Shree Sant Gajanan Maharaj

Shree Sant Gajanan Maharaj “SHRI SANT GAJANAN MAHARAJ” Computer & IT Career Foundation is just started on 24th Oct., 2011. Jalgaon, State – Maharashtra, Country – India in October, 2011.

SSGM is the sales & service provider of the Computer & IT to the Industry, with a team of talented enthusiastic & committed people. We always position ourselves as a true IT Partner rather than as a complete IT Vendor. This is possible only because we think / view the market place from the customer’s angles, and finally integrate them in the network. We enable medium and Large Enterprises to reduc

e the cost of IT operation by leveraging cost effective solutions with ensuring scalability. SSGM is started his Training – Sales & Service – Development Divisions at Bhusawal, Dist.

20/10/2025

नरक चतुर्दशीच्या हार्दिक शुभेच्छा

13/07/2020

जय श्रीराम 🙏

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15/05/2020

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उत्तमराव नेरकर जळगाव कविता :- शेतकरी प्रेरणा गीत Uttamrao Nerkar Jalgaon Kavita:- Shetkari Prerna Git ताळेबंदीच्या काळात लोकहितवादी आयोजित या महा....

24/11/2015

जी हाँ, कोई गलती नहीं, कोई मिसप्रिंट नहीं, आपने शीर्षक में एकदम सही पढ़ा है, महाराष्ट्र के आदिवासी इलाके मेलघाट में पिछले...
23/11/2015

जी हाँ, कोई गलती नहीं, कोई मिसप्रिंट नहीं, आपने शीर्षक में एकदम सही पढ़ा है, महाराष्ट्र के आदिवासी इलाके मेलघाट में पिछले 24 साल से काम कर रहे, डॉ. श्री. रवीन्द्र कोल्हे की फ़ीस सिर्फ़ 2 रुपये है (पहली बार) और दूसरी बार में 1 रुपया।

पूज्य विनोबाजी भावे के “सच्चे अनुयायी” डॉ. श्री. रवीन्द्र कोल्हे सभी से जॉन रस्किन का यह वाक्य कहते हैं की, “यदि आप मानव की सच्ची सेवा करना चाहते हैं तो जाईये और सबसे गरीब तथा सबसे उपेक्षित लोगों के बीच जाकर काम कीजिय।"

जब रवीन्द्र कोल्हे नामक नौजवान ने MBBS की पढ़ाई के बाद मेलघाट के अति-पिछड़े इलाके में नौकरी की, तब उन्हें अहसास हो गया था की, इन गरीब आदिवासि भाईयों की गहन पीड़ा और आवश्यकतायें सामान्य व्यक्तियों से अलग है।

तब उन्होंने MD की डिग्री हासिल की और पुनः मेलघाट आकर कोरकू आदिवासियों के बीच काम करने लगे। इन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से MBBS किया, वे शुरु से ही विनोबा भावे के कार्यों और विचारों से बेहद प्रभावित थे।

उन्होंने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के कई जिलों का दौरा किया और पाया कि महाराष्ट्र का गढ़चिरौली इलाका नक्सलवाद, गरीबी और बीमारी से जूझ रहा है तब उन्होंने मेलघाट को ही अपना स्थाई ठिकाना बनाने का फ़ैसला किया।

उनकी माताज़ी ने नक्सलवाद के खतरे को देखते हुए उन्हें मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन रवीन्द्र कोल्हे ठान चुके थे कि उन्हें आदिवासियों के बीच ही काम करना है। उनका पहनावा और हुलिया देखकर कोई भी नहीं कह सकता कि यह एक MD डॉक्टर हैं।

अपने पुराने दिनों को याद करते हुये डॉ. रवीन्द्र कोल्हे कहते हैं, “उन दिनों इस पूरे इलाके में सिर्फ़ 2 स्वास्थ्य केन्द्र थे। मुझे अपनी क्लिनिक तक पहुँचने के लिये धारणी से बैरागढ़ तक रोजाना 40 किमी पैदल चलना पड़ता था। मुझे इन जंगलों में रोजाना कम-से-कम एक शेर जरूर दिखाई दे जाता था, हालांकि पिछले 4 साल से मैने यहाँ कोई शेर नहीं देखा।"

मेलघाट का मतलब होता है, वह जगह जहाँ 2 घाटों का मिलन होता है। यह गाँव महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की सीमा पर बसा हुआ है, और पहाड़ियों की गहरी हरियाली को सिर्फ़ एक ही बात भेदती है वह है यहाँ के स्थानीय निवासी कोरकू आदिवासियों का रंगीन पहनावा।

