**IR / Relations with Neighbours**
=>"भारत की अफगानिस्तान में 'सॉफ्ट पावर' की कूटनीति"
- अफगानिस्तान में तालिबान की बढ़ती ताकत और अफगान की नई सरकार की पाकिस्तान के साथ बढ़ते रिश्तों की गंभीरता को समझने के बावजूद भारत अपनी 'सॉफ्ट पावर' की कूटनीति जारी रखेगा।
- अपनी इस कूटनीति के तहत अफगानिस्तान में अभी तक 2.5 अरब डॉलर का निवेश कर चुका भारत आने वाले दिनों में और मदद देने की तैयारी में है।
- इसके तहत भारत अफगानिस्तान में कृषि को बढ़ावा देने के साथ ही वहां रेलवे नेटवर्क के विस्तार में भी मदद करेगा।
- पिछले एक दशक से भारत वहां सॉफ्ट पावर की रणनीति लागू किये हुए है। इसके तहत ही न सिर्फ काबुल में संसद भवन का निर्माण किया गया है बल्कि वहां 218 किलोमीटर लंबी जारंग-दालेरम राजमार्ग का निर्माण किया गया। अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर पावर ट्रांसमिशन लाइन बनाने में भी भारत की अहम भूमिका रही।
- इसके अलावा स्वास्थ्य सेवा सुधारने में भी भारत ने मदद की है। इन सभी उपायों से अफगानियों के दिल में भारत की बहुत अच्छी छवि बनी है। यही बात पाकिस्तान को सबसे ज्यादा नागवार गुजरती है। तालिबान ने कई बार भारतीय समर्थन या निवेश से तैयार हो रहे संस्थानों पर हमला भी बोला है।
- हालांकि घनी के राष्ट्रपति बनने के बाद भले ही भारत और अफगानिस्तान के बीच रिश्तों में वह पहले वाली गर्माहट न रही हो लेकिन सरकार इसका असर अपनी सॉफ्ट पावर रणनीति पर नहीं पड़ने देना चाहती है। अप्रैल, 2015 में अफगानिस्तान के नए राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ घनी भारत की यात्रा पर आए थे। तब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर भारतीय निवेश को बढ़ाने का आग्र्रह किया था।
Pratigya IAS Academy
Pratigya IAS Academy, is one of leading learning institution and was established with an aim to dev
**River Conservation**
=>"अस्तित्व बचाने को जूझ रहीं "सभ्यता की जननी"
- जिनके आंगन में हजारों वर्षों से मानव सभ्यता फली-फूली, वे ही अपना अस्तित्व" बचाने को संघर्ष कर रहीं हैं। "सभ्यता की जननी" नदियों की हकीकत आज कुछ ऐसी ही है। जो हाल गंगा-यमुना का है वैसी पीड़ा में देश की 275 नदियां हैं।
- सबसे चिंताजनक बात यह है कि जीवनदायिनी नदियों की हालत सुधरने के बजाय बदतर हो रही है। इनको निर्मल और अविरल बनाने की राह में सबसे बड़ा गतिरोध उन राज्यों की उदासीनता है जिनको ये पीने का पानी देती हैं, जिनके खेतों को सींचती हैं और जिनके शहरों की गंदगी को बहाकर ले जाती हैं।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक देश की 445 नदियों में से 275 नदियां प्रदूषित हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से असम तक देश के हर कोने में नदियां प्रदूषण के बोझ से दबी जा रही हैं। इन नदियों के अगर प्रदूषित खंड गिनें तो उनकी संख्या 302 है। स्थिति कितनी भयावह है इसका अंदाजा इससे लगता है कि देश में नदियों की प्रदूषित धारा की कुल लंबाई 12,363 किलोमीटर है।
- नदियों के इन प्रदूषित खंडों को अगर एक ही दिशा में जोड़ दिया जाए तो प्रदूषण की यह धारा दिल्ली से न्यूयार्क तक पहुंच जाएंगी। अहम तथ्य यह है कि प्रदूषित नदियों की संख्या बीते पांच साल में दोगुनी हुई है। 2009 में लगभग सवा सौ नदियां ही प्रदूषित थीं।
- रेट का अवैध खनन ,
- नदियों के तटों का अतिक्रमण,
- नदियों में जमा होने वाली गड और उथलापन अन्य समस्याएं हैं।
=>नदियों में बहता है सीवेज
- आखिर क्या वजह है कि नदियां इतनी तेजी से नाले में बदलती जा रही हैं? इनको अविरल और निर्मल बनाने में सबसे बड़ा गतिरोध क्या है? सबसे बड़ा गतिरोध है शहरों से निकलने वाला सीवेज जो अधिकांशतः साफ किए बगैर नदियों में बहता है। देश में 650 महानगर, शहर और कस्बे हैं जिनकी गंदगी इन नदियों में जा रही है।
