13/05/2024
मेरे शरीर की जन्मदात्री और मेरे अध्यात्म के जन्मदाता दोनों ने इस मई के महीने में ही शरीर छोड़े थे l एक का प्राणावसान हुआ था और एक का महाप्रयाण हुआ था l पता नहीं अब किस लोक और किस गति ( भव ) में होंगे ये दोनो l
आजकल बहुत याद आती हैं इनकी l सोचता हूँ क्या इन्हें कभी हमारी याद आती होगी, क्या उन्हें फर्क़ पड़ता होगा हमारे दुखी होने से, मुझे लगता है शायद नहीं l
क्यूंकि इस जन्म में जो हमारे प्रियजन या रिश्तेदार जिंदा है, जिनके साथ हमारे संबंध है और जिनके साथ हम दिन रात रहते हैं ओर एडवांस्ड तकनीकी सम्पर्क सूत्र की व्यवस्थाएं होते हुए भी उन्हें आपकी याद नहीं आती , आपके दुखी होने से फर्क़ नहीं पड़ता तो मरे हुओं से कैसी उम्मीद की जाये l
इसलिये मुझे इन दोनो की याद आते हुए भी,याद आना व्यर्थ सा लगता है l
मात्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं l