vikram agarwal

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मेरा हमेशा से यह मानना रहा है 🇮🇳कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है🥹🥺 वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देख...
07/09/2024

मेरा हमेशा से यह मानना रहा है 🇮🇳कि दुनिया में ‌जितना बदलाव हमारी पीढ़ी ने देखा है🥹🥺 वह ना तो हमसे पहले किसी पीढ़ी ने देखा है और ना ही हमारे बाद किसी पीढ़ी के देखने की संभावना लगती है🥹🥹🥺🥺

हम वह आखिरी पीढ़ी हैं जिसने बैलगाड़ी से लेकर सुपर सोनिक जेट देखें हैं.बैरंग ख़त से लेकर लाइव चैटिंग तक देखा है और असंभव लगने वाली बहुत सी बातों को संभव होता देखा है.

● हम वो आखिरी पीढ़ी हैं

जिन्होंने कई-कई बार मिटटी के घरों में बैठ कर परियों और राजाओं की कहानियां सुनीं, जमीन पर बैठ कर खाना खाया है, प्लेट में चाय पी है।

● हम वो आखिरी लोग हैं…

जिन्होंने बचपन में मोहल्ले के मैदानों में अपने दोस्तों के साथ पम्परागत खेल, गिल्ली-डंडा, लँगड़ी टांग, आइस पाइस, छुपा-छिपी, खो-खो, कबड्डी, कंचे, सितोलिया जैसे खेल खेले हैं।

● हम वो आखिरी पीढ़ी के लोग हैं

जिन्होंने चिमनी , लालटेन, कम या बल्ब की पीली रोशनी में होम वर्क किया है और चादर के अंदर छिपा कर नावेल पढ़े हैं।

● हम उसी पीढ़ी के लोग हैं…

जिन्होंने अपनों के लिए अपने जज़्बात, खतों में आदान प्रदान किये हैं और उन ख़तो के पहुंचने और जवाब के वापस आने में महीनों तक इंतजार किया है।

● हम उस आखिरी पीढ़ी के लोग हैं

जिन्होंने कूलर, एसी या हीटर के बिना ही बचपन गुज़ारा है। और बिजली के बिना भी गुज़ारा किया है।

जो अक्सर अपने छोटे बालों में, सरसों का ज्यादा तेल लगा कर, स्कूल और शादियों में जाया करते थे।

जिन्होंने स्याही वाली दावात या पेन से कॉपी, किताबें, कपडे और हाथ काले, नीले किये है। तख़्ती पर सेठे की क़लम से लिखा है और तख़्ती घोटी है।

जिन्होंने टीचर्स से मार खाई है. और घर में शिकायत करने पर फिर मार खाई है

जो मोहल्ले के बुज़ुर्गों को दूर से देख कर, नुक्कड़ से भाग कर, घर आ जाया करते थे. और समाज के बड़े बूढों की इज़्ज़त डरने की हद तक करते थे।

जिन्होंने अपने स्कूल के सफ़ेद केनवास शूज़ पर, खड़िया का पेस्ट लगा कर चमकाया हैं

जिन्होंने गोदरेज सोप की गोल डिबिया से साबुन लगाकर शेव बनाई है जिन्होंने गुड़ की चाय पी है। काफी समय तक सुबह काला या लाल दंत मंजन या सफेद टूथ पाउडर इस्तेमाल किया है और कभी कभी तो नमक से या लकड़ी के कोयले से दांत साफ किए हैं।

जिन्होंने चांदनी रातों में, रेडियो पर BBC की ख़बरें, विविध भारती, आल इंडिया रेडियो, बिनाका गीत माला और हवा महल जैसे

25/07/2024

एक बार एक जनरल स्टोर में एक ग्राहक आया और दुकानदार से बोला: "मुझे 10 किलो काजू दे दीजिए।"

दुकानदार उसके लिए 10 किलो काजू तौलने लगा। तभी एक कीमती कार दुकान के सामने आकर रुकी और उससे उतरकर एक वीआईपी टाइप आदमी दुकान के अंदर आया, और बोला: "भाई, जरा मुझे भी 1 किलो काजू तौल दीजिए।"

दुकानदार ने पहले वाले ग्राहक को तौलकर 10 किलो काजू दिए, फिर दूसरे ग्राहक के लिए 1 किलो काजू तौलने लगा। जब 10 किलो काजू वाला ग्राहक चला गया, तब कार सवार ग्राहक ने कौतूहलवश दुकानदार से पूछा: "ये जो ग्राहक अभी गए हैं, यह कोई बड़े आदमी हैं या इनके घर में कोई काम है जिसके कारण ये 10 किलो काजू ले गए हैं?"

