23/04/2019
बेरोजगारी और छ.ग.psc के चक्राव्यूह से मुझे माहाभारत का वो पल याद आता है जहाँ पांडव की तरह हम students भी यह सोचने मे असमर्थ हैं की अपने लछय के इस चक्राव्यूह को कैसे भेदे
वहा तो पांडव की सहायता के लिए स्वयं भगवान कृष्णा ने पेहले से ही अवतार ले लिया था पर हम उतने खुशकिस्मत नहीं !
मैँ निहशब्द हु जब माँ को घर के काम से राहात नहीं मिलती
मैँ निहशब्द हु जब बहने रक्षाबंधन मे राखी बांधती हैं
मैँ निहशब्द हु जब पापा मुझे बड़े उम्मिद से देखते हैं
मैँ निहशब्द हु जब दोस्त मुझ पे व्यंग करते हैं
जीवन मे ये ज्ञान भी बड़ी समस्या का केन्द्र हैं इतना कुछ होने के बाद भी
कहती हैं की तुही नर रूपी नारायण,तु ही सप्त ऋषियो का एक तारा
दोस्तो समय की ये मांग हैं ज़िसे हमें निडता से सामना करना हैं वो भी बड़े सहाज रुप से, हमें फिर से एक नए सोच के साथ एक नए आशाओं के बिज को रोपित करना हैं , हा ये हो सकता हैं हमारे पास मिट्टी के सामान धन और सिँचायी के पानी के सामान रोजगार की कमी हो परंतु हमारे पास मेहनत और इच्छाशक्ति की कमी नहीं !
धन्यवाद