We Can Learn

We Can Learn

Share

हम एक दूसरे के अनुभवों को जानकर सीखने ?

01/05/2023

विचार प्रवाह
एक दिन कार्यालय में एक व्यक्ति आए। हमने उन्हें आदर सहित बैठाया, पानी पिलाया, अपने पुस्तकालय के काम के बारे में कुछ बताया भी उन्हें। उनका भी कुछ काम था। वह भी किया। जब वह जाने लगे तो उन्होंने कहा कि आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा। मैंने उन्हे धन्यवाद दिया। वो कहने लगे कि धन्यवाद तो मुझे देना चाहिए, मेरा काम था। मैंने कहा कि आपका काम करना मेरा काम था सो किया। इस छोटी सी मुलाकात से मुझे लगा कि कितना खूबसूरत है यह जीवन ! एक दूसरे को देने के लिए कितनी सारी चीजें हैं यहां। यह देने से कितने आनंदित रह सकते हैं हम। कल उन व्यक्ति का फोन आया था और उन्होंने कहा कि मैंने आपके बारे में अपने एक मित्र को बताया है जो आपको लायब्रेरी के काम में मदद करेंगे। मेरे दो पल के अच्छे व्यवहार ने मेरे लिए कई रास्ते खोले हैं। चलिए जरा सोचते हैं कि जब कोई हमारे सामने किसी काम को लेकर आता है तो हम किस भाव से वह काम करते हैं? यह भी चिंतन करते हैं कि क्या वह भाव हमारी जीवन ऊर्जा को बढ़ा रहा है?
अनुभूति -राजेंद्र 🌹

Photos from We Can Learn's post 29/04/2023

स्कूलों में आज से बच्चे गर्मी की छुट्टियों पर चले गए। शिक्षकों ने दी उन्हें पढ़ने के लिए किताबें। पालकों से आग्रह है कि अपने बच्चों से उनकी पढ़ी हुई किताबों पर बातचीत जरूर करें।

16/11/2020

*लघुकथा*
हम और हमारे मित्र लगभग पाँच वर्ष पूर्व कार से जा रहे थे। रास्ते में एक घुमावदार रास्ते पर एक बड़ा पत्थर (बोल्डर) पड़ा हुआ था। जैसे ही हम वहाँ से निकले हमने और हमारे मित्रों ने कुछ अशोभनीय शब्दों का प्रयोग उनके लिये किया जो पत्थर छोड़ कर गये होंगे और वहाँ नहीं थे।
कुछ दिनों पूर्व हम दमोह से डिंडोरी अपने मित्र व्यास जी के साथ गये थे। फिर से रास्ते में पत्थर मिले पर इस बार हमने केवल एक दूसरे पर निगाह डाली और गाड़ी रुक गईं। हमने मिलकर पत्थर हटा दिये। हमें लोग थोड़े आश्चर्य से देख रहे थे पर हम खुद को स्वाभाविक लग रहे थे। हमें अब यह लगातार अहसास हो रहा है कि खुशियां फूलों, कांटो, पत्थरों, रिश्तों सहित हर जगह बिखरी हुई हैं जिन्हें हम हर पल महसूस कर सकते हैं बस थोड़ी ...जिम्मेदारी,🌹🙏
धन्यवाद

15/11/2020

*ब्रेक*
एक बार भौतिकी कक्षा में, शिक्षक ने छात्रों से पूछा, "हमारे पास कार में ब्रेक क्यों हैं?"

विविध उत्तर प्राप्त हुए:

"रोकने के लिए"

"गति को कम करने के लिए"

"टकराव से बचने के लिए" आदि,

लेकिन एक जवाब अलग था,

"आपको तेजी से ड्राइव करने के लिए सक्षम करने के लिए"

यह एक विचार है।

एक पल के लिए मान लें कि आपकी कार में कोई ब्रेक नहीं है तो आप कितनी तेजी से अपनी कार चलाएंगे?

यह केवल ब्रेक के कारण है कि हम तेजी लाने की हिम्मत कर सकते हैं, तेजी से जाने की हिम्मत कर सकते हैं और उन गंतव्यों तक पहुंच सकते हैं जिनकी हम इच्छा करते हैं।

जीवन में विभिन्न बिंदुओं पर,हम अपने माता-पिता, शिक्षकों, आकाओं और दोस्तों से हमारी प्रगति, दिशा या निर्णय पर सवाल उठाते हैं। हम उन्हें अड़चन मानते हैं या इस तरह की पूछताछ को हमारे चल रहे काम के लिए "ब्रेक" मानते हैं।

