Kisan Ki Duniya
Website
www.kisankiduniya.in
www.kisankiduniya.com
page Link
https://www.facebook.com/share/168LsHTGUN/
Instagram New Account link
https://www.instagram.com/kisankiduniaya?igsh=MWJzaWMxcHh1bzhtdA==
Instagram old account link
https://www.instagram.com/kisankiduniya?igsh=b2pndmJlZjVnY2py
Business whatsapp link
https://wa.me/917400030522
About Us – Kisan Ki Duniya
Kisan Ki Duniya is your trusted source for natural, chemical-free products in Mira-Bhayander. We offer high-quality Millets, cold-pressed (kacchi ghani) oils, Natural Jaggery products
Our mission is to promote healthy living while supporting farmers and sustainable practices. Every product is carefully sourced, free from harmful chemicals, and packed with natural goodness. By choosing Kisan Ki Duniya, you embrace purity, health, and a greener future. Experience the best of nature with us!
Media coverage
https://hellomumbainews.com/current-news/iwd-2025-meet-top-10-famous-mumbai-based-women-entrepreneurs-of-2025-read-their-success-stories-on-international-womens-day/
https://hellomumbainews.com/current-news/iwd-2025-interview-with-dr-mansi-surati-founder-of-psychandsoul-on-international-womens-day/
Contact- 9321757598
Aniruddh Academy Sanatan Gurukul Activity
For More Information plese Visit our face book page
https://www.facebook.com/anirudhacademy/?mibextid=ZbWKwL Take Prior Appointment Before Come
"जैविक खेती: स्वस्थ धरती, स्वस्थ जीवन! 🌱🚜 देखिए आमिर खान के साथ सत्यमेव जयते में, कैसे जैविक खेती से किसान और उपभोक्ता दोनों को फायदा होता है।
"Organic Farming: Healthy Soil, Healthy Life! 🌱🚜 Watch Aamir Khan on Satyamev Jayate as he shares valuable insights on the benefits of organic farming for both farmers and consumers.
"
08/03/2025
https://hellomumbainews.com/current-news/iwd-2025-interview-with-seema-agarwal-founder-of-kisan-ki-duniya-on-international-womens-day/
"Feeling proud and grateful to be featured in Hello Mumbai News as the founder of Kisan Ki Duniya on the occasion of Women's Day. This journey wouldn't have been possible without your support and trust. Together, let's continue our mission to bring pure and healthy food to every home."
IWD 2025 : Interview with Seema Agarwal founder of Kisan Ki Duniya On Interested Women's Day - Hello Mumbai News IWD 2025 : Interview with Seema Agarwal founder of Kisan Ki Duniya On Interested Women's Day Hello Mumbai News
25/01/2024
कौन कहता है मूर्तियों में प्राण नहीं होता श्री राम चंद्र की आँखें प्राण प्रतिष्ठा के पहले देखो और प्राण प्रतिष्ठा के बाद देखो ! जय श्री राम 🚩🚩
#प्राण_प्रतिष्ठा_क्या_है ??...
