Swargashram school

Swargashram school

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Only one private school in Buxar who is providing NCERT books right from beginning, no readmission and ECCE program for beginners. Only one dress also.

12/02/2025

Sejal Srivastava हमारे स्कूल Swargashram से पढ़ी बच्ची जिसने जे ई ई मेंस में 96.95 Percentile अंक प्राप्त किया है।
ये बच्ची सरेंजा के रहने वाले पेशे से रजिस्ट्री ऑफिस में कातिब बड़े भाई समान हमेशा स्नेह रखने वाले Anil Lal (Munna Lal ) की बिटिया है।
हम बिटिया के उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं। ईश्वर आपको उच्चतम शिखर पर ले जाए बेटा। ❤️

Photos from Swargashram school's post 16/08/2024

Glimpses of 15 August 2024.
Happy Independence Day. ❤🥰🌺

14/02/2024

विद्या और सुरों की देवी माँ सरस्वती पूजा की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई🎉🎊
माँ का आशीर्वाद आप सभी शुभेच्छुओं को सदैव मिलता रहे।
सरस्वती महाभागे
विद्ये कमललोचने
विद्यारूपे विशालाक्षी
विद्यांदेही नमोऽस्तुते।
🙏🌺🙏

26/01/2024

Lets re-affirm our determination to protect our constitutional values and make India the best republic in the world. 🇮🇳🇮🇳🇮🇳
Happy 75th Republic Day. ❤🥰🌺

Photos from Swargashram school's post 10/11/2023

Rangoli Compitition in Swargashram school.

08/04/2023

"According to Psychologists, there are four types of Intelligence:

1) Intelligence Quotient (IQ)
2) Emotional Quotient (EQ)
3) Social Quotient (SQ)
4) Adversity Quotient (AQ)

1. Intelligence Quotient (IQ): this is the measure of your level of comprehension. You need IQ to solve maths, memorize things, and recall lessons.

2. Emotional Quotient (EQ): this is the measure of your ability to maintain peace with others, keep to time, be responsible, be honest, respect boundaries, be humble, genuine and considerate.

3. Social Quotient (SQ): this is the measure of your ability to build a network of friends and maintain it over a long period of time.

People that have higher EQ and SQ tend to go further in life than those with a high IQ but low EQ and SQ. Most schools capitalize on improving IQ levels while EQ and SQ are played down.

A man of high IQ can end up being employed by a man of high EQ and SQ even though he has an average IQ.

Your EQ represents your Character, while your SQ represents your Charisma. Give in to habits that will improve these three Qs, especially your EQ and SQ.

Now there is a 4th one, a new paradigm:

4. The Adversity Quotient (AQ): The measure of your ability to go through a rough patch in life, and come out of it without losing your mind.

When faced with troubles, AQ determines who will give up, who will abandon their family, and who will consider su***de.

Parents please expose your children to other areas of life than just Academics. They should adore manual labour (never use work as a form of punishment), Sports and Arts.

Develop their IQ, as well as their EQ, SQ and AQ. They should become multifaceted human beings able to do things independently of their parents.

Finally, do not prepare the road for your children. Prepare your children for the road."

