Daffodils WORLD

Daffodils WORLD

Share

OUR AIM IS TO KEEP OURSELVES AND OUR COUNTRY AHEAD

07/06/2024

नीतीश सबके हैं





24/10/2023

बिहारशरीफ भव्य दुर्गा पूजा पंडाल (2023)

01/03/2023

27 फरवरी 1931 को वह अंग्रेजों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। कहा जाता है कि वह आजादी के लिए इतना दीवाने थे कि जब वह महज 15 साल के थे, तो गांधीजी से प्रभावित होकर उनके असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए थे। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था और जब जज ने उनसे उनका नाम पूछा तो उन्होंने बताया कि उनका नाम आजाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता है और घर का पता जेल है। इसके बाद जज ने उन्हें 15 कोड़े की सजा सुनाई थी।

कहां हुआ था जन्म
चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश के अलीराजपुर जिले के भाबरा गांव में हुआ था। उनका पूरा नाम चंद्रशेखर तिवारी था। कहा जाता है कि उन्होंने अपने बचपन में आदिवासियों से धनुष बाण चलाना सीखा था और उनका निशाना काफी पक्का था।

कहा जाता है कि चंद्रशेखर आजाद ओरछा के पास जंगल में लोगों को निशानेबाजी सिखाते थे और पंडित हरिशंकर ब्रह्मचारी का नाम रखकर अपने कामों को अंजाम दिया करते थे। आजाद का एक प्रमुख काम क्रांतिकारी कार्यों के लिए धन जुटाना भी था और वह चंदा जमा करने के काम में काफी माहिर थे।

काकोरी कांड की योजना और आजाद का बच निकलना
9 अगस्त 1925 को क्रांतिकारियों ने काकोरी में चलती ट्रेन को रोककर ब्रिटिश खजाना लूटने की प्लानिंग कर ली थी। इस लूट ने अंग्रेजी हुकूमत के पैरों तले जमीन खिसका दी थी। अंग्रेजों ने इस कांड में शामिल क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था लेकिन आजाद फिर भी अंग्रेजों के हाथ नहीं लगे।

जब सांडर्स को मारने की प्लानिंग हुई थी, तब भी चंद्रशेखर आजाद ने भगत सिंह का साथ दिया था। उनका काम अपने साथियों को कवर देना था। वे मरते दम तक अंग्रेजों के हाथ नहीं आए।

अल्फ्रेड पार्क में मुठभेड़ और पेड़ का काटा जाना
27 फरवरी 1931 को इलाहबाद (अब प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में चंद्रशेखर आजाद की अंग्रेजों के साथ भीषण मुठभेड़ हुई थी, जिसने अंग्रेजी हुकूमत के दिल में क्रांतिकारियों का खौफ पैदा कर दिया था। मुठभेड़ के दौरान जब आजाद के पास गोलियां खत्म हो गईं तो उन्होंने खुद को गोली मार ली लेकिन अंग्रेजों के हाथ नहीं आए।

जिस पेड़ की ओट लेकर आजाद, अंग्रेजों की फायरिंग का जवाब दे रहे थे, उसे अंग्रेजों ने आजाद की मौत के बाद कटवा दिया था। दरअसल इस पेड़ पर लोगों ने कई जगह आजाद लिख दिया था और लोग यहां की मिट्टी भी उठा ले गए थे। लोगों का मजमा इस जगह पर लगने लगा था और लोग फूल-मालाओं के साथ इस जगह की दीप जलाकर आरती करने लगे थे। अंग्रेजों को ये बात रास नहीं आई और उन्होंने रातों-रात उस पेड़ को जड़ से काट दिया और उसे फिंकवा दिया। इसके बाद अक्टूबर, 1939 में उसी जगह पर बाबा राघवदास ने एक जामुन के पेड़ को लगाया था।

29/01/2023

🥰भारतीय अंडर -19 महिला टीम ने जीता पहला क्रिकेट वर्ल्ड कप🥰

भारत ने पहला अंडर -19 Women's Cricket वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया l भारतीय टीम ने फाइनल में इंग्लैंड की टीम को 7 विकेट से हराकर यह खिताब अपने नाम किया l भारतीय कप्तान Shafali Verma के नेतृत्व में महिला टीम ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है l

















28/01/2023

भारत की स्टार टेनिस महिला खिलाड़ी सानिया मिर्जा की जीवन से हर कोई वाकिफ है। सानिया ने यूएस ओपन 2022 में टेनिस से संन्यास लेने की योजना बनाई थी लेकिन चोट के कारण उन्हें ग्रैंड स्लैम से चूकना पड़ा। सानिया ने कम उम्र में टेनिस खेलना शुरु किया और दुनिया भर में भारत का मान बढ़ाया। कई अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया।

