06/09/2024
वर्तमान क्षण में खड़े होकर आप शायद यह कभी न सोचें कि अगले 10 सालों में दुनिया कितनी बदल सकती है! और आज की 70% से 90% नौकरियाँ अगले 10 सालों में पूरी तरह से खत्म हो जाएँगी। हम धीरे-धीरे "चौथी औद्योगिक क्रांति" के दौर में प्रवेश कर रहे हैं।
कुछ सालों पहले की मशहूर कंपनियों को देखिए-
HMT (घड़ी)
BAJAJ (स्कूटर)
DYANORA (TV)
MURPHY (रेडियो)
NOKIA (मोबाइल)
RAJDOOT (बाइक)
AMBASSADOR (कार)
उपरोक्त कंपनियों में से किसी की भी गुणवत्ता खराब नहीं थी। फिर भी ये कंपनियाँ बाहर क्यों हो गईं? क्योंकि वे समय के साथ खुद को बदल नहीं पाईं।
कोडक कंपनी याद है? 1997 में, कोडक के पास लगभग 160,000 कर्मचारी थे। और दुनिया की लगभग 85% फोटोग्राफी कोडक कैमरों से की जाती थी। पिछले कुछ सालों में मोबाइल कैमरों के उदय के साथ, कोडक कैमरा कंपनी मार्केट से बाहर हो गई है। यहाँ तक कि कोडक पूरी तरह से दिवालिया हो गई और उसके सभी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया।
उसी समय कई और मशहूर कंपनियों ने खुद को समय के साथ अपने आप को अपडेट किया तथा जरूरी बदलाव के साथ वर्तमान में मौजूद हैं ।
UBER सिर्फ़ एक सॉफ्टवेयर का नाम है। नहीं, उनके पास अपनी कोई कार नहीं है। फिर भी आज दुनिया की सबसे बड़ी टैक्सी-फ़ेयर कंपनी UBER है।
Airbnb आज दुनिया की सबसे बड़ी होटल कंपनी है। लेकिन मज़ेदार बात यह है कि दुनिया में उनके पास एक भी होटल नहीं है।
इसी तरह, Paytm, Ola Cab, Oyo rooms आदि जैसी अनगिनत कंपनियों के उदाहरण दिए जा सकते हैं।
आज अमेरिका में नए वकीलों के लिए कोई काम नहीं है, क्योंकि IBM Watson नामक एक कानूनी सॉफ्टवेयर किसी भी नए वकील से कहीं बेहतर वकालत कर सकता है। इस प्रकार अगले 10 सालों में लगभग 90% अमेरिकियों के पास कोई नौकरी नहीं होगी। शेष 10% बच जाएँगे। ये 10% विशेषज्ञ होंगे।
नए डॉक्टर भी काम पर जाने के लिए बैठे हैं। Watson सॉफ्टवेयर कैंसर और दूसरी बीमारियों का पता इंसानों से 4 गुना ज़्यादा सटीकता से लगा सकता है। 2030 तक कंप्यूटर इंटेलिजेंस मानव इंटेलिजेंस से आगे निकल जाएगा।
अगले 20 सालों में आज की 90% कारें सड़कों पर नहीं दिखेंगी। बची हुई कारें या तो बिजली से चलेंगी या हाइब्रिड कारें होंगी। सड़कें धीरे-धीरे खाली हो जाएंगी। गैसोलीन की खपत कम हो जाएगी और तेल उत्पादक अरब देश धीरे-धीरे दिवालिया हो जाएंगे।
अगर आपको कार चाहिए तो आपको उबर जैसे किसी सॉफ्टवेयर से कार मांगनी होगी। और जैसे ही आप कार मांगेंगे, आपके दरवाजे के सामने एक पूरी तरह से ड्राइवरलेस कार आकर खड़ी हो जाएगी। अगर आप एक ही कार में कई लोगों के साथ यात्रा करते हैं, तो प्रति व्यक्ति कार का किराया बाइक से भी कम होगा।
बिना ड्राइवर के गाड़ी चलाने से दुर्घटनाओं की संख्या 99% कम हो जाएगी। और इसीलिए कार बीमा बंद हो जाएगा और कार बीमा कंपनियाँ भी बाहर हो जायेंगी।
पृथ्वी पर ड्राइविंग जैसी चीजें अब नहीं बचेंगी। जब 90% वाहन सड़क से गायब हो जाएँगे, तो ट्रैफ़िक पुलिस और पार्किंग कर्मचारियों की ज़रूरत नहीं होगी।