भारतीय धर्मों में, जब किसी मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा की जाती है तब मंत्र द्वारा उस देवी या देवता का आवाहन किया जाता है कि वे उस मूर्ति में प्रतिष्ठित (विराजमान) हों।
इसी समय पहली बार मूर्ति की आँखें खोली जाती हैं।
मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा में महत्व मूर्ति की शिल्पगत सुंदरता का नहीं होता ।
अगर कोई साधारण- सा पत्थर भी रख दिया जाए और उसकी प्राण प्रतिष्ठा हो जाए तब वह भी उतना ही फलदायक रहता है, जितनी कि कोई सुंदर कलाकार द्वारा निर्मित की गई मूर्ति होती है। बहुत से पवित्र देवस्थानों में हम यही देखते हैं।
बारह ज्योतिर्लिंग हजारों वर्ष पहले किसी महान सत्ता के द्वारा प्राणप्रतिष्ठा से जागृत किए गए थे । उनमें स्थापित मूर्तियाँ शिल्प की दृष्टि से बहुत सुंदर नहीं कही जा सकती हैं ।
केदारनाथ में तो हम जिस मूर्ति की उपासना करते हैं, वह एक अनगढ़ चट्टान का टुकड़ा अथवा पाषाण मात्र है । लेकिन उसकी दिव्यता अद्भुत है। मूर्ति का मूल्य उसके पत्थर की कीमत से अथवा उसकी सुंदरता से नहीं आंका जाता । यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस स्थान विशेष की परिधि में पहुँचते ही साधक को दिव्यता का अनुभव होने लगता है तथा ईश्वर के साथ उसका संपर्क तत्काल जुड़ने लगता है।
प्राण प्रतिष्ठा एक असाधारण और अद्भुत कार्य है । कोई-कोई ही हजारों वर्षों में जन्म लेता है , जो मूर्तियों में प्राण प्रतिष्ठा कर सकने में समर्थ होता है। हजारों साल पहले बारह ज्योतिर्लिंग किसी महापुरुष ने प्राणप्रतिष्ठित कर दिए और वह अभी तक चले आ रहे हैं।
।। जय श्री राम।।
🙏🚩🙏
प्रिय हिंदुओं 🙏🏻
प्रिय हिंदू माता-पिता👨👩👧👧
बॉलीवुड 💩 और पश्चिमी सभ्यता की 👙🩱🕵🏻♀️🧟♀️ दुनिया से अपने बच्चे को बचाइए 🤔क्योंकि इसके बदले में आपको और आपके बच्चो को मिलता हैं 👎🏻
डिप्रेशन☹️
वासना👹❤🔥
तनाव🙇🏻♂️🙇🏻♀️
डर 😱
आत्मविश्वास की कमी 😟😔
🆕 सनातन शिक्षा कार्यक्रम
हर शनिवार और रविवार
आइए अपने बच्चे को 🎁💝 सही संस्कारों का उपहार दे।
➡️ सनातन के सच्चे मूल्य🕉️💎
➡️ हिंदुत्व का एक वास्तविक विज्ञान 🔱 🛕
➡️ भारतीय संस्कृति और मनोविज्ञान☸️
➡️ अध्यात्म का विज्ञान🧘🏻♀️🧘🏻♂️
➡️ व्यवहार संशोधन🤹🏻♀️🤹🏻♂️
➡️ ईर्ष्या ;जलन और वासना जैसे 🤢 विकारों का गायब होना ❤️🔥
➡️ आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ाएं 🛕🧘🏻♀️🧘🏻♂️
➡️ अपने बच्चे को सिखाएं कि 🤔 सकारात्मक 😇 कैसे सोचें।
हमारी व्हाट्स ऐप कम्युनिटी को ज्वाइन करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे
https://chat.whatsapp.com/Fuko2hLGVrQ4ac5sPcbe9O
अधिक जानकारी के लिए हमारे page को लाइक और Follow करिए
https://www.facebook.com/anirudhacademy/?mibextid=ZbWKwL
यह हमारे जागने का समय है😴😴👊🏻👊🏻 संस्कृति बचाओ देश बचाओ🤗🤗🚩🇮🇳🇮🇳🇮🇳
🙏🏻🙏🏻कृपया हमारा समर्थन करें कृपया यह संदेश साझा करें➡️ अपने प्रियजनों के साथ💕❣️❣️
21/12/2023
समयसूचक AM और PM का उद्गगम भारत ही था, लेकिन हमें बचपन से यह रटवाया गया, विश्वास दिलवाया गया कि इन दो शब्दों AM और PM का मतलब होता है :
AM : Ante Meridian PM : Post Meridian
एंटे यानि पहले, लेकिन किसके? पोस्ट यानि बाद में, लेकिन किसके?
