अभ्युदय IAS

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Togetherness brings success.....

22/12/2023

पहलवान भाई बजरंग पूनिया जी का प्रधानमंत्री जी को लिखा पत्र सभी को पढ़ना चाहिए।

माननीय प्रधानमंत्री जी,

उम्मीद है कि आप स्वस्थ होंगे. आप देश की सेवा में व्यस्त होंगे. आपकी इस भारी व्यस्तता के बीच आपका ध्यान हमारी कुश्ती पर दिलवाना चाहता हूं. आपको पता होगा कि इसी साल जनवरी महीने में देश की महिला पहलवानों ने कुश्ती संघ पर काबिज बृजभूषण सिंह पर सेक्सुएल हरासमैंट के गंभीर आरोप लगाए थे, जब उन महिला पहलवानों ने अपना आंदोलन शुरू किया तो मैं भी उसमें शामिल हो गया था. आंदोलित पहलवान जनवरी में अपने घर लौट गए, जब उन्हें सरकार ने ठोस कार्रवाई की बात कही. लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी जब बृजभूषण पर एफआईआर तक नहीं की तब हम पहलवानों ने अप्रैल महीने में दोबारा सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया ताकि दिल्ली पुलिस कम से कम बृजभूषण सिंह पर एफआईआर दर्ज करे, लेकिन फिर भी बात नहीं बनी तो हमें कोर्ट में जाकर एफआईआर दर्ज करवानी पड़ी. जनवरी में शिकायतकर्ता महिला पहलवानों की गिनती 19 थी जो अप्रैल तक आते आते 7 रह गई थी, यानी इन तीन महीनों में अपनी ताकत के दम पर बृजभूषण सिंह ने 12 महिला पहलवानों को अपने न्याय की लड़ाई में पीछे हटा दिया था. आंदोलन 40 दिन चला. इन 40 दिनों में एक महिला पहलवान और पीछे हट गईं. हम सबपर बहुत दबाव आ रहा था. हमारे प्रदर्शन स्थल को तहस नहस कर दिया गया और हमें दिल्ली से बाहर खदेड़ दिया गया और हमारे प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी. जब ऐसा हुआ तो हमें कुछ समझ नहीं आया कि हम क्या करें. इसलिए हमने अपने मेडल गंगा में बहाने की सोची. जब हम वहां गए तो हमारे कोच साहिबान और किसानों ने हमें ऐसा नहीं करने दिया. उसी समय आपके एक जिम्मेदार मंत्री का फोन आया और हमें कहा गया कि हम वापस आ जाएं, हमारे साथ न्याय होगा. इसी बीच हमारे गृहमंत्री जी से भी हमारी मुलाकात हुई, जिसमें उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि वे महिला पहलवानों के लिए न्याय में उनका साथ देंगे और कुश्ती फेडरेशन से बृजभूषण, उसके परिवार और उसके गुर्गों को बाहर करेंगे. हमने उनकी बात मानकर सड़कों से अपना आंदोलन समाप्त कर दिया, क्योंकि कुश्ती संघ का हल सरकार कर देगी और न्याय की लड़ाई न्यायालय में लड़ी जाएगी, ये दो बातें हमें तर्कसंगत लगी.

लेकिन बीती 21 दिसंबर को हुए कुश्ती संघ के चुनाव में बृजभूषण एक बार दोबारा काबिज हो गया है. उसने स्टेटमैंट दी कि "दबदबा है और दबदबा रहेगा." महिला पहलवानों के यौन शोषण का आरोपी सरेआम दोबारा कुश्ती का प्रबंधन करने वाली इकाई पर अपना दबदबा होने का दावा कर रहा था. इसी मानसिक दबाव में आकर ओलंपिक पदक विजेता एकमात्र महिला पहलवान साक्षी मलिक ने कुश्ती से सन्यास ले लिया. हम सभी की रात रोते हुए निकली. समझ नहीं आ रहा था कि कहां

जाएं, क्या करें और कैसे जीएं. इतना मान-सम्मान दिया सरकार ने, लोगों ने. क्या इसी सम्मान के बोझ तले दबकर घुटता रहूँ. साल 2019 में मुझे पद्मश्री से नवाजा गया. खेल रत्न और अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया. जब ये सम्मान मिले तो मैं बहुत खुश हुआ. लगा था कि जीवन सफल हो गया. लेकिन आज उससे कहीं ज्यादा दुखी हूं और ये सम्मान मुझे कचोट रहे हैं. कारण सिर्फ एक ही है, जिस कुश्ती के लिए ये सम्मान मिले उसमें हमारी साथी महिला पहलवानों को अपनी सुरक्षा के लिए कुश्ती तक छोड़नी पड़ रही है.