विकास के नाम पर इस पूरे इलाके में कुछ भी नहीं है, मीलों तक सड़कें नहीं हैं और गाँव के गाँव आज भी बिजली के बिना अपना गुज़ारा कर रहे हैं।

टाइगर रिज़र्व इलाका होने की वजह से यहाँ किसी प्रकार का “इंफ़्रास्ट्रक्चर” बनाया ही नहीं गया है, ये और बात है कि पिछले कई साल से यहाँ एक भी टाइगर नहीं देखा गया है, अलबत्ता केन्द्र और राज्य से बाघ संरक्षण के नाम पर पैसा खूब आ रहा है।

जंगलों के अन्दर आदिवासियों के गाँव तक पहुँचने के लिये सिर्फ़ जीप का ही सहारा है, जो ऊबड़-खाबड़ ज़मीन पर चल जाती है। यहाँ के आदिवासी सिर्फ़ पहाड़ी झरनों और छोटी नदियों के सहारे ही छोटी-मोटी खेती करके अपना पेट पालते हैं, क्योंकि न तो यहाँ सिंचाई व्यवस्था है, न ही पम्प, क्योंकि बिजली भी नहीं है।

ऐसी जगह पर डॉ रवीन्द्र कोल्हे एवम् उनकी धर्मपत्नी सौ. स्मितादेवी पिछले 24 साल से अपना काम एक निष्काम कर्मयोगी की तरह कर रहे हैं।

पहली बार जब भी कोई रोगी आता है तब वे उससे सिर्फ़ 2 रुपये फ़ीस लेते हैं और अगली बार जब भी वह दोबारा चेक-अप के लिये आता है तब 1 रुपया।

अपने खुद के खर्चों से उन्होंने एक छोटा क्लिनिक खोल रखा है, और वे वहीं रहते भी हैं जहाँ कोई भी 24 घण्टे उनकी सलाह ले सकता है।

ऐसे भले व्यक्ति को नमन।।।

23/11/2015
22/11/2015

अकबर ने बीरबल के सामने
अचानक एक दिन 3 प्रश्न उछाल दिये।
प्रश्न यह थे -
1) ' भगवान कहाँ रहता है?
2) वह कैसे मिलता है
और
3) वह करता क्या है?''

बीरबल इन प्रश्नों को सुनकर सकपका गये और बोले - ''जहाँपनाह! इन प्रश्नों के उत्तर मैं कल आपको दूँगा।"

जब बीरबल घर पहुँचे तो वह बहुत उदास थे।

उनके पुत्र ने जब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया -

''बेटा! आज बादशाह ने मुझसे एक साथ तीन प्रश्न:
✅ 'भगवान कहाँ रहता है?
✅ वह कैसे मिलता है?
✅ और वह करता क्या है?' पूछे हैं।

मुझे उनके उत्तर सूझ नही रहे हैं और कल दरबार में इनका उत्तर देना है।''

बीरबल के पुत्र ने कहा- ''पिता जी! कल आप मुझे दरबार में अपने साथ ले चलना मैं बादशाह के प्रश्नों के उत्तर दूँगा।''

पुत्र की हठ के कारण बीरबल अगले दिन अपने पुत्र को साथ लेकर दरबार में पहुँचे।

बीरबल को देख कर बादशाह अकबर ने कहा - ''बीरबल मेरे प्रश्नों के उत्तर दो।

बीरबल ने कहा - ''जहाँपनाह आपके प्रश्नों के उत्तर तो मेरा पुत्र भी दे सकता है।''

अकबर ने बीरबल के पुत्र से पहला प्रश्न पूछा - ''बताओ!

' भगवान कहाँ रहता है?'' बीरबल के पुत्र ने एक गिलास शक्कर मिला हुआ दूध बादशाह से मँगवाया और कहा- जहाँपनाह दूध कैसा है?

अकबर ने दूध चखा और कहा कि ये मीठा है।

परन्तु बादशाह सलामत या आपको इसमें शक्कर दिखाई दे रही है।

बादशाह बोले नही। वह तो घुल गयी।

जी हाँ, जहाँपनाह! भगवान भी इसी प्रकार संसार की हर वस्तु में रहता है।

जैसे शक्कर दूध में घुल गयी है परन्तु वह दिखाई नही दे रही है।

बादशाह ने सन्तुष्ट होकर अब दूसरे प्रश्न का उत्तर पूछा - ''बताओ!

