08/05/2021
आखिरकार टीवीएफ ने अपने ओरिजिनल्स वेब सीरीज एस्पिरेन्ट्स का पाँचवाँ एपिसोड आज रिलीज कर दिया,
टीवीएफ के यूट्यूब चैनल के 10 मिलियन सब्सक्राइबर होने पर अंतिम एपिसोड रिलीज करने के बात कही थी,पर पहले कर दिया है ।मैंने गौर किया की पाँचवे एपिसोड के इंतज़ार में 1 मिलियन नए सब्सक्राइबर टीवीएफ से जुड़ गए हैं।
एस्पिरेन्ट्स लगभग 4 घंटे की वेब सीरीज है,अब चूँकि इसके सब एपिसोड आ चुके हैं,तो आप एक ही बार में पूरे एपिसोड्स देख सकते हैं, हमारी तरह आपको इंतज़ार की आग में जलने की जरूरत नहीं है।
कहानी न्यू राजेन्द्र नगर दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी करते 3 दोस्तों के रिश्तों,उनके दुविधा और उनकी परेशानियों की बात करती है,
कहानी 2 समय काल में साथ साथ चलती है,एक तैयारी के समय की और दूसरी उसके 5-6 साल बाद की,
जिसमें सब दोस्त उनके किस्मत के अनुसार ज़िंदगी मे सेटल हो चुके हैं,
कहानी बहुत सिंपल है पर कुछ सस्पेंस को अंतिम एपिसोड तक लेकर चलती है,
कहानी को लेकर आगे कोई बात करना मतलब आपको स्पॉइलर देना होगा,इसलिए आगे वेब सीरीज के भावनात्मक पक्ष की बात करते हैं,
न्यू राजेन्द्र नगर साउथ दिल्ली का पॉश एरिया है,यूपीएससी की तैयारी को लेकर दिल्ली में रहा कोई भी इंसान न्यू राजेन्द्र नगर और मुखर्जी नगर को जानता है और दोनों जगह के अंतर को भी,
न्यू राजेन्द्र नगर यूपीएससी की तैयारी करते इंग्लिश मीडियम वालों के लिए है और मुखर्जी नगर हिंदी माध्यम वालों का ठिकाना है,
हिंदी माध्यम से होने के कारण मुझे राजेंद्र नगर का एक्सपोज़र तो नहीं मिला पर जितना मैंने देखा है,दोनों जगह में कोई अंतर नहीं है,
दोनों जगह रात रात भर जागने वाले, आईएएस/आईपीएस से नीचे का सपना नहीं देखने वाले, दिल्ली के एक्सट्रीम वेदर में अपने आप को ढालने की कोशिश करते भारत भर के एस्पिरेन्ट्स रहते हैं।
हम एस्पिरेन्ट्स उस दिन हो जाते हैं,जिस दिन इस दौड़ में शामिल हो जाते हैं,पर जो अपने लक्ष्य को नहीं पाते वो कब तक एस्पिरेन्ट्स रहते हैं,ये कोई नहीं जानता।
आपके एटेम्पट खत्म हो जाते हैं,आपकी उम्र हो जाती है,आपकी हिम्मत खत्म हो जाती है पर आप तब भी एस्पिरेन्ट्स रह ही जाते हैं, एक आत्मा वहीं की गलियों में भटकती रह जाती है।
एस्पिरेन्ट्स के 5 कैरेक्टर में से किसी न किसी एक कैरेक्टर को हर एस्पिरेन्ट्स अपने जैसा पायेगा,
हमने सलेक्ट होते, कोचिंग से टीचर के रूप में जुड़ते,वापस जा कर अपने फैमिली बिजनेस से जुड़ते और स्टेट पीसीएस से मन को बहलाते,सब प्रकार के एस्पिरेन्ट्स देखे हैं।
वेब सीरीज ऑप्शनल चुनने की दुविधा, कोचिंग इंस्टिट्यूट फाइनल करने की समस्या,जॉब से छुट्टी लेकर तैयारी करते एस्पिरेन्ट्स पर सफल होने का दबाव,प्लान बीऔर अंतिम एटेम्पट का तनाव , सब पर अपनी बात रखती है,
लोकेशन और एस्पिरेन्ट्स के रूम ऐसा अहसास दिलाते हैं कि आप वापस उन्हीं गलियों और 25-50 ग़ज़ के मकान में पहुंच गए हैं।
ऐसा स्क्रिप्ट बिना किसी एस्पिरेन्ट्स के अनुभव के लिखना संभव नहीं है,
अभिलाश के रूम में कॉट,स्वामी विवेकानंद के पोस्टर,लबसना के पोस्टर,छोटे छोटे रैक,20 लीटर के पानी वाले जार,दीवाल पे चिपके टाइम टेबल और इम्पोर्टेन्ट नोट्स,दड़बे के साइज के किचन में पकता चिकन सब कुछ नॉस्टैल्जिक करते हैं,