यह कभी साफ नहीं किया गया, क्योंकि यह चुराये गये शब्द का लघुतम रूप था।काफ़ी अध्ययन करने के पश्चात ज्ञात हुआ और हमारी प्राचीन संस्कृत भाषा ने इस संशय को साफ-साफ दृष्टिगत किया है। कैसे? देखिये...
AM = आरोहनम् मार्तण्डस्य Aarohanam Martandasya
PM = पतनम् मार्तण्डस्य Patanam Martandasya
- - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - -
सूर्य, जो कि हर आकाशीय गणना का मूल है, उसी को गौण कर दिया। अंग्रेजी के ये शब्द संस्कृत के उस वास्तविक ‘मतलब' को इंगित नहीं करते।
आरोहणम् मार्तण्डस्य यानि सूर्य का आरोहण (चढ़ाव)।
पतनम् मार्तण्डस्य यानि सूर्य का ढलाव।
बारह बजे के पहले सूर्य चढ़ता रहता है - 'आरोहनम मार्तण्डस्य' (AM)।
बारह के बाद सूर्य का अवसान/ ढलाव होता है - 'पतनम मार्तण्डस्य' (PM)।
पश्चिम के प्रभाव में रमे हुए और पश्चिमी शिक्षा पाए कुछ लोगों को भ्रम हुआ कि समस्त वैज्ञानिकता पश्चिम जगत की देन है।
हम अपनी हजारों साल की समृद्ध विरासत, परंपराओं और संस्कृति का पालन करते हुए भी आधुनिक और उन्नत हो सकते हैं।इस से शर्मिंदा न हों बल्कि इस पर गौरव की अनुभूति करें और केवल नकली सुधारवादी बनने के लिए इसे नीचा न दिखाएं।समय निकालें और इसके बारे में पढ़ें / समझें / बात करें / जानने की कोशिश करें।
अपने “सनातनी" होने पर गौरवान्वित महसूस करें।
#सनातनी #सनातनभारत #सनातन #सनातनहमारीपहचान
ऋग्वेद के अनुसार जो अनाज खेतों मे पैदा होता है, उसका बंटवारा तो देखिए...
1- जमीन से चार अंगुल भूमि का,
2- गेहूं के बाली के नीचे का पशुओं का,
3- पहली फसल की पहली बाली अग्नि की,
4- बाली से गेहूं अलग करने पर मूठी भर दाना पंछियो का,
5- गेहूं का आटा बनाने पर मुट्ठी भर आटा चीटियों का,
6- चुटकी भर गुथा आटा मछलियों का,
7- फिर उस आटे की पहली रोटी गौमाता की,
8- पहली थाली घर के बुजुर्गो की
9- फिर हमारी थाली,
10- आखिरी रोटी कुत्ते की,
ये हमें सिखाती है, हमारी सनातन संस्कृति।
मुझे गर्व है कि मैं इस संस्कृति की हिस्सा हूँ.....
🙏🚩🙏
27/11/2023
*"शिवलिंग”’क्या है ?*
लिंग का अर्थ संस्कृत में चिन्ह, प्रतीक होता है।
जिस प्रकार पुरुषलिंग का अर्थ हुआ पुरुष का प्रतीक इसी प्रकार स्त्रीलिंग का अर्थ हुआ स्त्री का प्रतीक (अन्यथा स्त्री शब्द के साथ इसे जोड़ने का क्या औचित्य होता?) ठीक वैसे ही शिवलिंग का अर्थ है जो शिवका अंश या प्रतीक है उसे ही "शिवलिंग" कहा जाता है। शिवलिंग का अर्थ लिंग या जननांग नहीं होता। दरअसल ये गलतफहमी, जानबूझकर कुछ विशिष्ट श्रेणी के इतिहासकारों और मूर्खों द्वारा भाषा के रूपांतरण ( literal translation) और हमारे पुरातन धर्म ग्रंथों और प्रतीकों की महानता को नष्ट कर दिए जानेका एकमात्र प्रयास है ..
