NEELESH RAGHUWANSHI ( HINDI POET ) 04 अगस्त 1969 को मध्य प्रदेष के गंज बासौदा कस्बे में जन्मी नीलेष रघुवंषी का नाम हिन्दी की बहुचर्चित कवियों में षुमार होता है। ‘घर निकासी’ (1997), ‘पानी का स्वाद’ (2004), ‘अंतिम पंक्ति में’ (2008), ‘कवि ने कहा’ (चुनी हुई कविताएँ, 2016), ‘खिड़की खुलने के बाद’ (2017) की कविताएँ पाठकों और सह-लेखकों के बीच समान रूप से स्वीकृत और चर्चित हैं। कविता और उपन्यास के अलावा उन्होंने बच्चों के लिए नाटक और कई टेलीफिल्मों के लिए पटकथा-लेखन भी किया है। कई देषी-विदेषी भाषाओं में उनकी कविताओं का अनुवाद हो चुका है।
2012 में उनका पहला उपन्यास ‘एक कस्बे के नोट्स’ प्रकाषित हुआ था, जो कि हिन्दी के चर्चित उपन्यासों में से एक है। 2019 में ‘द गर्ल विद क्वेषचनिंग आईज़’ नाम से परमानेंट ब्लैक द्वारा उसे अंग्रेज़ी में अनूदित कर प्रकाषित किया गया।
लेखन के लिए नीलेष रघुवंषी को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (1997), आर्य स्मृति साहित्य सम्मान (1997), दुष्यंत कुमार स्मृति सम्मान (1997), केदार सम्मान (2004), शीला स्मृति पुरस्कार (2006), भारतीय भाषा परिषद कोलकाता का युवा लेखन पुरस्कार (2009), स्पंदन कृति पुरस्कार, (2012), प्रेमचंद स्मृति सम्मान (2013), षैलप्रिया स्मृति सम्मान (2014) आदि पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं।
वह फि़लहाल दूरदर्षन केन्द्र, भोपाल में कार्यरत हैं।
सपंर्क: ए-40, आकृति गार्डन्स, नेहरू नगर, भोपाल म0 प्र0
मो0 9826701393
Email: [email protected]
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NEELESH RAGHUWANSHI ( HINDI POET ) 04 अगस्त 1969 को मध्य प्रदेष के गंज बासौदा कस्बे में जन्मी नीलेष रघुवंषी का नाम हिन्दी की बहुचर्चित कवियों में षुमार होता है। ‘घर निकासी’ (1997), ‘पानी का स्वाद’ (2004), ‘अंतिम पंक्ति में’ (2008), ‘कवि ने कहा’ (चुनी हुई कविताएँ, 2016), ‘खिड़की खुलने के बाद’ (2017) की कविताएँ पाठकों और सह-लेखकों के बीच समान रूप से स्वीकृत और चर्चित हैं। कविता और उपन्यास के अलावा उन्होंने बच्चों के लिए नाटक और कई टेलीफिल्मों के लिए पटकथा-लेखन भी किया है। कई देषी-विदेषी भाषाओं में उनकी कविताओं का अनुवाद हो चुका है।
2012 में उनका पहला उपन्यास ‘एक कस्बे के नोट्स’ प्रकाषित हुआ था, जो कि हिन्दी के चर्चित उपन्यासों में से एक है। 2019 में ‘द गर्ल विद क्वेषचनिंग आईज़’ नाम से परमानेंट ब्लैक द्वारा उसे अंग्रेज़ी में अनूदित कर प्रकाषित किया गया।
लेखन के लिए नीलेष रघुवंषी को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (1997), आर्य स्मृति साहित्य सम्मान (1997), दुष्यंत कुमार स्मृति सम्मान (1997), केदार सम्मान (2004), शीला स्मृति पुरस्कार (2006), भारतीय भाषा परिषद कोलकाता का युवा लेखन पुरस्कार (2009), स्पंदन कृति पुरस्कार, (2012), प्रेमचंद स्मृति सम्मान (2013), षैलप्रिया स्मृति सम्मान (2014) आदि पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं।
वह फि़लहाल दूरदर्षन केन्द्र, भोपाल में कार्यरत हैं।
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04 अगस्त 1969 को मध्य प्रदेष के गंज बासौदा कस्बे में जन्मी नीलेष रघुवंषी का नाम हिन्दी की बहुचर्चित कवियों में षुमार होता है। ‘घर निकासी’ (1997), ‘पानी का स्वाद’ (2004), ‘अंतिम पंक्ति में’ (2008), ‘कवि ने कहा’ (चुनी हुई कविताएँ, 2016), ‘खिड़की खुलने के बाद’ (2017) की कविताएँ पाठकों और सह-लेखकों के बीच समान रूप से स्वीकृत और चर्चित हैं। कविता और उपन्यास के अलावा उन्होंने बच्चों के लिए नाटक और कई टेलीफिल्मों के लिए पटकथा-लेखन भी किया है। कई देषी-विदेषी भाषाओं में उनकी कविताओं का अनुवाद हो चुका है।