एस्पिरेन्ट्स पर्दे पर दोस्ती की एक नई कहानी कहती है,जो दिल चाहता है और जिंदगी न मिलेगी दोबारा जैसी पॉश नहीं है,
ये हमारी दोस्ती की जैसी दोस्ती है,दिल्ली ने मुझे कुछ बहुत कीमती दोस्त दिए हैं,जो इसलिए और करीब हैं कि हम में से कोई उस सपने को पूरा नहीं कर पाया,शायद असफलता दोस्ती पक्की करने के लिए ज्यादा मजबूत एडहेसिव है,
हम में से हर कोई दूसरे के सफल होने की आशा रखता था,पर अंत में सबकी आशा टूटी,
दिल को समझाने के लिए हर कोई ये कहता है कि वो सफर भी बहुत खूबसूरत था पर अंदर अंदर सब ये महसूस करते हैं मंज़िल पाए बिना सफ़र के दर्द का फल नहीं मिलता,
आज इतने साल बाद जब आईएएस के सामने हाथ पाँव काँपते है,कलेक्टर बैठक के नाम पर रातों की नींद उड़ जाती है,तो महसूस होता है कि हमने कितना महत्वपूर्ण मौका खो दिया,वो सफलता उस पार खड़ी थी पर हमसे कुछ कमी रह गयी,
आज इतने साल बाद अपनी गलतियाँ समझ आती हैं,पर वो समय अब जा चुका है,इस ज़िंदगी में उन गलतियों को सुधार पाना संभव नहीं है।
प्रतियोगी परीक्षा से जुड़े हर किसी को एस्पिरेन्ट्स में कुछ न कुछ अपना अनुभव मिल जाएगा।
एस्पिरेन्ट्स तैयारी के दौर में रिश्तों को लेकर हमारे व्यवहार को लेकर भी बहुत जरूरी बात कहती है,
सफलता और असफलता के परे दोस्ती को बचाये रखना जरूरी है क्यूंकि सफल होकर हम सबसे दूर हो गए तो अपने सफलता के साथ अकेले रह जाएंगे,
संघर्ष के दौर की दोस्ती बहुत कीमती होती है और बहुत मजबूत भी।
हम में से अधिकतर अपने आप को संदीप भैया के कैरेक्टर के पास पाएंगे (वो कुसुम वाला एंगल सबकी ज़िंदगी में हो ये जरूरी नहीं है),
हम सबको अपनी तैयारी के शुरुआत में कोई न कोई संदीप भैया मिला था और कुछ के हम संदीप भैया हुए थे।
कल रविवार है,ज़िंदगी के इस सबसे कठिन दौर में रविवार सोमवार का अंतर खत्म हो गया है,
पर रविवार के सदुपयोग के लिए वो जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौर से गुजरे हैं और जिनके अंदर का एस्पिरेन्ट्स आज भी अपनी गलतियों के आंकलन में उलझा है,उन्हें एस्पिरेन्ट्स जरूर देखनी चाहिए।
कुँवर नारायण की रचना अपने सामने की कविता अंतिम ऊँचाई की इन पंक्तियों से आप वेब सीरीज खत्म होने के बाद जुड़ाव महसूस करेंगे-
कितना स्पष्ट होता आगे बढ़ते जाने का मतलब
अगर दसों दिशाएँ हमारे सामने होतीं
हमारे चारो ओर नहीं।
कितना आसान होता चलते चले जाना
यदि केवल हम चलते होते
बाक़ी सब रुका होता।
मैंने अक्सर इस ऊल-जुलूल दुनिया को
दस सिरों से सोचने और बीस हाथों से पाने की कोशिश में
अपने लिए बेहद मुश्किल बना लिया है।
शुरू-शुरू में सब यही चाहते हैं
कि सब कुछ शुरू से शुरू हो,
लेकिन अंत तक पहुँचते पहुँचते हिम्मत हार जाते हैं
हमें कोई दिलचस्पी नहीं रहती
कि वह सब कैसे समाप्त होता है
जो इतनी धूमधाम से शुरू हुआ था
हमारे चाहने पर।
दुर्गम वनों और ऊँचे पर्वतों को जीतते हुए
जब तुम अंतिम ऊँचाई को भी जीत लोगे –
तब तुम्हें लगेगा कि कोई अंतर नहीं बचा अब
तुममें और उन पत्थरों की कठोरता में
जिन्हें तुमने जीता है –
जब तुम अपने मस्तक पर बर्फ का पहला तूफ़ान झेलोगे
और कांपोगे नहीं –
तब तुम पाओगे कि कोई फर्क़ नहीं
सब कुछ जीत लेने में
और अंत तक हिम्मत न हारने में।
-नितेन रंजन बेहरा
08/05/2021