- वर्ष 2009 में इन शहरों से प्रतिदिन 38,254 मिलियन लीटर गंदगी नदियों में गिर रही थी जो अब बढ़कर 62,000 मिलियन लीटर प्रतिदिन हो गई है। जबकि देश में मात्र 18,883 एमएलडी सीवेज को ही साफ करने की क्षमता है। दरअसल शहरों को रोजाना जितने पीने के पानी की आपूर्ति होती है उसका 80 प्रतिशत सीवेज के रूप में बाहर आता है।
=>औद्योगिक इकाइयां कचरा डालती हैं
- नदियों को साफ रखने में दूसरा बड़ा गतिरोध है औद्योगिक गंदगी। देश की सभी नदियों में कितना औद्योगिक कचरा और गंदगी रोजाना प्रवाहित होती है इसके तो आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं लेकिन गंगा में जाने वाली औद्योगिक गंदगी से इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक 764 प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयां गंगा में रोजाना 501 एमएलडी से अधिक गंदगी बिना साफ किए प्रवाहित करती हैं। इनमें अधिकांश कानपुर के पास जाजमऊ की टेनरियां हैं।
=>कानून का सख्ती से पालन नहीं
- ऐसा नहीं है कि गंदगी रोकने के लिए कानूनी प्रावधान न हो। जल प्रदूषण नियंत्रण और रोकथाम कानून 1974 की धारा-24 के तहत किसी धारा या कुएं का इस्तेमाल प्रदूषित पदार्थ बहाने के लिए नहीं किया जा सकता। लेकिन प्रशासन ने कभी इन प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की कोशिश नहीं की।
- राज्य सरकारें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए धन और बिजली की कमी का रोना रोती हैं लेकिन विडंबना यह है कि कई नदियों से जलविद्युत उत्पादन के बावजूद उन नदियों को साफ रखने को वे बिजली मुहैया नहीं करातीं। पर्यावरणविद नदियों पर बने बांधों को भी नदी पर्यावरण बनाए रखने के लिए बड़ा गतिरोध मानते हैं। इसके चलते जलीय जीव-जंतुओं का आवागमन बाधित होता है।
=>प्रदूषित नदियां
1. उत्तर प्रदेश- गोमती, हिंडन, काली, रामगंगा, राप्ती, रिहंद, साइ, सरयू, गंगा, यमुना, कोसी
2. उत्तराखंड- गंगा, सुसवा, धेला, भेल्लां, कोसी।
3. बिहार- गंगा, हरबोरा, मनुसमार, रामरेखा, सीरसिआ
4. दिल्ली- यमुना
5. हरियाणा- यमुना, घग्गर
6. झारखंड- बोकारो, दामोदर, जुमर, कारो, कोएल, नार्थ कोएल, सांख, सबर्णरेखा
7. पंजाब- घग्गर, सतलुज
8. छत्तीसग़ढ़- हसदेव, केलो, खारुन, महानदी, शिवनाथ
=>क्यों जरूरी है नदियों को बचाना
- फिलहाल देश में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता सालाना 2,208 घन मीटर है। ब्रहमपुत्र और बराक नदी बेसिन में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 16,589 घन मीटर है जबकि यह साबरमती बेसिन में मात्र 360 घन मीटर है।
- अगर ब्रहमपुत्र और बराक को अलग रखें तो देश के बाकी भागों में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता मात्र 1583 घन मीटर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1000 घन मीटर से कम होने पर चिंताजनक माना जाता है।
- ब्रह्मापुत्र नदी को छोड़ दें तो उत्तर भारत में कोई भी ऐसी नदी नहीं है जो मौजूदा प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 2,209 घन मीटर के स्तर को बरकरार रख सके। फिलहाल देश में जल के कुल उपभोग में उद्योग जगत की हिस्सेदारी मात्र आठ प्रतिशत है। औद्योगिकीकरण तेज होने पर 2025 में यह बढ़कर 18 प्रतिशत होने का अनुमान है।
**Multi-purpose project**
=>"लखवाड़ परियोजना"
- 27 साल बाद यमुना घाटी में प्रस्तावित तीन सौ मेगावाट की लखवाड़ जल विद्युत परियोजनाफिर से शुरू होगी। परियोजना पर 3966.51 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
