R K A Law College Begusarai

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफ़ा ! छात्र आंदोलन के बीच बड़ा फ़ैसला !
25/07/2026

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफ़ा ! छात्र आंदोलन के बीच बड़ा फ़ैसला !

कहते हैं पूर्वजो की महान कीर्ति ही वंसजो का भविष्य संवारती है ! ऐसे ही एक शानदार शख्शियत थे बेगूसराय जिले के दुलारपुर गा...
25/07/2026

कहते हैं पूर्वजो की महान कीर्ति ही वंसजो का भविष्य संवारती है ! ऐसे ही एक शानदार शख्शियत थे बेगूसराय जिले के दुलारपुर गाँव के स्वर्गीय रामपदारथ सिंह बाबा ! आम आवाम की आवाज उठाने के लिए तमाम भौतिक सुविधाओं को त्याग कर जनसेवा के कठिन मार्ग को अपनाने वाले "अहिंसा व सादगी" के प्रतीक राम पदारथ सिंह (बाबा) की आज 17-वी पुण्यतिथि है। इस अवसर पर पुरे परिवार एवं समस्त दुलारपुर ग्रामवासी की तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ ! बाबा को शत शत नमन करता हूँ !

बाबा एक चलते फिरते न्यायालय थे. दियारा के किसान इनके फैसले को हमेशा अपने सर आँखों पर रखते थे. साथ ही इनका लोगों के प्रति सम भाव अपने आप में अनोखा था. ऐसे गरीब गुरबे किसान जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती थी, के खेतों में अपने ट्रेक्टर से जुताई करवा देते थे और कहते थे कि "सब माया रघुनाथ जी की" फसल अच्छी होगी तो दे देगा बेचारा. आज भले ही वो हमारे बीच मौजूद न हों, लेकिन उनका यह मुस्कराता चेहरा सदा हमें प्रेरणा देता हुआ हमारा मार्गदर्शन करता रहता है। शत शत नमन बाबा को।

#भवेश #भारद्वाज

एक समय उत्तरप्रदेश में BJP का कोई B नही जानता था.OBC समाज के नेता कल्याण सिंह, विनय कटियार और साध्वी उमा भारती ने BJP को...
25/07/2026

एक समय उत्तरप्रदेश में BJP का कोई B नही जानता था.

OBC समाज के नेता कल्याण सिंह, विनय कटियार और साध्वी उमा भारती ने BJP को उत्तरप्रदेश के गांव गांव तक पहुंचा दिया.

राम मंदिर आंदोलन में विनय कटियार और उमा भारती ने उत्तरप्रदेश में अहम भूमिका निभाई थी.

1999 में जब कल्याण सिंह को UP के मुख्यमंत्री पद से हटाया गया तब विनय कटियार को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था.

लंका विजय के बाद विनय कटियार को किनारे लगा दिया गया. राम मंदिर ट्रस्ट में उन लोगों को जगह दी गयी जिन्हें कोई जानता तक नही था. विनय कटियार को राम मंदिर ट्रस्ट का मुखिया बनाया जाए. देश के धार्मिक स्थलों पर पहला अधिकार OBC SC और ST समाज का होना चाहिए, उन्हीं मेहनत से धार्मिक स्थलों का निर्माण हुआ है.


हर दिन बंद हो रहे 25 सरकारी स्कूल!नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में देशभर में करीब 94 हजार सरकारी स्कू...
25/07/2026

हर दिन बंद हो रहे 25 सरकारी स्कूल!

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में देशभर में करीब 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि औसतन हर दिन 25 सरकारी स्कूलों पर ताला लगा, जिससे सरकारी स्कूलों की संख्या करीब 11 लाख से घटकर 10 लाख रह गई है।

शिक्षा किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। ऐसे में सरकारी स्कूलों की घटती संख्या को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या हर बच्चे तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने की दिशा में पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं?

यह मुद्दा अब केवल आँकड़ों का नहीं, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा विषय है।

पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों पर अब लगभग विराम लगता दिखाई दे रहा है।काफी समय से यह चर्चा थी कि प्रदेश...
25/07/2026

पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों पर अब लगभग विराम लगता दिखाई दे रहा है।

काफी समय से यह चर्चा थी कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बदलाव हो सकता है। पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं की सक्रियता और बैठकों के बीच कई तरह के कयास लगाए गए, लेकिन अब संकेत यही हैं कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ही प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे।

यह घटनाक्रम एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी देता है। यदि किसी राज्य में आंतरिक दबाव या शक्ति प्रदर्शन के आधार पर संगठनात्मक फैसले बदले जाएं, तो इसका असर दूसरे राज्यों की राजनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने फिलहाल स्थिरता और निरंतरता को प्राथमिकता दी है।

