16/07/2015
**Defense** IMP Topic
=>"भारत की प्रमुख मिसाइलें"
आइए जानते हैं कि भारत के पास कौन-कौन सी मिसाइल हैं और उनकी खासियत क्या है।
✓✓ भारत के पास, जमीन से जमीन तक मार करने वाली मिसाइलें हैं तो कुछ जमीन से हवा में मार करने वाली हैं। समुद्र में से दागी जा सकने वाली मिसाइलें भी हैं। अग्नि मिसाइल भारतीय मिसाइल प्रणाली की मुख्य रीढ़ हैं।
आइए जानते हैं अग्नि के संस्करणों पर:
✓ अग्नि-1 : अग्नि-1 का विकास 1999 में शुरु हुआ था लेकिन परीक्षण 2002 में किया गया। इसे कम मारक क्षमता वाली मिसाइल के तौर पर विकसित किया गया था। यह 700 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। भारत ने परमाणु क्षमता संपन्न अग्नि-1 प्रक्षेपास्त्र का दिसंबर 2011 में सफल परीक्षण किया था।
✓ अग्नि-2 : जमीन से जमीन तक मार करने वाली अग्नि-2 मिसाइल का व्हीलर आइलैंड से मई 2010 में सफल परीक्षण किया था। इसकी मारक क्षमता दो हजार किलोमीटर है और ये एक टन तक का पेलोड ले जा सकती है। इसमें अति आधुनिक नेवीगेशन सिस्टम और तकनीक है तथा इसकी आकृति पेंसिल के समान है। अग्नि-2 सफल परीक्षण के बाद भारतीय सेना में शामिल की जा चुकी है।
✓ अग्नि -3 : भारत ने परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता वाली मिसाइल अग्नि-3 का पहले 2006 में परीक्षण किया जिसे आंशिक रूप से ही सफल बताया गया था। इसकी मारक क्षमता 3500 किलोमीटर है। ये जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है। 3500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली ये मिसाइल 17 मीटर लंबी है और डायामीटर (व्यास) दो मीटर है। ये 1.5 टन का पेलोड ले जा सकता है। इसमें अति आधुनिक कम्प्यूटर और नेवीगेशन सिस्टम लगे हैं।
✓ अग्नि-4 : इस मिसाइल का सबसे पहला परीक्षण नवंबर 20111 में किया गया। यह मिसाइल तीन हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है। इसमें कई तरह की नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है और ये पहली की मिसाइलों से हल्की है। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम लगभग एक हजार किलोग्राम के पेलोड क्षमता वाली अग्नि-4 बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-2 मिसाइल का ही उन्नत रूप है।
✓अग्नि -5: इसकी मारक क्षमता 5000- 5500 किलोमीटर है। ये जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है।इसमें अति आधुनिक कम्प्यूटर और नेवीगेशन सिस्टम लगे हैं।
=>पृथ्वी मिसाइलें:-
✓✓ पृथ्वी-2 सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। इसमें किसी भी एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल को झांसा देकर निशाना साधने की क्षमता है। पृथ्वी रेंज की मिसाइलें भारत ने स्वदेशी तकनीक से विकसित की है और भारतीय सेना में इसे शामिल किया जा चुका है। पृथ्वी के जरिए 500 किलोग्राम तक के बम गिराए जा सकते हैं और यह द्रवित इंजन से संचालित होती है।
✓✓धनुष मिसाइल:-
- धनुष मिसाइल को नौसेना के इस्तेमाल के लिए विकसित किया गया है और यह 350 किलोमीटर तक की दूरी पर स्थित लक्ष्य को भेद सकती है।
✓ ये पृथ्वी मिसाइल का नौसनिक संस्करण है। इसकी लंबाई दस मीटर और चौड़ाई एक मीटर है और यह 500 किलोग्राम तक के हथियार ढो सकती है।
=>ब्रह्मोस मिसाइल:-
✓✓ 28 अप्रैल 2002 को भारत ने ध्वनि की गति से भी तेज चलने वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का परिक्षण किया था। इसे ब्रह्मोस का नाम दिया गया। भारत ने इसका निर्माण रूस के सहयोग से किया है। यह 290 किलोमीटर तक की मार करने की क्षमता रखती है और इसका वजन तीन टन है। ये जहाज, पनडुब्बी और हवा समेत कई प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती है। ये मिसाइल ध्वनि की गति से 2.8 गुना ज्यादा गति से उड़ान भर सकती है।
✓✓सागरिका मिसाइल:-
- हमारे देश के पास सागरिका नाम की ऐसी मिसाइल भी है जो समुद्र में से दागी जा सकती है और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। यह मिसाइल 700 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है। इस तरह की मिसाइलें चुनिंदा देशों के पास हैं।
✓✓ आकाश मिसाइल:-
2003 में भारत ने जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल का परीक्षण किया था। 700 किलोग्राम वजन वाली ये मिसाइल 55 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकती है। यह मिसाइल मानवरहित वाहन, युद्धक विमान और हेलीकॉप्टरों से दागी मिसाइलो को नष्ट कर सकती है।
✓✓प्रहार मिसाइल:-
- प्रहार जमीन से जमीन तक मार करने वाली मिसाइल है जिसका जुलाई 2011 में परीक्षण किया गया था। इसकी मारक क्षमता 150 किलोमीटर है। इसकी लंबाई 7.3 मीटर, वजन 1280 किलोग्राम और डायामीटर 420 मिलीमीटर है।
- 200 किलोग्राम का पेलोड ले जाने की क्षमता रखने वाली इस मिसाइल का रिएक्शन टाइम काफी कम है यानी प्रतिक्रिया काफी जल्दी होती है। इसे डीआरडीओ ने दो साल से भी कम समय में विकसित किया है. ये मल्टी बैरल रॉकेट और मध्यम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के बीच की खाई को कम करती है।
=>टैंकभेदी गाइडेड मिसाइल "नाग"
भारत ने ताजा परीक्षणों के तहत देश में निर्मित टैंकभेदी गाइडेड मिसाइल "नाग" का परीक्षण किया। इस मिसाइल की खासियत है कि यह हेलिकॉप्टर प्लेटफॉर्म से सात किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है।
- हेलिकॉप्टर से दागे जा सकने की वजह से इसे हेलिना नाम दिया गया है।