- परियोजना के पूरा होने पर हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान को न केवल पीने का पानी मुहैया होगा, बल्कि करीब 33,760 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई भी की जा सकेगी। 2021 तक परियोजना निर्माण पूरा होने का अनुमान है।
- देहरादून के पास लखवाड़ में प्रस्तावित इस जल विद्युत परियोजना के निर्माण पर खर्च होने वाली 90 फीसद धनराशि केंद्र वहन करेगा, शेष राज्य सरकार वहन करेगी।
- गौरतलब है कि लखवाड़ परियोजना का निर्माण वर्ष 1985 में शुरू हुआ। करीब 25 से 30 फीसद काम पूरा होने के बाद आर्थिक तंगी के कारण 1992 में परियोजना बंद कर दी गई। तब परियोजना निर्माण सिंचाई विभाग कर रहा था। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद इसके निर्माण का जिम्मा एनएचपीसी (नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन) को सौंपा गया।
- आपदा के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार तत्कालीन केंद्र सरकार ने टौंस, यमुना, अलकनंदा और भागीरथी नदी पर निर्माणाधीन परियोजनाओं पर रोक लगा दी। बाद में राज्य सरकार की पैरवी के बाद यमुना नदी पर परियोजना निर्माण को स्वीकृति मिल गई।
**Security**
=>"अगाती और मिनिकॉय द्वीपों पर आव्रजन चेक पोस्ट: अगाती और मिनिकॉय से भी हो सकेगा भारत में प्रवेश और निकासी"
- केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लक्षद्वीप के दो छोटे द्वीपों अगाती और मिनिकॉय को भारत में प्रवेश और निकासी का आधिकारिक पारगमन (ट्रांजिट) केंद्र घोषित किया है।
- अगाती का क्षेत्रफल 3.84 वर्ग किमी और मिनिकॉय का 4.80 वर्ग किमी है। मिनिकॉय सबसे व्यस्त शिपिंग मार्ग के निकट है और मालदीव के उत्तरी द्वीप से 130 किमी दूर है।
- गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि इन दोनों द्वीपों पर आव्रजन चेक पोस्ट बनाया गया है। किसी भी श्रेणी का यात्री वैध यात्रा दस्तावेज दिखाकर यहां से भारत में प्रवेश कर सकता है।
- इसमें 30 जून 2015 से लक्षद्वीप के पुलिस अधीक्षक को आव्रजन जांच के लिए "प्रशासनिक प्राधिकरण" नियुक्त किया गया है।
- मंत्रालय के अनुसार इन दोनों प्रवेश बिंदुओं से जहाज मुख्यतः लग्जरी क्रूज को भारत प्रवेश में आसानी होगी। उन्हें भारत में प्रवेश और निकासी में कम समय लगेगा।
=>देश में 82 आव्रजन केंद्र
- देश में अभी 82 आव्रजन केंद्र काम कर रहे हैं। इनमें से 37 आव्रजन ब्यूरो के तहत काम कर रहे हैं। शेष स्थानीय राज्य सरकारों के तहत काम कर रहे हैं।
- इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नाई, अमृतसर, बेंगलुरु, हैदराबाद, कालीकट, कोच्चि, तिरुवनंतपुरम, लखनऊ और अहमदाबाद में 12 क्षेत्रीय विदेशी पंजीकरण ऑफिस काम कर रहे हैं।
- 11 स्थानों पर मुख्य आव्रजन ऑफिस हैं। अन्य स्थानों पर वहां के संबंधित पुलिस अधीक्षक या नियुक्त अधिकारी विदेशी पंजीकरण कार्यालय के लिए काम कर विदेशी यात्रियों की मदद करते हैं।
**Climate change**
=>"स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है जलवायु परिवर्तन"
- जलवायु परिवर्तन मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गया है। इस खतरे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगर इसे काबू में नहीं किया गया तो पिछले 50 वर्षों में स्वास्थ्य के मोर्चे पर जितनी उपलब्धियां हासिल की गई हैं, वे सब नष्ट हो जाएंगी। लांसेट कमीशन आन हेल्थ एंड क्लाइमेट चेंज ने अपनी रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है।
- वर्ष 2015 की अपनी रिपोर्ट में कमीशन ने कहा है, "जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को मौसम के मिजाज में अचानक आ रहे बदलाव से समझा जा सकता है।
