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19/02/2023

Music Industry Ke Peeche Ka Kala Sach

18/02/2023

Truth behind WWE

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15/01/2023

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने हजरत दिह्या कलबी (र.अ) के हाथ रूम के बादशाह हिरकल (Hercules) के नाम दावती खत भेजा, जिस का मजमून यह था –

“यह खत अल्लाह के रसूल मुहम्मद (ﷺ) की तरफ से रूम के बड़े बादशाह हिरक्ल के नाम है, जो हिदायत की इत्तेबा करे, उस पर सलामती हो, मैं तुम्हें दीने इस्लाम की तरफ बुलाता हूँ, इस्लाम कबूल कर लो, सलामत रहोगे, अल्लाह तआला तुम को दुगना अज्र अता फ़र्माएगा और अगर तुम ने नहीं माना तो तमाम रिआया के इस्लाम न लाने का गुनाह भी तुम पर होगा।
ऐ अहले किताब ! ऐक ऐसी बात की तरफ आओ, जो हमारे और तुम्हारे दर्मियान बराबर है, वह यह के हम अल्लाह के अलावा किसी की इबादत न करें और हम में से कोई अल्लाह के अलावा किसी को रब और माबूद न बनाए और अगर तुम नहीं मानते तो गवाह रहो के हम अल्लाह की ताबेदारी करते हैं।”

शाहे हिरक्ल ने आप (ﷺ) के मुबारक खत को अदब व एहतेराम के साथ सोने के कलमदान में रखा और अबू सुफियान की जबानी हालात सुन कर कहा मैं खूब जानता हूँ के आप सच्चे नबी हैं, लेकिन अगर मैंने ईमान क़बूल कर लिया तो मेरी हुकूमत जाती रहेगी और रूम के लोग मुझे कत्ल कर डालेंगे।

*7

21/12/2022

About Gharqad Tree

20/12/2022

Tolne Me Naa insaafi Karna

27/10/2022

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15/10/2022

हजरत इब्राहीम (अ.स) की दावते तौहीद की खबर आहिस्ता आहिस्ता बादशाह नमरूद को भी पहुँच गई, जिसने खुदाई का दावा कर रखा था। बादशाह ने हजरत इब्राहीम (अ.स) को तलब किया। मगर इस अजीम पैगम्बर ने वहाँ भी अल्लाह तआला की वहदानियत और उसकी सिफात को खूब अच्छी तरह वाजेह किया, जिस से बादशाह लाजवाब हो गया और दुश्मनी पर उतर आया।

अब वालिद, कौम और बादशाहे वक़्त ने मिलकर उन्हें सजा देने की तदबीर की और बादशाह के मश्वरे पर कौम के लोगों ने एक खास जगह में कई रोज़ तक आग दहकाई जिसके शोलों से आसपास की चीजें झुलसने लगीं। जब लोगों को यकीन हो गया के हजरत इब्राहीम (अ.स) इस आग से जिन्दा बच कर हरगिज नहीं निकल सकेंगे तो उन को उस आग में डाल दिया।

मगर अल्लाह रब्बुल आलमीन की मदद और उस की जबरदस्त ताकत के सामने उन कम अक्लों की तदबीरें कहाँ चल सकती थीं। अल्लाह तआला ने आग को हुक्म दिया के ऐ आग! तू इब्राहीम पर सलामती के साथ ठंडी हो जा आग शोलों और अंगारों के बावजूद उसी वक्त उन के हक में ठंडी हो गई और हजरत इब्राहीम (अ.स) उस में सही व सालिम रहे। इस कुदरते खुदावन्दी और मुअजिजे को देखने के बाद भी लोगों ने ईमान कुबूल नहीं किया, तो हज़रत इब्राहीम (अ.स) ने हिजरत का इरादा फ़र्मा लिया और हज़रत सारा और अपने भतीजे हजरत लूत को लेकर फलस्तीन, नायलस और मिन्न वगैरह की तरफ हिजरत कर गए, इस दौरान दीन की दावत का फरीजा भी अन्जाम देते रहे।

12/10/2022

यमन में दो पहाड़ों के दर्मियान मआरिब नामी शहर में “कौमे सबा” आबाद थी, यहाँ के बादशाहों ने उन दोनों पहाड़ों के दर्मियान एक निहायत मज़बूत बन्द (डेम) बनवाया था, जो सद्दे मआरिब के नाम से मशहूर था।

यह बन्द शिमाल व जूनूब दोनों तरफ पहाड़ों से आने वाले पानी को रोके रखता था, इस पानी की वजह से उनके दारूल हकमत शहरे मआरिब के दोनों जानिब तकरीबन तीन सौ मुरब्बा मील तक खूबसूरत बागात, हरी भरी खेतियाँ, कदम कदम पर खुश्बूदार फूल और उम्दा उम्दा मेवों के दरख्त लगे हुए थे, कौमे सबा एक ज़माने तक अल्लाह के अहकाम पर अमल करती रही।

मगर फिर वह उन नेअमतों में पड़ कर एक अल्लाह को भूल गई और कुफ्र व नाफ़रमानी में मुब्तला हो गई, अल्लाह तआला ने उन की इस्लाह के लिये मुतअद्दद अम्बियाए किराम को भेजा, लेकिन उन लोगों ने किसी नबी की दावत को कबूल नहीं किया और गुमराही और अल्लाह तआला की नाफ़रमानी में बढ़ती चली गई।

बिल आखिर अल्लाह तआला ने उन लोगों पर अज़ाब नाज़िल किया और जिस मज़बूत बन्द (डेम) पर उन्हें बड़ा नाज़ था, उस को तोड़ कर पूरे शहर, बाग़ात और खेतों को बरबाद कर दिया।