महज 6 साल की उम्र में शुरु की ट्रेनिंग

15 नवंबर 1986 मुंबई में जन्मीं सानिया का बचपन हैदराबाद में गुजरा। उनके पिता इमरान मिर्जा पेशे से एक स्पोर्ट्स पत्रकार थे, बाद में उन्होंने एक प्रिटिंग बिजनेस की शुरुआत की और निर्माता बन गए। उसी प्रीटिंग में सानिया की मां नसीमा मिर्जा भी कार्यरत थीं। उनकी शुरुआती स्कूली शिक्षा खेराताबाद की नासर स्कूल से हुई जबकि आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने हैदराबाद के सेंट मैरी कॉलेज को चुना। महज 6 साल की उम्र में उन्होंने निजाम क्लब में दाखिला लिया लेकिन वहां के कोच ने उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें कोचिंग देने से मना कर दिया। लेकिन उनके हुनर और लगाव को देखकर बाद में कोच उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए मान गए।

अपने पूरे करियर में सानिया ने 1999 में जकार्ता में हुए विश्व जूनियर चैंपियनशिप में पहला अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट खेला था। बाद में 2003 में विंबलडन चैंपियनशिप गर्ल्स डबल में खिताब भी जीता। 2003 यूएस ओपन गर्ल्स डबल्स के सेमीफाइनल तक पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने चार गोल्ड मेडल भी अपने नाम किए। साल 2007 में सानिया ने चार युगल खिताब जीते और वर्ल्ड रैंकिंग में 27वें नंबर पर अपनी जगह बनाई। फिर 2009 में महेश भूपति के साथ ऑस्ट्रेलियाई ओपन मिक्स्ड डबल में पहला ग्रैंड स्लैम अपने नाम किया। बता दें कि, सानिया ने अपने पूरे करियर में 6 ग्रैंड स्लैम अपने नाम किए। गौरतलब है कि, सानिया ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं।



#सानियामिर्जा





26/01/2023

गणतन्त्र दिवस भारत का एक राष्ट्रीय पर्व है जो प्रति वर्ष 26 जनवरी को मनाया जाता है। इस वर्ष 2023 में भारत का 74वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। इसी दिन सन् 1950 को भारत सरकार अधिनियम (1935) को हटाकर भारत का संविधान लागू किया गया था। यह भारत के तीन राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है, स्‍वतन्त्रता दिवस संविधान के रचियता डाॅ. भीमराव अम्बेडकर हैं।
एक स्वतन्त्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए 26 नवम्बर 1949 को भारतीय संविधान सभा द्वारा इसे अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। इसे लागू करने के लिये 26 जनवरी की तिथि को इसलिए चुना गया था क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।

इस दिन हर भारतीय अपने देश के लिए प्राण देने वाले अमर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं। स्कूलों, कॉलेजों आदि मे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति दिल्ली के राजपथ पर भारतीय ध्वज फहराते हैं। राजधानी दिल्ली में बहुत सारे आकर्षक और मनमोहक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। दिल्ली को अच्छी तरह सजाया जाता है कर्त्तव्यपथ पर बड़ी धूम-धाम से परेड निकलती है जिसमें विभिन्न प्रदेशों और सरकारी विभागों की झांकियाँ होतीं हैं। देश के कोने कोने से लोग दिल्ली मे 26 जनवरी की परेड देखने आते हैं। भारतीय सेना अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन होता है।