लेकिन याद रखें, यह ऐसे ही सवालों (समय-समय पर ब्रेक) के कारण है कि आप आज जहां हैं, वहां पहुंचने में कामयाब रहे हैं। ब्रेक के बिना, आप स्किड हो सकते हैं, दिशा खो सकते हैं या एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं।

मैं अपने सभी अनमोल ब्रेक्स के लिए गहराई से और ईमानदारी से आभारी हूं।

आइये अपने जीवन में "ब्रेक" की सराहना करें। उनके बिना हम वह नहीं होते जहाँ हम आज हैं।

धन्यवाद
🌹🌹🌹👏🏻🌹🌹🌹

26/06/2020

*☺सम्मान- एक अनुभव☺*
*आज शांत समय में मैं इस शब्द (सम्मान) के बारे में फिर से चिंतन करने की कोशिश कर रहा हूँ।इसको जीवन में पीछे जाकर देखता हूँ तो हमें कुछ बातों या रिश्तों का स्वभाविक रूप से सम्मान करना सिखाया गया है जैसे गुरु,माता पिता आदि। कई बार घरों में भी बच्चों में सुबह से उठकर बड़ों के और स्कूल में शिक्षकों के पैर छूने की आदत डाली जाती है। इसे हममें से बहुत सारे लोग अच्छे संस्कार भी कहते हैं।शादी होते समय कई बार लडकियों को भी घऱ के लोग उन्हें पति को परमेश्वर मानकर, सास ससुर ननद को पूज्य मानकर हर दिन सुबह उठकर पैर छूने की बात सिखाते हैं। यह सब भी संस्कार की तथाकथित श्रेणी में आता है। मैं सोच रहा हूँ कि क्या सम्मान का कोई ऐसा तरीका हो सकता है कि सबका सम्मान कायम रहे?*
*जब आप यह पढ़ते जा रहे हैं तो इन बातों से खुद को सहमत या असहमत मत करिये बस पढ़ते जाइये क्योंकि अब हम इसको थोड़ा गहराई में देखने की कोशिश कर रहे हैं।इसके लिये हम कुछ सवाल खुद से करते हैं।*
*1-क्या मुझमें कुछ ऐसा है जो मुझमें खुद के प्रति सम्मान का भाव जगाता है।*
*2-क्या मैं मेरी कमियों में सुधार के प्रति जागरूक हूँ?*
*ऐसे कई सवाल जब मैं खुद से करता हूँ तो मैं एकांत में चिंतन करता हूँ और उससे कुछ निकलता है जिनमें से एक घटना मैं l आपसे शेयर कर रहा हूँ जिसमें मैंने खुद की नजरों में खुद का सम्मान देखने की कोशिश की।*
*प्रशिक्षण संस्थान में नये सत्र में कक्षाएं शुरू हुई थीं तो द्वितीय वर्ष के कुछ बच्चे जैसे ही संस्थान में आये तो उन्होंने हमेशा की तरह हमारे पैर छूकर अपना सम्मान व्यक्त किया। उन्हें देखकर प्रथम वर्ष के कई बच्चों ने भी लाइन लगाकर पैर छुए। मैंने ऑब्जर्व किया कि कुछ बच्चे पैर तो छू रहे थे पर असहज थे। दो या तीन बच्चों ने मुस्कुराहट के साथ गुडमॉर्निंग कहा और दो बच्चे ऐसे थे जो दूर खड़े थे, न तो उन्होंने विश किया और पैर छूना तो जैसे दूर की बात थी।*
