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प्रतिदिन GK  पढ़ने के लिए पेज को फॉलो करें 🙏परमाणु हथियार के मामले में पीछे नहीं यूक्रेन, जानें इस देश से जुड़ी 6 खास बा...
28/02/2022

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परमाणु हथियार के मामले में पीछे नहीं यूक्रेन, जानें इस देश से जुड़ी 6 खास बातें …...

इन दिनों यूक्रेन दुनिया भर में चर्चा में है। सोवियत संघ से आजाद हुआ यूक्रेन काफी सुंदर है।

रूस (Russia) और यूक्रेन (Ukraine) के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा पूर्वी यूक्रेन के डोनेत्स्क और लुगंस्क को अलग देश के रूप में मान्यता देने के बाद से विवाद और भी गहरा गया है। एक समय में यूक्रेन सोवियत संघ का हिस्सा था। कहा जा रहा है कि रूस यूक्रेन पर कभी भी हमला कर सकता है। 1990 में सोवियत संघ से आजाद हुआ यह देश काफी सुंदर है। आज हम आपको इस लेख के जरिए यूक्रेन से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बता रहे हैं जो आपको शायद ही पता हो।

(1) यूरोपीय महाद्वीप का दूसरा बड़ा देश है यूक्रेन....

यूक्रेन, पूर्वी यूरोप में स्थित देश, रूस के बाद महाद्वीप पर दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसकी राजधानी कीव है, जो उत्तर-मध्य यूक्रेन में नीपर नदी पर स्थित है। इस देश में अधिकतर लोग खेती हैं। खेती यहां आय का सबसे बड़ा साधन है। यूक्रेन खेती के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर आता है। यूक्रेन का क्षेत्रफल 607,700 वर्ग किलोमीटर है।

(2) जनसंख्या, भाषा और मुद्रा...

यूक्रेन की कुल जनसंख्या 44.9 मिलियन यानी कि 4.49 करोड़ है। यूक्रेन में 100 महिलाओं के मुकाबले 86.3 पुरुष हैं। इस देश का प्रमुख धर्म ईसाई है। यहां ईसाई धर्म के लोग बहुसंख्यक हैं। यहां दूसरे नंबर पर मुस्लिम लोग रहते हैं। यूक्रेन की आधिकारिक भाषा यूक्रेनी है। लेकिन यहां अन्य भाषाओं का भी इस्तेमाल किया जाता है। Ukrainian Hryvnia यहां की आधिकारिक मुद्रा है।

(3) शिक्षा के मामले में दुनिया में चौथे नंबर पर...

यूक्रेन में साक्षरता दर करीब 99.8 फीसदी है, जो दुनिया की चौथी सबसे बड़ी साक्षरता दर है। यहां मेडिकल की पढ़ाई काफी सस्ती है और यही कारण है कि भारत के साथ दुनिया के कई देशों के मेडिकल के छात्र यहां मेडिकल कोर्स में एडमिशन लेने आते हैं। यहां मेडिकल की फीस 3500 US डॉलर से 5000 US डॉलर तक है। जहां यहां पर ढ़ाई लाख रुपये से मेडिकल की पढ़ाई शुरू होती है, वहीं भारत में एक मेडिकल कॉलेज की औसतन फीस 10 लाख रुपये के करीब है।

(4) परमाणु हथियार के मामले में भी पीछे नहीं यूक्रेन....

सोवियत संघ से अगल होने के बाद यूक्रेन को अपनी विरासत में 780,000 सैन्य बल तो मिला ही साथ ही यह देश दुनिया में तीसरे सबसे बड़े परमाणु हथियार रखने वाले देश के रूप में उभरा। यूरोप में रूस के बाद यहां सबसे ज्यादा सैना है और यहां सेना में भर्ती अनिवार्य है।

(5) बेहद खूबसूरत हैं यहां की लड़कियां...

यूक्रेन एक ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा खूबसूरत लड़कियां हैं। यूक्रेन की महिलाएं सुंदर होने के साथ-साथ काफी बोल्ड भी होती हैं। इनका अनोखा अंदाज ही इन्हें दुनिया में सबसे अगल बनाता है।

(6) यूक्रेन में चलती है सबसे गहराई वाली मैट्रो....