अल्लाह तआला ने क़ुरआन में उन का तज़किरा करते हुए फ़रमाया : “हम ने (उन लोगों के) कुफ्र व नाफ़रमानी का यह बदला दिया और हम कुफ्र व नाफ़रमानी का इसी तरह बदला दिया करते हैं।” सूरह सबा: 17

11/10/2022

क़ुरान करीम के सूर-ए-कहफ़ में “याजूज माजूज” का तज़्किरा है। यह लोग आम इन्सानों की तरह हज़रत नूह (अ.स) की औलाद में से हैं। यह बड़े जंगजू और ताक़तवर थे। अपनी पड़ोसी क़ौमों पर हमले करते रहते, उनके घरों को तबाह करते, कीमती चीजें लूट लेते और क़त्ल व ग़ारत गिरी करते थे।

इन्हीं लोगों के फ़ित्ना व फ़साद से हिफ़ाज़त के लिये जुज़ुलक़रनैन ने एक मज़बूत दीवार बनाई थी। एक हदीस में आया है के कयामत के करीब जब हज़रत ईसा (अ.स) मुसलमानों को ले कर कोहे तूर पर चले जाएँगे, तो अल्लाह तआला याजूज व माजूज को खोल देंगे और व हतेज़ी के साथ निकलने के सबब बुलंदी से फिसलते हुए दिखाई देंगे, उन में से पहले लोग “बहर-ए-तबरिया” से गुज़रेंगे, तो सारे पानी को पी कर दरिया को ख़ुश्क़ कर देंगे। फिर हज़रत ईसा (अ.स) और मुसलमान अपनी तक़लीफ दूर करने के लिये अल्लाह तआला से दुआ करेंगे।

अल्लाह तआला उन की दुआ कबूल फ़रमायेंगे और उन लोगों पर वबाई सूरत में एक बीमारी भेजेंगे और थोड़ी देर में याजूज व माजूज सब हलाक़ होजाएँगे।

01/10/2022

Biography Of Hazrat Khalid Bin Waleed RZ Part 1
سیرتِ حضرت خالد بن ولید رضي الله عنه قسط نمبر ۱



31/08/2022

हजरत यूसुफ (अ.स) बड़े मशहूर और जलीलुल क़द्र पैगम्बर हैं, वह हज़रत याकूब (अ.स) के बेटे हजरत इस्हाक़ (अ.स) के पोते और हज़रत इब्राहीम (अ.स) के परपोते हैं, अल्लाह तआला ने उन की शान में एक मुकम्मल सूरत “सूरह यूसुफ” के नाम से नाज़िल फ़रमाई है, जिस में उन की जिन्दगी के हालात व वाकिआत अजीब अन्दाज़ से बयान फरमाए हैं।

कुरआने करीम में 27 मर्तबा उन का तजकेरा
आया है, उन की पैदाइश हज़रत इब्राहीम (अ.स) के तक़रीबन दो सौ पचास साल बाद इराक के शहर “फद्यान इरम” में हुई।

बचपन ही में वह अपने वालिद के साथ फलस्तीन आ गए थे, उन के ग्यारह भाइयों में बिनयामीन के अलावा बाकी सब सौतेले भाई थे। हजरत याकूब (अ.स) उन से बेहद मुहब्बत करते थे, किसी वक़्त भी उन की जुदाई गवारा न थी, क्योंकि शुरू ही से उन की फितरी सलाहियत दूसरे भाइयों के मुकाबले में बिल्कुल मुमताज़ और रोज़े रौशन की तरह जाहिर थीं।

हजरत याकूब (अ.स) होनहार फ़रज़न्द की पेशानी पर चमकता हुआ नूरे नुबुव्वत पहचानते थे और वहिये इलाही के जरिये उस की इत्तेला पा चुके थे, अल्लाह तआला ने उन्हें नुबुव्वत के साथ हुकूमत व सलतनत से भी नवाज़ा था।

28/08/2022

आप का नाम अहमद बिन शुऐब कुन्नियत अबू अब्दुर्रहमान है, आप खुरासान के “नसा” नामी शहर में सन 215 हिजरी में पैदा हुए, इब्तिदाई तालीम अपने शहर में हासिल की और फिर अपनी इल्मी प्यास बुझाने के लिए अपने शहर से निकल कर खुरासान, हिजाज़, मिस्र, इराक, जज़ीरा और शाम का सफ़र किया और फिर मिस्र को अपना वतन बना लिया, वहीं दीन की इशाअत और तदरीसे हदीस में लगे रहे और इतनी शोहरत पाई के उस जमाने में मिस्र में उन के बराबर कोई न था।

आपने हदीस की कई किताबें लिखीं जिन में से आप की किताब “अलमुजतबा” जो हमारे और आप के दर्मियान “नसई शरीफ़” के नाम से मशहूर है “अस्सुननुलकुब्रा” का इखतिसार है। इमाम नसई एक तरफ़ हदीस में माहिर थे, तो दुसरी तरफ़ फ़िक्रहे हदीस और रावियों को परखने और जांचने में लासानी थे,जिस का अंदाज़ा आप की किताब “अलमुजतबा” से होता है, के आप एक ही हदीस को बार बार लाते हैं और अलग अलग मसाइल का इस्तिम्बात करते हैं। इस के साथ साथ आप बड़े आबिद व जाहिद थे, रातों को इबादत करना आप का मामूल था जीकादा सन 302 हिजरी में आप मिस्र से निकले और फ़लस्तीन पहूंचे, पीर के दिन सन 303 हिजरी में आप की वफ़ात हुई।

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