29/12/2022
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22/12/2022
सहकारिता का आंदोलन एक पवित्र आंदोलन है जिसका उद्देश्य समाज के शोषित, वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना है ।यह विचार डॉ अमित मुद्गल ने रामकृष्ण धर्मार्थ फाउंडेशन विश्वविद्यालय द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि वैसे तो सहकारिता आंदोलन लगभग 150 वर्ष पुराना है परंतु पिछले कुछ वर्षों में सके महत्व को समझा गया। उन्होंने बताया कि देश के अनेक राजनैतिक नेतृत्व सहकारिता आंदोलन की देन है । महाराष्ट्र गुजरात तथा पंजाब सहकारिता आंदोलन के प्रमुख ऐसे राज्यों में हैं जिनके किसानों और कामगारों को इस आंदोलन ने एक बेहतर जीवन स्तर प्रदान किया है। बाबा आमटे, डी वाई पाटिल, एना हजारे, पी जे कुरियन कुछ ऐसे भारतीय हैं जिनके योगदान को हमेशा रेखांकित जिया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर इस बात की पुष्टि कर दी है कि देश की प्राथमिकता सूची में सहकारिता को महत्वपूर्ण स्थान है। पश्चिम के अनेक देशों में सहकारिता उनके देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। और इस दिशा में हमारा देश पिछले कुछ वर्षों में आशातीत सफलता प्राप्त कर चुका है।
उन्होंने इस अवसर पर विद्यार्थियों का आवाहन किया कि वे नौकरी की तलाश में भटकने के स्थान पर छोटे-छोटे कुटीर उद्योग और सहकारिता के माध्यम से अपने क्षेत्र का और खुद अपने भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने भारत सरकार की अनेक ऐसी योजनाओं का भी जिक्र किया जिसके माध्यम से सहकारी संस्थानों को लाभ मिलता है, उन्हें लोन की सुविधा दी जाती है।
सहकारिता के क्षेत्र में कोई नौकर नहीं होता जो भी सरकारी संस्थानों से जुड़े हुए सदस्य हैं वह सब उसके लाभांश के हिस्सेदार होते हैं को रेखांकित करते हुए डॉ मुद्गल ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे सहकारिता आंदोलन से जुड़ें।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विजय अग्रवाल ने कहा कि सहकारिता आंदोलन का मुख्य उद्देश्य छोटे किसानों, ग्रामीण जनों एवं ऐसे लोगों को लाभ पहुंचाना है जो वर्षो से उपेक्षित और शोषित रहे हैं । उन्होंने कहा कि आजादी के पहले पूंजी पतियों ने किसानों और कामगारों का अत्यधिक शोषण किया। महात्मा गांधी ने इससे उबरने का जो उपाय सुझाया वह छोटे-छोटे कुटीर उद्योगों की स्थापना और सहकारिता को प्रोत्साहन देना ही रहा है। खादी ग्रामोद्योग, कृभको, इफको, अमूल जैसे अनेक सहकारी संस्थाओं का उदाहरण देते हुए उन्होंने सहकारिता के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रो अग्रवल ने कहा कि भारत युवाओं का देश बन चुका है इसलिए सहकारिता उनके भविष्य का मार्ग प्रशस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगी। स्टार्ट अप को सहकारिता से जोड़ कर नौजवान उसका लाभ उठा सकते हैं। प्रोफेसर अग्रवाल नेआश्वस्त किया कि यदि उनके विद्यार्थी सहकारिता के माध्यम से रोजगार देने की दिशा में काम करना चाहेंगे तो विश्वविद्यालय का प्रबंध विभाग उन्हें आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएगा।
डॉ श्रीमती रश्मि गोलिया ने सहकारिता आंदोलन की दिशा में जागरूकता के इस अभियान के संदर्भ में प्रकाश डाला ।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉक्टर सत्येन्द्र ठाकुर ने किया। आरम्भ में प्रो प्रत्यूष त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया और आयोजन की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन डॉक्टर मीनाक्षी समर्थ द्वारा किया गया। समारोह में प्रोफेसर वी के सेठी, प्रोफेसर प्रत्यूष त्रिपाठी , प्रो एनके श्रीवास्तव ,डॉ शुचि गंगवार, प्रो सोनल सिंह सहित अनेक शिक्षक और छात्र उपस्थित रहे । आयोजन कृषि एवं प्रबंध संकाय ने संयुक्त रूप से किया। छात्रों ने सहकारिता आंदोलन जागरूकता कार्यक्रम में अपना पंजीयन भी कराया ।
| 9am - 5pm |