13/05/2026
आज ILM (Integrated Learning Mission) के लिए एक खास दिन रहा।
Moulshree (NFI Mentor) ILM में आईं, उन्होंने यहाँ के काम को करीब से देखा, समझा और महसूस किया।
ILM की टीम ने उन्हें अपनी पूरी जर्नी बताई—
कैसे एक छोटे से सेटअप से शुरुआत हुई,
कैसे उन बच्चों के साथ काम शुरू किया गया जिन्हें लोग “backbencher” कहकर नज़रअंदाज़ कर देते थे,
और कैसे रास्ते में कई तरह की परेशानियाँ आईं—संसाधनों की कमी, लोगों की सोच, और लगातार संघर्ष।
लेकिन इन सबके बावजूद ILM रुका नहीं…
बल्कि धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया।
आज की सबसे बड़ी बात जो हमेशा याद रखी जाएगी:
यहाँ के बच्चे पढ़ाई या इतिहास में सबसे आगे हों या न हों,
लेकिन वे अपनी ज़िंदगी में अच्छे इंसान बन रहे हैं —
और यही ILM की असली जीत है।
यही सोच ILM को अलग बनाती है—
सिर्फ किताबों की शिक्षा नहीं, बल्कि इंसानियत की शिक्षा।
03/05/2026
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ILM (Integrated Learning Mission) की कहानी
2020-21 के पहले लॉकडाउन के बाद, कुछ बच्चों ने एक छोटा-सा कदम उठाया।
उन बच्चों के पास कुछ नहीं था—
लेकिन उनके सामने एक बड़ी सच्चाई थी—
ऐसे बच्चे, जिन्हें क, ख, ग…, ABCD, और 1 से 10 तक भी नहीं आता था।
समाज उन्हें “backbencher” कहते थे …
पर उन्होंने उन्हें समझने का फैसला किया।
इसी सोच से एक छोटा-सा सेटअप शुरू हुआ
जिसका नाम रखा गया ILM (Integrated Learning Mission)
शुरुआत आसान नहीं थी—
कभी रिश्ते बने, कभी टूटे…
कभी कुछ सिखा पाए, कभी नहीं सिखा पाए…
हम सिखाते गए… और खुद भी सीखते गए।
आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं—
जहाँ हमारे ही बीच के दो बच्चे
NEET का एग्जाम दे रहे हैं।
हमें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि उनका रिज़ल्ट क्या आता है…
क्योंकि हमारे लिए असली जीत ये है कि—
जो बच्चे कभी “क, ख, ग” नहीं जानते थे,
आज वही बच्चे देश के सबसे कठिन एग्जाम में बैठने की हिम्मत रखते
उन सभी का बहुत बहुत शुक्रिया जिन्होंने शुरू से लेकर अभी तक हमारी मदद की ।
01/05/2026
मजदूर दिवस विशेष – इंटेग्रेटेड लर्निंग मिशन (ILM)
आज मजदूर दिवस के अवसर पर इंटेग्रेटेड लर्निंग मिशन (ILM) द्वारा एक विशेष आयोजन किया गया, जिसका मुख्य केंद्र मजदूर वर्ग रहा। यह आयोजन इसलिए भी खास था क्योंकि यहाँ के सभी लर्नर्स स्वयं मजदूर परिवारों से आते हैं—उनकी ज़िंदगी, उनका संघर्ष, और उनकी मेहनत इन बच्चों की अपनी सच्चाई है।
इस कार्यक्रम में लर्नर्स ने मजदूरों के जीवन, उनकी कठिनाइयों और उनके संघर्षों पर खुलकर चर्चा की। सबसे भावुक क्षण वह था जब बच्चों ने अपने माता-पिता के प्रति आभार व्यक्त किया—यह स्वीकार करते हुए कि उनकी मेहनत और त्याग की वजह से ही वे आज कुछ बेहतर करने की दिशा में आगे बढ़ पा रहे हैं।
बच्चों के शब्दों में मजदूरों का दर्द साफ झलक रहा था—एक ऐसा दर्द जो सिर्फ सुना नहीं, बल्कि जिया हुआ था।