*शुरुआत में कुछ बच्चों का पैर नहीं छूना मुझे खुद के सम्मान को चुनौती जैसा लगा और पहले दिन ही उनके प्रति मन में दूरी जैसी पैदा हुई। मैंने एकान्त में इस पर चिंतन किया। मैं इस शब्द सम्मान की गहराई को भी समझना चाह रहा था। शान्त होकर बैठा तो प्रश्न की दिशा अचानक बदल गईं और अब प्रश्न यह आ गया कि,जो बच्चे आज कक्षा में पहली बार आये हैं वो हमारे पैर क्यों छू रहे थे?*
*मुझे समझ नहीं आ रहा था कि यह श्रृद्धा थी,परम्परा थी, देखा देखी थी या कुछ और था जिसे मैं शायद आज तक देख ही नहीं पाया था या मैं भी कुछ परंपरागत चीजों में बंधकर सम्मान के व्यापक अर्थों को नहीं देख रहा था।?*
*मुझे अंदर की आवाज ने कहा कि इस प्रश्न के उत्तर के लिये हमें एक एक करके बच्चों से चर्चा करनी चाहिए पर इसके लिये पहले कुछ दिन बच्चों से दोस्ती गहरी करना होगा। यह कार्य मैंने किया और जब मैंने बच्चों से घुल मिलकर बातें की तो निष्कर्ष कुछ अलग तरह के थे। उनमें से सबसे महत्वपूर्ण यह थे कि,*
*1-अधिकांश बच्चों का भाव यह था कि वे पहले दिन पैर नहीं छूना चाहते थे पर छुए क्योंकि वे द्वितीय वर्ष के बच्चों को देखकर अपना एक्शन कर रहे थे। उन्हें यह भी लग रहा था कि यदि वे ऐसा करेंगे तो आगे का समय उनके लिये बेहतर होगा।*
*2-जिन बच्चों ने केवल विश किया था, उन्होंने कहा कि जब लोगों के प्रति उनके मन में श्रृद्धा भाव पैदा होता है तो वे उनके पैर भी छू सकते हैं और कई बार सामीप्य महसूस होने पर इसकी परिणिति वे गले लगकर भी करते हैं! उन्होंने बताया कि कैसे एक शिक्षक उन्हें कभी कभी गले लगाकर पीठ ठोंककर प्रोत्साहित करते थे।*
*3-जिन दो बच्चों ने न तो विश किया था और न पैर छुए थे, उन्होंने कहा कि शिक्षक बहुत कठोर होते हैं, उन्होंने इसे बताया कि कैसे उनके शिक्षक ने उन्हें अप्रिय शब्दों से संबोधित कर कक्षा में हंसी उड़ाई थी।*
*बच्चों से चर्चा सम्मान को व्यापक अर्थ दे गयी। हमें लगता है कि कुछ याद आते ही मन को संतुष्टि मिल जाना, कुछ देखकर मन का कृतज्ञ हो जाना,दूर होने पर भी दुआ करना, मन के अंदर घटित आवेगों का निरपेक्ष विश्लेषण कर खुद को सतत सुधार की प्रक्रिया से गुजारना, हमेशा कुछ नया सीखते रहना हमें खुद की नजर में सम्मान दिलाता है। खुद के प्रति सम्मान हमें सबके प्रति सदैव सम्मान और स्नेह का भाव रखने हेतु प्रेरित करता है। इसे व्यक्त करने के सबके अपने तरीके हो सकते हैं।*
*इसे समझने की प्रक्रिया ने मुझे खुद से जुड़ने का अवसर दिया है और आज मैं अपनी कक्षा के सभी बच्चों से मिलकर संस्थान से विदा हो रहा हूँ। आज अधिकांश बच्चे मेरे गले लगकर हटने में काफी समय लगा रहे हैं, कुछ तो कँधों को गीला भी कर रहे हैं। सबके जाने के बाद मैं फिर से सम्मान और स्नेह की गलियों में खुद को ढूंढ रहा हूँ।*
*धन्यवाद*💐

