School Today

School Today

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School Today in one of the renowned and reputed magazines of Bhopal, capital of Madhya Pradesh. It has been published since 1997.

It is a well known fact that Madhya Pradesh has been the center stage of publishing different magazines on multifarious subjects. Nevertheless, there is a visible dearth of a periodical that focuses school education. As an effort to fill this void, in the year 1997 our institution started publishing a periodical “School Today Hindi Masik”, that received overwhelming response from the educational m

19/04/2019

गुड फ्राइडे पर सभी सदस्‍यों को हार्दिक शुभकामनाएं।

12/04/2018

स्कूल टुडे के प्रकाशन के दो दशक पूर्ण हो गए हैं।

30/10/2016

Happy Diwali to all

29/10/2016

मिल कर ऐसी दीवाली ले आएं, अंतिम आदमी के घर के अंधेरे मिट जाएं। सभी देश वासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

09/06/2016

आपको विदित ही होगा कि स्‍कूल टुडे हिन्‍दी मासिक इस महीने अपने प्रकाशन के बीसवें वर्ष में प्रवेष कर रहा है। हमे निर्णय लिया है कि इस प्रकाशन मंच से पालकों जोड़ना होगा। इसी संदर्भ में आपके सुझाव आमंत्रित हैं।

07/05/2016

कल यानी 8 मई को विश्‍व थैलेसीमिया दिवस है। क्‍या है थैलेसीमिया जानने के लिए इसे ज़रूर पढ़े और जनहित में इसे साझा भी करें।

रक्‍तदान से बनते हैं ख़ून के रिश्‍ते
-शाहिद-उल-हुसैनी
यह सवामान्‍य तथ्‍य है कि मानव शरीर को जि़दा रहने के लिए हर पल ऑक्‍सीज़न की आवश्‍यक्‍ता होती है और शरीर में नसों के जाल के माध्‍यम से रक्‍त द्वारा ऑक्‍सीज़न शरीर में प्रवेश करता है, यानी शरीर की प्रत्‍येक हरकत के लिए रक्‍त आवश्‍यक तत्‍व है। ख़ून नही तो जीवन नहीं इस बात से रक्‍त के महत्‍व का अंदाज़ा लगाया जा सकता है इसी वजह से समाज ने 'रक्‍त दान जीवन दान' और 'रक्‍त दान महा दान' जैसे मुहावरों को गढ़ा है। शरीर को जि़दा रखने के लिए इतने महत्‍वपूर्ण और आवश्‍यक तत्‍व की शरीर में जब कमी हो तो उसे जीने के लिए दूसरों के रक्‍त का सहारा लेने को विवश होना पड़ता है। संसार में कुछ ऐसे बदनसीब बच्‍चे हैं जो दूसरों के ख़ून के सहारे अपनी सांसें लेने को मजबूर हैं। यदि उन अभागे बच्‍चों को साहसी लोग अअपना रक्‍त दान नहीं करें तो उनकी सांसें रुक जाएंगी और उनकी जि़न्‍दगी का अंत हो जाएगा। ऐसे कुछ अभागे बच्‍चे थैलेसीमिया नामक बीमारी से आक्रांत हैं। थैलेसीमिया रक्‍त से संबंधित अनुवांशिक बीमारी है जो बच्‍चे को जन्‍म से ही होती है अभी तक पूरे विश्‍व में थेल्‍ेसीमिया का इलाज केवल दवाओं से करना संभव नहीं हो सका है।
क्‍यों करें रक्‍तदान ?
थैलेसीमिया से आक्रांत बच्‍चों को जीवित रखने के लिए 15 से 30 दिन में ब्‍लड देने की आवश्‍यकता होती है। किसी व्‍यक्ति के द्वारा दान किया गया एक यूनिट ब्‍लड 15-30 दिन की आयु प्रदान करता है। आए दिन देश और प्रदेश में कितने ही लोग दुर्घटना के शिकार होते हैं। उनमें अधिकांश की मृत्‍यु अधिक रक्‍त रिसाव के कारण होती है इससे न जाने कितनी महिलाओं की मांग का सिंदूर मिट जाता है। ज़रा सोचें! आपके द्वारा किया गया रक्‍तदान किसी महिला के सिंदूर की रक्षा कर सकता है, किसी माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा छिन सकता है और अनेक माता-पिता के बुढ़ापे के सहारे को सुरक्षित रख सकता है, अनेक मासूमों को यतीम बनने से रोक सकता है और अनेक माता-पिताओं के बच्‍चों को जीवनदान दे सकता है। क्‍योंकि कृतिम रक्‍त का उत्‍पादन नहीं किया जा सकता है, जीवन बवाने के लिए रक्‍तदान ही एकमात्र उपाय है। मानव शरीर में को ख़ून की आवश्‍यकता पड़ने पर उसे किसी मानव का ही रक्‍त लेकर ज़रूरतम़दों को चढ़ाया जा सकता है। आप रक्‍तदान कर किसी का जीवन बचाना नहीं वाहेंगे? साचिये तो सही किसी व्‍यक्ति की जान बचाकर उसके परिवार में होने वाला सूनेपन को बचाने से बड़ा पुनीत कार्य और क्‍या हो सकता है ?
रक्‍तदान : कुछ तथ्‍य
रक्‍तदान करने में केवल 3-5 मिनट का समय लगता है। प्रत्‍येक 3 माह में आप पुन: रक्‍तदान कर सकते हैं। सामान्‍य मानव शरीर में 5-6 लीटर रक्‍त होता है जिसका 20 प्रतिशत भाग अतिशेश होता है इस अतिशेश रक्‍त का 1/4 भाग 350 मि.ली. रक्‍तदान में लिया जाता है। रक्‍तदान करने में कोई शारीरिक हानी नहीं होती। 18 वर्ष का आयु से लेकर 65 वर्ष की आयु वाला कोई भी स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति रक्‍तदान कर सकता है। रक्‍तदान किसी भी शासकीय हाॅस्पिटल अथवा रेडक्रास सोसायटी के ब्‍लड बैंक में पहुंचकर किया जा सकता है।
अतीत मेंरक्‍तदान करने से लोग कतराते थे लेकिन जैसे-जैसे समाज शिक्षित जागरूक हो रहा है अब लोग स्‍वैछिक रक्‍तदान करने के लिए आगे आ रहे हैं। लेकिन वर्तमान में रक्‍तदान की जितनी आवश्‍यकता है उतना रक्‍तदान अभी भी नहीं हो पा रहा है। रक्‍तदान को बढ़ावा देने के लिए हमें अभी ओर प्रयास करने की आवश्‍यकता है।
आइये कुछ हट कर करें
- जन्‍मदिन या शादी की सालगिराह जैसे अवसरों पर रक्‍तदान करदूसरों को तोहफा दें।
- घर के बुजुर्गों की बरसी या श्राद्ध के दिन रक्‍तदान कर श्रद्धांजलि दें।
- संस्‍थान के स्‍थापना दिवस को कमैचारी/अधिकारी रक्‍तदान करके यादगार बना सकते हैं।

Photos 06/05/2016

Come to listed Addas on May 8th a help chaiforcancer.org PLEASE SHARE..

Photos 18/08/2015

is like a , It smile at you if you at it...
everyone a very very
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‘Education system needs serious reforms’ 22/03/2014

Ur Kind Attention is required

‘Education system needs serious reforms’ The education system in the country need serious reforms to make higher education accessible to students from all sections of the society, VIT Vice-Chancellor G. Viswanathan said.

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