मस्ती की पाठशाला

मस्ती की पाठशाला Gudhanathawatan

शिक्षा मानव का एक महत्वपूर्ण आभूषण होता है लेकिन सही और सच्ची सीख से आज भी ज्यादातर लोग महरूम है। जागरूकता एवं जानकारी के अभाव में कई लोग आज भी शोषित पीड़ित है और तथाकथित उच्च वर्ग उन दीन हीन लोगों को नजरअंदाज कर सभ्य होने का ढोंग करते है।

पहाड़ों की खूबसूरती..
23/09/2026

पहाड़ों की खूबसूरती..

मानसून में खिल उठे बूंदी के जंगल...
बूंदी। क्षेत्र के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के पहाड़ी इलाकों के जंगलों में इन दिनों हरियाली से लबरेज पहाड़ियों की श्रंखला आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। धोक वृक्षों की बहुलता वाले यहां के जंगलों में बाघों की मौजूदगी व टाइगर रिजर्व बनने के बाद वन विभाग की गश्त बढ़ने से वनों की कटाई व पशु चराई पर अंकुश लगने का सकारात्मक असर जंगलों की हरीतिमा पर भी दिखने लगा है। टाइगर रिजर्व के जंगलों में कड़ियों के रूप में फैली पहाड़ी श्रंखलाओं पर छाई हरियाली चादर रोमांचित अनुभव प्रदान करती है। बूंदी के जंगलों में इस तरह की कई पहाड़ी दर्रे है जो इस टाइगर रिजर्व को अन्य टाइगर रिजर्व से अलग बनाते हैं। टाइगर रिजर्व के कालदां के जंगलों का नयनाभिराम दृश्य।
#रामगढ़_विषधारी_टाइगर_रिजर्व

19/09/2026

बाघ-बाघिन...

19/09/2026

भीमलत

कालदां की शेरनी...
17/09/2026

कालदां की शेरनी...

बाघ की तलाश में बाघिन आरवीटी-8, वन विभाग नहीं है गंभीर।
डेढ़ साल से कालदां व बूंदी के बीच अकेली भटक रही है युवा बाघिन लेकिन नहीं मिला जोड़ीदार।

(पृथ्वी सिंह राजावत)

बूंदी रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन कालदां व सूरज छतरी तक डेढ़ साल से भटक रही युवा बाघिन आरवीटी-8 को न तो जोड़ीदार मिला और न हीं किसी तरह के प्रे-बेस की व्यवस्था हो सकी। टाइगर रिजर्व के बफर जोन में पड़ने वाला यह क्षेत्र कहने को तो टाइगर रिजर्व घोषित हो गया है लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कोई राशी खर्च नहीं की गई है। बाघिन को वन विभाग ने अपने भरोसे छोड़ दिया है और कोई गंभीर प्रयास नहीं किए गए है। गौरतलब है कि रणथंभौर से लाकर बूंदी के जंगलों में छोड़ी गई यह बाघिन भीमलत तक विचरण कर रही है लेकिन वन विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं है। बाघिन बार बार हाइवे क्रॉस कर टाइगर हिल पर आ रही है लेकिन इसे जोड़ीदार नहीं मिल सका है। बाघ आरवीटी-1 जो बाघिन आरवीटी-3 के साथ रह रहा है वह इस बाघिन के साथ नहीं मिल सका है। लंबे समय से वन्यजीव प्रेमी कालदां क्षेत्र को बाघों के अनुकूल बनाने की मांग उठाते रहे हैं लेकिन वन विभाग अभी तक बूंदी में बाघों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं लग रहा है। करीब 4 साल की हो चुकी युवा बाघिन आरवीटी-8 तीन बार टाइगर हिल पर बाघ की तलाश में आ चुकी है लेकिन यह क्षेत्र बाघिन आरवीटी-3 की टेरेटरी होने से यह वापस कालदां इलाके में चली जाती है। एक तरफ चार साल से यह टाइगर रिजर्व नए शावकों को लेकर तरस रहा है वहीं वन विभाग की टाइगर रिजर्व के बफर जोन के प्रति बरती जा रही लापरवाही बूंदी के इको टूरिज्म के लिए भारी पड़ सकती है।
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बाघिन आरवीटी-8 की नियमित मोनिटरिंग की जा रही है और कालदां के जंगलों को बाघों के अनुकूल बनाने के प्रयास कर रहे हैं। यदि आवश्यकता हुई तो कालदां क्षेत्र के जंगलों को कोर प्रबंधन में शामिल करेंगे।

सुगनाराम जाट, फील्ड डायरेक्टर, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, बूंदी
#रामगढ़_विषधारी_टाइगर_रिजर्व

प्रकृति का खूबसूरत रूप..
12/09/2026

प्रकृति का खूबसूरत रूप..