पूरे विश्व में सबसे गहराई वाला मेट्रो स्टेशन यूक्रेन में ही स्थित है। कीव स्थिति स्वितोशिंको ब्रोवार्स्का ट्रेन लाइन विश्व की सबसे गहराई में बनी मेट्रो लाइन है। यह जमीन से 105.5 मीटर नीचे चलती है। इसके अधिकतर स्टेशन भी इतने ही नीचे हैं। Arsenalna Metro Station 105.5 मीटर नीचे स्थित है।

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प्रतिदिन GK  पढ़ने के लिए पेज को फॉलो करें🙏|| 7 ऐसे युद्ध जिन्होंने भारत का इतिहास बदल दिया ||भारत में प्राचीन काल से आज...
20/02/2022

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|| 7 ऐसे युद्ध जिन्होंने भारत का इतिहास बदल दिया ||

भारत में प्राचीन काल से आज तक अनेकों युद्ध लड़े गए लेकिन कुछ युद्ध ऐसे भी हुए जिन्होंने भारत के इतिहास को बदल कर रख दिया। चलिये जानें ऐसे 7 युद्धों के बारे में जिन्होंने भारत का इतिहास बदल कर रख दिया


1. कलिंग का युद्ध (261 ईसा पूर्व)
कलिंग की और से 60000 सिपाही की सेना लड़ाई के मैदान में थी, तथा मौर्य सेना में 1 लाख से अधिक सिपाही थे।
इस युद्ध में महा-नरसंहार हुआ, लगभग समस्त कलिंग सेना मारी गयी और मौर्य सेना को भी विजय की भारी कीमत चुकानी पड़ी।
युद्ध की विभीषिका देख कर सम्राट अशोक के ह्रदय-परिवर्तन के बाद बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया और भविष्य में युद्ध नहीं करने की प्रतिज्ञा भी की।

परिणाम --

भारत के सबसे शक्तिशाली सम्राट के बौद्ध धर्म ग्रहण कर अहिंसा के पथ पर चले जाने का प्रभाव भारत के इतिहास पर हमेशा के लिये रह गया।
बौद्ध धर्म का प्रभाव बढ़ता गया और फिर एक समय संसार के सबसे आक्रामक साम्राज्य के अधिकाँश राजा अहिंसा पथ पर चल पड़े।
परिणामस्वरूप सैन्य बल में कम होते हुए भी विदेशी हमलावर अपनी आक्रमक रणनीति के बल पर यहां के राजाओं को परास्त करने में सफल रहे।

2. तराइन की दूसरी लड़ाई (1192)
सन 1191 तक भारत मुख्य रूप से हिन्दू राजपूत राजाओं के अनेक साम्राज्यों में बंटा हुआ था।
इससे पहले कुछ पश्चिमी हमलावर यहाँ आये जरूर लेकिन वो भारत के पश्चिमी भू-भाग तक लूट-पाट करने तक सीमित रहे और वापस लौट गए।
सन 1191 में पहली बार अफगानिस्तान के गौर प्रान्त के मुहम्मद गौरी ने भारत पर आक्रमण किया। उसका मुकाबला दिल्ली के उत्तर-पश्चिम में स्थित तराइन के के मैदान में राजा पृथ्वीराज चौहान से हुआ। गौरी की हार हुई लेकिन अगले वर्ष वह फिर और अधिक तैयारी और सेना के साथ वापस लौटा।
सन 1192 के इस तराइन के युद्ध में अपनी आक्रामक घुड़सेना और रणनीति से उसने चौहान की भारी-भरकम सेना को हरा दिया।
पृथ्वीराज चौहान इस लड़ाई में मारा गया। इस युद्ध के बाद भारत में राजपूत राजाओं के राज का धीरे-धीरे अंत हो गया।

परिणाम --
भारत के इतिहास पर इस युद्ध से ज्यादा राजनीतिक-सामाजिक प्रभाव किसी और युद्ध का नहीं पड़ा। भारत में इस्लामिक शासन की शुरुआत इसी युद्ध से मानी जा सकती है।

3. पानीपत का युद्ध (1526)
उस समय दिल्ली पर लोदी सल्तनत के इब्राहिम लोदी का राज था।
दिल्ली के पास स्थित पानीपत में काबुल के शासक बाबर और इब्राहिम लोदी की सेनाओं के बीच भयंकर युद्ध हुआ।
लोदी की सेना संख्या में अधिक और ज्यादा शक्तिशाली थी किन्तु उस समय के सामरिक हथियारों से कहीं उन्नत हथियार – अपनी 24 तोपों – के दम पर बाबर ने लोदी की सेना को हरा दिया और इस लड़ाई में इब्राहिम लोदी की मौत हुई।
इस प्रकार संसार के सबसे शक्तिशाली और लम्बे समय तक चलने वाले साम्राज्यों में से एक – मुग़ल शासन – की भारत में स्थापना हुई।
परिणाम
मुग़ल शासन ने भारत के राजनीतिक, आर्थिक एवं सामजिक इतिहास को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया।
आज जो भारत, विशेषकर उत्तर भारत, का ताना – बाना है, उसकी नींव मुग़ल शासन की स्थापना के साथ ही रख दी गई थी।

4. प्लासी का युद्ध (1757)
उस समय भारत में फ्रांसीसियों और अंग्रेजों के बीच व्यापारिक और भविष्य के सामरिक आधिपत्य को लेकर संघर्ष चल रहा था।
सिराज-उद -दौला फ्रांसीसियों के समर्थन में था। सन 1756 में उसने अंग्रेजों के कलकत्ता स्थित व्यापार केंद्र पर हमला कर वहां मौजूद ब्रिटिश फ़ौज का नर-संहार कर दिया था।
प्लासी की लड़ाई में में मीर जाफर ने सिराजुद्दौला से गद्दारी कर ब्रिटिश फौजों का साथ दिया।
इस लड़ाई के बाद कुछ समय बंगाल की कमान मीरजाफ़र के हाथ रही किन्तु जल्दी ही उन्होंने वहां का शासन अपने हाथ में लेकर खुद ही बंगाल में राज करना आरम्भ कर दिया।

परिणाम --

प्लासी की लड़ाई ने भारत में अंग्रेजों के पांव मजबूती से जमा दिए। लार्ड क्लाइव के नेतृत्व में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने नवाब सिराजुद्दौला की सेना को प्लासी की लड़ाई में पूरी तरह से तहस-नहस कर के बंगाल में ब्रिटिश शासन स्थापित कर दिया।
यहाँ से कमाई हुई दौलत के बल उन्होंने अपनी सेना को और मजबूत किया और धीरे धीरे पूरे भारत में अपने साम्राज्य की स्थापना कर डाली।

5. कोहिमा का युद्ध (1944)
कोहिमा भारत में बर्मा की सीमा के निकट नागालैंड में स्थित है। कोहिमा का यह युद्ध इतिहास में “पूरब के स्टालिनग्राद‘ के नाम से प्रसिद्ध है।
बर्मा पर जापानियों का आधिपत्य था जिन्होंने भारत में आधिपत्य की महत्वाकांक्षी योजना बनाई ताकि यहाँ सम्पदा का इस्तेमाल युद्ध में किया जा सके और अंग्रेजों की ताकत को कमजोर किया जा सके क्यूंकि अंग्रेज भी उस समय सेना और संसाधनों के लिए भारत पर ही निर्भर थे।

परिणाम--
यहां पर मिली पराजय द्वितीय विश्व-युद्ध के दौरान जापानी फौजों को मिलने वाली सबसे महत्वपूर्ण शिकस्त थी जिसने भारतीय उपमहाद्वीप और संभवतया सारे संसार में जापानियों को बढ़ने से रोक दिया।
इस भयानक युद्ध में जापानियों की हार हुई और भारत का इतिहास नए सिरे से लिखते-लिखते रह गया।
यदि भारत या इसके बड़े भू-भाग पर जापानी अपना कब्ज़ा ज़माने में कामयाब हो जाते तो यह मित्र देशों के लिए बड़ा सामरिक नुक्सान होता।
साथ ही भारत का इतिहास भी हमेशा के लिए बदल जाता क्यूंकि संभव है कि मात्र तीन वर्ष बाद भारत को मिलने वाली स्वतंत्रता जापानी शासन के तले संभव न हो पाती।

