Department of Mathematics & Physics Govt.dungar College Bikaner

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17/10/2023

बीकानेर के प्रोफेसर रविंद्र मंगल सालों से बच्चों के लिए फिजिक्स को रोचक बनाने में जुटे हुए हैं. उन्होंने थ्योरेटि....

B.SC. 2nd year Student shuld apply for this
09/07/2023

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17/12/2022

चार साल के अंडरग्रैजुएट प्रोग्राम के बाद सीधे पीएचडी कर सकते हैं स्टूडेंट: यूजीसी

पूरी ख़बर: https://bbc.in/3Ym9wzW

01/12/2022

आज महान भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस का जन्मदिन है।

जन्म:30 नवम्बर 1858 , देहांत: 23 नवम्बर 1937

श्री जगदीश चंद्र बोस भारत के प्रसिद्ध भौतिकविद् तथा पादपक्रिया वैज्ञानिक थे। जगदीश चंद्र बोस ने कई महान ग्रंथ भी लिखे हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित विषयों पर आधारित हैं, जैसे- सजीव तथा निर्जीव की अभिक्रियाएँ (1902), वनस्पतियों की अभिक्रिया (1906), पौधों की प्रेरक यांत्रिकी (1926) इत्यादि।

कर्म-क्षेत्र: भौतिकी, जीवभौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान, पुरातत्त्व, बांग्लासाहित्य, बांग्ला विज्ञानकथाएँ

संस्थाये: कलकत्ता विश्वविद्यालय, क्राइस्ट महाविद्यालय, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, लंदन विश्वविद्यालय

विशेष कार्य: रेडियो, मिलीमीटर तरंगें, क्रेस्कोग्राफ़

पुरस्कार: नाइट, 'रॉयल सोसायटी लंदन' के फ़ॅलोशिप

कार्य: जगदीश चन्द्र बोस, जे.सी.बोस के नाम से प्रसिद्ध थे। आधुनिक भारतीय विज्ञान के इतिहास में उनका अद्वितीय स्थान है। उन्हें भारत का प्रथम आधुनिक वैज्ञानिक माना जाता है। 1917 में जगदीश चंद्र बोस को "नाइट" की उपाधि प्रदान की गई तथा शीघ्र ही भौतिक तथा जीव विज्ञान के लिए 'रॉयल सोसायटी लंदन' के फैलो चुन लिए गए। बोस ने अपना पूरा शोधकार्य किसी अच्छे (महगें) उपकरण और प्रयोगशाला से नहीं किया था, इसलिये जगदीश चंद्र बोस एक अच्छी प्रयोगशाला बनाने की सोच रहे थे।

प्रयोग और सफलता

1.जगदीश चंद्र बोस ने सूक्ष्म तरंगों (माइक्रोवेव) के क्षेत्र में वैज्ञानिक कार्य तथा अपवर्तन, विवर्तन और ध्रुवीकरण के विषय में अपने प्रयोग आरंभ कर दिये थे।

2.लघु तरंगदैर्ध्य, रेडियो तरंगों तथा श्वेत एवं पराबैंगनी प्रकाश दोनों के रिसीवर में गेलेना क्रिस्टल का प्रयोग बोस के द्वारा ही विकसित किया गया था।

3.मारकोनी के प्रदर्शन से 2 वर्ष पहले ही 1885 में बोस ने रेडियो तरंगों द्वारा बेतार संचार का प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में जगदीश चंद्र बोस ने दूर से एक घण्टी बजाई और बारूद में विस्फोट कराया था।

4.आजकल प्रचलित बहुत सारे माइक्रोवेव उपकरण जैसे वेव गाईड, ध्रुवक, परावैद्युत लैंस, विद्युतचुम्बकीय विकिरण के लिये अर्धचालक संसूचक, इन सभी उपकरणों का उन्नींसवी सदी के अंतिम दशक में बोस ने अविष्कार किया और उपयोग किया था।

5.बोस ने ही सूर्य से आने वाले विद्युत चुम्बकीय विकिरण के अस्तित्व का सुझाव दिया था जिसकी पुष्टि 1944 में हुई।

6.इसके बाद बोस ने, किसी घटना पर पौधों की प्रतिक्रिया पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया। बोस ने दिखाया कि यांत्रिक, ताप, विद्युत तथा रासायनिक जैसी विभिन्न प्रकार की उत्तेजनाओं में सब्जियों के ऊतक भी प्राणियों के समान विद्युतीय संकेत उत्पन्न करते हैं।

27/08/2021

RPSC Recruitment 2021: इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को वेतन मैट्रिक्स लेवल 12 के तहत सैलरी दी जाएगी।

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23/05/2021

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23/03/2021

23 मार्च, 1882 को जर्मनी में जन्मी एम्मी के पिता मैक्स नोएथेर हेयइडलबर्ग और एर्लांजन यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफेसर ...

07/11/2020

आज 7 नवंबर महान वैज्ञानिक मेरी क्यूरी का जन्मदिन है।
मैरी स्क्लाडोवका क्यूरी (लघु नाम: मैरी क्यूरी)विख्यात भौतिकविद और रसायनशास्त्री थी। मेरी ने रेडियम की खोज की थी।विज्ञान की दो शाखाओं (भौतिकी एवं रसायन विज्ञान) में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली वह पहली वैज्ञानिक हैं।
वैज्ञानिक मां की दोनों बेटियों ने भी नोबल पुरस्कार प्राप्त किया। बडी बेटी आइरीन को 1935में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ तो छोटी बेटी ईव को 1965 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला।
मेरी का जन्म पोलैंड के वारसा नगर में हुआ था। महिला होने के कारण तत्कालीन वारसॉ में उन्हें सीमित शिक्षा की ही अनुमति थी। इसलिए उन्हें छुप-छुपाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करनी पड़ी। बाद में बड़ी बहन की आर्थिक सहायता की बदौलत वह भौतिकी और गणित की पढ़ाई के लिए पेरिस आईं। उन्होंने फ़्रांस में डॉक्टरेट पूरा करने वाली पहली महिला होने का गौरव पाया। उन्हें पेरिसविश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर बनने वाली पहली महिला होने का गौरव भी मिला। यहीं उनकी मुलाक़ात पियरे क्यूरी से हुई जो उनके पति बने। इस वैज्ञानिक दंपत्ति ने 1898 में पोलोनियम की महत्त्वपूर्ण खोज की। कुछ ही महीने बाद उन्होंने रेडियम की खोज भी की। चिकित्सा विज्ञान और रोगों के उपचार में यह एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी खोज साबित हुई। 1903 में मेरी क्यूरी ने पी-एच.डी. पूरी कर ली। इसी वर्ष इस दंपत्ति को रेडियोएक्टिविटी की खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। 1911 में उन्हें रसायन विज्ञान के क्षेत्र में रेडियम के शुद्धीकरण (आइसोलेशन ऑफ प्योर रेडियम) के लिए रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार भी मिला। विज्ञान की दो शाखाओं में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली वह पहली वैज्ञानिक हैं। वैज्ञानिक मां की दोनों बेटियों ने भी नोबल पुरस्कार प्राप्त किया। बडी बेटी आइरीन को 1935 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ तो छोटी बेटी ईव को 1965 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला।
पुरस्कार :
भौतिकी नोबेल पुरस्कार (1903)
डेवी मेडल (1903)
मैटेक्की मेडल (1904)
एलीयट क्रेसन मेडल (1909)
अलबर्ट मेडल (1910)
रसायन नोबेल पुरस्कार (1911)
विलियर्ड गिब्स पुरस्कार (1921)

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Bikaner
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