Thanks for reading

For more👉Hassan Sas Bangura Blog

©️ Google

12/09/2022

" टिकट कहाँ है ? " -- टी सी ने बर्थ के नीचे छिपी लगभग तेरह - चौदह साल की लडकी से पूछा ।"
"नहीं है साहब ।"
"काँपती हुई हाथ जोड़े लडकी बोली।"
"तो गाड़ी से उतरो ।" टी सी ने कहा ।
इसका टिकट मैं दे रहीं हूँ।........पीछे से ऊषा भट्टाचार्य की आवाज आई , जो पेशे से प्रोफेसर थी ।
"तुम्हें कहाँ जाना है ?" लड़की से पूछा " पता नहीं मैम ! " तब मेरे साथ चल बैंगलोर तक ! "
तुम्हारा नाम क्या है ? " चित्रा
"बैंगलोर पहुँच कर ऊषाजी ने चित्रा को अपनी एक पहचान के स्वंयसेवी संस्थान को सौंप दिया और अच्छे स्कूल में एडमीशन करवा दिया । जल्द ही ऊषा जी का ट्रांसफर दिल्ली होने की वजह से चित्रा से कभी-कभार फोन पर बात हो जाया करती थी । करीब बीस साल बाद ऊषाजी को एक लेक्चर के लिए सेन फ्रांसिस्को (अमरीका) बुलाया गया । लेक्चर के बाद जब वह होटल का बिल देने रिसेप्सन पर गई तो पता चला पीछे खड़े एक खूबसूरत दंपत्ति ने बिल भर दिया था ।
"तुमने मेरा बिल क्यों भरा ?"
मैम , यह बम्बई से बैंगलोर तक के रेल टिकट के सामने कुछ नहीं है ।
"अरे चित्रा ! ?"
. . . .चित्रा कोई और नहीं इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरमैन सुधा मुर्ति थी , एवं इंफोसिस के संस्थापक श्री नारायण मूर्ति जी की पत्नी थी ।
यह उन्ही की लिखी पुस्तक "द डे आई स्टाॅप्ट ड्रिंकिंग मिल्क" से लिया गया कुछ अंश ।
देखा आपने ! ........कभी आपके द्वारा भी की गई सहायता किसी की जिन्दगी बदल सकती है ।
"अगर कुछ कमाना है तो नेकियां कमाईये जनाब ,
क्योंकि यही वो रास्ता है जो जन्नत तक जाता है..."

11/09/2022

एक कम्प्यूटर इंजीनियर से बात हो रही थी. बचपन में उसकी इच्छा थी कि वैज्ञानिक बनेगा. पिता जी ने बोला बहुत अच्छा पढ़ते रहो. फ़िर उसकी इच्छा हुई कि अंतरिक्ष यात्री बनेगा. पिता जी ने बोला बहुत अच्छा साइंस मैथ ठीक रखो. फ़िर 12 th में उसे समझा दिया कि कम्प्यूटर साइंस से चुप चाप बी टेक कर लो, अंतरिक्ष यात्री किसी भी फ़ील्ड में इंजीनियरिंग कर बन सकते हो, यहाँ तक कि मेडिकल करके भी बन सकते हो. बच्चा बी टेक करने गया और उसका मब कम्प्यूटर साइयन्स में लग गया, अब तो उसके दिमाग़ से ऐस्ट्रॉनॉट का भूत भी उतर गया है. अब पूँछो तो बोलता है वो तो बचपना था.

ऐसे ही एक लड़की का प्लान था, राइटर बनना. पढ़ने में होशियार थी ही. अब राइटर बनने के लिए विशेष डिग्री की ज़रूरत नहीं होती, क्रियेटिविती डिग्री की मोहताज नहीं होती. पिता जी ने समझाया इंजीनियर बन जा, लाइफ़ सेट है, फ़िर राइटर आर्टिस्ट जो बनना हो वो भी बन जाना. कला अनादि काल से या तो राजाओं के प्रोत्साहन से चलती है या अपने पैसे से. लड़की ने बात मानी, आज एक बड़ी कम्पनी में उच्च पद पर है. साल में एक महीने की छुट्टी लेकर पहाड़ों में बांग्ला लेकर पुस्तक लिखती है, छपवाती है, पुरुष्कार पाती है, इंटर्व्यू देती है.

कैरियर के मामले में अक्सर बहुत लोगों का तर्क होता है बच्चों को वह करने दो जो वह करना चाहते हैं. भारतीय परिवेश में यह एक लेवल तक ही सही है. निहसंदेह जिस बच्चे का रुझान बायोलाजी हो उसे ज़बरदस्ती गायक बनाना उचित नहीं. पर साथ ही पैरेंटल ज़िम्मेदारियाँ भी होती हैं कि आप बच्चों का उचित मार्ग दर्शन करें. कल को समय बीत जाने पर बच्चे जवाब न माँगे कि हम तो बच्चे थे आप तो एडल्त थे क्या आपकी ज़िम्मेदारी नहीं थी हमें सही कैरियर चुनने में मदद करते.