इस आयोजन की झलक आप संविधान टाकीज़ के अगले एपिसोड में देख सकेंगे।
खासतौर पर साथी सचिन और साथी औरंगजेब ने मजदूरों की वास्तविक स्थिति को बेहद सटीक और संवेदनशील तरीके से सामने रखा, जिससे पूरे माहौल में एक गहरी समझ और संवेदना पैदा हुई।
https://youtu.be/fHSLD354Pxc?si=SgPr76win79k_MS8
15/04/2026
उन हाथों के नाम जिन्होंने सपनों को सहारा दिया…
हमारे सम्मानित Donors का हृदय से आभार।
आपने केवल आर्थिक सहयोग नहीं दिया—
आपने उन बच्चों को विश्वास दिया
जिन्हें दुनिया ने अक्सर कम आँका था।
आपने किताबें नहीं खरीदीं,
आपने संभावनाएँ खरीदीं।
आपने फीस नहीं भरी,
आपने भविष्य लिखा है।
अब्दुल मोईज़ – 91.0%, भावना यादव – 76.5%, मुस्कान – 72.6%, फिज़ा – 72.5%, नितेश – 69.4%, विक्रम कुर्मी – 68.4%, अलशिया – 67.8%, सयबा – 60.3%, अल्फिया – 57.6%, अलीशा शेख – 56.6%, सानिया – 53.0%, तमन्ना – 45.8%, ऋषि – 45.0%, मोहम्मद ज़ामिन – 39.4%. , हासिल कर हम सभी को डटे रहने का हौसला दिया है ,साथ मे ,नितेश ,अलशिया,सायबा,सानिया,.
हमारे Learners को सलाम
तुम्हारी मेहनत ने साबित कर दिया—
हालात चाहे जैसे हों,
इरादे मजबूत हों तो मंज़िल मिलती है।
ये परिणाम सिर्फ नंबर नहीं,
तुम्हारे संघर्ष, अनुशासन और जज़्बे की पहचान हैं।
और अब… अगला अध्याय
हम अगले वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं
उम्मीद का बहुत बड़ा पिटारा लेकर।
और हमें विश्वास है—
अगला साल सिर्फ बेहतर नहीं बेहतर से बेहतर होगा,
03/04/2026
आज इल्म का सबसे छोटा लर्नर क़ासिम
झाँसी (मलखम्ब टूर) के लिए निकल चुका है।
ये सिर्फ एक सफर नहीं है,
ये उसकी मेहनत और हिम्मत की शुरुआत है।
हमारा मानना साफ है —
ना दुआ, ना किस्मत…
सिर्फ मेहनत ही सब कुछ तय करती है।
क़ासिम जो करेगा,
अपनी ताकत और अभ्यास से करेगा।
आज वो जा रहा है,
कल लोग उसे पहचानेंगे।
शाबाश क़ासिम — ऐसे ही आगे बढ़ते रहो।
22/03/2026
ईद की मिठास, नमकीन पकवानों की खुशबू और चर-चर करती बातचीत ने इस बार की ईद को सचमुच खास बना दिया।
पाँच साल में पहली बार ‘इल्म’ में ईद मिलन समारोह आयोजित हुआ, जिसमें NFI के फेलोज़ ने भी उत्साह के साथ भाग लिया। उन्होंने इल्म के लर्नर्स के कामों को करीब से देखा—चाहे वह उनका रोबोटिक्स का प्रयोग हो या लकड़ी से तैयार किए गए लाइट और माइक स्टैंड।
इस मुलाक़ात में सिर्फ़ काम ही नहीं, अनुभव भी साझा हुए। NFI फेलोज़ ने अपनी यात्रा के किस्से सुनाए, वहीं लर्नर्स ने भी अपने पाँच साल के सफर को खुलकर बयान किया—कैसे उन्होंने सीखते, गिरते, संभलते हुए खुद को गढ़ा।
कार्यक्रम के दौरान लर्नर्स ने अपने ही बनाए गीत “संविधान ज़िंदाबाद” को गाकर माहौल को और जीवंत कर दिया। इसके बाद कार्तिक आभाष ने एक कहानी सुनाई, जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया।
इस पूरी शाम ने एक बात साफ़ कर दी—
