Mathematical Society of Thar - Bikaner, Rajasthan

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18/10/2022

कैलकुलस की कहानी 2

सोफ़ी जर्मेन: पुरुष की आड़ में छिपी महिला गणितज्ञ

वो अक्सर अपने पिता की निजी लाइब्रेरी में किताबे पढ़ा करती थी। यही से एक ओर उसके हाथ #आर्कमिडीज की बारे में लिखी कोई किताब लग गयी। फिर क्या था विज्ञान और गणित के प्रति उसकी दीवानगी बढ़ती चली गयी। सम्भ्रान्त परिवार से ताल्लुक रखने वाली उस लड़की के माता-पिता को गणित के प्रति उसकी लगन और झुकाव की भनक लगते देर न लगी। उसके अभिभावकों ने देखा कि वो देर रात तक जग कर गणित सवालों में उलझी रहती है।

अपने समय के अन्य महिलाओ की तरह ही सोफ़ी को भी विश्वविद्यालय की शिक्षा से वंचित होना था। इसलिए उसके मातापिता ने शुरू में तो उससे उसके रात के गर्म कपड़े और मोमबत्तियां छीन ली ताकि वो रात को न जग सके। लेकिन सोफ़ी ने खुद को रजाई में लपेटा और चोरी की मोमबत्तियों के सहारे गणित में खुद का स्वध्याय जारी रखा और कैल्कुलस में अच्छी महारत हासिल की। आखिरकार उसके पेरेंट्स ने उसके स्वाध्याय के लिए हामी भर दी। परन्तु विश्वविद्यालय का दरवाजा अभी भी उसके लिए बंद था।

नज़दीक के ही इकोल पॉलीटेक्निक का एक छात्र #एंटोनी ऑगस्टा ले ब्लांक जो संस्थान छोड़ चुके थे, परन्तु संस्थान के अध्यापकों को इसकी जानकारी न थी, इसलिए संस्थान में ऑगस्टा ब्लांक के लिए भी नियमित रूप से लेक्चर नोट्स और असाइनमेंट छपते थे।

सोफ़ी ने किसी तरह पारिवारिक साख की जुगत लगाकर वो नोट्स ब्लांक के ही नाम के आड़ में प्राप्त करने शुरू किए और उसके असाइनमेंट में समय पर जमा करने लगी। उसने यह असाइनमेंट स्कूल के ही एक टीचर #लेग्रांज़ को भेजना शुरू किया। लेग्रांज़ उसकी वास्तविक पहचान से अनभिज्ञ थे परन्तु उसके कार्यो में हो रहे सुधारो से बहुत प्रभावित थे। उसके कार्यो से प्रभावित हो लेग्रांज़ ने उससे मिलने का प्रस्ताव रखा और मिलने पर जब उन्हें सोफ़ी की वास्तविकता पता चली वो खुशी और हैरानी से भर गए। अन्ततः उसने सोफ़ी को खुद की छत्रछाया में रख लिया।

सोफ़ी का शुरुवाती प्रयास #संख्या_सिद्धांत में था। उसने संख्या सिद्धांत के क्षेत्र की सबसे चर्चित समस्या #फेरमेट लास्ट थेरम को हल करने के प्रयासों में एक अहम योगदान दिया हालांकि वो इसे हल नही कर पाई। यह थेरम फेरमेट की मृत्यु के करीब 350 साल बाद इंग्लैंड के गणितज्ञ #एन्ड्रयू_विल्स ने हल किया। ( इस पर फिर कभी लिखा जाएगा)

सोफ़ी को जब लगा कि उसने फेरमेट लास्ट थेरम को हल करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर चुकी है तब उसने उस सर्वकालिक महान गणितज्ञ #कार्ल फ्रेडरिक गॉस को अपना काम पत्र के माध्यम से भेजा। गॉस उसकी बुद्धिमत्ता से खासे प्रभावित हुए और दोनों के बीच एक जीवंत पत्राचार शुरू हो गया लेकिन मज़े की बात ये रही कि इस पत्राचार में सोफ़ी ने पुनः अपना परिचय पुरुष छद्मनाम 'ऑगस्टा ब्लांक' ही रखा और गॉस उसे यही समझकर पत्र भेजते रहे।

यह पत्राचार सन 1806 तक जारी रहा जब तक कि नेपोलियन की सेना की वजह से गॉस का गृहनगर ब्रूनस्विक कब्जे में न ले लिया गया। पत्राचार टूटने से सोफ़ी को गॉस और उनके परिवार की चिंता हुई। पारिवारिक संपर्कों का उपयोग कर सोफ़ी ने फ्रेंच आर्मी के एक अधिकारी को गॉस और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए कहा।

जब गॉस को पता चला कि उनकी सुरक्षा किसी नवयुवती सोफ़ी जर्मेन के हस्तक्षेप की वजह से तय हुई है तो वह बड़े कृतज्ञता से भर गए परन्तु हैरानी उससे भी दुगुनी थी कि आखिर ये नवयुवती है कौन, क्योंकि वो इस नाम के किसी भी लड़की को नही जानते थे।

अगले पत्र में सोफ़ी ने अपनी वास्तविकता का खुलासा किया। गॉस ये सोच के हैरान थे कि अब तक उन्होंने एक लड़की से पत्राचार किया है। अपनी अंतर्दृष्टि की गहराई को देखते हुए और उन सभी पूर्वाग्रहों और बाधाओं को पहचानते हुए जिन्हें उन्होंने सहन किया होगा, उन्होंने उससे कहा कि "निस्संदेह उसके पास सबसे महान साहस, काफी असाधारण प्रतिभा और श्रेष्ठ प्रतिभा होनी चाहिए।"

अब आते है क्लॉडनी पैटर्न की व्याख्या पर....

जैसे ही सोफ़ी को क्लॉडनी पैटर्न से जुड़ी प्रतियोगिता के बारे में पता चला उसने उसे सुलझाने की तरकीबे ढूंढने लगी। वो नही जानती थी कि उसके प्रयास शायद यांत्रिकी की एक नई शाखा को जन्म देने वाले थे। कैल्कुलस और अवकल समीकरणों के उपयोग से उसने इस समस्या को सुलझाने की भरपूर कोशिश की परन्तु गणित में औपचारिक शिक्षा के अभाव ने एक बार फिर उसका रास्ता रोका। जब निर्णायक मंडल ने देखा कि जर्मेन का तरीका पूरी तरह से इसकी व्याख्या नही करता, लेकिन इससे एक फायदा यह हुआ कि इस प्रतियोगिता को आगे दो साल और फिर अगले दो साल के लिए बढ़ा दिया गया।

आखिरकार अपने तीसरे प्रयास में सोफ़ी ने इस समस्या को पूरी तरह सुलझा लिया और #पेरिस_अकादमी_ऑफ_साइंस से पुरस्कृत होने वाली पहली महिला बनी।

✍️ Kumar Gourav
#कलन

23/09/2022
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