6. तालीकोटा की लड़ाई--
तालीकोटा की लड़ाई 26 जनवरी 1565 ईस्वी को दक्कन की सल्तनतों और विजयनगर साम्राज्य के बीच लड़ा गया था
विजयनगर साम्राज्य की यह लडाई राक्षस-टंगडी नामक गावं के नजदीक लड़ी गयी थी. इस युद्ध में विजय नगर साम्राज्य को हार का सामना करना पड़ा.
तालीकोटा की लड़ाई के समय, सदाशिव राय विजयनगर साम्राज्य का शासक था. लेकिन वह एक कठपुतली शासक था.
वास्तविक शक्ति उसके मंत्री राम राय द्वारा प्रयोग किया जाता था. सदाशिव राय नें दक्कन की इन सल्तनतों के बीच अंतर पैदा करके उन्हें पूरी तरह से कुचलने की कोशिश की थी.
हालाकि बाद में इन सल्तनतों को विजयनगर के इस मंसूबे के बारे में पता चल गया था और उन्होंने एकजुट होकर एक गठबंधन का निर्माण किया.
और विजयनगर साम्राज्य पर हमला बोल दिया था. दक्कन की सल्तनतों ने विजयनगर की राजधानी में प्रवेश करके उनको बुरी तरह से लूटा और सब कुछ नष्ट कर दिया.

परिणाम--
तालीकोटा की लड़ाई के पश्चात् दक्षिण भारतीय राजनीति में विजयनगर राज्य की प्रमुखता समाप्त हो गयी.
मैसूर के राज्य, वेल्लोर के नायकों और शिमोगा में केलादी के नायकों नें विजयनगर से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की.
यद्यपि दक्कन की इन सल्तनतों नें विजयनगर की इस पराजय का लाभ नहीं उठाया और पुनः पहले की तरह एक दुसरे से लड़ने में व्यस्त हो गए और अंततः मुगलों के आक्रमण के शिकार हुए.

7. करनाल का युद्ध --
करनाल का युद्ध 24 फ़रवरी, 1739 ई. को नादिरशाह और मुहम्मदशाह के मध्य लड़ा गया
नादिरशाह के आक्रमण से भयभीत होकर मुहम्मदशाह 80 हज़ार सेना लेकर ‘निज़ामुलमुल्क’, ‘कमरुद्दीन’ तथा ‘ख़ान-ए-दौराँ’ के साथ आक्रमणकारी का मुकाबला करने के लिए चल पड़ा था।
शीघ्र ही अवध का नवाब सआदत ख़ाँ भी उससे आ मिला। करनाल युद्ध तीन घण्टे तक चला था।

परिणाम--
इस युद्ध में ख़ान-ए-दौराँ युद्ध में लड़ते हुए मारा गया, जबकि सआदत ख़ाँ बन्दी बना लिया गया।
सम्राट मुहम्मदशाह, निज़ामुलमुल्क की इस सेवा से बहुत प्रसन्न हुआ और उसे ‘मीर बख़्शी’ के पद पर नियुक्त कर दिया
सआदत ख़ाँ ने मीर बख़्शी के इस पद से वंचित रहने के कारण नादिरशाह को धन का लालच देकर दिल्ली पर आक्रमण करने को कहा।
नादिरशाह ने दिल्ली की ओर प्रस्थान कर दिया, तथा वह 20 मार्च, 1739 को दिल्ली पहुँचा। दिल्ली में नादिरशाह के नाम का ‘खुतबा’ पढ़ा गया तथा सिक्के जारी किए गए।
नादिरशाह दिल्ली में 57 दिन तक रहा और वापस जाते समय वह अपार धन के साथ ‘तख़्त-ए-ताऊस’ तथा कोहिनूर हीरा भी ले गया

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