12/06/2020

*☺मॉनिटरिंग☺*
*हम इस बात को अक्सर महसूस करते हैं कि बच्चों का स्कूल और जिंदगी का स्कूल आपस में बहुत जुड़ा होता है।दोनों में सीखने के लिये कुछ न कुछ हमेशा मौजूद होता है। जो शिक्षक अपने घर के दायित्वों का निर्वहन ठीक से करते हैं, घर को व्यवस्थित रखते हैं उनके स्कूल्स में भी हमने उन्हें बच्चों की,बच्चों की तरह परवाह करते देखा है।*
*हमने अक्सर ऑब्जर्व किया है कि हर स्कूल का एक कल्चर धीरे धीरे डेवलप होता है और चीजें उनके अनुसार चलने लगती है। हमने अपनी मॉनिटरिंग के दौरान कई स्कूल्स को हमारी उम्मीदों से बहुत आगे काम करते देखा है और वह स्कूल हमेशा से अच्छे ही चल रहे हैं क्योंकि वे स्कूल के व्यापक महत्व को समझकर पीढ़ियों का निर्माण कर रहे हैं। उनके कई कामों की बात हम भी अपनी चर्चाओं के दौरान अन्य स्कूल्स से करते रहते हैं और ऐसा लगता था कि शायद इसे सुनकर अन्य स्कूल बदल सकते हैं।*
*हमें लगता है कि कुछ स्कूलों की सफलता की कहानियां सुनकर अन्य स्कूलों को सुधार हेतु बाह्य प्रेरणा तो मिलती है पर आंतरिक प्रेरणा का स्रोत उत्पन्न करने के लिये हमें सुधार योग्य स्कूलों के साथ कुछ समय तक जुड़कर काम करना होता है और जब इसके सुखद परिवर्तन आने लगते हैं तो खुद ब खुद स्कूल उन रास्तों पर चलने लगते हैं।*
*बी आर सी रहने के दौरान जब हम एक स्कूल में गये तो स्कूल में चीजें बिखरी हुई थीं और कहने को तो वहाँ पर तीन शिक्षक थे और एक हेडमास्टर पर नेतृत्व कोई भी नहीं था। हम काफी देर तक उन सभी से बात करते रहे और तय किया कि हम सब मिलकर वहाँ अपने जनशिक्षक, एच एम,शिक्षकों और बच्चों के साथ बिखरे हुए सामान को जमायेंगे और शाम तक यह काम हुआ।*
*अब चीजें थोड़ी ठीक हुई पर इस दौरान हमने देखा कि हेडमास्टर साहब जब भी कोई पेपर पढ़ते हैं तो पढ़ने में दिक्कत होती है पर वे चश्मा नहीं बनवा रहे, उसी दिन शाम को डाक्टर के यहाँ उन्हें ले जाकर एक चश्मा भी बनवाने में हमने उन्हें मदद की। उस दिन उन्होंने हमारे साथ कपड़े और जूते तथा एक बेल्ट भी लिया।*
*मुझे याद है कि स्कूल की चीजें जमने के बाद उन्होंने सात दिन के अंदर स्कूल की पुताई बिना कहे कराई थी। अब शिक्षकों ने भी बच्चों के बस्ते और साफ सफाई, पढ़ाई लिखाई का ध्यान रखना शुरू कर दिया था। वे निर्देशों के अनुसार कार्य करने लगे थे और कभी कभी तो वे अपने मन से भी कुछ नया करते। अब तो हेडमास्टर और शिक्षक हमसे ऐसे जुड़ गये थे जैसे हम उनका एक हिस्सा हों।कभी कभी कुछ समस्या होती तो वे हमसे बातें भी करते।*
*इस अनुभव ने हमें यह अहसास कराया कि अगर हम यह कहते हैं कि स्थितियां अच्छी नहीं हैं तो हमें भी उतनी ही शिद्दत से अपने रोल को स्कूल से जुड़कर निभाना पड़ेगा,अपनी अपनी भूमिका को दायरे से आगे जाकर व्यापकता में देखना होगा। हमें यह भी लगा कि एक बार यदि स्कूल को कोई व्यवस्थित काम करने के तरीके सिखा दे, शिक्षकों को उनकी असीमित क्षमताओं का अहसास करा दे, तो उनमें भी आगे बढ़ने की स्वाभाविक चाह है।*
*हमने यह भी जाना कि किसी स्कूल को गोद लेने के मायने क्या होते हैं और जुड़ाव से परिवर्तन कितनी तेजी से होता है? अब हम जुड़कर काम करते हैं और लोगों पर भरोसे के साथ काम करके परिस्थितियों को बदलते की कोशिश भी करते हैं।*
*कुछ दिनों पहले हेडमास्टर जी की बिटिया की शादी का कार्ड भी आया था और जब हम वहाँ गये तो उन्होंने कहा कि सर आपने ही तो हमें हेडमास्टर बनाया, उनकी आंखें नम थीं और हम थे,-----निःशब्द*☺
*धन्यवाद*