यदि हम हिंदी के एक शब्द “सूत्र” को ही लें तो
सूत्र को ‘डोरी/धागा’, गणितीय सूत्र, कोई भाष्य अथवा लेखन कई रूपों में आप व्याखित कर सकते उसी प्रकार “अर्थ” शब्द का भावार्थ ‘सम्पति’ भी हो सकता है और ‘मतलब’ भीशून्य,आकाश,अनन्त,ब्रह्मांड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया अर्थात जिसका कोई अन्त नहीं है न ही शुरुआत...
स्कन्दपुराण में कहा है -
“आकाशं लिंगमित्याहु: पृथ्वी तस्य पीठिका।
आलय: सर्व देवानां लयनार्लिंगमुच्यते ॥”
अर्थात् आकाश स्वयं लिंग है। शिवलिंग वातावरण सहित घूमती धरती (उसका आधार) तथा सारे अनन्त ब्रह्मांड (क्योंकि,ब्रह्मांड गतिमान है) का अक्ष/धुरी ही लिंग है अर्थात एक दिन सब उसी आकाश में समा जायेगा व फिर से एक नयी सरंचना बनेगी।)
ब्रह्माण्ड में दो ही चीजें हैं : ऊर्जा और पदार्थ , हमारा शरीर पदार्थ से निर्मित है और आत्मा ऊर्जा है। इसी प्रकार शिव ‘पदार्थ’ और शक्ति ‘ऊर्जा’ का प्रतीक बन कर शिवलिंग कहलाते है। ब्रह्मांड में उपस्थित समस्त ठोस तथा उर्जा शिवलिंग में निहित है.ब्रह्माण्ड में दो ही चीजें हैं : ऊर्जा और पदार्थ , हमारा शरीर पदार्थ से निर्मित है और आत्मा ऊर्जा है। इसी प्रकार शिव ‘पदार्थ’ और शक्ति ‘ऊर्जा’ का प्रतीक बन कर शिवलिंग कहलाते है।
ब्रह्मांड में उपस्थित समस्त ठोस तथा उर्जा शिवलिंग में निहित है.
वास्तव में शिवलिंग हमारे ब्रह्मांड की आकृति है. (The universe is a sign of Shiva Lingam.)
शिवलिंग भगवान शिव और देवी शक्ति (पार्वती) का आदि-अनादि एकल रूप है तथा पुरुष और प्रकृति की समानता का प्रतीक भी अर्थात इस संसार में न केवल पुरुष का और न केवल प्रकृति (स्त्री) का वर्चस्व है बल्कि दोनों का समान है। इन्हीं से मिलकर 'परमेश्वर' का रूप सृजित होता है, जिसका संबंध आत्मा से है।
'शिव का प्रतीक' ‘पराशक्ति’ परिपूर्णता में भगवान शिव का ‘आकार’ है परन्तु ‘परशिव’ परिपूर्णता में वे ‘निराकार’ हैं
परमेश्वर का शाब्दिक अर्थ ‘परम ईश्वर’ है। संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति का मूल कारण परमेश्वर है..
शिवलिंग' को 3 रूपों में बांटा गया है :-
शैव संप्रदाय के अनुसार 'शिवलिंग''परशिव', 'पराशक्ति' और 'परमेश्वर' तीन रूपों में बंटा है। ऊपर वाले भाग को 'परशिव' और बीच वाले हिस्से को 'पराशक्ति' कहते हैं।
🪷 _ 🪷 _ 🪷 _ 🕉️ _ 🪷 _ 🪷 _ 🪷
हम सब हनुमान चालीसा पढते हैं, सब रटा रटाया...
क्या हमे चालीसा पढते समय पता भी होता है कि हम हनुमानजी से क्या कह रहे हैं या क्या मांग रहे हैं?
बस रटा रटाया बोलते जाते हैं। आनंद और फल शायद तभी मिलेगा जब हमें इसका मतलब भी पता हो।
तो लीजिए पेश है श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित!!