नफरत चाहे कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, मोहब्बत में उसे बदलने की ताकत होती है।
15/03/2026
इल्म की एक कहानी — अल्फिया के नाम
इल्म में एक लड़की ऐसी है जिसे हम सब बहुत प्यार करते हैं। हम सब यह मानते हैं कि अगर वह न होती, तो शायद इल्म भी आज इस तरह खड़ा न होता और हम सब कहीं न कहीं भटक रहे होते।
आज से ठीक पाँच साल पहले उसकी मुलाक़ात हमसे हुई थी। वह हमेशा हँसती रहती थी। उसके पास सवालों के जवाब हों या न हों, मगर वह जवाब ज़रूर देती थी। जब भी मैं उससे पूछता, “तुम पढ़ोगी?” — वह हँसकर टाल देती थी। धीरे-धीरे यह मेरी भी रोज़ की आदत बन गई। मैं हर दिन उससे यही सवाल पूछता।
एक दिन उसकी सहेली और बहन के कहने पर वह यहाँ आई — सिर्फ यह देखने के लिए कि “देखते हैं, ये लोग पढ़ाते कैसे हैं।”
लेकिन जिस दिन वह आई… उस दिन के बाद वह कभी वापस नहीं गई।
उसने अपनी छोटी उम्र में ही मुझे जिद्दी बना दिया। इतनी कम उम्र में ही वह इल्म की अध्यक्ष बन गई। उसे तब यह भी नहीं मालूम था कि अध्यक्ष होना क्या होता है। मगर उसने अपनी उम्र और अपने आसपास की बहुत-सी लड़कियों को पीछे छोड़ते हुए अपनी बोलने की आदत को अपना हुनर और अपनी ज़िंदगी का हिस्स बना लिया।
आज इल्म जहाँ है, उसमें उसका बहुत बड़ा योगदान है।
इल्म ने बहुत उतार-चढ़ाव देखे। मगर हर मुश्किल में वह गिरते-उठते आगे बढ़ती रही। उसने सिर्फ खुद चलना नहीं सीखा, बल्कि अपने साथियों का हाथ भी कभी नहीं छोड़ा।
मैं उम्र में उससे तीन गुना बड़ा था। समाज ने बहुत कुछ कहा भी। मगर उसका भरोसा कभी नहीं डिगा। हालात के हिसाब से जो सख्ती थी, उसने सब कुछ सहते हुए आगे बढ़ना जारी रखा।
आज भी हम आर्थिक मुश्किलों से जूझते हुए इल्म को चलाते हैं — और उसमें उसका किरदार हमेशा सबसे महत्वपूर्ण रहता है।
जब भी उसे कोई सम्मान मिला, उसने सिर्फ उस सम्मान को बढ़ाया ही नहीं, बल्कि उससे आगे जाने की कोशिश की — और वह आगे बढ़ती भी गई।
एक समय ऐसा भी था जब उसके अपने परिवार से रिश्ते ठीक नहीं थे। मगर तब भी वह अपने कंधों पर इल्म की ज़िम्मेदारी उठाए रही। उसने अपने टूटते-बिखरते घर और रिश्तों को सिर्फ संभाला ही नहीं, बल्कि पहले से ज़्यादा मज़बूत भी बनाया।
पहले उसकी अपनी माँ से नहीं पटती थी।
आज वही माँ उसकी सबसे अच्छी दोस्त है।
वे लड़ते भी हैं, रूठते भी हैं — मगर साथ नहीं छोड़ते।
वह लड़ती-झगड़ती भी है, मगर उसकी एक खूबी है — उसे दोस्त बनाना आता है।
स्कूल में भी उसने लड़ते-झगड़ते अपनी शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने शिक्षकों की खास बन गई।
उसकी एक कमजोरी है — और वही उसकी सबसे बड़ी ताकत भी है।
उसके पास हमेशा सवालों का अंबार रहता है।
और वह जहाँ भी जाती है, सवाल करती है।
वह एक बहुत अच्छी इंसान है।
एक ठीक-ठाक स्पीकर।
और एक लीडर — जो यह जानती है कि जब तक हम सुनने की आदत नहीं डालेंगे, तब तक हम अपनी बात सही तरह से नहीं कह सकते।
वह हमेशा सबके लिए एक पैर पर खड़ी रहती है।
रूठती भी है… मगर मान जाना उसकी खूबी है।
