11/04/2026
भारत के परमाणु कार्यक्रम में नया अध्याय: PFBR – BHAVINI की प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर
भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए 6 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक दिन बन गया। तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित 500 MWe प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने रात 8:25 बजे पहली क्रिटिकलिटी प्राप्त कर ली, जिससे नियंत्रित नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया शुरू हो गई। यह उपलब्धि भारत को अपने तीन चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में आधिकारिक रूप से ले जाती है, जो डॉ. होमी जहांगीर भाभा की मूल दृष्टि पर आधारित है।
PFBR क्या है और इसका महत्व
PFBR एक द्रव सोडियम‑शीतलित, मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन वाला फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है, जो उत्पादित ऊर्जा के साथ‑साथ नया ईंधन (प्लूटोनियम‑239) भी पैदा करता है। इससे भारत के सीमित यूरेनियम संसाधनों का उपयोग बहुत अधिक दक्ष तरीके से होता है और भविष्य में थोरियम‑आधारित तीसरे चरण की दिशा मजबूत होती है।
PFBR का निर्माण और संचालन भारतीया नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च (IGCAR), कलपक्कम के वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग ज्ञान पर आधारित है। इस उपलब्धि से भारत रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा जो व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करेगा।
PFBR की वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियाँ
हाल के शोधों के अनुसार PFBR निम्नलिखित उन्नत तकनीकों पर आधारित है:
मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन: प्लूटोनियम और यूरेनियम का मिश्रण, जो ईंधन‑चक्र को लंबा और अधिक दक्ष बनाता है।
लिक्विड सोडियम कूलेंट: उच्च तापमान पर बेहतर ऊष्मा‑स्थानांतरण, जिससे ऊर्जा‑दक्षता बढ़ती है।
उन्नत सुरक्षा प्रणाली: बहु‑स्तरीय बैरियर, जोखिम‑आधारित विश्लेषण और स्वचालित शटडाउन संरचनाएँ, जिन्हें परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने कड़ी समीक्षा के बाद अनुमोदित किया।
थोरियम‑प्रयोगात्मक तत्व: भविष्य के थोरियम‑आधारित रिएक्टरों के लिए छोटे‑पैमाने पर थोरियम‑आधारित ईंधन असेंबली का परीक्षण PFBR के माध्यम से किया जाएगा।
ये तकनीकें PFBR की दक्षता और सुरक्षा बढ़ाती हैं और भारत के 2047 तक लगभग 100 गीगावाट नाभिकीय क्षमता के लक्ष्य के लिए एक मॉडल स्थापित करती हैं।