3 idiots टाइप अब्बा नहीं मानेंगे फ़िल्मी बातों में मत पड़िए. यदि आप बच्चों की फ़ीस दे रहे हैं, उन्हें पढ़ा रहे हैं तो उनके कैरियर पथ चयन में पूरा इंट्रेस्ट / दख़लंदाज़ी ज़रूर रखिए - हाँ ऐसा भी न कर दीजिए जिससे बच्चे को नफ़रत हो.

साभार Nitin Tripathi

02/09/2022

*शिक्षक का अदभुत ज्ञान*
*शाकाहारी - मांसाहारी*

एक बार एक चिंतनशील शिक्षक ने अपने 7th - 8th स्टेंडर्ड के बच्चों से पूछा कि
आप लोग कहीं जा रहे हैं और
सामने से कोई कीड़ा मकोड़ा या कोई साँप, छिपकली या कोई गाय-भैंस या अन्य कोई ऐसा विचित्र जीव दिख गया, जो आपने जीवन में पहले कभी नहीं देखा हो, तो प्रश्न यह है कि
आप कैसे पहचानेंगे कि
वह जीव *अंडे* देता है *या बच्चे* ?
क्या पहचान है उसकी ?

अधिकांश बच्चे मौन रहे
जबकि कुछ बच्चों में बस आंतरिक खुसर-फुसर चलती रही...।

मिनट दो मिनट बाद
फिर उस चिंतनशील शिक्षक ने स्वयं ही बताया कि
बहुत आसान है,,
जिनके भी *कान बाहर* दिखाई देते हैं *वे सब बच्चे देते हैं*
और जिन जीवों के *कान बाहर नहीं* दिखाई देते हैं
*वे अंडे* देते हैं.... ।।
फिर दूसरा प्रश्न पूछा कि–
ये बताइए आप लोगों के सामने एकदम कोई प्राणी आ गया... तो आप कैसे पहचानेंगे की यह *शाकाहारी है या मांसाहारी ?*
क्योंकि आपने तो उसे पहले भोजन करते देखा ही नहीं,
बच्चों में फिर वही कौतूहल और खुसर फ़ुसर की आवाजें.....

शिक्षक ने कहा–
देखो भाई बहुत आसान है,,
जिन जीवों की *आँखों की बाहर की यानी ऊपरी संरचना गोल होती है, वे सब के सब माँसाहारी होते हैं*,
जैसे-कुत्ता, बिल्ली, बाज, चिड़िया, शेर, भेड़िया, चील या अन्य कोई भी आपके आस-पास का जीव-जंतु जिसकी आँखे गोल हैं वह माँसाहारी ही होगा और है भी,
ठीक उसी तरह जिसकी *आँखों की बाहरी संरचना लंबाई लिए हुए होती है, वे सब के सब जीव शाकाहारी होते हैं*,
जैसे- हिरन, गाय, हाथी, बैल, भैंस, बकरी,, इत्यादि।
इनकी आँखे बाहर की बनावट में लंबाई लिए होती है ....

फिर उस चिंतनशील शिक्षक ने बच्चों से पूछा कि-
बच्चों अब ये बताओ कि मनुष्य की आँखें गोल हैं या लंबाई वाली ?