खेल हमारी महिला खिलाड़ियों के जीवन में जबरदस्त बदलाव लेकर आए थे. पहले देहात में यह कल्पना नहीं कर सकता था कि देहाती मैदानों में लड़के-लड़कियां एक साथ खेलते दिखेंगे. लेकिन पहली पीढी की महिला खिलाड़ियों की हिम्मत के कारण ऐसा हो सका. हर गांव में आपको लड़कियां खेलती दिख जाएंगी और वे खेलने के लिए देश विदेश तक जा रही हैं. लेकिन जिनका दबदबा कायम हुआ है या रहेगा, उनकी परछाई तक महिला खिलाड़ियों को डराती है और अब तो वे पूरी तरह दोबारा काबिज हो गए हैं, उनके गले में फूल-मालाओं वाली फोटो आप तक पहुंची होगी. जिन बेटियों को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड अंबेसडर बनना था उनको इस हाल में पहुंचा दिया गया कि उनको अपने खेल से ही पीछे हटना पड़ा. हम "सम्मानित" पहलवान कुछ नहीं कर सके. महिला पहलवानों को अपमानित किए जाने के बाद मैं "सम्मानित" बनकर अपनी जिंदगी नहीं जी पाउंगा. ऐसी जिंदगी कचोटेगी ताउम्र मुझे. इसलिए ये "सम्मान" मैं आपको लौटा रहा हूं.

Bajrang Punia SakshiMalik Kadian

Photos from अभ्युदय IAS's post 06/12/2023

आज संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर जी की पुण्यतिथि है। संविधान के सबसे बड़े विरोधियों ने आज के दिन को कलंकित करने के लिये एक बड़े षड्यंत्र को अंजाम दिया था ताकि बाबासाहब की यादों को स्मृति से ओझल किया जा सके।

आज देश में हर जगह लोकतंत्र के ऊपर मंडराते ख़तरे पर सवाल है ऐसे समय में पुण्यतिथि के दिन बाबासाहब की इस चेतावनी को भी याद करने का दिन है;

“हमें ‘जॉन स्टुअर्ट मिल’ के उस कथन को अवश्य याद रखना चाहिए जो उन्होंने लोकतंत्र में दिलचस्पी रखने वाले सभी लोगों को चेताते हुए दिया है कि “किसी भी महान् व्यक्ति के पैरों में अपनी आज़ादी मत रखो, और न ही उस पर इतना विश्वास करो जो उसे आपके संस्थानों को नष्ट करने में सक्षम बनाता है।” उन महान् पुरुषों के प्रति आभारी होने में कुछ भी गलत नहीं है, जिन्होंने देश के लिए अपने पूरे जीवन भर सेवाएं दी हैं। लेकिन कृतज्ञता की भी सीमाएं हैं। जैसा कि Daniel O’Connell ने कहा है “कोई भी व्यक्ति अपना सम्मान खोकर कृतज्ञ नहीं हो सकता, कोई भी स्त्री अपनी पवित्रता खोकर कृतज्ञ नहीं हो सकती और कोई भी राष्ट्र अपनी स्वतंत्रता खोकर कृतज्ञ नहीं हो सकता।” यह सावधानी किसी भी अन्य देश के मामले की तुलना में भारत के मामले में कहीं अधिक आवश्यक है। भारत में भक्ति, भक्ति-मार्ग या नायक-पूजा दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में राजनीति में अप्रत्याशित एवं अद्वितीय भूमिका निभाती है। धर्म में, भक्ति आत्मा के उद्धार का मार्ग हो सकता है लेकिन राजनीति में भक्ति या नायक-पूजा गिरावट और तानाशाही के लिए एक निश्चित मार्ग है।”