- आए दिन बाढ़, सूखा, तूफान और भयंकर गर्मी जैसी प्राकृतिक आपदाओं की आए दिन पुनरावृत्ति से मानव स्वास्थ्य सीधे प्रभावित हो रहा है।"
- कमीशन के अध्ययन के अनुसार, "जलवायु परिवर्तन मानव के जीवन पर अप्रत्यक्ष तरीके से भी प्रतिकूल असर डाल रहा है। यह संक्रमण के बदलते तौर-तरीके, उत्सर्जन के प्रभाव, खाद्यान्न की अनिश्चितता और फिर इससे जुड़े कुपोषण के जरिये इंसान की सेहत को खराब कर रहा है।
- ऐसी बीमारियां पैदा हो रही हैं, जिनका जवाब मौजूदा चिकित्सा विज्ञान के पास नहीं रह गया है। रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन की बढ़ती प्रवृत्ति को काबू में करने पर जोर दिया गया है और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने की सिफारिश की गई है।
**Clean Ganga Mission** भुवन गंगा वेब पोर्टल**
=>"गंगा नदी के प्रदूषण पर निगरानी के लिए जियोस्पेशियल और क्राउड सोर्सिंग टेक्नोलॉजी का होगा उपयोग"
- सरकार के प्रमुख कार्यक्रम गंगा सफाई मिशन के लिए प्रभावी योजना बनाने और उस पर निगरानी के लिए जल संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय गंगा सफाई मिशन (एनएमसीजी) नदी विकास और गंगा संरक्षण तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के राष्ट्रीय सुदूर संवेदी केन्द्र (एनआरएससी) के बीच एक सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए।
- इस सहमति ज्ञापन का उद्देश्य गंगा नदी में प्रदूषण की निगरानी के लिए जियोस्पेशियल (किसी विशेष स्थान से जुड़े आंकड़ों के संकेत देना) और क्राउड सोर्सिंग (इंटरनेट के जरिये अनेक लोगों से परियोजना के बारे में जानकारी हासिल करना) करना है।
=>"भुवन गंगा वेब पोर्टल"
- साथ ही भुवन गंगा मोबाइल एप्लीकेशन और वेब पोर्टल की शुरूआत की गई। भुवन गंगा पोर्टल एक विशिष्ट वेब पोर्टल है जिसे गंगा नदी से जुड़ी सभी जियोस्पेशियल परतों के साथ इसरो भुवन के जियोपोर्टल में स्थापित किया गया है।
- इसका इस्तेमाल निर्णय लेने और गंगा सफाई मिशन की योजना बनाने के लिए किया जाएगा। भुवन मोबाइल ऐप आसानी से उपयोग में आने वाला एन्ड्रायड आधारित एप्लीकेशन है जिससे लोग गंगा के पानी की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाले प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों के बारे में सूचना एकत्र कर उसकी जानकारी दे सकेंगे।
- ये मोबाइल ऐप गंगा नदी में प्रदूषण की निगरानी के संबंध में जानकारियां देगा और निर्णयकर्ताओं को हस्तक्षेप की इजाजत देगा। इस एप्लीकेशन का पहला संस्करण डाउनलोड के लिए भुवन गंगा वेब पोर्टल http://bhuvan.nrse.gov.in/ganga पर उपलब्ध है।
- एनएमसीजी ने गंगा सफाई मिशन के लिए प्रभावी योजना बनाने और गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए अंतरिक्ष और अन्य अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने की जरूरत महसूस की।
=>उद्देश्य :-
- आपसी हित के प्रमुख क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता पर निगरानी के लिए जियोस्पेशियल
टेक्नोलॉजी,निगरानी/ क्षेत्र के आंकड़ों की अपलिंकिंग में सामुदायिक भागीदारी के लिए मोबाइल एप्लीकेशन विकसित करना, देखने के लिए भुवन पोर्टल को रूचि के अनुसार बनाना, गंगा बेसिन से जुड़े डेटा सेटों के बारे में पूछताछ और विश्लेषण तथा नदी के पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए जियोस्पेशियल डेटा बेस और वेब आधारित एप्लीकेशन के संबंध में अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय और आवश्यक संपर्क स्थापित करना शामिल है।
24/06/2015
**IT in Agriculture**
=>''फसल बीमा पोर्टल'' और ''मौसम चेतावनी सेवा – नाऊकास्ट''
- राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना के तहत कृषि में मिशन मोड (एनईजीपी-ए) परियोजना का लक्ष्य देश के किसानों हेतु कृषि संबंधी सूचना की समय पर पहुंच सुनिश्चित करके सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के उपयोग के जरिए भारत में कृषि का शीघ्र विकास प्राप्त करना है।
- इस योजना के अंतर्गत कुल 12 कृषि सेवाओं के समूहों के विभिन्न घटकों पर वेब आधारित अप्लिकेशनो का विकास किया जा रहा है, जिनमें कृषि आदान सामग्री, मृदा स्वास्थ्य, अच्छी कृषि पद्धतियां, मौसम, पशुधन, मात्स्यिकी, विपणन, योजनाओं संबंधी सूचना; प्रशिक्षण आदि पर जानकारी शामिल हैं।
=>"किसानों के उपयोग के लिए फसल बीमा पोर्टल"
- देश के कुछ भागों में हाल की मौसम की प्रतिकूल स्थितियों तथा उनकी फसलों के बीमा करने के बारे में उनकी गैर जागरूकता के कारण किसानों द्वारा उठाई गई हानियों की दशा में कृषि बीमा कवर हेतु बीमा और उनके अनुप्रयोग पर भी किसानों के प्रश्नों पर शीघ्र कार्यवाही को सक्षम बनाने वाले बीमा पोर्टल की तत्काल आवश्यकता महसूस की गई।
- वर्तमान प्रावधानों के अनुसार किसान 3 स्कीमों के अर्थात राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआईएस), संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एमएनएआईएस) और मौसम आधारित फसल बीमा योजना (डब्ल्यूबीआईएस) के तहत अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं। इसके अलावा देश के कुछ भागों में नारियल पॉम बीमा योजना (सीपीआईएस) भी लागू है, तथापि वर्ष 2014-15 की सांख्यिकी यह दर्शाती है कि केवल लगभग 20 प्रतिशत सकल फसली क्षेत्र बीमित है।
- ऐसे कम कवरेज के पीछे मुख्य कारणों में अन्य बातों के साथ-साथ बीमा उत्पादों और प्रक्रियाओं के बारे में किसानों की अनभिज्ञता तथा कभी-कभी राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआईएस) की तुलना में बहुत अधिक उच्च दर शामिल हैं। बहुधा ये दोनों कारक एक बुरे चक्र के रूप में किसानों को हतोत्साहित करने का कार्य करते हैं।
- अत: त्वरित, शुद्ध और गैर आवर्ती ढंग से 3 मुख्य योजनाओं अर्थात् एनएआईएस, एमएनएआईएस और डब्ल्यूबीआईएस के अंतर्गत अनिवार्य सूचनाओं की प्रविष्टि के लिए एक नया वेब आधारित पोर्टल (www.farmer.gov.in/insurance) तैयार किया गया।
- किसान इस सुविधा के माध्यम से विभिन्न कृषि बीमा कंपनियों के डेटाबेस में जाकर उनके क्षेत्र में आबंटित विभिन्न बीमा योजनाओं का विवरण व लागू प्रीमियम की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। संबंधित राज्यों के विभिन्न जिलों में अधिसूचित विभिन्न बीमा योजनाओं की ऑनलाइन डाटा एंट्री की सुविधा से गलतियां होने की संभावना कम होने के साथ ही किसान को उनके द्वारा चाही जानकारी तुरन्त व सही मिल सकेगी। बीमा पोर्टल www.farmer.gov.in/insurance के मुख्य पृष्ठ पर विस्तृत प्रक्रिया दी गई है।
=>"किसानों को प्रतिकूल मौसम की जानकारी एस एम एस द्वारा देने के लिए तत्कालिक पूर्वानुमान (NOWCAST) सेवा"
- मृदा विज्ञान मंत्रालय के तहत भारत का मौसम विज्ञान विभाग द्वारा तथा पूरे देश में फैले हुए 130 एग्रोमेट फील्ड यूनिटों द्वारा मौसम व सूचना तथा कृषि मौसम विज्ञानीय परामर्श सृजित की जाती तथा उनका प्रसार किया जाता है, तथापि ये परामर्श पहले सृजित किए जाते हैं तथा बहुत बड़े क्षेत्र को कवर करते हैं अत: स्थानीय कृषि पारिस्थितिकीय विचलनों के कारण उनकी शुद्धता की हमेशा ही एक सीमा रही है।
- इस स्थिति से निपटने के लिए आईएमडी ने 17 डोपलर रडार स्थापित किए हैं, जो तडित झंझावात ओलावृष्टि आदि जैसी उग्र मौसम संबंधी स्थिति के संबंध में मौसम केंद्रों में सूचना फीड करता है। इन उग्र स्थितियों के लिए इन मौसम केन्द्रों में से 146 लगातार डाटा सृजित कर रहे हैं।