01/05/2020

*😌सीखने के प्रतिफल-लर्निग आउटकम😌*
*आज विज्ञान की कक्षा में शिक्षक भोजन में पोषक तत्वों की उपस्थिति के बारे में बता रहे हैं जो मुख्य रूप से प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन तथा खनिज लवण हैं। उन्होंने अपनी जेब से दो पुड़िया निकाली हैं जिनमें दो अलग अलग खाद्य सामग्री के चूर्ण हैं और वे साथ में कक्षा में तीन प्रकार के विलयन लेकर आये हैं।*
*पहला है आयोडीन का विलयन जो उन्होंने जल में टिंचर डालकर बनाया है, दूसरा काँपर सल्फेट विलयन जो 100 मिलीलीटर जल में 2 ग्राम काँपर सल्फेट घोलकर बनाया है और तीसरा विलयन कास्टिक सोडा का है जो100 मिलीलीटर जल में 10 ग्राम कास्टिक सोडे को घोलकर बनाया है। अब शिक्षक दो परखनली और ड्रापर लेकर आये हैं। पहली परखनली में पहले खाद्य पदार्थ चावल की पुड़िया का चूर्ण और दूसरी परखनली में दूसरे खाद्य पदार्थ दाल की पुड़िया का चूर्ण डाल दिया है।*
*सभी बच्चे उत्सुकता से देख रहे हैं। अब उन्होंने मुन्नू से कहा है कि वह आकर ड्रापर से पहली परखनली में पहले जल डालकर हिलाकर विलयन बनाये और उसके बाद आयोडीन के विलयन की दो या तीन बूंदे डालकर हिलाये और बाकी बच्चों को आयोडीन विलयन डालने के बाद रंग का अवलोकन करने को कहा है। आयोडीन का विलयन डालने के बाद चावल के चूर्ण के विलयन का रंग नीला हो गया है। यह खाद्य पदार्थ में कार्बोहाइड्रेट की उपस्थिति का परिचायक है।*
*अब उन्होंने पहेली से दूसरी परखनली में दाल के चूर्ण में पहले जल की कुछ मात्रा से उसका विलयन बनाने और फिर उसमें ड्रापर से दो बूंद कापर सल्फेट और दस बूंद कास्टिक सोडा का विलयन डालकर उसे अच्छी तरह हिलाकर रखने और उसके रंग का अवलोकन सभी छात्रों से करने को कहा है। थोड़ी देर में यह बैगनी रंग का हो जाता है जो दाल में प्रोटीन की उपस्थिति का परिचायक है।*
*इस पूरी प्रक्रिया में बच्चे अवलोकन करते हुए स्वयं प्रयोग करके देख रहे हैं और निष्कर्ष निकाल रहे हैं। आप कल्पना कीजिये कि यदि शिक्षक ने कक्षा में बिना प्रयोग किये यह बातें बच्चों को रटवा दी होतीं तो क्या बच्चे विज्ञान सीखते? शायद नहीं।*
*अंत में शिक्षक बच्चों से कह रहे हैं कि कल सभी बच्चे कक्षा में कम से कम एक खाद्य पदार्थ लेकर आयेंगे और उसमें विभिन्न पोषक तत्वों की उपस्थिति का परीक्षण करेंगे।अब राम सोच रहा है कि उसके रोज पिये जाने वाले दूध में कौन सा पोषक तत्व है पर वह खुश है क्योंकि अब वह खुद इसकी जांच कर सकता है।*
*अगले दिन बच्चे कक्षा में दैनिक जीवन में उपयोग किये जाने वाले खाद्य पदार्थो में उपस्थित पोषक तत्वों की सूची बना लाये है जिनसे यह पता चल रहा है कि कौन सा पोषक तत्व किस खाद्य पदार्थ में है।*
*मुन्नी यह सोच रही है कि क्या एक ही खाद्य पदार्थ में एक से अधिक पोषक तत्व हो सकते हैं तो टीचर जी ने मुन्नी को इसकी जांच खुद करने के लिये कहा है और मुन्नी अब अपने दोस्तों के साथ समूह में जांच कर रही है। देखते हैं कि बच्चे क्या निष्कर्ष निकालते हैं?*
*इस विवरण से स्पष्ट है कि विज्ञान की कक्षाओं की खूबसूरती अवलोकन, प्रयोग, वर्गीकरण, निरीक्षण और स्वयं निष्कर्ष निकालने में निहित होती है और तब बनता है विज्ञान, क्रमबद्ध ज्ञान और जिंदगी का हिस्सा,और हम प्राप्त करते हैं अपने लर्निग आउटकम।*
*धन्यवाद*