पुण्यतिथि पर विनम्र नमन। 🙏🏻

23/11/2023

यूपीएससी/एमपीपीएससी की बेसिक कोर्स की हिन्दी माध्यम की अनेक किताबें हैं। इन किताबों की मुझे अब आवश्यकता नहीं है लेकिन आपको आवश्यकता हो सकती है। किसी ज़रूरतमंद साथी, भाई या बहन को आवश्यकता हो तो बतायें। मुझसे मेसेंजर में संपर्क करें।

15/01/2023

Celebrating my 6th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

10/11/2022

भोपाल स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान और चिड़ियाघर!

यह पार्क जो "वन विहार" के नाम से अधिक लोकप्रिय रूप में जाना जाता है, समृद्ध आर्द्रभूमि क्षेत्रों, घास के मैदानों, विभिन्न स्थानों पर पानी के पूल, ऊबड़-खाबड़ ढलानों, मिश्रित बांस की वनस्पतियों के साथ घास से ढके पठार और मिश्रित वृक्षारोपण के विशिष्ट संयोजन क्षेत्र में समृद्ध पुष्प और जीव विविधता का क्षेत्र है!

झीलों के शहर के बीच यह हरा भरा जंगल भोपाल के पर्यावरणीय स्वास्थ्य में योगदान देने वाले कार्बन सिंक के रूप में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह भोपाल की प्रसिद्ध ऊपरी झील (जिसे "बड़ा तालाब" के नाम से भी जाना जाता है) के ठीक बगल में स्थित है, जो एक रामसर साइट है और भोज वेटलैंड की दो झीलों में से एक है।

Photos from अभ्युदय IAS's post 25/10/2022

8वीं सदी में सूर्यग्रहण की खोज की गई. सूर्य और पृथ्वी के मध्य चंद्रमा के आने से पृथ्वी पर सूर्यग्रहण की खगोलीय घटना घटित होती है।

इस वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण..

07/10/2022

कुछ सवाल जिनके जवाब हमें पता होने चाहियेः-

1. भारत को आज़ादी 15 अगस्त 1947 में मिली!
2. मध्य प्रदेश की स्थापना 1 नवम्बर 1956 में हुई!

प्रश्नः तो 15 अगस्त 1947 से 1 नवम्बर 1956 के मध्य मध्य प्रदेश की व्यवस्था क्या थी?

प्रश्नः भारत में भाषायी आधार पर राज्यों के गठन के पीछे क्या तर्क थे?

ऐसे ही कुछ प्रश्नों के जवाब और बहुत सारी कहानियाँ लेकर हम जल्द आ रहे हैं…. आपके बीच

मनोरंजन के साथ पढ़ाई भी!


04/10/2022

प्रिय साथियों! अभ्युदय IAS पर पढ़ने-पढ़ाने का सिलसिला फिर से शुरू किया जा रहा है इस बार पढ़ाई का प्रारूप केवल ऑनलाइन और निःशुल्क रहेगा!
मध्य प्रदेश के वृहद् परिचय से लेकर भारत के भूगोल और इतिहास तक वो सब जो आप जानना चाहेंगे!
शुरुआत विडियो फ़ोर्मेट से करेंगे, आपके सवालों का जवाब अगले एपिसोड में देने का प्रयास करेंगे।
इस बारे में आपके सुझाव आमंत्रित है!

02/10/2022

बापू की जयंती पर चरणों में नमन!