इस बार सब बच्चों ने कहा कि मनुष्य की आंखें लंबाई वाली होती है...
इस बात पर
शिक्षक ने फिर बच्चों से पूछा कि
यह बताओ इस हिसाब से मनुष्य शाकाहारी जीव हुआ या माँसाहारी ??
सब के सब बच्चों का उत्तर था *शाकाहारी* ।

फिर शिक्षक से पूछा कि
बच्चों यह बताओ कि
फिर मनुष्य में बहुत सारे लोग मांसाहार क्यों करते हैं ?
तो इस बार बच्चों ने बहुत ही गम्भीर उत्तर दिया
और वह उत्तर था कि *अज्ञानतावश या मूर्खता के कारण।*

फिर उस चिंतनशील शिक्षक ने बच्चों को दूसरी बात यह बताई कि
जिन भी *जीवों के नाखून तीखे नुकीले होते हैं, वे सब के सब माँसाहारी* होते हैं,
जैसे- शेर, बिल्ली, कुत्ता, बाज, गिद्ध या अन्य कोई तीखे नुकीले नाखूनों वाला जीव....
और
जिन जीवों के *नाखून चौड़े चपटे होते हैं वे सब के सब शाकाहारी* होते हैं,
जैसे-मनुष्य, गाय, घोड़ा, गधा, बैल, हाथी, ऊँट, हिरण, बकरी इत्यादि।

इस हिसाब से भी अब ये बताओ बच्चों कि मनुष्य के नाखून तीखे नुकीले होते हैं या चौड़े चपटे ??

सभी बच्चों ने कहा कि
चौड़े चपटे,,

फिर शिक्षक ने पूछा कि
अब ये बताओ इस हिसाब से मनुष्य कौन से जीवों की श्रेणी में हुआ ??
सब के सब बच्चों ने एक सुर में कहा कि *शाकाहारी ।*

फिर शिक्षक ने बच्चों से तीसरी बात यह बताई कि,
जिन भी *जीवों अथवा पशु-प्राणियों को पसीना आता है, वे सब के सब शाकाहारी* होते हैं,
जैसे- घोड़ा, बैल, गाय, भैंस, खच्चर, आदि अनेकानेक प्राणी... ।
जबकि
*माँसाहारी जीवों को पसीना नहीं आता है, इसलिए कुदरती तौर पर वे जीव अपनी जीभ निकाल कर लार टपकाते हुए हाँफते रहते हैं*
इस प्रकार वे अपनी शरीर की गर्मी को नियंत्रित करते हैं.... ।

तो प्रश्न यह उठता है कि
मनुष्य को पसीना आता है या मनुष्य जीभ से अपने तापमान को एडजस्ट करता है ??

सभी बच्चों ने कहा कि मनुष्य को पसीना आता है, इसलिए मनुष्य भी शाकाहारी हुआ।
*फिर शिक्षक ने एक पहचान और बताई कि जो मांसाहारी होते हैं वह जीभ से चाट कर पानी पीते हैं जबकि शाकाहारी सुरूक कर या खींच कर पीते हैं।* बच्चों ने इस पर ताली बजाई।
शिक्षक ने कहा कि अच्छा यह बताओ कि
इस बात से भी मनुष्य कौन सा जीव सिद्ध हुआ, सब के सब बच्चों ने एक साथ कहा –
*शाकाहारी ।*
सभी लोग विशेषकर अहिंसा में, सनातन धर्म, संस्कृति और परम्पराओं में विश्वास करने वाले लोग भी चाहे तो बच्चों को नैतिक-बौद्धिक ज्ञान देने अथवा सीखने-पढ़ाने के लिए इस तरह बातचीत की शैली विकसित कर सकते हैं,
इससे जो वे समझेंगे सीखेंगे वह उन्हें जीवनभर काम आएगा...
याद रहेगा, पढ़ते वक्त बोर भी नहीं होंगे....।

बच्चे अगर बड़े हो जाएं तो उनको यह भी बताएं कि कैसे शाकाहारी मनुष्य जानकारी के अभाव में मांसाहार का उपयोग करता है और कहता है कि जब अन्न नहीं उपजाया जाता था तब मनुष्य मांसाहार का सेवन करते थे, जो सरासर गलत है ; तब मनुष्य कंद-मुल एवं फलों पर जीवित रहते थे, जो सही है एवं मनुष्य के संरचना और स्वभाव से मेल भी खाता है। *धन्यवाद*
व्हाट्सएप से प्राप्त 🙏❤

15/08/2022

सभी शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों को स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई🎉🎊🎉🎊🎉🎊

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