इसी बीच पार्टी के भीतर मतभेदों की खबरें भी सामने आईं। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष ने सार्वजनिक रूप से मेल-मिलाप का संदेश देते हुए कहा कि जो हाथ मिलाना चाहेगा, उससे हाथ मिलाएंगे और जो गले लगना चाहेगा, उसे गले लगाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की जीत के लिए यदि किसी नेता के जूते भी सिर पर रखने पड़ें, तो वे उससे भी पीछे नहीं हटेंगे। यह बयान संगठन को एकजुट रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

साथ ही उन्होंने संसद के माहौल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच संवाद, सहजता और स्वस्थ राजनीतिक संस्कृति बनी रहनी चाहिए। उनका मानना है कि संसद ऐसा मंच होना चाहिए, जहां विचारों का टकराव हो, लेकिन संवाद और लोकतांत्रिक गरिमा भी बनी रहे।

उधर, पार्टी के भीतर यह चर्चा भी जारी है कि संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। माना जा रहा है कि चुनावी तैयारियों और टिकट वितरण जैसी अहम प्रक्रियाओं में विभिन्न नेताओं की भूमिका बढ़ाई जा सकती है, ताकि सभी गुटों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सके।

आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए पंजाब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता, कार्यकर्ताओं का विश्वास और जनता के बीच मजबूत राजनीतिक संदेश देने की होगी। यही तय करेगा कि पार्टी चुनावी मैदान में कितनी मजबूती से उतरती है।

उत्तर प्रदेश की दलित सियासत में आज एक बड़ा भूचाल आ गया ! एक तरफ हैं चार बार मुख्यमंत्री रहीं बहुजन समाज पार्टी की 'आयरन ...
25/07/2026

उत्तर प्रदेश की दलित सियासत में आज एक बड़ा भूचाल आ गया ! एक तरफ हैं चार बार मुख्यमंत्री रहीं बहुजन समाज पार्टी की 'आयरन लेडी' मायावती, और दूसरी तरफ हैं सड़कों पर संघर्ष करने वाले युवा सांसद चंद्रशेखर आजाद।

मेरठ में दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड के बाद उपजे विरोध प्रदर्शनों को लेकर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे वार किए हैं, क्योंकि एक को यकीन हो गया है कि -
जो नया किंगमेकर आया है वो उसे खत्म कर देगा।

दरअसल, मायावती जी ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो चंद्रशेखर आजाद पर तगड़ा हमला बोला और इशारों इशारों में उन्हें मगरमच्छ तक कह डाला।
उन्होंने कहा कि कुछ नेता पीड़ित परिवारों को भड़काकर सड़कों पर हिंसा करवाते हैं, राजनीति चमकाते हैं और फिर 'मगरमच्छ के आंसू' बहाते हैं।

वहीं चंद्रशेखर ने भी मायावती को करारा जवाब दिया है उन्होंने कहा— हम जान की बाजी लगा रहे हैं, हमारे कार्यकर्ता डंडे खा रहे हैं और वो AC कमरों से बाहर निकलती नहीं और हमें रोक रही हैं!
अगर हम मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं, तो आप भी सड़क पर आ जाइए।मैं उनका सम्मान करता था लेकिन आज ठेस पहुंची।

यह लड़ाई सिर्फ बयानों की नहीं, बल्कि दलित वोट बैंक के असली 'वारिस' और 'किंगमेकर' बनने की है। क्या चंद्रशेखर का जमीनी संघर्ष मायावती के पारंपरिक कैडर को हिला देगा, या मायावती का सियासी अनुभव नए उभार को रोक देगा?

साल 1977 आपातकाल समाप्त हो चुका था। जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और पहली बार केंद्र में कांग्रेस सत्ता से बाहर हु...
05/07/2026

साल 1977 आपातकाल समाप्त हो चुका था। जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और पहली बार केंद्र में कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई। नई सरकार बनने जा रही थी

उस समय सबसे अनुभवी, सबसे स्वीकार्य और सबसे बड़े नेताओं में बाबू जगजीवन राम का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा था। ऐसा माना जा रहा था कि भारत को अपना पहला दलित प्रधानमंत्री मिल सकता है।

लेकिन राजनीति केवल योग्यता या लोकप्रियता से नहीं चलती, उस समय जनता पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट सक्रिय थे। अंततः सत्ता का संतुलन दूसरी दिशा में गया और बाबू जगजीवन राम प्रधानमंत्री बनते बनते रह गए.

मधु लिमये गुट ने उन्हें देश का पहला दलित प्रधानमंत्री बनने नही दिया.