आदरणीय बापू,
अभी थोड़ी देर में तुम्हारे 152 वें जयंती वर्ष की धूमधाम देश में शुरू हो जाएगी. सुबह होते होते यमुना किनारे राजघाट पर कसकर बांधे गए फूलों के चक्र तुम्हें समर्पित किए जाएंगे. ऊंची आवाजों में तुम्हें शांति का मसीहा बताया जाएगा. वह लोग तुम्हारा नाम सबसे ज्यादा लेंगे, जिन्होंने तुम्हारे कातिल के बचाव के लिए चंदा इकट्ठा किया था. जिन्होंने तुम्हारे कत्ल पर मिठाईयां बांटी थी और जो 70 साल से तुम्हें मारने की कोशिश करते करते तुम से हार गए.
लेकिन वे लोग कमजोर नहीं है. वे मारीच हैं. आपको तो पता ही होगा मारीच बहुत खतरनाक है, वह रावण का मामा है. उसके पास माया की तलवार है. लेकिन उस सबसे बढ़कर उसके पास झूठ का अमोघ अस्त्र है. उसने राम का नाम लेकर राम को छला था. उसने राम का नाम लेकर सीता का हरण करवाया था. उसने राम का नाम लेकर लक्ष्मण को विवश कर दिया था और पौराणिक मान्यता तो यह भी है कि राम का नाम लेकर वह तर भी गया था। इस समय देश में लाखों मारीच रात दिन गांधी गांधी चिल्ला रहे हैं. मैं तो कहूंगा जैसे भी सही तुम्हारा नाम तो ले रहे हैं.
लेकिन मैं सोचता हूं कि आज अपने डेढ़ सौवें जन्मदिन पर तुम क्या सोचते, जब तुम्हारे सामने असम से एनआरसी की लिस्ट आती. जब तुम्हें पता चलता कि तुम्हारे देश का आधा इलाका बाढ़ में डूबा हुआ है. जब तुम्हें पता चलता कि कश्मीर लंबे समय से बंद है और पता नहीं कब तक बंद रहेगा.
जब तुम देखते कि मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए नई नई शब्दावली गढ़ी जा रही हैं. कानून के पेच निकाले जा रहे हैं. हर ऐसी युक्ति खोजी जा रही है जिसमें नाम लिए बिना साफ-साफ यह समझाया जा सके कि निशाने पर मुसलमान ही है. वैसे मुझे लगता है कि तुम यह सारी चीजें झेल जाते क्योंकि इन सब की तुम्हें आदत थी. तुम इन्हीं सबसे जूझते हुए तो भारत माता की सेवा कर रहे थे.
लेकिन पता है अब ऐसे विकट शोधार्थी पैदा हो गए हैं जो मोहम्मद अली जिन्ना का काम बड़ी तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं. जिन्ना ने तुम्हारी मौत पर कहा था कि तुम संसार के बहुत बड़े हिंदू थे. अब देश के हिंदूवादी लगातार ऐसा शोध कर रहे हैं जिससे साबित हो कि तुम ईश्वर अल्लाह तेरे नाम के बजाय हिंदुत्ववादी थे. वे चाहते हैं कि भारत और दुनिया तुम्हें एक कुशल सफाई कर्मचारी और भगवाधारी के रूप में पहचाने. मुझे डर है कि बहुत जल्द ऐसी तस्वीरें सामने आएंगी जिनमें तुम्हारी लंगोटी सफेद के बजाय भगवा दिखाई देगी.
तुम्हें जानकर तसल्ली होगी कि आजकल नई पीढ़ी तुम्हारे ब्रह्मचर्य के प्रयोगों में से सेक्स वाला मसाला निकालने की कोशिश करती रहती है. वह तुम्हारे बारे में ऐसी बातें कर रहे हैं जिन्हें चटखारा लेकर कहा सुना जाए और व्हाट्सएप के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए. वे पतन का नंगा नाच खेल रहे हैं.