#गणतंत्र



25/01/2023

बागेश्वर धाम का उद्गम यह है लोगों के भरोसे बागेश्वर धाम भूत भवन महादेव गढ़ा में स्थित है और वह चंदेल कालीन सिद्धपीठ है। 1986 में ग्रामीणों द्वारा मंदिर का निर्माण किया गया, उसके बाद 1987 के बीच गाँव के बाबा पंडित सेतुलाल गर्ग चित्रकूट से दीक्षा प्राप्त कर बागेश्वर धाम पहुंचे, जिसके बाद 1989 में एक बड़ा यज्ञ जुड़ा। जिसके बाद से बागेश्वर धाम प्रसिद्ध होने लगा। वह तब ध्यान में आए जब नागपुर की अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के श्याम मानव नाम के एक व्यक्ति ने उन्हें दिव्य दरबार में चुनौती दी और उनकी आध्यात्मिक शक्तियों पर सवाल उठाया, मानव ने शास्त्री पर अंध विश्वास को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। जब मीडिया में विवाद शुरू हुआ, तो शास्त्री ने मानव को अपने दिव्य दरबार में आमंत्रित किया और पूछा कि वह क्या जानना चाहता है। स्वामी रामदेव, सद्गुरु जग्गी वासुदेव, रामभद्राचार्य, साध्वी प्राची, प्रज्ञा ठाकुर और राजनेता गिरिराज सिंह जैसे कई प्रमुख हिंदू धार्मिक नेता उनके समर्थन में आए। उन्हें छत्तीसगढ़ में लगभग 300 ईसाइयों को हिन्दू बनाने के लिए जाना जाता है। 20 जनवरी, 2023 को लगभग 500,000 लोग उनके दिव्य दरबार में आए। 22 जनवरी, 2023 को कई हिंदू संगठनों ने बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख पुजारी शास्त्री के समर्थन में नई दिल्ली में जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। वर्तमान में मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक हिंदू तीर्थ स्थल बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर और प्रमुख के रूप में सेवा कर रहे हैं। शास्त्री को रामचरितमानस और शिव पुराण के उपदेश के लिए जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि उनके अनुयायियों द्वारा साधना के माध्यम से प्राप्त की गई कुछ करिश्माई शक्तियाँ हैं। उन्होंने अपने धाम में अन्नपूर्णा रसोई की स्थापना की है जहां उनके अनुयायियों के लिए निःशुल्क भोजन प्रसाद की व्यवस्था की जाती है। धीरेंद्र शास्त्री गरीब और बेसहारा लड़कियों की शादी का वार्षिक समारोह भी रखते हैं। वह प्राचीन वैदिक अध्ययन और संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए एक वैदिक गुरुकुल की स्थापना कर रहें है.....

#बागेश्वर





#बागेश्वरधाम

#पंडितधीरेंद्रशास्त्री







#जयहनुमान

#जयमहाकाल

#जयश्रीराम

#ॐ

15/01/2023

भारतीय थलसेना दिवस हर साल 15 जनवरी को सेना के शौर्य, साहस, बलिदान व पराक्रम के उपलक्ष में मनाया जाता है। आज के ही दिन 15 जनवरी 1949 को सेना के प्रथम फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना का कमान अपने हाथों में लिया था। केएम करिअप्पा पहले सैन्य अधिकारी थे जिन्हें फील्ड मार्शल की पांच सितारा रैंकिंग दी गई थी। थलसेना दिवस के अवसर पर हमारा पूरा भारत देश भारतीय सेना की वीरता,शौर्य व उनकी कुर्बानी को याद करता है।

#थलसेनादिवस





15/01/2023

♥️ अखंड भारत की अखंड संस्कृति ♥️

मकर संक्रांति पर्व भारतीय हिन्दू संस्कृति का एक मुख्य त्योहार है। जप, तप, दान, स्नान, सुख- समृद्धि व सक्रात्मकता का प्रतीक यह त्योहार पूरे देश भर में कई नामों के साथ हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।

मकर संक्रांति सूर्य देव का सबसे बड़ा त्योहार है। सूर्य के अभाव में जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
सूर्य देव जेब उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो सूर्य की इस क्रांति को मकर संक्रांति के रूप में पूरे देश भर में हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है।

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में मकर संक्रांति का यह त्योहार अलग-अलग नामों के साथ पारंपरिक तरीके से सदियों से मनाया जाता रहा है।



#मकरसंक्रांति





07/12/2022

#शौर्यदिवस #बाबरी #राममंदिर

6दिसंबर 1992 के आज के ही दिन अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि क्षेत्र या कहे तो विवादित बाबरी मस्जिद के ढांचा को गिरा कर हिंदू सेना वाहिनी व बजरंग दल के कार सेवकों के द्वारा विवादित ढांचे पर भगवा को लगाया गया था ...

कार सेवकों के कुर्बानी की बदौलत ही आज हम भारतवासी श्री रामचंद्र के पवित्र भूमि अयोध्या में आज श्री राम मंदिर के भव्य दरबार को अपने आंखों से बनते हुए देख रहे हैं...

05/10/2022

बिहारशरीफ शहर के खूबसूरत दुर्गा पूजा के पंडाल (2022)

Want your school to be the top-listed School/college in Bihar Sharif?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Website

Address


Bihar Sharif