जयतु भारतम ।।

हनुमान जन्मोत्सव: धर्म शास्त्रों में जिन सात चिरंजीवियों का जिक्र किया जाता है, उनमें अश्वत्थामा, बलि, महर्षि वेदव्यास, ...
16/04/2022

हनुमान जन्मोत्सव:

धर्म शास्त्रों में जिन सात चिरंजीवियों का जिक्र किया जाता है, उनमें अश्वत्थामा, बलि, महर्षि वेदव्यास, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य और भगवान परशुराम हैं। मान्यता है कि ये अमर आत्माएं हैं, जो आज भी पृथ्वी पर हमारे बीच मौजूद हैं। वहीं कलयुग में इन सात चिरंजीवियों में महाबली हनुमान की साधना सबसे अधिक की जाती है। भगवान हनुमान का मात्र नाम लेने से ही बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं, बड़ी से बड़ी परेशानियां दूर हो जाती हैं। प्रभु श्री रामचंद्र के परम भक्त भगवान हनुमान का जन्मोत्सव आने ही वाला है। अंजनी पुत्र महावीर हनुमान का जन्म चैत्र की पूर्णिमा को हुआ था। इस साल ये तिथि 16 अप्रैल को है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने पवन पुत्र हनुमान के रूप में जन्म लिया था। संकट मोचन हनुमान जन्मोत्सव पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

जयतु संस्कृतम ।। जयतु भारतम ।।

आप सभी को राम नवमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
10/04/2022

आप सभी को राम नवमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...💐💐💐चैत्र मास को हिंदू वर्ष का पहला महीना होता है। चैत्र मास में शुक्ल पक्ष प्रतिपद...
02/04/2022

हिन्दू नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...💐💐💐

चैत्र मास को हिंदू वर्ष का पहला महीना होता है। चैत्र मास में शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवसंवत्सर आरंभ होता है। आज 02 अप्रैल 2022 को विक्रम संवत 2079 को हिंदू नववर्ष मनाया जाएगा। संवत्सर की शुरुआत राजा विक्रमादित्य के द्वारा की गई थी, इसलिए इसे विक्रम संवत कहा जाता है। यह अंग्रेजी कैलेंडर से 57 वर्ष आगे है। जहां अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2022 चल रहा है तो वहीं नवसंवत्सर 2079 होगा।

जयतु संस्कृतम ।। जयतु भारतम ।।

सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने मनुष्य योनि की रचना की, परंतु वह अपनी सर्जना से संतुष्...
05/02/2022

सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने मनुष्य योनि की रचना की, परंतु वह अपनी सर्जना से संतुष्ट नहीं थे।

तब ब्रह्माज ी ने विष्णु जी से आज्ञा लेकर अपने कमंडल से जल को पृथ्वी पर छिड़क दिया, जिससे पृथ्वी पर कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई।

जिनके एक हाथ में वीणा एवं दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। वहीं अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। जब इस देवी ने वीणा का मधुर नाद किया तो संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई, तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा।

सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण वह संगीत की देवी भी हैं।

वसंत पंचमी के दिन को माता सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं।

पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण अवतार के रूप में सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी आराधना की जाएगी। इस कारण हिंदू धर्म में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।

28/12/2021

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176310

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