बापू आजकल रातों में बहुत से लोगों को वैसा ही लगता है जैसा तुम्हें नोआखाली की रातों में लगता था. तुम कहा करते थे कि तुम्हें रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है, चारों तरफ घुप अंधेरा है. तुम यह भी कहते थे कि बस अच्छी बात यह है कि मेरा हौसला नहीं टूटा है. उस दौर में तुम अंधेरी रातों में रामधुन किया करते थे और दिन में पीड़ित मानवता की सेवा करते थे. चारों ओर नफरत से भरी भीड़ से घिरे अल्पसंख्यक हिंदुओं से भी तुम रामधुन करने के लिए ही कहते थे ताकि उनका हौसला बढ़ा रहे.
तुम थे जो अंधेरे में भी हौसला नहीं हारते थे. लेकिन छोटे मोटे लोग कहां इतनी हिम्मत रखते हैं. अब तो ज्यादातर बातों पर तुम्हारे तीन बंदरों का अनर्थ निकालकर पालन किया जा रहा है. लोग हर उस चीज को मान लेते हैं जो उन्हें मनवाई जा रही है. हर जगह कमजोर आदमी को हर अपराध की वजह साबित करने का चलन चल पड़ा है. जो पीड़ित है, दुखी है, कमजोर है, वही अपराधी है. जो शोषक है, दबंग है, उसी के मानवाधिकारों की सबसे ज्यादा चिंता है. और एक चीज जो शायद तुम्हें बहुत कम देखनी पड़ी हो, वह यह कि इंसानियत की बात कहने वाले को कितनी तेज़ी से देशद्रोही साबित किया जाए. तुम्हारे करोड़ों करोड़ देशवासियों के पास इस समय बहुत सारा फालतू समय है, जिसमें वे तुम्हारी और हर अच्छे काम की निंदा करते रहते हैं.
बापू यह बहुत भयानक वक्त है. तुम्हारे वक्त से भी भयानक. वह इसलिए क्योंकि तुम्हारे समय में दुश्मन बहुत साफ था. वह लोगों को बरगला नहीं सकता था. वह कहीं छुप नहीं सकता था. लेकिन इस वक्त में दुश्मन ही रहबर है. हत्यारा ही रक्षक है. देश के विनाश की स्कीमें ही देशभक्ति हैं. उनके हाथों में तिरंगा है. उनके होठों पर राम का नाम है. उनके सीने पर तुम्हारी तस्वीर है. उनके हमलों में संविधान की ढाल है. उनके कुचक्रों पर अदालत की मोहर है. वह इतना जबरदस्त है कि उसे दुश्मन साबित ही नहीं किया जा सकता.
वह भी एक विचार है और तुम भी एक विचार हो. इस समय उनके साथ भीड़ है. भीड़ के पास एक नारा है. यह नारा उस नारे से बहुत उलट है जो तुमने आजादी के लिए लगाया था. बस गनीमत यह है कि तुम अब भी हो. तुम्हारा नाम अब भी उन्हें डराता है. तुम्हारा नाम कल भी उन्हें डराता रहेगा. और डराए भी क्यों नहीं. क्योंकि तुम्हारा विचार सबसे कमजोर लोगों की ताकत पर खड़ा होता है. उसे बंदूक, पैसा और षड्यंत्र की दरकार नहीं है. जब लोग वाकई दुखी हो जाते हैं, जब उन्हें अपना कष्ट साफ-साफ दिखाई देने लगता है तो वह गांधी नाम के नीचे एकजुट होते हैं. वे अमेरिका में काले लोगों का समूह बन जाते हैं और मार्टिन लूथर किंग होते हैं. वे अफ्रीका में नेल्सन मंडेला हो जाते हैं. भारत अभी धुंधलके में है. धुंध छटेगी. तब हम तुम्हारा तमाशा नहीं उत्सव मनाएंगे. लेकिन तुम तो उस दिन भी उपवास ही रखोगे, अपने हर जन्मदिन की तरह. और थोड़ा सा और ज्यादा चरखा चलाओगे, सूत कातोगे अपने हर जन्मदिन की तरह.
सादर प्रणाम
Nehru: Mithak Aur Satya by Piyush Babele

