17/08/2026
सावन के 19वें दिन (17 अगस्त 2026) का रुद्राभिषेक
🙏🌺ॐ शाम्ब सदाशिव 🌺🙏
आज सावन महीने का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का दुर्लभ संयोग है। इस खास दिन भगवान शिव की पूजा के साथ नागों के राजा वासुकी नाथ की कथा सुनने से घर में सुख-शांति आती है और कालसर्प दोष या नाग भय दूर होता है।
भगवान शिव और नाग पंचमी की कथा
समुद्र मंथन और विषपान: पौराणिक कथा के अनुसार, सावन मास में ही देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। मंथन से निकले घातक 'हलाहल विष' को संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने अपने कंठ (गले) में धारण किया और वे 'नीलकंठ' कहलाए।
नागों की भक्ति:
शिव जी द्वारा विष पीने के दौरान कुछ बूंदें धरती पर गिर गईं, जिन्हें नागों ने ग्रहण कर लिया। नागों की इस निष्ठा और प्रकृति की रक्षा के भाव को देखते हुए भगवान शिव ने नागों को आशीर्वाद दिया कि सावन शुक्ल पंचमी को जो भी नाग देवता की पूजा करेगा, उसे कभी नाग भय नहीं होगा।
नागराज वासुकी नाथ की संक्षिप्त कथा
मंथन की रस्सी:
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