Professorthinker Philosophy & Science

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My name is Raghunath Patel, I am interested in education, philosophy, science, yoga.

16/04/2023

सूर्य नमस्कार

07/01/2023

Motivational philosophy of lifelesson.
जीवन के पाठ का प्रेरणात्मक दर्शन।
#सीख

30/12/2022

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27/09/2022

नवदुर्गा या नवरात्रि(Navdurga or navratri)

आदिशक्ति, सृजनात्मक चेतना को माया, प्रकृति, दुर्गा तथा कुण्डलिनी शक्ति आदि नामों से सम्बोधित किया गया है।ब्रह्म स्वयं अपनी सृजनात्मक चेतना,माया के प्रभाव से निराकार से साकार होकर प्रकृति रूप में प्रक्षेपित होते हैं, एक ओर आदिशक्ति माया अपनी अविद्या रूप में ब्रह्म के अंश जीवात्मा को भ्रमित करती हैं,दूसरी ओर कुंडलिनी शक्ति के रूप में जीवात्मा के अंदर निवास करती हैं, और पुनः जीवात्मा और ब्रह्म में अद्वैत स्थापित करने में सहायक होती हैं।
https://docs.google.com/document/d/16rOoraGgqy6srySgCQrNJGr-UYXCE0aekMtiw3I_SSY/edit?usp=drivesdk

#नवदुर्गा

15/12/2021

संस्कृत का वेद से, ब्रह्म से, और ज्ञान से कोई संबंध नहीं है।धर्म को शब्दों और भाषा में नहीं अटकना चाहिए। संन्यास केवल पांडित्य नहीं है।कबीर भी जान लेते हैं बिना पढ़े-लिखे; मोहम्मद भी जान लेते हैं बिना पढ़े-लिखे; बढ़ई के बेटे जीसस के जीवन में भी वे फूल खिल जाते हैं।कुछ पंडित होना शर्त तो नहीं है।कोई भी भाषा न आती हो तो भी आदमी परमात्मा को जान सकता है।
https://docs.google.com/document/d/1cTBu_FzpyEtpvEmIUICr1-s8b798ruYrnO_ErK1bLOk/edit?usp=drivesdk

29/09/2021

ज्ञान कोई भी हो वह तभी सार्थक होता है,जब उसको व्यावहारिक रूप से जीवन में उतारा जाता है।केवल प्रवचन सुनने या उसका अध्ययन करने से कुछ प्राप्त नहीं होता है।
https://docs.google.com/document/d/1V7jN99coOmxseJsWYiNy6BtJPegDQO12XXTvZMpu-PM/edit?usp=drivesdk

13/04/2021

व्रत मन में लिया गया संकल्प है,जबकि उपवास का अर्थ कम भोजन होता है।उपवास करने की इच्छा मन में लाना भी एक प्रकार का संकल्प है।इसलिए उपवास को व्रत का पर्यायवाची माना जाता है,परन्तु व्रत के अनेक अर्थ हैं,जबकि उपवास उन अर्थों में से एक है।
https://docs.google.com/document/d/1NPngykHlP5czWTQZhXGicmqEEmoIVlGkROIMwGefL9I/edit?usp=drivesdk

05/03/2021

दूसरे के द्वारा कही गई बातों को दोहरा देने से आप ज्ञानी नहीं हो जाते,ऐसा व्यक्ति जानकार अवश्य कहा जा सकता है।जानकारी कोई ज्ञान नहीं है,मात्र सूचनाओं का बोझ है।उसमें स्वयं का कोई अनुभव नहीं,यदि स्वयं का अनुभव नहीं तो उसे ज्ञान भी नहीं कहा जा सकता।
https://docs.google.com/document/d/1b4mW_FVDKaxPiCMHFjVfx4qWbmv0eqA_whxEhed8Hlw/edit?usp=drivesdk

15/02/2021

संस्कृति हमारे मस्तिष्क को आकार देती है।रचनात्मकता संस्कृति में गहराई तक पाई जाती है।जिस तरह समय परिवर्तन के साथ संस्कृति में भी परिवर्तन होने लगता है,जो कि आवश्यक भी है,उसी तरह परिवर्तित संस्कृति एक नवीन रचना के द्वार खोलती हैं।और इस तरह हम प्रकृति की खोज और नवीन अविष्कारों के द्वारा स्वयं के मस्तिष्क का और समाज का विकास करते हैं।
अगर संस्कृति "पृष्ठभूमि" है,तो रचनात्मकता "वस्तु" है।
https://docs.google.com/document/d/1JMnXFLHFXXeF_j1NT_XRjBNYnrWr_gcS-7plnuCxVVE/edit?usp=drivesdk

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