जरा सोचिए, 10 साल पहले भी गली-मोहल्लों में STD बूथ हुआ करते थे। देश में मोबाइल क्रांति के आने के बाद ये सारे STD बूथ बंद होने को मजबूर हो गए। जो बच गए वो मोबाइल रिचार्ज की दुकानें बन गए। फिर मोबाइल रिचार्ज में ऑनलाइन क्रांति आई। लोग घर बैठे ऑनलाइन ही अपने मोबाइल रिचार्ज करने लगे। फिर इन रिचार्ज की दुकानों को बदलना पड़ा। अब ये सिर्फ मोबाइल फोन खरीदने-बेचने और रिपेयर की दुकानें रह गई हैं। लेकिन ये भी बहुत जल्द बदल जाएगा। Amazon, Flipkart से सीधे मोबाइल फोन की बिक्री बढ़ रही है।
पैसे की परिभाषा भी बदल रही है। कभी कैश हुआ करता था लेकिन आज के दौर में ये "प्लास्टिक मनी" बन गया है। क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड का दौर कुछ दिन पहले की बात है। अब वो भी बदल रहा है और मोबाइल वॉलेट का दौर आ रहा है। पेटीएम का बढ़ता बाजार, मोबाइल मनी की एक क्लिक।
जो लोग उम्र के साथ नहीं बदल सकते, उम्र उन्हें धरती से हटा देती है। इसलिए जमाने के साथ बदलते रहें। वक्त के साथ चलते रहें।
अब जरूरी मुद्दे की बात ....
जब इतने बदलावों को वर्तमान पूंजिवादी अपनाकर स्वयं को स्थापित करने में लगे हैं , जिन दकियानूशी सामंतवादी विचारों को त्यागकर एक दौर में समाज लोकतंत्र और प्रगति की बात करते हुए आगे बढ़ रहा था फिर अचानक क्यों प्रतिक्रियाशील होकर प्रगतिपथ को छोड़कर वही जातिवाद, धार्मिक उन्माद, और पुराने जड़वादी सोच को सही बताने पर तुला हुआ है । इसकी पड़ताल जरूरी है । क्यों हमारे चिंतन और सोच में आज भी ग्रह , नक्षत्र, राशिफल के विचार इतने घनीभूत हैं कि समाज में जिन बुराइयों का अंत आसानी से प्रगतिशील विचार व व्यवस्था को अपनाकर मिटाया जा सकता है उन्ही समस्याओं को दूर करने के लिए हम अपने व्यवहार में सामंतवादी बने होने के चलते समाज के भीतर से हटा नहीं पा रहे हैं ।
विज्ञान की तरक्की और तकनीकी ज्ञान कभी भी मानव सभ्यता को नुकशान पहुचाने के लिए इज़ाद नहीं किये गये थे । विज्ञान और तकनीक का उपयोग मानव समाज को सुख - सुविधा प्रदान करने और पूरी दुनिया पर मानव जाति के वैभव को स्थापित करने के लिए होना चाहिए । जो चिंतन मनुष्य को मनुष्य से बेहतर और कमतर बनाता है उस चिंतन को त्याग देना ही श्रेयस्कर है।
जिन तकनीकी उपायों के बदलाव से कारपोरेट मुनाफा लूट रहे हैं और मानव श्रम की जरूरत को खत्म कर अत्यधिक मुनाफा बटोरना चाहते हैं उन बदलावों के चलते मनुष्य को बेरोजगार बनाकर शोषण करने की खुली छूट कतई नहीं मिलनी चाहिए ।
इसके लिए पूंजिवादी संस्कृति को एवं सामंतवादी चिंतन को मन से मिटा देना ही एकमात्र उपाय है ।और ये अपने आप नहीं होगा इसके लिए प्रगतिशील और लोकतांत्रिक व्यवस्था को वास्तविक अमलीजामा पहनाना होगा । केवल दिखावे के लिए लोकतंत्र और प्रगति को महिमामंडित करना और व्यवहार में नारी अस्मिता से खेलना , भाषा - जाति और धार्मिक उन्माद को हवा देना तथा पुरातनपंथी सोच विचार को शिक्षा में लागू करने वाली दोहरी नीतियों से कतई संभव नहीं है ।