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।
📯《अर्थ》→ गुरु महाराज के चरण.कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।★
📯《अर्थ》→ हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन.करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सदबुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥★
📯《अर्थ 》→ श्री हनुमान जी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों,स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥2॥★
📯《अर्थ》→ हे पवनसुत अंजनी नंदन! आपके समान दूसरा बलवान नही है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥★
📯《अर्थ》→ हे महावीर बजरंग बली! आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालो के साथी, सहायक है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥★
📯《अर्थ》→ आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे, काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥★
📯《अर्थ》→ आपके हाथ मे बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥★
📯《अर्थ 》→ हे शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन! आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर मे वन्दना होती है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर॥7॥★
📯《अर्थ 》→ आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए आतुर रहते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया॥8॥★
📯《अर्थ 》→ आप श्री राम चरित सुनने मे आनन्द रस लेते है। श्री राम, सीता और लखन आपके हृदय मे बसे रहते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा॥9॥★
📯《अर्थ》→ आपने अपना बहुत छोटा रुप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके.लंका को जलाया।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
भीम रुप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे॥10॥★
📯《अर्थ 》→ आपने विकराल रुप धारण करके.राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उदेश्यों को सफल कराया।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥★
📯《अर्थ 》→ आपने संजीवनी बुटी लाकर लक्ष्मणजी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥12॥★
📯《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा की तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥13॥★
📯《अर्थ 》→ श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से.लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद,सारद सहित अहीसा॥14॥★
📯《अर्थ》→श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥★
📯《अर्थ 》→ यमराज,कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा॥16॥★
📯《अर्थ 》→ आपनें सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया, जिसके कारण वे राजा बने।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥17॥★
📯《अर्थ 》→ आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥★
📯《अर्थ 》→ जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस पर पहुँचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझ कर निगल लिया।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि, जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥19॥★
📯《अर्थ 》→ आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुँह मे रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नही है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥★
📯《अर्थ 》→ संसार मे जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥21॥★
📯《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप.रखवाले है, जिसमे आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नही मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू.को डरना॥22॥★
📯《अर्थ 》→ जो भी आपकी शरण मे आते है, उस सभी को आन्नद प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक. है, तो फिर किसी का डर नही रहता।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँपै॥23॥★
📯《अर्थ. 》→ आपके सिवाय आपके वेग को कोई नही रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥24॥★
📯《अर्थ 》→ जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत, पिशाच पास भी नही फटक सकते।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥25॥★
📯《अर्थ 》→ वीर हनुमान जी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है,और सब पीड़ा मिट जाती है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥★
📯《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! विचार करने मे, कर्म करने मे और बोलने मे, जिनका ध्यान आपमे रहता है, उनको सब संकटो से आप छुड़ाते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥ 27॥★
📯《अर्थ 》→ तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यो को आपने सहज मे कर दिया।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