- प्रभावित क्षेत्रों में किसान समय पर इस सूचना को पूर्व में प्राप्त नहीं कर पाते थे, क्योंकि फार्म स्तर पर आईएमडी वेबसाईट तक पहुंच की एक सीमा थी।
- इस पहल के अंतर्गत आईएमडी से सृजित उग्र मौसम संबंधी डाटा को वेब सर्विस का उपयोग करते हुए एम किसानपोर्टल पर डाला जाता है। एम किसान पोर्टल द्वारा प्रभावितजिले/प्रखंडों में स्थित किसानों को उग्र मौसम स्थिति से संबंधित सूचना एसएमएस द्वारा स्वत: और लगातार दी जाती है।
- यह प्रौद्योगिकीय सफलता कृषि एवं सहकारिता विभाग द्वारा तैयार किए गए एम किसान पोर्टल, आईएमईडी द्वारा अपनाए गए मौसम प्रौद्योगिकियों और एनआईसी के जीआईएसपोर्टल का संयुक्त प्रयास है। अग्रिम में जारी चेतावनियों को वेब पर भी डिस्पले किया जाता है।
Note:- कृषि मंत्रालय का यह प्रयास किसानों को विषम मौसम से निपटने में सहायता करेगा।
Login Insurance
05/06/2015
A marathon was organised by Pratigya IAS Academy and M.P Biodiversity Board on the occassion of World Environment Day (05.06.15)
04/06/2015
Prizes for Marathon 05/06/15
04/06/2015
Run for Environment, A Marathon is organised by Pratigya IAS Academy on 05/06/15 ( World Environment Day )
Pratigya in Newz....
Vacancy:
SSC CGL (Tier-I) Exam Vacancy Details:
Name of the Examination: Combined Graduate Level (Tier-I) Examination, 2015
Name of the Post:
I. Group B Posts:
1. Assistant
2. Assistant (Cypher)
3. Inspector, (Central Excise)
4. Inspector (Preventive Officer)
5. Inspector (Examiner)
6. Assistant Enforcement Officer
7. Sub Inspector
8. Inspector of Posts
9. Statistical Investigator Gr.II
10. Inspector
II. Group C Posts:
1. Inspector of Income Tax
2. Divisional Accountant
3. Auditor
4. Accountant/ Junior Accountant
5. Upper Division Clerk
6. Tax Assistant
7. Compiler
8. Sub Inspector
Age Limit: Candidates age limit up to 30 years for Sub Inspector (NIA) & Asst Enforcement Officer, 32 years for Statistical Investigator Gr. II post, 20-27 years for Assistant & Tax Asst (CBEC), 21-27 years for Assistant (Intelligence Bureau), 20-30 years for Sub Inspector (Central Bureau of Investigation), 18-25 years for Sub Inspector (Group C), 18-27 years for all remaining posts as on 01-08-2015. Age relaxation will be applicable as per the rules.
Educational Qualification: Candidates should possess Bachelors Degree with Economics/ Statistics/ Mathematics as compulsory or Elective subject for Compiler Post, Bachelor’s Degree with Statistics as one of the subjects at degree level for Statistical Investigator Gr .II Post, Bachelor’s Degree from a recognized University or equivalent for All other Posts.
Selection Process: Candidates will be selected on the basis of their performance in three Tiers (Tier-I, Tier-II) (i.e. Written examination (Objective Multiple Choice Type)) & Tier-III (i.e. Personality Test cm Interview/ Computer Proficiency Test/ Skill Test (wherever applicable)/ Document Verification).
Application Fee: Candidates should have to pay the fee of Rs. 100/-through online mode and offline mode. Fee is exempted for all Women candidates and candidates belonging to Scheduled Caste, Scheduled Tribe, Physically Handicapped and Ex-Servicemen eligible for reservation as per Govt. orders.
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