02/10/2022

आदरणीय बापू,
अभी थोड़ी देर में तुम्हारे 152 वें जयंती वर्ष की धूमधाम देश में शुरू हो जाएगी. सुबह होते होते यमुना किनारे राजघाट पर कसकर बांधे गए फूलों के चक्र तुम्हें समर्पित किए जाएंगे. ऊंची आवाजों में तुम्हें शांति का मसीहा बताया जाएगा. वह लोग तुम्हारा नाम सबसे ज्यादा लेंगे, जिन्होंने तुम्हारे कातिल के बचाव के लिए चंदा इकट्ठा किया था. जिन्होंने तुम्हारे कत्ल पर मिठाईयां बांटी थी और जो 70 साल से तुम्हें मारने की कोशिश करते करते तुम से हार गए.
लेकिन वे लोग कमजोर नहीं है. वे मारीच हैं. आपको तो पता ही होगा मारीच बहुत खतरनाक है, वह रावण का मामा है. उसके पास माया की तलवार है. लेकिन उस सबसे बढ़कर उसके पास झूठ का अमोघ अस्त्र है. उसने राम का नाम लेकर राम को छला था. उसने राम का नाम लेकर सीता का हरण करवाया था. उसने राम का नाम लेकर लक्ष्मण को विवश कर दिया था और पौराणिक मान्यता तो यह भी है कि राम का नाम लेकर वह तर भी गया था। इस समय देश में लाखों मारीच रात दिन गांधी गांधी चिल्ला रहे हैं. मैं तो कहूंगा जैसे भी सही तुम्हारा नाम तो ले रहे हैं.
लेकिन मैं सोचता हूं कि आज अपने डेढ़ सौवें जन्मदिन पर तुम क्या सोचते, जब तुम्हारे सामने असम से एनआरसी की लिस्ट आती. जब तुम्हें पता चलता कि तुम्हारे देश का आधा इलाका बाढ़ में डूबा हुआ है. जब तुम्हें पता चलता कि कश्मीर लंबे समय से बंद है और पता नहीं कब तक बंद रहेगा.
जब तुम देखते कि मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए नई नई शब्दावली गढ़ी जा रही हैं. कानून के पेच निकाले जा रहे हैं. हर ऐसी युक्ति खोजी जा रही है जिसमें नाम लिए बिना साफ-साफ यह समझाया जा सके कि निशाने पर मुसलमान ही है. वैसे मुझे लगता है कि तुम यह सारी चीजें झेल जाते क्योंकि इन सब की तुम्हें आदत थी. तुम इन्हीं सबसे जूझते हुए तो भारत माता की सेवा कर रहे थे.
लेकिन पता है अब ऐसे विकट शोधार्थी पैदा हो गए हैं जो मोहम्मद अली जिन्ना का काम बड़ी तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं. जिन्ना ने तुम्हारी मौत पर कहा था कि तुम संसार के बहुत बड़े हिंदू थे. अब देश के हिंदूवादी लगातार ऐसा शोध कर रहे हैं जिससे साबित हो कि तुम ईश्वर अल्लाह तेरे नाम के बजाय हिंदुत्ववादी थे. वे चाहते हैं कि भारत और दुनिया तुम्हें एक कुशल सफाई कर्मचारी और भगवाधारी के रूप में पहचाने. मुझे डर है कि बहुत जल्द ऐसी तस्वीरें सामने आएंगी जिनमें तुम्हारी लंगोटी सफेद के बजाय भगवा दिखाई देगी.
तुम्हें जानकर तसल्ली होगी कि आजकल नई पीढ़ी तुम्हारे ब्रह्मचर्य के प्रयोगों में से सेक्स वाला मसाला निकालने की कोशिश करती रहती है. वह तुम्हारे बारे में ऐसी बातें कर रहे हैं जिन्हें चटखारा लेकर कहा सुना जाए और व्हाट्सएप के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए. वे पतन का नंगा नाच खेल रहे हैं.
बापू आजकल रातों में बहुत से लोगों को वैसा ही लगता है जैसा तुम्हें नोआखाली की रातों में लगता था. तुम कहा करते थे कि तुम्हें रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है, चारों तरफ घुप अंधेरा है. तुम यह भी कहते थे कि बस अच्छी बात यह है कि मेरा हौसला नहीं टूटा है. उस दौर में तुम अंधेरी रातों में रामधुन किया करते थे और दिन में पीड़ित मानवता की सेवा करते थे. चारों ओर नफरत से भरी भीड़ से घिरे अल्पसंख्यक हिंदुओं से भी तुम रामधुन करने के लिए ही कहते थे ताकि उनका हौसला बढ़ा रहे.