धरती पर दर्ज अंतरिक्ष की अमिट छाप है राजस्थान का "रामगढ़-क्रेटर"

भारत की पहली जियो हैरिटेज साइट भी घोषित है यह उल्का पिंड से निर्मित अदभुत "भूआकृति"
(पृथ्वी सिंह राजावत)
बूंदी। राजस्थान का रामगढ़ क्रेटर राजस्थान ही नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की महत्वपूर्ण भू-वैज्ञानिक धरोहर भी है। दक्षिणी पूर्वी राजस्थान के बारां जिले में रामगढ़ गांव के पास बनी यह भू-संरचना विंध्यन समूह के प्राचीन बलुआ पत्थर एवं अवसादी चट्टानों से निर्मित है। इसकी विशिष्ट गोलाकार भू-आकृति, ऊंची वलयाकार पहाड़ियां और मध्य का कटोरानुमा वृहत गड्ढा इसे दूर से ही अलग पहचान देते हैं। वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर इस संरचना को अति प्राचीन व उल्का-पिंड के प्रभाव से उत्पन्न माना गया है। रामगढ़ की एक और विशेषता यह है कि इस क्रेटर के मध्य भाग में एक कलात्मक प्राचीन शिव मंदिर सदियों से खंडित अवस्था में भी खड़ा है जिसे लोग भंडदेवरा कहते हैं। प्राकृतिक भू-आकृति और मानव सभ्यता की यह निकटता इसे एक विशिष्ट भू-विरासत एवं शैक्षणिक पर्यटन स्थल बनाती है। राजस्थान सरकार ने 2024 में रामगढ़ क्रेटर को आधिकारिक रूप से भारत की पहली जियो हैरिटेज साइट (अधिसूचित भू-विरासत स्थल) घोषित किया है। रामगढ़ क्रेटर हमें यह एहसास कराता है कि राजस्थान की धरती केवल किलों, महलों और जंगलों तक ही सीमित नहीं, बल्कि करोड़ों वर्षों से अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच हुए घटनाक्रमों की भी जीवंत पुस्तक है।
(फ़ोटो एवं कंटेंट Bundi Tiger)
#रामगढ़_विषधारी_टाइगर_रिजर्व

ऐसा कीट आपने देखा है क्या इन दिनों में...
31/08/2026

ऐसा कीट आपने देखा है क्या इन दिनों में...

राजस्थान में कीटनाशकों की भेंट चढ़ी सावण की डोकरी...

(पृथ्वी सिंह राजावत)

बूंदी। लाल मखमली रंग वाला यह आकर्षक अकशेरुक जीव बरसात की पहली फुहारों के साथ ही रेतीली , भूरी-दोमट व पथरीली खुली भूमि पर धीमे-धीमे चलता दिखाई देकर अपने सुर्ख लाल मखमली रूप से आकर्षित करता है। अंग्रेजी Red Velvet Mite और वीर बहूटी ,लाल मखमली बरूथी कुटकी व राजस्थान में सावण की डोकरी नाम से जानी जाने वाला यह सुंदर जीव उड़ नही सकता तथा आँखे नही होने से देख भी नही पाता । यह कुटकी(Mite) व चीचड़ा(Tick) परिवार का सदस्य है| इसका मुख्य भोजन पौधों का रस है ,मुखांग छेद करने और रस चूसने के काम आता है। इस परिवार के कुछ सदस्य जानवरों का खून चूसते है जिसे हम बग कहते है। बरसात के बाद यह जीव नहीं दिखता तथा शेष समय जमीन में अंडों, इल्ली या कोष के रूप मेँ बिताती है। क्या आपने इसे स्वतंत्र रूप से खेतों या जंगल में देखा है? कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में लिखें।
#रामगढ़_विषधारी_टाइगर_रिजर्व