2012 में उनका पहला उपन्यास ‘एक कस्बे के नोट्स’ प्रकाषित हुआ था, जो कि हिन्दी के चर्चित उपन्यासों में से एक है। 2019 में ‘द गर्ल विद क्वेषचनिंग आईज़’ नाम से परमानेंट ब्लैक द्वारा उसे अंग्रेज़ी में अनूदित कर प्रकाषित किया गया।
लेखन के लिए नीलेष रघुवंषी को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (1997), आर्य स्मृति साहित्य सम्मान (1997), दुष्यंत कुमार स्मृति सम्मान (1997), केदार सम्मान (2004), शीला स्मृति पुरस्कार (2006), भारतीय भाषा परिषद कोलकाता का युवा लेखन पुरस्कार (2009), स्पंदन कृति पुरस्कार, (2012), प्रेमचंद स्मृति सम्मान (2013), षैलप्रिया स्मृति सम्मान (2014) आदि पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं।
वह फि़लहाल दूरदर्षन केन्द्र, भोपाल में कार्यरत हैं।
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NEELESH RAGHUWANSHI ( POET) POEM- GHAR NIKASI, THEHRO, CHABUTRA
04 अगस्त 1969 को मध्य प्रदेष के गंज बासौदा कस्बे में जन्मी नीलेष रघुवंषी का नाम हिन्दी की बहुचर्चित कवियों में षुमार होता है। ‘घर निकासी’ (1997), ‘पानी का स्वाद’ (2004), ‘अंतिम पंक्ति में’ (2008), ‘कवि ने कहा’ (चुनी हुई कविताएँ, 2016), ‘खिड़की खुलने के बाद’ (2017) की कविताएँ पाठकों और सह-लेखकों के बीच समान रूप से स्वीकृत और चर्चित हैं। कविता और उपन्यास के अलावा उन्होंने बच्चों के लिए नाटक और कई टेलीफिल्मों के लिए पटकथा-लेखन भी किया है। कई देषी-विदेषी भाषाओं में उनकी कविताओं का अनुवाद हो चुका है।
2012 में उनका पहला उपन्यास ‘एक कस्बे के नोट्स’ प्रकाषित हुआ था, जो कि हिन्दी के चर्चित उपन्यासों में से एक है। 2019 में ‘द गर्ल विद क्वेषचनिंग आईज़’ नाम से परमानेंट ब्लैक द्वारा उसे अंग्रेज़ी में अनूदित कर प्रकाषित किया गया।
लेखन के लिए नीलेष रघुवंषी को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (1997), आर्य स्मृति साहित्य सम्मान (1997), दुष्यंत कुमार स्मृति सम्मान (1997), केदार सम्मान (2004), शीला स्मृति पुरस्कार (2006), भारतीय भाषा परिषद कोलकाता का युवा लेखन पुरस्कार (2009), स्पंदन कृति पुरस्कार, (2012), प्रेमचंद स्मृति सम्मान (2013), षैलप्रिया स्मृति सम्मान (2014) आदि पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं।
वह फ़िलहाल दूरदर्षन केन्द्र, भोपाल में कार्यरत हैं।
सपंर्क: ए-40, आकृति गार्डन्स, नेहरू नगर, भोपाल म0 प्र0
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NEELESH RAGHUWANSHI ( POET )
04 अगस्त 1969 को मध्य प्रदेष के गंज बासौदा कस्बे में जन्मी नीलेष रघुवंषी का नाम हिन्दी की बहुचर्चित कवियों में षुमार होता है। ‘घर निकासी’ (1997), ‘पानी का स्वाद’ (2004), ‘अंतिम पंक्ति में’ (2008), ‘कवि ने कहा’ (चुनी हुई कविताएँ, 2016), ‘खिड़की खुलने के बाद’ (2017) की कविताएँ पाठकों और सह-लेखकों के बीच समान रूप से स्वीकृत और चर्चित हैं। कविता और उपन्यास के अलावा उन्होंने बच्चों के लिए नाटक और कई टेलीफिल्मों के लिए पटकथा-लेखन भी किया है। कई देषी-विदेषी भाषाओं में उनकी कविताओं का अनुवाद हो चुका है।
