24/08/2025
डहरे करम बेड़हा
31 अगस्त 2025, बोकारो | आइए, अपनी परंपरा और एकजुटता का हिस्सा बनें
मञं कुड़मालि तञं कुड़मालि
जते कुड़मि तते कुड़मालि
हामरा कुड़मालि तहरा कुड़मालि
भारत देसेक कुड़मालि
24/08/2025
डहरे करम बेड़हा
31 अगस्त 2025, बोकारो | आइए, अपनी परंपरा और एकजुटता का हिस्सा बनें
02/08/2025
राढ़भुँञेक माञभाखि
कुड़मालि माञभाखि ।
14/07/2025
जोहार साथियों,🙏
जैसा कि आपसबों को ज्ञात है कि आगामी दिनांक 15/07/25 को कुड़माली छात्र संघ द्वारा कुड़माली विषय में स्नातकोत्तर एवं बी.एड की पढ़ाई को चालू करने को लेकर बिनोद धाम बलियापुर से बी.बी.एम.के. यूनिवर्सिटी तक पैदल मार्च कर विश्वविद्यालय घेराव समेत कुलपति महोदय से इस विषय पर विशेष वार्ता का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
अतः इस पद यात्रा समेत कुलपति महोदय से वार्ता तक के कार्यक्रम को सुचारू रूप से संपन्न करने हेतु कुड़मालि छात्र संघ द्वारा कुछ दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं जो कि इस प्रकार हैं :-
1. सर्वप्रथम सुबह 10 बजे से बिनोद धाम बलियापुर में विनोद बाबू की समाधि पर माल्यार्पण किया जाएगा ।
2. 10:30 बजे से कुड़मालि छात्र संघ के बैनर तले पद यात्रा शुरू होगी ।
3. पैदल मार्च के दौरान सबसे आगे बैनर के साथ कुड़मालि छात्र संघ के अगुआ साथी एवं छात्राएं तथा किनारे में छात्र कतार बद्ध (वॉलेंटियर के रूप में) तरीके से होंगे, कतार के बीच में भी छात्राएं ही होंगे। बैनर के आगे केवल मीडिया कर्मी ही होंगे ।
तत्पश्चात सामाजिक कार्यकर्ता, परिजन एवं अन्य सभी पीछे होंगे ।
5. कोई भी व्यक्ति विशेष या संगठन विशेष हमारे बैनर के आगे या बीच में नहीं आऐंगे।
6. अंतिम में दो पहिया चार पहिया वाहन होंगे जिसमें वैसे छात्र छात्राएं जो पदयात्रा के दौरान अस्वस्थ होंगे वो उसमें जा पाएंगे साथ में पीने का पानी और चिकित्सा सुविधा की भी व्यवस्था होगी ।।
7. इस आयोजन में आप समस्त झारखंडवासियों का स्वागत है किंतु कुड़मालि छात्र संघ के अलावा अन्य किसी भी पार्टी या संगठन के झंडा को लाना अथवा अपना पार्टी या संगठन का प्रेस में बयान देना वर्जित रहेगा। हमारे वॉलेंटियर द्वारा ऐसा करने पर रोका जाएगा।
8. इस पदयात्रा यात्रा के दौरान मीडिया कर्मियों तथा कुलपति महोदय से जो कुछ भी वार्ता होगी वो हमारे संगठन के छात्र , अगुआ साथी एवं प्रोफेसर के साथ ही होगा, अन्य कोई बात न रखे ।
9. कार्यक्रम के अंतिम क्षणों में प्रेस वार्ता केवल कुड़माली छात्र संघ के छात्र छात्राएं एवं अगुआ साथी ही करेंगे ।
नोट :- सभी साथियों से आग्रह है कि हमारे द्वारा जारी नियमावली का अनुसरण कर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना सहयोग दें। साथ ही कुड़मालि छात्र संघ आप सभी का इस कार्यक्रम में सहयोग हेतु हृदय से स्वागत करता है।
🙏****जोहार****🙏
28/06/2025
🌼 अंतिम जोहार 🌼
चित्रकार मनीष महतो के पिताजी अब हमारे बीच नहीं रहे। यह सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का अपूरणीय क्षति है।
वे कोई बड़े ओहदे पर नहीं थे, न ही किसी मंच की शोभा थे, लेकिन जो काम उन्होंने छोटी-सी ज़िंदगी में कर दिखाया, वह सचमुच असाधारण है। उन्होंने मनीष महतो जैसे नायाब हीरे को समाज को दिया — एक ऐसा बेटा जो कला, संस्कृति और पहचान की नई रोशनी बनकर उभरा।
आज के दौर में जहाँ हर अभिभावक अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर या सरकारी अफसर बनाने की सोच में उलझा रहता है, वहाँ मनीष जी के पिताजी ने लीक से हटकर बेटे की प्रतिभा को पहचाना, उसे अपनाया और हर वो सुविधा दी जिसकी उसे ज़रूरत थी — भले ही वो खुद गाँव की सीमाओं में बंधे रहे।
वे जानते थे कि हुनर किसी किताब का मोहताज नहीं होता, और शायद इसी कारण आज लोग मनीष के पिता को उसके नाम से नहीं, बल्कि "मनीष के पापा" के नाम से पहचानते हैं। इससे बड़ा गौरव और क्या हो सकता है किसी पिता के लिए।
आज उनकी देह हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनकी सोच, उनका योगदान और उनके संस्कार हमेशा जीवित रहेंगे — मनीष की कला में, उसके हर रंग में, उसकी हर रेखा में।
🙏 हम सबकी ओर से उन्हें सादर नमन और श्रद्धांजलि।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें और परिवार को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करें।
26/06/2025
कुड़माली छात्र संगठन के द्वारा विनोद धाम बलियापुर में प्रेस वार्ता की गई। जिसमें बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय में कुड़माली भाषा को स्नाकोत्तर (पीजी) ओर बीएड में शामिल करने की मांग को लेकर आगामी दिनांक 15/7/25 को बिनोद धाम बलियापुर से विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय तक पद यात्रा की जाएगी।
22/06/2025
पश्चिम बंगाल में कुड़मालि भाषा
20/06/2025
बेजाइं हुबेक बानार 🌿💐
16/06/2025
रामगढ़ विधायिका को धन्यवाद आभार 🙏💐
#कुड़मालि
02/06/2025
02/06/2025
नेउता पाती, धरम जडुआहि
दिनांक 03 जून 2025 दिन मंगलवार
02/06/2025
'धान' आविष्कार कर्ता ही जान सकता है 'धान' का महत्व। राजा दामोदर सांखुआर जानते थे धान की संस्कृति उनकी अपनी है इसलिए किलों के दीवारों पर उगा कर सुरक्षित कर गये अपना इतिहास। बालियों की तरह उगाये गये ये चित्र अब भी किसानी संस्कृति को बता रहे हैं।
चित्र संदर्भ - डाॅ गुलांचो टिडुआर
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