26/08/2026

दुखद पहलू

खूबसूरत
26/08/2026

खूबसूरत

प्रकृति के बीच छलांग...
#रामगढ़_विषधारी_टाइगर_रिजर्व

भीमलत
26/08/2026

भीमलत

पूरा भरा तो टूट सकता है बूंदी का 68 साल पुराना भीमलत बांध! सतर्क हुआ जल संसाधन विभाग, आधे भरे बांध से जल निकासी शुरू की। इस साल बांध नहीं भरने से रबी फसलों को नहीं मिलेगा सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी।
(पृथ्वी सिंह राजावत)
बूंदी। बूंदी-चित्तौड़ मार्ग स्थित बाणगंगा नदी पर रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बने जिले के 68 साल पुराने भीमलत बांध में रिसाव की समस्या बढ़ने से इसके टूटने की आशंका उत्पन्न हो गई है। हालांकि बांध की स्थिति व बांध सुरक्षा दल की रिपोर्ट के आधार पर जल संसाधन विभाग सतर्क हो गया है और बांध को टूटने से बचाने के लिए पूरा भरने से पहले ही जल निकासी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार 1958 में बने इस बांध की आर्च आकार की पक्की दीवार में कई जगह रिसाव की समस्या बढ़ गई है जिसके चलते विभाग ने बांध व नीचे बसे ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट पर कुछ माह पहले राज्य बांध सुरक्षा संगठन के एक दल ने भीमलत बांध का जायजा लिया था और इसकी दीवार की स्थिति को देखते हुए इसे असुरक्षित माना था। संगठन ने जल संसाधन विभाग को बांध की मरम्मत कराने का सुझाव भी दिया था। टीम ने बांध में इस साल 20 फ़ीट से ज्यादा पानी का भराव नहीं करने के भी निर्देश दिए थे। बांध की मरम्मत के लिए जल संसाधन विभाग ने विस्तृत कार्य रिपोर्ट तैयार कर प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग को भेज दिए है जहां से स्वीकृति मिलते ही काम शुरू होगा। गौरतलब है कि बांध की कुल भराव क्षमता 36 फ़ीट है और इस समय बांध में करीब 24 फ़ीट पानी आ गया है। बांध से विगत तीन दिनों से कम वेग से जल निकासी की जा रही थी जिसे मानसून की गतिविधियां फिर शुरू होने के चलते मंगलवार से बढ़ा दिया है। बांध को खाली करने से इस साल किसानों को रबी की बुवाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने की आशंका उत्पन्न हो गई है।

साढ़े चार लाख में बना बना बांध, अब 25 करोड़ से होगी मरम्मत

1958 में मेवाड़ व हाड़ौती की सीमा पर 4 लाख 58 हजार रुपये में बनकर तैयार हुए भीमलत बांध की सुरक्षा दीवार की मरम्मत के लिए विभाग ने करीब 20 से 25 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया है और इसके प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेजे है। विभागीय जानकारी के अनुसार इस साल अक्टूबर माह तक टेंडर प्रक्रिया पूरी होकर मरम्मत का काम शुरू होने की संभावना है।

भीमलत बांध में नहीं है नहरी प्रणाली, नीचे बने अभयपुरा बांध से होती है सिंचाई

ऊपरमाल के पठार व हाड़ौती के मैदानी इलाकों के संगम स्थल भीमलत जलप्रपात से ऊपर बने भीमलत बांध में नहरी प्रणाली नहीं है। यहां से पानी छोड़ा जाता है जो भीमलत जलप्रपात के रास्ते तीन किलोमीटर नाले में बहते हुए नीचे बने अभयपुरा बांध में पहुंचता है जहां से दो नहरें निकलती है। इस बांध परियोजना से बूंदी पंचायत समिति के नीम का खेड़ा, मेघारावत की झोपड़ियां, मंगाल, गुढ़ानाथावतान, शाहपुरा व रामनगर पंचायत के दो दर्जन गांवों की करीब 3402 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई होती है। इस साल बांध से जल निकासी के कारण किसानों को रबी की फसलों के लिए सिंचाई की चिंता सताने लगी है। ................................................

भीमलत बांध की दीवार में रिसाव की समस्या और राज्य बांध सुरक्षा संगठन के निर्देशानुसार नीचे बसे ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस साल बांध को पूरा नहीं भरा जाएगा। केंद्रीय जल आयोग को प्रस्ताव भिजवा दिया है और स्वीकृति मिलते ही बांध की मरम्मत शुरू कराने के प्रयास कर रहे हैं।

प्रेमचंद मीणा, अधिशासी अभियंता,
जल संसाधन विभाग, परियोजना खण्ड, बूंदी
#रामगढ़_विषधारी_टाइगर_रिजर्व

26/08/2026

खतरे में भीमलत बांध...

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