29/04/2020

*🌳LEARNING OUTCOME🌳*
*आज हम विज्ञान में सीखने के प्रतिफल अवलोकन/वर्गीकरण पर चर्चा करेंगे। जब भी हम कक्षाओं में जाते हैं तो हमें यह विचार करना होता है कि इस विषयवस्तु को पढ़ाने से हमें किस लर्निंग आउटकम या सीखने के प्रतिफल की प्राप्ति होगी?*
*आज जब मैं विज्ञान विषय की कक्षा 6 में भोजन के बारे में पढ़ाने जाने वाला हूँ तो पाठ्योजना बनाते समय मैने सबसे पहले मैने पाठ का गहराई से अध्ययन किया है जिससे मुझे लगता है कि इसको कक्षा में पढ़ाने से मुझे बच्चों में मुख्य रूप से अवलोकन एवं वर्गीकरण का कौशल विकसित करने में मदद मिलेगी।*
*इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिये मैने एक सारणी बोर्ड पर बना दी हैं जिसमें बच्चे स्वयं चिंतन कर अपने अवलोकन के आधार पर लिख रहे हैं।*
विद्यार्थी/दोस्त .......खाये गये
का नाम खाद्य पदार्थ
का नाम
........ ...........
--------- ---------__
*इस सारणी में विभिन्न बच्चों द्वारा स्वयं और दोस्तों के नाम के सामने उनके खाद्य पदार्थों के नाम लिखने के बाद उनसे यह पूछा कि यह खाद्य पदार्थ कहाँ से प्राप्त होते हैं? बच्चों ने उत्तर दिये। जो पता नहीं थे मैने उन्हें बताये। बच्चों ने खाद्य पदार्थो के स्रोत स्वयं जाने।*
*अब दूसरी सारणी बनाई जो इस प्रकार थी।*
जंतु का नाम खाये जाने
वाले खाद्य पदार्थ
बिल्ली ---------------------
चूहा --------------------
शेर ------------------
बाघ -----------------
गाय -------------------
मनुष्य --------------------
तितली -------------------
अन्य ------------------
*अब बच्चों से हमने पूछा कि 1-इनमें से कौन से जंतु हैं जो केवल पौधे या उनके उत्पादों पर निर्भर हैं?*
*2-कौन से जंतु हैं जो दूसरे जन्तुओं को खाते हैं?*
*3-कौन से जंतु हैं जो पौधे, उनके उत्पादो और जन्तुओं दोनों को ही खाते हैं?*
*इन प्रश्नो से बच्चे वर्गीकरण सीखेंगे याने शाकाहारी, मांसाहारी और सर्वाहारी जन्तुओं के बारे में खुद के अनुभवों से जान सकेंगे।इस पूरी प्रक्रिया में बच्चे खुद सीख रहे हैं और शिक्षक फेसिलिटेटर है। हमें यह देखना होगा कि इन लर्निग आउटकम को और ज्यादा सीखने की संभावना अन्य चेप्टर में भी हैं अतः उन्हें लगातार अवलोकन और वर्गीकरण हेतु मौके देने होंगे।*
*साथियो हममें से बहुत सारे ऐसे शिक्षक हैं जो कक्षाओं में विषयों को जीवंत कर देते हैं।मुझे हमेशा यह लगता हैं कि कक्षा में हम बच्चों को जितने ज्यादा मौके देंगे उतने ही अधिक सीखने के मौके बढ़ेंगे लेकिन यह करने के लिये हमें योजना बनानी ही पड़ेगी, ऐसा हुआ तो बहुत सारे रंग बिरंगे पक्षी उड़ेंगे आसमान में*🧚‍♀️🧚‍♀️🧚‍♂️
*धन्यवाद*

20/04/2020

*☺मौलिकता ☺*
*जब हम बच्चे थे तो हमने घर से, परिवार से, समाज से, स्कूल से, अपने साथियों से कुछ अच्छी बातें सीखीं पर उसके साथ साथ कुछ और भी बातें थीं जो ठीक नहीं थीं और हमें उनसे दूर रखा गया। हमें ये तो अच्छे से बताया गया कि क्या करना या सीखना चाहिए पर क्या नहीं करना है?इस पर चर्चा न करते हुए केवल ये कहा गया कि यह करना ठीक नहीं है और वह एक रहस्य जैसा बन गया। हम अक्सर उन चीजों की तरफ भागते हैं जो पता नहीं होती और हमने उन तथाकथित बुरी बातों में ज्यादा रुचि ली और घर में पता ही नहीं चला कि हम किस दिशा में जा रहे हैं?बच्चे घर में बात करते भी तो कैसे क्योंकि हम उन बातों पर चर्चा करने से डरते थे, डर इस बात का था कि कहीं हम उसी को न अपना ले।हम अक्सर बच्चों को महापुरूषों की कहानियाँ सुनाकर या कोई सफलता की कहानी सुनाकर प्रेरित करना चाहते हैं पर अधिकांश मामलों में यह प्रेरणा नहीं बनती।*
*कारण यह है कि हम यह तो बताते हैं कि किसी को सफलता मिली पर किन परिस्थितियों में मिली, उन परिस्थितियों में उसने कैसे यात्रा जारी रखी, उस समय उनकी मनोदशा क्या थी, इन सबका पता हमें होता ही नहीं है क्योंकि हम उसे गहराई से पढ़ते ही नहीं है। हमें हमेशा यह लगता है कि सफलता ही प्रेरित करती है।*
*जब मैने यह चिंतन किया तो मेरे पास भी अन्य लोगों की बड़ी सफलताओं की कहानियाँ थी पर वे घर की नहीं थीं तो मैने अपने जीवन की असफलताओं के कारणों की सूची बनाई, कई कक्षाओं में कम मार्क्स आने के कारण लिखे। यह सब मेरा खुद का मामला था इसीलिये अपने बच्चों से इस पर विस्तार से चर्चा भी कर पाया। यह करने के लिये मुझे मौलिक होना पड़ा क्योंकि इसके पहले मैं एक दिखावटी आदर्श था। अब मेरे बच्चों को यह पता है कि किन कारणों से वे असफल हो सकते हैं? वे यह गलतियाँ अपने जीवन में नहीं कर रहे हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी में गल्तियों को स्वीकार करने का अमूल्य गुण पाया है जो उन्हें एक बेहतर इन्सान तो बना ही देगा।*
*मैने जब बच्चों को अपनी कमियाँ बताने की शुरुआत की तो मुझे कई दिनों तक खुद से संघर्ष करना पड़ा, यह आसान नहीं था पर जब खुद को खोलकर रखा तो मैं उनका असली आदर्श बन गया। ऐसा लगता है कि असफलताएं हमारी जिंदगी में सफलताओं से ज्यादा प्रेरित करती हैं और इसके लिये जरूरी है हमारा वो होना जो हम हैं,तो आइये संघर्ष करें वह दिखने का जो हम हैं याने मौलिक होने का, शुभकामनाएं इस संघर्ष में विजयी होने की💐*
*धन्यवाद*