इसके बाद भी वे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बने रहे। जनता पार्टी के शासनकाल में बाबू जगजीवन राम की लोकप्रियता बढ़ती जा रही थी. सवर्णवादियों को डर सता रहा था कहीं बाबू जगजीवन राम फिर से PM पद के प्रबल दावेदार ना बन जाएं.

इसी बीच 1978 में मेनका गांधी ने अपने सूर्य मैगज़ीन में बाबू जगजीवन राम के बेटे का सेक्स स्कैंडल का विवाद फ़ोटो सहित छाप कर उनकी छवि और उनकी प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं को गंभीर नुकसान पहुँचाया।

1979 में जब फिर से सत्ता परिवर्तन की स्थिति बनी, तब एक बार फिर उनके नाम की चर्चा हुई। लेकिन इस बार भी राजनीतिक परिस्थितियाँ उनके पक्ष में नहीं रहीं और अंततः चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री बने।
बाबू जगजीवन राम को उपप्रधानमंत्री का दायित्व मिला, किंतु प्रधानमंत्री बनने का सपना अधूरा ही रह गया।

आज़ादी को 77 साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन इसके बावजूद भारत को अब तक कोई दलित प्रधानमंत्री नहीं मिला है।बहन मायावती जी की पूरी संभावना थी वो एक दिन PM बनेंगी. लेकिन वो CM बनने के लिए भी कोई प्रयास नही कर रही हैं.
लगता है दलित PM के लिए 100 साल इंतजार करना होगा.

आज बाबू जगजीवन राम की पुण्यतिथि है, उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं शत-शत नमन।

ममता बनर्जी और गांधी परिवार के रिश्तों को लेकर अक्सर कहा जाता है कि यह संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कई दशकों पुराने व...
04/07/2026

ममता बनर्जी और गांधी परिवार के रिश्तों को लेकर अक्सर कहा जाता है कि यह संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कई दशकों पुराने व्यक्तिगत और राजनीतिक विश्वास पर आधारित हैं।

बताया जाता है कि 1991 के लोकसभा चुनाव के दौरान राजीव गांधी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे। उसी रैली के कुछ दिनों बाद तमिलनाडु में राजीव गांधी की हत्या हो गई। उस समय बंगाल कांग्रेस में ममता बनर्जी के विरोधी भी मौजूद थे और माना जाता है कि इस घटना के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे थे। इसके बाद ममता बनर्जी दिल्ली पहुंचीं और सोनिया गांधी से मुलाकात कर उनके साथ खड़ी रहीं।

तृणमूल कांग्रेस के गठन के समय भी ममता बनर्जी ने कहा था कि भले ही उनकी नई पार्टी का पंजीकरण हो गया है, लेकिन यदि सोनिया गांधी चाहेंगी तो वह कांग्रेस में वापस लौट सकती हैं, अन्यथा तृणमूल कांग्रेस के साथ आगे बढ़ेंगी।

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी और तेजस्वी यादव पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे। उस समय ममता बनर्जी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था और अपने हाथों से भोजन परोसने की घटना भी काफी चर्चा में रही थी।

इन्हीं घटनाओं के आधार पर राजनीतिक हलकों में यह माना जाता है कि गांधी परिवार और ममता बनर्जी के संबंध लंबे समय से बने हुए हैं। यही वजह है कि जब भी ममता बनर्जी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करती हैं, तब उनके और कांग्रेस नेतृत्व के रिश्तों को लेकर चर्चाएं फिर से तेज हो जाती हैं।

कांग्रेस पार्टी के विद्वान प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद Pawan Khera जी ने एक अत्यंत गंभीर और आंखें खोलने वाली बात कही है।...
03/07/2026

कांग्रेस पार्टी के विद्वान प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद Pawan Khera जी ने एक अत्यंत गंभीर और आंखें खोलने वाली बात कही है। अयोध्या में स्थित प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर देश का इकलौता ऐसा पावन धाम है,जिसकी देखरेख और निगरानी का जिम्मा सीधे BJP और RSS करती है।

वो कहते हैं कि इस पावन तीर्थ में इन दोनों संगठनों द्वारा आपराधिक मिलीभगत करके दान और चढ़ावे की चोरी और निर्माण कार्य में घोटाला करना एक ऐसा ऐसा अक्षम्य अपराध है जिसे धर्म शास्त्रों में भी महापाप माना गया है!

