Sametime

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SameTime Genius Kid offers an excellent business opportunity for all dynamic young men and women of India and Indians settled abroad who wish to join the SameTime, India family as business associates. A fantastic business opportunity awaits, where no prior experience in any field is necessary. All that is needed is the ability to manage, administer and market lifetime skills for children so as to

develop them into worthy citizens of tomorrow. The corporate office in Bilaspur and its experienced professionals will give all the necessary guidance and support to initiate this wonderful business opportunity. Once a business associate/franchisee, the franchisee will receive intensive counselling on this novel concept. SameTime will provide the brand name, logo, course contents, examination material and monitoring systems. SameTime Genius Kid will also annually arrange for examinations and issue certificates, all this in addition to our professional support in administrative, technical and marketing functions.

आप भी बना सकते हैं अपने बच्चे को मैथ का जीनियस:संपर्क करें- Sametime Abacus Educationमाया कॉम्पलेक्स, स्टेशन रोड, कोतमाP...
21/08/2016

आप भी बना सकते हैं अपने बच्चे को मैथ का जीनियस:

संपर्क करें-
Sametime Abacus Education
माया कॉम्पलेक्स, स्टेशन रोड, कोतमा
Phone: 8225040119, 8817331005

मैथ सब्जेक्ट समझ में आ जाए तो आपके बच्चे क्लास के हीरो बन सकते हैं वरना जीरो। जो जितनी तेजी से सवालों को कैलकुलेट करता है वही जीनियस कहलाता है। और तेजी से कैलकुलेशन कैसे करें इसी ट्रिक को कहते हैं मैंटल मैथ।

अधिकतर बच्चों को मैथ्स के सबजेक्ट में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इसी कारण मैथ्स में स्टूडेंट्स की रुचि लगातार कम होती जा रही है। जिसकी वजह है फॉर्मूले और स्टेप्स याद करने में आने वाली मुश्किल। लेकिन मैथ सब्जेक्ट ही ऐसा है। समझ में आ जाए तो आपके बच्चे क्लास के हीरो बन सकते हैं वरना जीरो। मैथ का बेसिक फॉर्मूला है कैलकुलेशन करना। जो जितनी तेजी से सवालों को कैलकुलेट करता है वही मैथमैटिक्स जीनियस कहलाता है। और तेजी से कैलकुलेशन कैसे करें इसी ट्रिक को कहते हैं मैंटल मैथ।

अगर आप भी अपने बच्चें को मैथ का जीनीयस बनाना चाहते हैं तो आप उसे मैंटल मैथ की क्लासेज ज्वॉइन करा सकते है। जहां उसे न ही मैथ के फॉर्मूले रटने पड़ेंगे और न ही नंबर के जोड़-घटानों में उलझना पड़ेगा। और इसका सबसे बड़ा फायदा उसको भविष्य में होगा। क्योंकि मैंटल मैथ से सीखी गई ट्रिक्स को आसानी से भूला पाना मुश्किल ही है।

मैंटल मैथ एक ऐसा हुनर है जिससे बिना पैंसिल, पेपर या किसी इलेक्ट्रानिक डिवाइस के कैलकुलेशन करके कुछ ही सैकेंड्स में सही जवाब प्राप्त किया जा सकता है। मैंटल मैथ एक तरीका है मैटल क्लेकुलेशन करने का। जो कि दिमाग में एक वर्चुअल अबेकस बनाकर सवालों को हल करता है। यह अबेकस की गणना पद्धति के अनुसार काम करता है। इस एक्टिवटी में अबेकस एक टूल है जिस पर बच्चें रोजना प्रयास करते है और ध्यान में रखते हैं किसी प्रशन को हल करने के लिए। इसका प्रयोग करके कोई भी बच्चा 10 संख्या तक की अंकगणित गणना कर सकता है। यही नहीं वह बच्चा गणित में महारत भी हासिल कर सकता है वो भी बिना किसी मॉडन डिवाइस की सहायता के जैसे - केल्क्युलेटर।

यही नहीं बच्चों में मैंटल मैथ सीखने के साथ-साथ इन गुणों का भी विकास होता है –

- अवलोकन

- एकाग्रता

- कलात्मकता

- कल्पना शक्ति का विकास और उसकी अभिव्यक्ति

- स्मृति शक्ति

- सहन-शीलता

- बेहतर समझ और गणना कौशल।

- स्वयं निर्णय लेने की क्षमता।

- तीव्र सुनने की क्षमता।

21/08/2016

नासा की जिज्ञासा :

ऑस्ट्रेलिया के कॉलिन निकोलस साद वैदिक गणित के भक्त हैं। उन्होंने अपना उपनाम 'जैन' रख लिया है और ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स प्रांत में बच्चों को वैदिक गणित सिखाते हैं। उनका दावा हैः 'अमेरिकी अंतरिक्ष अधिकरण नासा गोपनीय तरीके से वैदिक गणित का कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाले रोबोट बनाने में उपयोग कर रहा है। नासा वाले समझना चाहते हैं कि रोबोट में आदमी के दिमाग की नकल कैसे की जा सकती है ताकि रोबोट ही दिमाग की तरह हिसाब भी लगा सके-- उदाहरण के लिए कि 96 गुणा 95 कितना हुआ....9120।'

कॉलिन निकोलस साद ने वैदिक गणित पर किताबें भी लिखी हैं। बताते हैं कि वैदिक गणित कम से कम ढाई से तीन हजार साल पुराना विज्ञान है। उस में मन ही मन हिसाब लगाने के जो16 सूत्र बताए गए हैं, वे इस विधि का उपयोग करने वाले की स्मरणशक्ति भी बढ़ाते हैं।

चमकदार प्राचीन विद्या
साद अपने बारे में कहते हैं, 'मेरा काम अंकों की इस चमकदार प्राचीन विद्या के प्रति बच्चों में प्रेम जगाना है। मेरा मानना है कि बच्चों को सचमुच वैदिक गणित सीखना चाहिए। भारतीय योगियों ने उसे हजारों साल पहले विकसित किया था। आप उनसे गणित का कोई भी प्रश्न पूछ सकते थे और वे मन की कल्पनाशक्ति से देख कर फट से जवाब दे सकते थे। उन्होंने तीन हजार साल पहले शून्य की अवधारणा प्रस्तुत की और दशमलव वाला बिंदु सुझाया। उनके बिना आज हमारे पास कंप्यूटर नहीं होता।'

साद उर्फ जैन ने मानो वैदिक गणित के प्रचार-प्रसार का व्रत ले रखा है,' मैं पिछले 25 सालों से लोगों को बता रहा हूँ कि आप अपने बच्चों के लिए सबसे अच्छा काम यही कर सकते हैं कि उन्हें वैदिक गणित सिखाएँ। इससे आत्मविश्वास, स्मरणशक्ति और कल्पनाशक्ति बढ़ती है। इस गणित के 16 मूल सूत्र जानने के बाद बच्चों के लिए हर ज्ञान की खिड़की खुल जाती है।'

09/12/2015

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21/11/2015

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