17/04/2020

*☺भूत, भविष्य, वर्तमान☺*
*इस लेख को आज सुबह 4:30 पर लिखने की शुरुआत की है, इस लाइन को पढ़ने के बाद कई साथियों ने यह सोचना शुरू कर दिया होगा कि इतनी सुबह उठकर लिखना...उफ्फ, मैं तो नहीं करता, कई यह भी सोच रहे होंगे कि शायद मुझे अच्छी नींद नहीं आती और कुछ न कुछ गड़बड़ चल रही है। कुछ यह भी सोच रहे होंगे कि इसमें सोचने की कोई बात नहीं है क्योंकि पहले भी मैं लेखन करके सुबह 4 से 5 बजे के बीच पोस्ट करता रहा हूँ।*
*कुछ लोग और भी कुछ सोच रहे होंगे, यह मैं सोच रहा हूँ और यही सोचते हुए लग रहा है कि मैं सबके सोचने के बारे में सोचकर कुछ लिखूँ। अब मुझे यह पक्का यकीन हो गया है कि हम अक्सर कुछ न कुछ सोचते रहते हैं। अब तो ये हालात हो गये है कि सब कुछ ठीक चल रहा हो तब भी यह ख़याल आने लगा है कि हे भगवान अब कुछ गड़बड़ न हो और सब कुछ अच्छा चलता रहे और यह सोचकर पूर्व के सारे बुरे अनुभव सामने खड़े होकर डराने लगे हैं। कभी कभी भविष्य के बड़े बड़े प्लान और खुद को स्थापित करने के बारे में सोचता रहता हूँ क्योंकि बहुत आगे पहुंचने की महत्वाकांक्षा तो मुझे जैसे छोड़ती ही नहीं है।*
*इस दौरान पता नहीं क्यों पर ऐसा लगा कि कुछ बहुत खास छूट रहा है। हम सब साथ में बहुत कुछ कर रहे थे पर मैं उन सभी पलों में वहाँ शायद नहीं था, या तो अतीत में था या भविष्य में था और अब वह पल जो कभी वर्तमान थे, अतीत बन चुके हैं। जो भविष्य था वह वर्तमान है। कुछ बहुत ही छोटे शायद माइक्रो सेकंड्स के बाद फिर ये पल अतीत बन जायेंगे।*
*यह सब सोचकर लगा है कि मैं सोचता रहूँगा और वक्त गुजरता रहेगा, इससे कुछ ज्यादा होने वाला नहीं है। अब करने का वक्त आ गया है। उस हर पल में जीने का वक्त आ गया है जो अगले ही पल अतीत बन जाएगा। आज मैने अपने बहुत सारे रिश्तों और दोस्तों से कहा है कि उनके बिना शायद मैं अधूरा हूँ। कुछसे यह भी कहा है कि वे मुझे कभी कभी बुरे क्यों लगते हैं? यह सुनकर वे मुस्कुरा रहे हैं। कई दिनों से अपने बेटे को पढ़ाने की सोच रहा था अब हर दिन पढ़ा रहा हूँ। हमेशा सोचता रहता था कि कुछ वह करूँ जो चाहता हूँ, अब कर पा रहा हूँ क्योंकि अब मैं उस पल में जी रहा हूँ जो जीवन है..बाकी तो अतीत है या भविष्य है, एक गुजर गया और दूसरे का पता नहीं, अगर लगा कि किसी की मदद करनी है तो कर दी, फिर से लौटता हूँ मैं अपनी बात पर और लग रहा है कि अब आप सोच रहे होंगे कि क्या हमें भी वर्तमान में जीना चाहिए? मैं यह नहीं कह रहा हूँ।*
*आपका जीवन आपका है और उसे आप ही जानो पर इसे अतीत और भविष्य मत मानो, वर्तमान या उस छोटे से पल की कीमत पहचानो। मुझे भी पता है और आपको भी कि कुछ चीजें तो तय हैं जैसे कि यहाँ से जाना पर अधिकांश चीजें हम तय करेंगे और यह हम तब ज्यादा अच्छे से कर पायेंगे जब हम अभी प्लान करके उस पर काम शुरू कर देंगे वरना फिर हम कुछ सोचने लगेंगे।*
*एक हमारे साथी ने आज बताया कि इस लॉकडाउन में वे टी वी देख रहे थे तो किसी चैनल पर पट्टी चल रही थी कि देश के किसी इलाके में कुछ मजदूरों को मदद की जरूरत है तो उन्होंने अपने संपर्क सूत्रों और इन्टरनेट से संबंधों का लाभ उठाकर उनकी मदद कर दी है वहीं कई लोग आज भी यह सोच रहे हैं कि उन्हें एक्चुअली कितना डोनेट करना चाहिये, फिर वे कभी कभी इसके होने वाले सदुपयोग या दुरुपयोग पर भी एक लंबा चिंतन कर रहे हैं। कई लोग पहले लॉकडाउन के समय दूसरे की और अब तीसरे की अवधि कितनी होगी, इसके बारे में बड़ा तथ्यात्मक चिंतन कर रहे हैं पर समस्या यह है कि अभी वाले में कुछ नहीं कर रहे हैं।*
*अब इसको पढ़कर कई लोग अचानक सक्रिय होंगे और सब कुछ निपटाने की बात सोचेंगे पर ऐसा मत करिये बस उस एक पल के बारे में सोचिये जो शायद आपकी जिंदगी है।*
💐💐💐💐💐💐💐💐💐
*धन्यवाद*
*राजेन्द्र असाटी*
*9424395097*