दुकानदार ने मुस्कुराते हुए कहा: "अरे नहीं सर, ये तो एक सरकारी विभाग में चपरासी हैं लेकिन पिछले साल जब से इसने एक विधवा से शादी की है, जिसका पति करोड़ों रुपये उसके लिए छोड़ गया था! तब से उसी के पैसे को खर्च कर रहे हैं। ये महाशय तो 10 किलो काजू हर महीने लेते हैं!"

इतना सुनकर दूसरे ग्राहक ने भी दुकानवाले को 1 की बजाय 10 किलो काजू तौलने को कहा, और घर के लिए निकल गया।

अब 1 की जगह 10 किलो काजू लेकर जब वो अपने घर पहुँचा, तो उसकी पत्नी बेहद आश्चर्य से बोली: "आप ये किसी और का सामान उठा लाए क्या? आपको 1 किलो काजू लाने को कहा था, 10 किलो की क्या जरूरत है?"

आदमी ने उत्तर दिया: "पगली, मेरे मरने के बाद कोई दूसरा आदमी मेरे ही पैसे से 10 किलो काजू खाए, तो जीते जी फिर मैं क्यों 1 किलो खाऊं?"
सीख:
"अपनी कमाई को बैंक में जमा करते रहने के साथ जरूरत के मुताबिक अपने ऊपर भी खर्च करते रहना चाहिए।"
“दोस्तों, कहानी पसंद आई हो तो लाइक और अपने दोस्तो के साथ शेयर जरूर करना”!
धन्यवाद

जैसे ही वरमाला का कार्यक्रम पूरा हुआ तो दूल्हे ने दुल्हन के कदमों में अपना सर झुका दियायह देख सभी हंसने लगे तब दूल्हे ने...
01/05/2024

जैसे ही वरमाला का कार्यक्रम पूरा हुआ तो दूल्हे ने दुल्हन के कदमों में अपना सर झुका दिया
यह देख सभी हंसने लगे तब दूल्हे ने जवाब दिया..

1. मेरी वंश को यही आगे बढ़ाएगी।

2. मेरे घर की लक्ष्मी कह लाएगी।

3. मेरी मां बाप की इज्जत करेगी और उनकी सेवा करेगी।

4. मुझे पिता जैसी खुशी प्राप्त करवाएगी।

5. प्रसव के समय मौत को मेरे बच्चे के लिए मौत को छूकर आएगी।

6. इसी से मेरे घर की नींव है।

7. इसके व्यवहार से ही समाज में मेरी पहचान बनेगी।

8. अपने मां-बाप को छोड़ कर यह मेरे लिए मेरे पीछे आई है।

9. अपनों से नाता तोड़ कर उसने मुझ से नाता जोड़ा है।

12/01/2024

हर ओर एनिमल मूवी का हाइप बना हुआ है, उस हाइप में 12th फेल जैसी मास्टरपीस दब कर रह गई। इस मूवी में 2-4 किसिंग सीन नहीं थे, ग्लैमर नहीं था। लेकिन जो 12th फेल मूवी में था, शायद वह एनिमल में नहीं था। IPS मनोज शर्मा की वास्तविक जीवनी पर आधारित इस फिल्म को आज के युवा वर्ग को 4-5 बार तो देखना ही चाहिए। कैसे 12th की परीक्षा मे चीटिंग ना कर पाने से एक लड़का 12वीं में फेल होता है। फिर कैसे मध्यप्रदेश के चंबल से वह लड़का DSP बनने का सपना लिए निकलता है। जिसे बस इतना मालूम होता है कि DSP बनने के लिए PCS की तैयारी करनी पड़ती है।

उसे पता चलता है कि DSP से भी बड़ा कोई पद होता है, जिसे पाने के लिए IAS की परीक्षा पास करनी होती है। वह खाली हाथ अड़ियल सोच के साथ निकल पड़ता है मुखर्जी नगर की गुमनाम गलियों में, जहाँ वह अपने संघर्ष की पटकथा लिखता है। लाइब्रेरी मे एक छोटी सी नौकरी और फिर उसके बाद चक्की की मशीन में काम करते हुए अपने आखिरी और चौथे प्रयास मे हिन्दी मीडियम से IPS बनता है। जिसके संघर्षों मे उसकी प्रेमिका श्रद्धा का साथ मूवी को अलग लेवल पर ले जाता है। पढ़कर थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन सच है कोई प्रेमिका भी अपने प्रेमी का करियर बना सकती है।