जिसके लिए हमारे सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों में बेहद स्पष्ट और कठोर विधान बताए गए हैं।शास्त्रों में इस कुकृत के लिए निम्नलिखित दंड और कर्मफल बताए गए हैं।

गरुड़ पुराण के अनुसार, देवद्रव्य चुराने वालों को यमलोक में भयानक नरकों की यातनाएं भुगतनी पड़ती हैं और अगले जन्मों में पशु, कीट या पतंगों की योनि में जन्म लेना पड़ता है।

धर्मशास्त्रों(मनुस्मृति) के अनुसार, देवद्रव्य के चोरों को तब तक शांति नहीं मिलती, जब तक कि वह चुराई गई संपत्ति का कई गुना ज़्यादा हिस्सा लौटाकर संतों या ब्राह्मणों के समक्ष कठोर प्रायश्चित न करे।

राजा या राज्य का यह परम कर्तव्य है कि वह ऐसे चोरों को कठोर शारीरिक और आर्थिक दंड दे! आज के संदर्भ में, जांच एजेंसियों की निष्क्रियता इस राजधर्म का उल्लंघन है।

यह लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ की नहीं है, बल्कि प्रभु श्री राम की पवित्रता और भक्तों की गाढ़ी कमाई के समर्पण को सुरक्षित रखने की है।प्रभु श्रीराम के नाम पर आस्था का व्यापार और कौड़ी-कौड़ी का हिसाब न देना सीधे सनातन परंपरा का अपमान है!
राजनीति के नाम पर धर्म का चोला ओढ़ने वालों को याद रखना चाहिए कि इंसानी अदालतों से तो बचा जा सकता है, लेकिन 'कर्मफल' और 'ईश्वरीय न्याय' से कोई नहीं बच सकता।

आस्था पर सवाल उठाना धर्म पर हमला नहीं, बल्कि धर्म की पवित्रता को बचाना है। जनता हिसाब मांग रही है!

टी. एन. शेषन देश के मुख्य चुनाव आयुक्त थे। एक बार वे अपनी पत्नी और सुरक्षा दल के साथ उत्तर प्रदेश के दौरे पर जा रहे थे। ...
02/07/2026

टी. एन. शेषन देश के मुख्य चुनाव आयुक्त थे। एक बार वे अपनी पत्नी और सुरक्षा दल के साथ उत्तर प्रदेश के दौरे पर जा रहे थे। रास्ते में उनकी पत्नी की नज़र एक पेड़ पर लटक रहे सुंदर बया के घोंसले पर पड़ी।

घोंसला इतना आकर्षक था कि उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा,
“यह घोंसला मुझे ला दीजिए, घर सजाने के काम आएगा।”

शेषन साहब ने तुरंत अपने एक सुरक्षाकर्मी को घोंसला उतार लाने का निर्देश दिया।

सुरक्षाकर्मी ने पास ही भेड़-बकरियाँ चरा रहे एक किशोर को बुलाया और कहा,
“बेटा, यह घोंसला उतार दो। दस-बीस रुपये मिल जाएंगे।”

लेकिन लड़के ने बिना एक पल सोचे साफ़ इनकार कर दिया।

सुरक्षाकर्मी ने पैसे बढ़ाने की बात भी कही, पर वह टस से मस नहीं हुआ। आखिरकार उसने लौटकर सारी बात शेषन साहब को बता दी।

यह सुनकर शेषन साहब स्वयं कार से उतरे और उस किशोर के पास पहुँचे। उन्होंने मुस्कुराकर कहा,
“अगर तुम यह घोंसला उतार लाओगे तो मैं तुम्हें दस नहीं, पूरे पचास रुपये दूँगा।”

लड़के ने फिर भी विनम्रता से मना कर दिया।

शेषन साहब ने हैरानी से पूछा,
“इतने पैसे भी नहीं चाहिए? आखिर क्यों?”

किशोर ने मासूमियत से घोंसले की ओर देखा और बोला,

“साहब, इस घोंसले में छोटे-छोटे बच्चे हैं। शाम को उनकी माँ उनके लिए दाना लेकर आएगी। अगर घोंसला ही नहीं मिलेगा, तो उसे कितना दुख होगा। चाहे आप जितने भी पैसे दे दें, मैं यह घोंसला नहीं उतारूँगा।”

उस अनपढ़ चरवाहे के इन सरल शब्दों ने देश के सबसे शक्तिशाली अधिकारियों में से एक टी. एन. शेषन को भीतर तक झकझोर दिया।

बाद में इस घटना का उल्लेख करते हुए शेषन साहब ने लिखा

“आज भी मुझे इस बात का अफसोस होता है कि एक उच्च शिक्षित आईएएस अधिकारी होने के बावजूद मेरे मन में वह संवेदना क्यों नहीं थी, जो उस अनपढ़ किशोर के मन में थी। उस दिन मेरी डिग्रियाँ, मेरा पद, मेरी प्रतिष्ठा और मेरा अहंकार—सब उस बच्चे की करुणा के सामने छोटे पड़ गए। उसने मुझे सिखाया कि बुद्धि, पद और धन तभी सार्थक हैं, जब उनके साथ संवेदनशीलता भी हो।

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