अब तक उसने जो भी जिद की — उसे पूरा किया है।
उसे अपनी कमियों का भी पूरा एहसास है, और उन्हें दूर करने की कोशिश भी वह लगातार करती रहती है।
कभी-कभी लोग पूछते हैं कि इल्म आखिर है क्या?
क्या यह सिर्फ एक कमरा है? कुछ किताबें? कुछ लोग जो रोज़ मिलते हैं?
लेकिन अगर सच में देखें तो इल्म सिर्फ एक जगह नहीं है।
इल्म एक जिद है।
इल्म सवाल करने की हिम्मत है।
इल्म साथ चलने की जिम्मेदारी है।
और अगर इन सबको ध्यान से देखें…
तो इल्म कहीं बाहर नहीं मिलता।
हमें इल्म अल्फिया में मिलता है।
उसकी हँसी में,
उसके सवालों में,
उसके झगड़ों में,
उसके दोस्तों को मनाने में,
उसके बार-बार गिरकर फिर खड़े हो जाने में।
इसलिए अगर कोई पूछे कि इल्म कहाँ है,
तो जवाब किसी इमारत का नाम नहीं होगा।
जवाब होगा —
इल्म वहाँ है जहाँ अल्फिया खड़ी है।
और अगर कोई पूछे कि अल्फिया कौन है,
तो शायद कहना पड़े —
अल्फिया सिर्फ एक लड़की नहीं है,
अल्फिया इल्म की चलती-फिरती कहानी है।
इल्म लर्नर्स की तरफ़ से हम सभी उसे बहुत सारा प्यार देते हैं और यह उम्मीद करते हैं कि वह अपने अधिकारों के साथ-साथ अपनी ज़िम्मेदारियों को भी ईमानदारी से निभाते हुए ऐसे ही आगे बढ़ती रहे और एक काबिल इंसान और नेता बनती रहे।
अल्फिया, हम सब तुमसे बहुत प्यार करते हैं — और हमेशा करते रहेंगे।
अब तुम एक जिम्मेदार नागरिक बन चुकी हो।
अब तुम्हारे पास वह सारे अधिकार हैं जिनके आधार पर तुम अपने फैसले खुद ले सकती हो।
अब तुम खुद अपने दस्तख़त कर सकती हो।
अब किसी कागज़ पर तुम्हें किसी और के हस्ताक्षर की ज़रूरत नहीं है।
05/02/2026
इल्म की हमारी साथी ज़ोया की हार्ट सर्जरी के लिए आपका सहयोग ज़रूरी है
हाल ही में ज़ोया को तेज़ साँस फूलने और लगातार खांसी की समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में डॉक्टरों ने रूमैटिक हार्ट डिज़ीज़ का पता लगाया, जिससे उसके हृदय के वाल्व गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, उसकी स्थिति को सुधारने और सामान्य जीवन देने के लिए तुरंत वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी आवश्यक है। सही समय पर ऑपरेशन होने से वह पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकती है।
इलाज का कुल खर्च काफी अधिक है। परिवार ने अपनी बचत और सभी संसाधन लगा दिए हैं, लेकिन अभी भी पैसों की आवश्यकता है।
हम आपसे निवेदन करते हैं कि इस नेक कार्य में सहभागी बनें।
आपका हर छोटा या बड़ा सहयोग ज़ोया के स्वस्थ भविष्य की ओर एक मजबूत कदम होगा।
यदि संभव हो तो कृपया योगदान दें और इस संदेश को अपने परिचितों के साथ साझा करें, ताकि यह मदद और लोगों तक पहुँच सके।
आपके सहयोग, विश्वास और शुभकामनाओं के लिए हृदय से धन्यवाद।
आइए, मिलकर ज़ोया को एक नई ज़िंदगी दें।
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25/12/2025
दानदाताओं के प्रति आभार और इल्म समूह की उपलब्धियाँ