2012 में उनका पहला उपन्यास ‘एक कस्बे के नोट्स’ प्रकाषित हुआ था, जो कि हिन्दी के चर्चित उपन्यासों में से एक है। 2019 में ‘द गर्ल विद क्वेषचनिंग आईज़’ नाम से परमानेंट ब्लैक द्वारा उसे अंग्रेज़ी में अनूदित कर प्रकाषित किया गया।
लेखन के लिए नीलेष रघुवंषी को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (1997), आर्य स्मृति साहित्य सम्मान (1997), दुष्यंत कुमार स्मृति सम्मान (1997), केदार सम्मान (2004), शीला स्मृति पुरस्कार (2006), भारतीय भाषा परिषद कोलकाता का युवा लेखन पुरस्कार (2009), स्पंदन कृति पुरस्कार, (2012), प्रेमचंद स्मृति सम्मान (2013), षैलप्रिया स्मृति सम्मान (2014) आदि पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं।
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2012 में उनका पहला उपन्यास ‘एक कस्बे के नोट्स’ प्रकाषित हुआ था, जो कि हिन्दी के चर्चित उपन्यासों में से एक है। 2019 में ‘द गर्ल विद क्वेषचनिंग आईज़’ नाम से परमानेंट ब्लैक द्वारा उसे अंग्रेज़ी में अनूदित कर प्रकाषित किया गया।
लेखन के लिए नीलेष रघुवंषी को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (1997), आर्य स्मृति साहित्य सम्मान (1997), दुष्यंत कुमार स्मृति सम्मान (1997), केदार सम्मान (2004), शीला स्मृति पुरस्कार (2006), भारतीय भाषा परिषद कोलकाता का युवा लेखन पुरस्कार (2009), स्पंदन कृति पुरस्कार, (2012), प्रेमचंद स्मृति सम्मान (2013), षैलप्रिया स्मृति सम्मान (2014) आदि पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं।
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2012 में उनका पहला उपन्यास ‘एक कस्बे के नोट्स’ प्रकाषित हुआ था, जो कि हिन्दी के चर्चित उपन्यासों में से एक है। 2019 में ‘द गर्ल विद क्वेषचनिंग आईज़’ नाम से परमानेंट ब्लैक द्वारा उसे अंग्रेज़ी में अनूदित कर प्रकाषित किया गया।
लेखन के लिए नीलेष रघुवंषी को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (1997), आर्य स्मृति साहित्य सम्मान (1997), दुष्यंत कुमार स्मृति सम्मान (1997), केदार सम्मान (2004), शीला स्मृति पुरस्कार (2006), भारतीय भाषा परिषद कोलकाता का युवा लेखन पुरस्कार (2009), स्पंदन कृति पुरस्कार, (2012), प्रेमचंद स्मृति सम्मान (2013), षैलप्रिया स्मृति सम्मान (2014) आदि पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं।
वह फ़िलहाल दूरदर्षन केन्द्र, भोपाल में कार्यरत हैं।
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2012 में उनका पहला उपन्यास ‘एक कस्बे के नोट्स’ प्रकाषित हुआ था, जो कि हिन्दी के चर्चित उपन्यासों में से एक है। 2019 में ‘द गर्ल विद क्वेषचनिंग आईज़’ नाम से परमानेंट ब्लैक द्वारा उसे अंग्रेज़ी में अनूदित कर प्रकाषित किया गया।
लेखन के लिए नीलेष रघुवंषी को भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार (1997), आर्य स्मृति साहित्य सम्मान (1997), दुष्यंत कुमार स्मृति सम्मान (1997), केदार सम्मान (2004), शीला स्मृति पुरस्कार (2006), भारतीय भाषा परिषद कोलकाता का युवा लेखन पुरस्कार (2009), स्पंदन कृति पुरस्कार, (2012), प्रेमचंद स्मृति सम्मान (2013), षैलप्रिया स्मृति सम्मान (2014) आदि पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं।
वह फ़िलहाल दूरदर्षन केन्द्र, भोपाल में कार्यरत हैं।
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