और मनोरथ जो कोइ लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥★
📯《अर्थ 》→ जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन मे कोई सीमा नही होती।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
चारों जुग Enjoy तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥29॥★
📯《अर्थ 》→ चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग मे आपका यश फैला हुआ है, जगत मे आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
साधु सन्त के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥30॥★
📯《अर्थ 》→ हे श्री राम के दुलारे ! आप.सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥३१॥★
📯《अर्थ 》→ आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।★
1.) अणिमा → जिससे साधक किसी को दिखाई नही पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ मे प्रवेश कर.जाता है।★
2.) महिमा → जिसमे योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है।★
3.) गरिमा → जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।★
4.) लघिमा → जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।★
5.) प्राप्ति → जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।★
6.) प्राकाम्य → जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी मे समा सकता है, आकाश मे उड़ सकता है।★
7.) ईशित्व → जिससे सब पर शासन का सामर्थय हो जाता है।★
8.)वशित्व → जिससे दूसरो को वश मे किया जाता है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥★
📯《अर्थ 》→ आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण मे रहते है, जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥★
📯《अर्थ 》→ आपका भजन करने से श्री राम.जी प्राप्त होते है, और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर होते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
अन्त काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥34॥★
📯《अर्थ 》→ अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
और देवता चित न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥★
📯《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नही रहती।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥★
📯《अर्थ 》→ हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥★
📯《अर्थ 》→ हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझपर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जो सत बार पाठ कर कोई, छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥★
📯《अर्थ 》→ जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे परमानन्द मिलेगा।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा॥39॥★
📯《अर्थ 》→ भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥40॥★
📯《अर्थ 》→ हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है।इसलिए आप उसके हृदय मे निवास कीजिए।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥★
📯《अर्थ 》→ हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनन्द मंगलो के स्वरुप है। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय मे निवास कीजिए।★
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
🌹सीता राम दुत हनुमान जी को समर्पित🌹
🍒💠🍒💠🍒💠🍒💠🍒
🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏
जय जय श्री राम🙏
🌼🥀!!बोलो सियावर रामचन्द्र की जय!!🥀🌼
प्रिय हिंदुओं 🙏🏻
प्रिय हिंदू माता-पिता👨👩👧👧
बॉलीवुड 💩 और पश्चिमी सभ्यता की 👙🩱🕵🏻♀️🧟♀️ दुनिया से अपने बच्चे को बचाइए 🤔क्योंकि इसके बदले में आपको और आपके बच्चो को मिलता हैं 👎🏻
डिप्रेशन☹️
वासना👹❤🔥
तनाव🙇🏻♂️🙇🏻♀️
डर 😱
आत्मविश्वास की कमी 😟😔
🆕 सनातन शिक्षा कार्यक्रम
हर शनिवार और रविवार
आइए अपने बच्चे को 🎁💝 सही संस्कारों का उपहार दे।
➡️ सनातन के सच्चे मूल्य🕉️💎
➡️ हिंदुत्व का एक वास्तविक विज्ञान 🔱 🛕
➡️ भारतीय संस्कृति और मनोविज्ञान☸️
➡️ अध्यात्म का विज्ञान🧘🏻♀️🧘🏻♂️
➡️ व्यवहार संशोधन🤹🏻♀️🤹🏻♂️
➡️ ईर्ष्या ;जलन और वासना जैसे 🤢 विकारों का गायब होना ❤️🔥
➡️ आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ाएं 🛕🧘🏻♀️🧘🏻♂️
➡️ अपने बच्चे को सिखाएं कि 🤔 सकारात्मक 😇 कैसे सोचें।
हमारी व्हाट्स ऐप कम्युनिटी को ज्वाइन करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे
https://chat.whatsapp.com/Fuko2hLGVrQ4ac5sPcbe9O
अधिक जानकारी के लिए हमारे page को लाइक और Follow करिए
https://www.facebook.com/anirudhacademy/?mibextid=ZbWKwL
यह हमारे जागने का समय है😴😴👊🏻👊🏻 संस्कृति बचाओ देश बचाओ🤗🤗🚩🇮🇳🇮🇳🇮🇳
🙏🏻🙏🏻कृपया हमारा समर्थन करें कृपया यह संदेश साझा करें➡️ अपने प्रियजनों के साथ💕❣️❣️
18/11/2023
हनुमान विवाह
सूर्यदेव की पुत्री से हुआ था हनुमान का विवाह, क्या है इसका राज?
हनुमान जी को ब्रह्मचारी माना जाता है लेकिन पुराणों में उनकी पत्नी सुवर्चला बताई गई हैं। तेलंगाना में उनके नाम का एक मंदिर भी बना है। जानें क्या है हनुमान जी की शादी का राज...