14/04/2020

*☺जीवन की सीख ☺*
*जीवन यात्रा में हमारा हर दिन कई लोगों से मिलना जुलना होता है। इसमें बहुत सारे बुद्धिजीवी, पढ़े लिखे, सामान्य और अनपढ़ लोग भी होते हैं। हर व्यक्ति के पास उनके जीवन की कोई न कोई सीख होती है जिससे उनका जीवन बदला है, यदि हम उनसे यह पूछें कि उनके जीवन की क्या सीख है तो हम कम समय में ज्यादा सीखकर आगे बढ़ सकते हैं।*
*इस दुनिया में 7 अरब से ज्यादा लोग हैं अर्थात इससे ज्यादा गलतियाँ और सीख होंगी ही, तो अब मैं जब आपसे मिलूँगा तो पूछूंगा कि आपकी जिंदगी की सीख क्या है? यदि नहीं बताएंगे तो पढ़ने की कोशिश होगी आपके भाव से, आपके जीवन से।*
*मुझे याद आता है कि जब मैं दुनिया की नजर में बड़ा हो गया था तब भी मेरी दादी मुझसे बिना कुछ कहे मेरे सर को चूमती, प्यार करती तो मैं उनके उस प्यार के सामने बिल्कुल छोटा हो जाता, मेरी काल्पनिक विशालता पिघल जाती और मैं शायद प्रेम उन्हीं से सीखा।अब मुझे लगता है कि मेरे चारों तरफ बहुत सारी पाठशाला हैं जिनसे मैं सीख रहा हूँ। जब कोई उपलब्धि प्राप्त होती है और घर आकर साझा करता हूँ तो मम्मी, पापा, परिवार शांत होकर सुनते हैं और इसके बाद उनके चेहरे का भाव ऐसे लगता है कि खुशियों के साथ साथ आगे बढ़ने का आशीष भी दे रहा है। उसे याद रखकर फिर यात्रा शुरू हो जाती है।*
*आप सब मित्रों से जब मैं मिला तो सबके साथ अनुभव अलग अलग थे। कुछ ने प्रशंसा की तो तुरंत अच्छा लगा। कुछ ने सामने या बाद में बुरा कहा तो बहुत बुरा लगा पर जब शांत समय में खुद से बात की तो आत्मशोधन की अनन्त संभावनाएं नजर आई।*
*अब यह भी स्पष्ट है कि कबीर महान क्यों हैं, शायद इसीलिये क्योंकि जिस बात को हम कभी स्वीकार ही नहीं कर पाते उसे उन्होंने स्वीकार कर जीवनयात्रा की थी।*
*"बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया कोय, जो मन खोजो आपना मुझसे बुरा न कोय "*
*कोशिश जारी है अपने और आपके अनुभव से सीखने की,क्या आज आप इस समूह में अपने जीवन की कोई वास्तविक सीख या अनुभव साझा करेंगे जिससे हम सभी सीखें ??*
*धन्यवाद 💐*

Want your school to be the top-listed School/college in Bhopal?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Category

Website

Address


B Wing Arera Hills
Bhopal