मूवी के एक सीन में जब श्रद्धा कहती है "तुम कहते थे न मनोज कि अगर मैं आई लव यू बोल दूं तो तुम मेरे लिए दुनिया पलट दोगे, तो मनोज जाओ अब पलट दो दुनिया!" या फिर इंटरव्यू से पहले का वो सीन जब श्रद्धा के पत्र को मनोज पढ़ता है जिसमें लिखा होता है, "मनोज तुम चाहे आईपीएस ऑफिसर बनो या चक्की में काम करो मैं सारी जिंदगी तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूँ विल यू मैरी मी मनोज!" श्रद्धा का किरदार देखने के बाद लगता है कि ऐसी पसंदीदा स्त्री हर पुरूष के जीवन मे होनी चाहिए, जिसके लिए फिर कोई मनोज किसी श्रद्धा के लिए पूरी दुनिया पलट दे।

खैर फिर रिजल्ट के आने से पहले वो म्यूजिक और बैकग्राउंड के साथ चल रहीं अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियाँ "टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी अंतर को चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी आँसू ना बहाऊंगा सिर्फ मुस्कुराऊंगा कह देना भाग्य से मैं कल लौट आऊंगा"! ये पंक्तियां कलेजा चीर देती हैं। वह सीन जब मनोज कॉल पर अपनी माँ को बता रहा होता है कि माँ, मैं आईपीएस बन गया। उस वक्त मनोज के पापा का कहना कि जा रहा हूँ उस कर्मचारी को बताने, तुमने आईपीएस के बाप से दुश्मनी ली है। बहुत दिनों बात एक मास्टरपीस आई है। 2-4 स्क्रीन पर लगी है। देख लीजिए। एनिमल से ज्यादा सुकून मिलेगा।

साथियों,  यह तस्वीर जीवन की बहुत बड़ी सच्चाई को बयां करती है। जब जीवन के रास्ते पर चलते चलते हम कभी ऐसे मोड़ पर आ जाते ह...
22/12/2023

साथियों, यह तस्वीर जीवन की बहुत बड़ी सच्चाई को बयां करती है। जब जीवन के रास्ते पर चलते चलते हम कभी ऐसे मोड़ पर आ जाते हैं, जहां हमारा एक गलत क़दम हमारी प्रतिष्ठा, हमारा वजूद, हमारे जीवन तक को बर्बाद कर सकता है और उस समय हमारी सहायता करने, हमें मुसीबत से निकालने के लिए कोई नही आता।
इस तस्वीर को देखिए, कितने दिन वो आवाज रोई होगी, कितने आंसू बहाए होंगे, कितने दिन-रातें बिन पानी, बिन रोटी गुजरी होगी, दिल को किसी सहारे, किसी बात का इंतजार था। अगर हम एक पल के लिए भी उस जगह खुद को कल्पना कर लें, तो हम उस एहसास को समझ सकते हैं।
तुम्हारे लिए कोई नहीं आएगा, कोई रिश्ता तुम्हारी तरफ नहीं देखेगा, तुम जो कदम उठाओगे उसके बारे में सौ बार सोचना और जो भी निर्णय लिया, उसके बारे में हजार बार सोचना, कभी भी जल्दबाजी में निर्णय लेकर मूर्ख मत बनना, यह सोच कर जीना कि मेरा कोई नहीं है, कोई आये तो खुश तो जरूर होना और कोई ना आये तो भी दुखी बिलकुल नहीं होना।🦌🦌 🙏🙏

21/12/2023

राम का घर छोड़ना षड्यंत्रों में घिरे एक राजकुमार की करुण कथा है और कृष्ण का घर छोड़ना गूढ़ कूटनीति ।

राम आदर्शों को निभाते हुए कष्ट सहते हैं, कृष्ण षड्यंत्रों के हाथ नहीं आते, बल्कि स्थापित आदर्शों को चुनौती देते हुए एक नई परिपाटी को जन्म देते हैं ।

श्रीराम से श्री कृष्ण हो जाना एक सतत प्रक्रिया है...।

राम को मारीच भ्रमित कर सकता है, लेकिन कृष्ण को पूतना की ममता भी नहीं उलझा सकती ।

राम अपने भाई को मूर्छित देखकर ही बेसुध होकर बिलख पड़ते हैं,लेकिन कृष्ण अभिमन्यु को दांव पर लगाने से भी नहीं हिचकते.।

राम राजा हैं, कृष्ण राजनीति..
राम रण हैं, कृष्ण रणनीति...
राम मानवीय मूल्यों के लिए लड़ते हैं...
कृष्ण मानवता के लिए...