हनुमान भक्त उन्हें ब्रह्मचारी मानते हैं और उनकी पूजा में अक्सर उनके नाम के आगे इस शब्द का प्रयोग करते हैं। लेकिन तेलंगाना के एक मंदिर में उनकी और उनकी पत्नी सुवर्चला की एक साथ मूर्तियां स्थापित हैं। यहां पूरी श्रद्धा के साथ उनका पूजन किया जाता है। बता दें कि तेलंगाना के खम्मम जिले में हनुमान जी का ये मंदिर देश का अकेला ऐसा मंदिर है जहां उनकी मूर्ति पत्नी के साथ स्थापित है। जहां तक इनके विवाहित होने की बात है तो पाराशर संहिता में हनुमान जी और सुवर्चला के विवाह की कथा है।
तेलंगाना के इस मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। मान्यता है कि जो भी इस मंदिर में हनुमानजी और उनकी पत्नी के दर्शन करता है, उन भक्तों के वैवाहिक जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है। जहां तक हनुमान जी की पत्नी की बात है तो उनको सूर्यदेव की पुत्री बताया गया है।
कैसे हुआ हनुमान का विवाह:
तेलंगाना के इस मंदिर की मान्यता का आधार पाराशर संहिता को माना गया है। पाराशर संहिता में ही हनुमान जी के विवाहित होने का प्रमाण मिलता है। उनका विवाह सूर्यदेव की पुत्री सुवर्चला से हुआ है। संहिता के अनुसार, हनुमानजी ने सूर्य देव को अपना गुरु बनाया था। सूर्य देव के पास 9 दिव्य विद्याएं थीं जिनका ज्ञान बजरंग बली प्राप्त करना चाहते थे। सूर्य देव ने इन 9 में से 5 विद्याओं का ज्ञान तो हनुमानजी को दे दिया, लेकिन शेष 4 विद्याओं के लिए सूर्य के समक्ष एक संकट खड़ा हो गया।
दरअसल इन 4 दिव्य विद्याओं का ज्ञान सिर्फ उन्हीं शिष्यों को दिया जा सकता था जो विवाहित हों। इस समस्या को दूर करने के लिए सूर्य देव ने हनुमानजी से विवाह करने की बात कही।
सुवर्चला ऐसे बनीं हनुमानजी की पत्नी:
हनुमान जी विवाह के लिए योग्य कन्या की तलाश पूरी हुई सूर्य देव की पुत्री सुवर्चला पर। सूर्य देव ने हनुमानजी से कहा कि सुवर्चला परम तपस्वी और तेजस्वी है और इसका तेज तुम ही सहन कर सकते हो। सुवर्चला से विवाह के बाद तुम इस योग्य हो जाओगे कि शेष 4 दिव्य विद्याओं का ज्ञान प्राप्त कर सको। सूर्य देव ने यह भी बताया कि सुवर्चला से विवाह के बाद भी तुम सदैव बाल ब्रह्मचारी ही रहोगे, क्योंकि विवाह के बाद सुवर्चला पुन: तपस्या में लीन हो जाएगी।
यह सब बातें जानने के बाद हनुमानजी और सुवर्चला का विवाह सूर्य देव ने करवा दिया। विवाह के बाद सुवर्चला तपस्या में लीन हो गईं और हनुमानजी से अपने गुरु सूर्य देव से शेष 4 विद्याओं का ज्ञान भी प्राप्त कर लिया। इस प्रकार विवाह के बाद भी हनुमानजी ब्रह्मचारी बने हुए हैं।
अगर आप करना चाहें दर्शन:
तेलंगाना का खम्मम जिला हैदराबाद से करीब 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अत: यहां पहुंचने के लिए हैदराबाद से आवागमन के उचित साधन मिल सकते हैं। हैदराबाद पहुंचने के लिए देश के सभी बड़े शहरों से बस, ट्रेन और हवाई जहाज की सुविधा आसानी से मिल जाती है।
🙏🚩🙏
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Category
Address
Bhayandar
401105