भगवान मिलता केैसे है ?'' बालक ने कहा -

''जहाँपनाह थोड़ा दही मँगवाइए।

'' बादशाह ने दही मँगवाया तो बीरबल के पुत्र ने कहा -

''जहाँपनाह! क्या आपको इसमं मक्खन दिखाई दे रहा है।

बादशाह ने कहा- ''मक्खन तो दही में है पर इसको मथने पर ही दिखाई देगा।''

बालक ने कहा- ''जहाँपनाह! मन्थन करने पर ही भगवान के दर्शन हो सकते हैं।''

बादशाह ने सन्तुष्ट होकर अब अन्तिम प्रश्न का उत्तर पूछा - ''बताओ! भगवान करता क्या है?''

बीरबल के पुत्र ने कहा- ''महाराज! इसके लिए आपको मुझे अपना गुरू स्वीकार करना पड़ेगा।''

अकबर बोले- ''ठीक है, आप गुरू और मैं आप का शिष्य।''

अब बालक ने कहा- ''जहाँपनाह गुरू तो ऊँचे आसन पर बैठता है
और शिष्य नीचे।

'' अकबर ने बालक के लिए सिंहासन खाली कर दिया और स्वयं नीचे बैठ गये।

अब बालक ने सिंहासन पर बैठ कर कहा - ''महाराज! आपके
अन्तिम प्रश्न का उत्तर तो यही है।''

अकबर बोले- ''क्या मतलब? मैं कुछ समझा नहीं।''

बालक ने कहा- ''जहाँपनाह! भगवान यही तो करता है।

"पल भर में राजा को रंक बना देता है और भिखारी को सम्राट बना देता है।"

🌸🌿जय श्रीकृष्ण🌿🌸

कोणा हिस्सामा तुप ऊन ,ते कोणा हिस्सामा साय ऊनी !मी घरमा बठ्ठास्थीन धाकला व्हतु ,मना हिस्सामा माय ऊनी !दोन्ही भाऊ पैसाना ...
30/10/2015

कोणा हिस्सामा तुप ऊन ,
ते कोणा हिस्सामा साय ऊनी !
मी घरमा बठ्ठास्थीन धाकला व्हतु ,
मना हिस्सामा माय ऊनी !
दोन्ही भाऊ पैसाना भुक्या ,
त्यासना हातमा पैसा ऊना
मी व्हतु प्रेमना भुक्या ,
मना डोकावर मायना हात ऊना !
कोणा ताटमा मटण पुलाव ,
ते कोणा ताटमा दाय ऊनी !
मी घरमा बठ्ठास्थुन धाकला व्हतु ,
मना हिस्सामा माय ऊनी !
बाप जाताज भाऊस्ना मनमा वाटा घुसना !
आयी देखीनी जणु मायना कलेजामा काटा घुसना !
कोले खेत सम्मद बैल ऊनात ,
ते कोले दुध-दुभती गाय ऊनी !
मी घरमा बठ्ठस्थुन धाकला व्हतु,
मना हिस्साले माय ऊनी !
वावरमा दिनरात बाप राबना !
तवय यास्ले घरन छप्पर लाभन !
माले मनी मनी माय भेटनी ,
माले मायना पदर लाभना !

जेवढ लिखता ऊन तेवढ लिख!
मी घरमा बठ्ठास्थुन धाकला व्हतु ,
मना हिस्सामा माय ऊनी !
मी घरमा बठ्ठास्थुन धाकला व्हतु ,
मना हिस्सामा माय ऊनी !

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28/10/2015

आपण आपल्या सोबत घेऊन फिरतो ते आपलं अस्तित्व असतं आणि जे आपल्या माघारी चर्चिल जातं ते आपलं व्यक्तिमत्व आसतं आणि व्यक्तिमत्व जर स्वच्छ असेल तर आपल्या अस्तित्वाला सुध्दा नेहमी लोकांचा मुजरा असतो....!
🌻🍁 सुप्रभात. 🍁 🌻
🍂सुंदर दिवसाच्या सुंदर शुभेच्छा🍂

सनी लिओन विरुध्द धुळ्यात तक्रार!
25/05/2015

सनी लिओन विरुध्द धुळ्यात तक्रार!

सनी लिओन ला हाकलुन द्या!
25/05/2015

सनी लिओन ला हाकलुन द्या!

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