हर मनुष्य की यात्रा राम से ही शुरू होती है और समय उसे कृष्ण बनाता है ।

व्यक्ति का कृष्ण होना भी उतना ही जरूरी है, जितना राम होना.. ।।

लेकिन राम से प्रारंभ हुई यह यात्रा तब तक अधूरी है,
जब तक इस यात्रा का समापन कृष्ण पर न हो...।।

आदमी को नहीं पता कि नीचे उसकी जिंदगी में सांप है..महिला को नहीं पता कि उस आदमी को कोई पत्थर कुचल रहा है..महिला सोचती है:...
10/12/2023

आदमी को नहीं पता कि नीचे उसकी जिंदगी में सांप है..

महिला को नहीं पता कि उस आदमी को कोई पत्थर कुचल रहा है..

महिला सोचती है:- “मैं गिरने वाली हूं.. और मैं चढ़ नहीं सकती क्योंकि सांप मुझे काटने वाला है.. आदमी थोड़ी और ताकत लगाकर मुझे ऊपर क्यों नहीं खींच लेता..।”

आदमी सोचता है:- "मुझे बहुत दर्द हो रहा है.. फिर भी मैं तुम्हें जितना हो सके खींच रहा हूं.. तुम थोड़ा और जोर से चढ़ने की कोशिश क्यों नहीं करते..?"

नैतिक बात यह है:- आप यह नहीं देख सकते कि दूसरा व्यक्ति किस दबाव में है, और दूसरा व्यक्ति वह दर्द नहीं देख सकता जिसमें आप है।

यह जीवन है, चाहे यह काम, परिवार, भावनाओं या दोस्तों के साथ हो, हमें एक-दूसरे को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

अलग ढंग से सोचना सीखें, शायद अधिक स्पष्टता से और बेहतर ढंग से संवाद करें.. थोड़ा सा विचार और धैर्य बहुत काम आता है..
💓☺️💘

20/10/2023

एक सच्ची घटना से आपलोगों को अवगत कराना चाहता हूं | एक वृद्ध आश्रम में एक महिला रहती है जिसके तीन बेटे है सभी की शादी हो गई है | उन तीनों भाइयों में से कोई भी माँ को अपने पास रखने के लिए तैयार नहीं है जिसके कारण वृद्धा आश्रम में रहना पड़ रहा है | कुछ दिनों पहले जितिया अष्टमी का व्रत था | यह व्रत माँ अपने बच्चों की लंबी आयु के लिए रखती हैं | व्रत करीब दो दिनों का रखा जाता है | व्रत रखने के कारण उस वृद्धा की तबियत खराब हो गई | जब इस वृद्धा से पूछा गया की आपने व्रत क्यूँ रखा जब की आपके बच्चे आपको अपने पास रखने को तैयार नहीं है उसके बावजूद भी आपने अपनी संतान की लंबी आयु के लिए व्रत क्यूँ रखा तब उस माँ ने कहा कि अगर मैं भी अपने संतान की तरह व्यवहार करू तो संतान का अपनी माँ के ऊपर से विश्वास उठ जाएगा | इस घटना से समाज के तथाकथित आधुनिक संतानों को अपने माँ बाप के प्रति जो गलत सोच है उसमें समय रहते बदलाव लाने की जरूरत है|

90 का  #दूरदर्शन और हम :1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर टीवी के सामने बैठ जाना2." #रंगोली"में शुरू में पुराने फिर नए गानों क...
17/09/2023

90 का #दूरदर्शन और हम :

1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर
टीवी के सामने बैठ जाना

2." #रंगोली"में शुरू में पुराने फिर
नए गानों का इंतज़ार करना

3." #जंगल-बुक"देखने के लिए जिन
दोस्तों के पास टीवी नहीं था उनका
घर पर आना

4." #चंद्रकांता"की कास्टिंग से ले कर
अंत तक देखना

5.हर बार सस्पेंस बना कर छोड़ना
चंद्रकांता में और हमारा अगले हफ्ते
तक सोचना

6.शनिवार और रविवार की शाम को
#फिल्मों का इंतजार करना

7.किसी नेता के मरने पर कोई #सीरियल
ना आए तो उस नेता को और गालियाँ
देना

8.सचिन के आउट होते ही टीवी बंद
कर के खुद बैट-बॉल ले कर खेलने
निकल जाना

9." #मूक- #बधिर"समाचार में टीवी एंकर
के इशारों की नक़ल करना

10.कभी हवा से #ऐन्टेना घूम जाये तो
छत पर जा कर ठीक करना

बचपन वाला वो ' #रविवार' अब नहीं
आता, दोस्त पर अब वो प्यार नहीं
आता।

जब वो कहता था तो निकल पड़ते
थे बिना #घडी देखे,

अब घडी में वो समय वो वार नहीं
आता।

बचपन वाला वो ' #रविवार' अब नहीं
आता...।।।

वो #साईकिल अब भी मुझे बहुत याद
आती है, जिसपे मैं उसके पीछे बैठ
कर खुश हो जाया करता था। अब
कार में भी वो आराम नहीं आता...।।।