हम अपने सभी दानदाताओं का दिल की गहराई से धन्यवाद करते हैं। आपकी सहायता हमारे लिए केवल सहयोग नहीं, बल्कि एक गंभीर जिम्मेदारी है। हम इस जिम्मेदारी को सदैव ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाने का संकल्प करते हैं।
आपके सहयोग से इंटीग्रेटेड लर्नर मिशन के अंतर्गत इल्म समूह ने वर्ष 2025 में खेल क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित कीं।
एल.एन. सिटी राहत क्लब से पदक जीतकर वर्ष की शुरुआत की।
मध्य प्रदेश शासन के सांसद खेल महोत्सव में शत-प्रतिशत प्रदर्शन किया।
बेडमिन्टन में लर्नर अल्शिया विजेता बनीं और सायबा उपविजेता रहीं।
कबड्डी में लर्नर गुनगुन ने खंडवा प्रतियोगिता में उपविजेता और भोपाल में विजेता का गौरव पाया।
मल्लखम्ब में लर्नर कासिम ने टी.टी. नगर स्टेडियम से विजेता बनकर संस्था का नाम रोशन किया।
इन सफलताओं ने यह सिद्ध किया कि इल्म के लर्नर्स केवल खेलों में ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और टीम भावना में भी अग्रणी हैं।
साथ ही, यह भी उल्लेखनीय है कि इल्म केवल उपलब्धियों का नाम नहीं है, बल्कि यह उन किशोरों का समूह है जो आर्थिक कठिनाइयों और सामाजिक चुनौतियों से जूझते हुए भी हार नहीं मानते। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने संघर्ष को ही अपनी ताक़त बनाया और शिक्षा, खेल, संस्कृति तथा तकनीक को अपनाकर अपनी पहचान बनाई।
दानदाताओं का सहयोग इस यात्रा में आधारशिला रहा है। आपकी मदद से यह समूह न केवल पदक और सम्मान अर्जित कर रहा है, बल्कि अपने संघर्षों को सफलता की सीढ़ी में बदल रहा है। यही कारण है कि हम अपने कार्यों में पारदर्शिता, ईमानदारी और समर्पण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं।
01/12/2025
ILM Communication Workshop Begins! ✨
ILM has proudly launched a Communication Workshop facilitated by Sachin Shrivastava, a seasoned journalist and storyteller.
This workshop is a recreation of Azad Bol — an initiative originally started under Samvidhan Live two years ago. Today, we carry that vision forward with renewed purpose and deeper intent.
At the heart of this workshop lies a simple but powerful idea:
The stories we need to tell are not far away — they are around us, within us, and waiting to be heard.
Through this program, participants learn to:
🗂️ Identify stories rooted in their surroundings
🧩 Break down complex realities into meaningful narratives
🛠️ Equip themselves with the right tools of communication
🗣️ Express confidently and responsibly
💡 Understand the impact of thoughtful storytelling
With this workshop, ILM aims to empower young minds, helping them discover their voice and share stories that truly matter.
Because when individuals speak freely and thoughtfully — change begins.