तुम थे जो अंधेरे में भी हौसला नहीं हारते थे. लेकिन छोटे मोटे लोग कहां इतनी हिम्मत रखते हैं. अब तो ज्यादातर बातों पर तुम्हारे तीन बंदरों का अनर्थ निकालकर पालन किया जा रहा है. लोग हर उस चीज को मान लेते हैं जो उन्हें मनवाई जा रही है. हर जगह कमजोर आदमी को हर अपराध की वजह साबित करने का चलन चल पड़ा है. जो पीड़ित है, दुखी है, कमजोर है, वही अपराधी है. जो शोषक है, दबंग है, उसी के मानवाधिकारों की सबसे ज्यादा चिंता है. और एक चीज जो शायद तुम्हें बहुत कम देखनी पड़ी हो, वह यह कि इंसानियत की बात कहने वाले को कितनी तेज़ी से देशद्रोही साबित किया जाए. तुम्हारे करोड़ों करोड़ देशवासियों के पास इस समय बहुत सारा फालतू समय है, जिसमें वे तुम्हारी और हर अच्छे काम की निंदा करते रहते हैं.
बापू यह बहुत भयानक वक्त है. तुम्हारे वक्त से भी भयानक. वह इसलिए क्योंकि तुम्हारे समय में दुश्मन बहुत साफ था. वह लोगों को बरगला नहीं सकता था. वह कहीं छुप नहीं सकता था. लेकिन इस वक्त में दुश्मन ही रहबर है. हत्यारा ही रक्षक है. देश के विनाश की स्कीमें ही देशभक्ति हैं. उनके हाथों में तिरंगा है. उनके होठों पर राम का नाम है. उनके सीने पर तुम्हारी तस्वीर है. उनके हमलों में संविधान की ढाल है. उनके कुचक्रों पर अदालत की मोहर है. वह इतना जबरदस्त है कि उसे दुश्मन साबित ही नहीं किया जा सकता.
वह भी एक विचार है और तुम भी एक विचार हो. इस समय उनके साथ भीड़ है. भीड़ के पास एक नारा है. यह नारा उस नारे से बहुत उलट है जो तुमने आजादी के लिए लगाया था. बस गनीमत यह है कि तुम अब भी हो. तुम्हारा नाम अब भी उन्हें डराता है. तुम्हारा नाम कल भी उन्हें डराता रहेगा. और डराए भी क्यों नहीं. क्योंकि तुम्हारा विचार सबसे कमजोर लोगों की ताकत पर खड़ा होता है. उसे बंदूक, पैसा और षड्यंत्र की दरकार नहीं है. जब लोग वाकई दुखी हो जाते हैं, जब उन्हें अपना कष्ट साफ-साफ दिखाई देने लगता है तो वह गांधी नाम के नीचे एकजुट होते हैं. वे अमेरिका में काले लोगों का समूह बन जाते हैं और मार्टिन लूथर किंग होते हैं. वे अफ्रीका में नेल्सन मंडेला हो जाते हैं. भारत अभी धुंधलके में है. धुंध छटेगी. तब हम तुम्हारा तमाशा नहीं उत्सव मनाएंगे. लेकिन तुम तो उस दिन भी उपवास ही रखोगे, अपने हर जन्मदिन की तरह. और थोड़ा सा और ज्यादा चरखा चलाओगे, सूत कातोगे अपने हर जन्मदिन की तरह.
सादर प्रणाम
Nehru: Mithak Aur Satya by Piyush Babele

05/09/2022

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ।
सभी परम आदरणीय गुरुजनों को प्रणाम। मेरे सवालों को विस्तार देने, मेरे अधूरेपन को पूरा करने और मुझे खुद एक शिक्षक बनाने के लिए, उतनी ही शुभकामनायें दोस्तों, मेरे विद्यार्थियों और प्रथम गुरु, माता के सदर चरणों में नमन।
मेरे प्रिय दोस्तों, आप सबका भी मैं अभिनंदन करना चाहता हूँ क्योंकि विद्यार्थी से शिक्षक में रूपांतरित होने की यात्रा में आप सब मेरे साथ रहे और आपने जो भरोसा प्रेम और हौंसला दिया उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं....

03/09/2022

ऐसा व्यक्ति जो किसी अन्य व्यक्ति के हृदय में साहस बोता है, वह सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक होता है।

~ कार्ल वोन नेबेल

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