#जीवन की राहों में कुछ ऐसी उलझी
है गुथियाँ, उसके घर के सामने से
गुजर कर भी मिलना नहीं हो पाता...।।।

वो ' #मोगली' वो ' #अंकल Scrooz',
' #ये जो है जिंदगी' ' #सुरभि' ' #रंगोली'
और ' #चित्रहार' अब नहीं आता...।।।

#रामायण, #महाभारत, #चाणक्य का वो
चाव अब नहीं आता, बचपन वाला वो
'रविवार' अब नहीं आता...।।।

वो #एक रुपये किराए की साईकिल
लेके, दोस्तों के साथ गलियों में रेस
लगाना!

अब हर वार 'सोमवार' है
काम, ऑफिस, बॉस, बीवी, बच्चे;
बस ये जिंदगी है। दोस्त से दिल की
बात का इज़हार नहीं हो पाता।
बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं
आता...।।।

बचपन वाला वो ' #रविवार' अब नही
आता...।।।

🙂🙏

क्या आप भी बचपन मे नाना- नानी, मामा-मामी,  दादा -दादी या चाचा-चाची के परिवार के साथ गर्मियों की छूटियो में छत पर पानी छि...
30/07/2023

क्या आप भी बचपन मे नाना- नानी, मामा-मामी, दादा -दादी या चाचा-चाची के परिवार के साथ गर्मियों की छूटियो में छत पर पानी छिड़कर खाट पर या छत पर दरी - बिस्तर बिछा कर सोये हो....

तब घर में बिजली केवल पीले से चमकने वाले 0, 40, 60 और 100 वॉट के पीतल की टोपी वाले फिलामेंट बल्ब के लिए होती थी। पंखे अमीरों के घर में ही होते थे

बहुत ही यादगार दिन थे वे कभी न भूलने वाले

तब सभी के छत लगभग एक ऊँचाई के थें।

एक नियम होता था।

पहले बालटी मे पानी भरकर दो तल्ले पर छत पर पानी का छिड़काव।

नीचे से बिस्तर छत पर पहुँचाना ।

उसे बिछाना ताकि बिस्तर ठंडा हो जाए।

खाने के बाद, पानी की छोटी सुराही और गिलास भी छत पर ले जाना। कभी कभी रेडियो पर आकाशवाणी पर हवा-महल का प्रोग्राम सुनते थे या पुराने गीतमाला के पुराने गाने।

लेट कर आसमान देखना, तारे गिनना, उनके झुंड के आकार बनाना,छत पर लेटे लेटे ही हमने सप्तऋषि मंडल ,ध्रुव तारा और असंख्य तारों को देखा और समझा

आते-जाते हवाई जहाज को देखना ।

सुबह सुरज के साथ उठना पड़ता था। गरमियों मे सुबह-सुबह कोयल की कूक , चिड़ियों का चहचहाना , मोर की आवाज़ या मुर्गे की आवाज़ भी सुनने को मिलती थी।

फिर बिस्तर समेट कर छत से नीचे लाना। सुराही भी।

पहले किसी की छत पर कोई लेटा हो , खासकर महिला, तो दुसरे छत के लोग स्वंय हट जाते थे। यह एक अनकहा शिष्टाचार था।

रात में अचानक आंधी या बारिश आने पर पड़ोस के घर की पक्की सीढ़ियों से उतर कर नीचे आते थे क्योंकि अपने पास बांस की कुछ छोटी पुरानी ढुलमुल 10' फीट की सीढ़ी थी जिसका कभी भी गिरने डर रहता था और 14' फीट की ऊंची छत पर उतरने चढ़ने के लिए छत की मुंडेर को पकड़ कर लटक कर चढ़ना और उतरना होता था।

रात में पड़ी हल्की ठंड और ओस के कारण कपड़े बिस्तर सील जाते थे।

उस समय इतने मच्छर नहीं होते थे जो छत पर सोने में बाधा उत्पन्न करते ।

अब आसपास ऊँचे घर बन गए।

आसपास और हम , दोनो बदल गए हैं।

जब से हर घर मे AC, फ्रिज, कूलर और हर कमरे में पंखे आ गए है तब से ये सुनहरा दौर गायब हो गया हैं।।

Address

Talent Hunt, Prabhat Colony
Bokaro Steel City
827013

Telephone

+917209518488

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