“तुम्हारे तो बच्चे ही नहीं हैं, तुम्हारा इस दुनिया में नाम कौन लेगा ?” जब एक औरत को समाज से ऐसे ताने मिलते हैं, तो वो टूट जाती है। कर्नाटक की एक गरीब मज़दूर महिला को भी यही ताने मिले। लेकिन उस महिला ने रोने के बजाय एक ऐसा संकल्प लिया, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। उसने एक-दो नहीं, बल्कि 8000 से ज़्यादा पेड़ों को जन्म दिया और उन्हें अपने बच्चों की तरह पाला। आज कहानी— ‘वृक्ष माता’ और पद्मश्री से सम्मानित सालूमरदा थिमक्का की।
कर्नाटक के गुब्बी ताल्लुक में जन्मीं थिमक्का की शादी चिक्कैया नाम के एक दिहाड़ी मज़दूर से हुई थी। शादी के 25 साल बाद भी जब उनकी कोई संतान नहीं हुई, तो रिश्तेदारों और समाज ने उन्हें ताने मारना शुरू कर दिया। इस दुख से बचने के लिए दोनों पति-पत्नी ने एक ऐसा फैसला किया जो इंसानियत की मिसाल बन गया। उन्होंने तय किया कि वे बरगद के पौधे लगाएंगे और उन्हें ही अपनी संतान मानकर पालेंगे।
Ajay bhoravat
Ram ram ji
जब 1940 के दशक में भारत के विभाजन की पटकथा लिखी जा रही थी, जब मोहम्मद अली जिन्ना चिल्लाकर कह रहे थे कि ‘मुस्लिम लीग’ ही भारत के मुसलमानों की एकमात्र आवाज़ है, तब सिंध की धरती से एक बुलंद आवाज़ उठी थी। एक ऐसा मुख्यमंत्री जिसने जिन्ना की ‘टू-नेशन थ्योरी’ (दो-राष्ट्र सिद्धांत) को खारिज करते हुए कहा था— “हमारा धर्म अलग हो सकता है, लेकिन हमारी राष्ट्रीयता एक है। हम पहले हिंदुस्तानी हैं।” आज बात करेंगे इतिहास के उस सबसे बड़े और साहसी राष्ट्रवादी मुस्लिम नेता की— अल्लामा अल्लाह बख्श सूमरो की।
आज आप जो यह वीडियो बिना किसी रुकावट के देख रहे हैं, पलक झपकते ही जो हाई-स्पीड इंटरनेट आपके फोन में दुनिया भर का डेटा ले आता है—क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे किस भारतीय का दिमाग है? दुनिया कहती है कि 21वीं सदी ‘इंटरनेट’ की सदी है, लेकिन इंटरनेट की रीढ़ यानी ‘फाइबर ऑप्टिक्स’ का आविष्कार 1950 के दशक में ही एक भारतीय वैज्ञानिक ने कर दिया था। आज बात करेंगे फॉर्च्यून मैग्जीन के ‘बिजनेसमैन ऑफ द सेंचुरी’ की लिस्ट में शामिल और ‘फादर ऑफ फाइबर ऑप्टिक्स’— डॉ. नरेंद्र सिंह कपानी की।
जब भी संयुक्त राष्ट्र (UN) की बात होती है, तो मानवाधिकारों के घोषणापत्र का ज़िक्र ज़रूर आता है। क्या आप जानते हैं कि उस ऐतिहासिक दस्तावेज़ की पहली लाइन में लिखा होने वाला था— “All men are created equal” (सभी पुरुष समान पैदा हुए हैं)। लेकिन तभी वहां बैठी एक भारतीय महिला ने अपनी आवाज़ उठाई और कहा, “नहीं, केवल पुरुष क्यों? इसमें लिखो— All human beings are born free and equal.” (सभी मनुष्य स्वतंत्र और समान पैदा हुए हैं)। आज बात करेंगे उस महान विदुषी और संविधान निर्माता की— हंसा जीवराज मेहता।
कॉकरोच जनता पार्टी ।
कालिदास के बारे में एक मशहूर किस्सा है कि वे शुरुआत में बहुत कम बुद्धिमान थे। कहा जाता है कि वे उसी डाल को काट रहे थे जिस पर वे बैठे थे। लेकिन विद्युतमा जैसी विदुषी से विवाह और फिर उनके तिरस्कार ने कालिदास के भीतर की सोई हुई प्रतिभा को जगा दिया। उन्होंने ज्ञान की ऐसी साधना की कि जब वे वापस लौटे, तो उनके मुख से निकले तीन शब्दों (अस्ति कश्चित वाग्विशेष:) पर उन्होंने तीन महान काव्यों की रचना कर डाली।
राजा रवि वर्मा | Raja Ravi Varma
आप अपने घर के पूजा घर में लक्ष्मी, सरस्वती या भगवान राम की जो तस्वीर देखते हैं, क्या आपने कभी सोचा है कि उनका वह स्वरूप कहाँ से आया? सदियों तक हमारे देवी-देवता केवल मंदिरों की मूर्तियों या महलों की दीवारों तक सीमित थे। लेकिन 19वीं सदी के अंत में एक ऐसा कलाकार आया जिसने अपनी कूची से देवताओं को एक इंसानी रूप दिया और उन्हें आम आदमी के घर तक पहुँचा दिया। आज बात करेंगे ‘महान चित्रकार’ राजा रवि वर्मा की।
बैरम ख़ान | Bairam Khan
भगवान बिरसा मुण्डा: उलगुलान विद्रोह और धरती आबा का पूरा इतिहास !“भगवान बिरसा मुण्डा” - एक ऐसा नाम जिसने न केवल आदिवासियों को उनके अधिकारों के लिए जगाया, बल्कि ब्रिटिश हुकूमत की नींव भी हिला दी।25 साल की छोटी सी उम्र में बिरसा मुण्डा ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए एक विशाल जन-आंदोलन खड़ा किया और क्यों आज भी उन्हें ‘भगवान’ की तरह पूजा जाता है।
The last queen of avadh “ begum Hazrat Mahal “
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