21/04/2020
यह पूरे विश्व के लिए निंदा की
विषय हैं।
महाराष्ट्र के पालघर में सौ लोगों के बीच एक निर्दोष भक्त की हत्या पूरे विश्व के लिए निंदनीय है, एक भक्त अपने कर्तव्यों के पालन हेतु गुजरात के एक संत के अन्तियोष्टि संस्कार के लिए जा रहे थे, वह तो अपने कर्तव्यों के पालन हेतु जा रहे थे, हम मानते है की हमारे भारत में अभी लॉक डाउन लागू है, उसका पालन करना अनिवार्य है, इसलिए भारत के हर व्यक्ति को इस नियम का पालन करना अति आवश्यक है। ताकि इससे कोरोना जैसी महामारी से समाज की रक्षा हो सके।
जिस तरह मनुष्य को भोजन की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार यदि मनुष्य संस्कार विहीन हो जाए तो इससे धर्म की क्षति होती हैं। कल्पवृक्ष गिरी महाराज जी, सुशील गिरी महाराज जी, और उनके ड्राइवर ने लॉक डाउन के नियम को तोड़ कर कानून के दृष्टि में दोषी बन गए, जिससे कानून इनको इस दोष के अनुसार सजा दे सकते थे। यदि हम धर्म की दृष्टि से देखे तो वह अपने कर्तव्यों के पालन करते हुए, अपने धर्म के पालन कर रहे थे।
यहां पर कल्पना करने की आवश्यकता है कि आप यदि कल्पवृक्ष गिरी या सुशील गिरी या उनके ड्राइवर के स्थान पर निर्दोष हो और एक भीड़ भ्रम या संदेह में आकर लाठी बरसाने लगे और मार दे, तो यह दृश्य कितने भयानक और पापपूर्ण होंगे इसकी कल्पना आप अच्छी प्रकार से कर सकते हैं। ये एक सामूहिक अपराध है, इस समूह में प्रशासन के पुलिस/सैनिक भी मौजूद रहकर अपने कर्तव्यों के पालन न करते हुए उस पापी समूह के साथ दे रहे थे, इसलिए इस कांड में हत्या करने वाले समूह के साथ पुलिस भी अपराधी है।
यदि किसी राज्य के सैनिक अपराध करें तो उस राज्य के राजा भी दोषी होते है, ठीक इसी प्रकार महाराष्ट्र के प्रशासन के उच्चतम अधिकारी भी कल्पवृक्ष गिरी, सुशील गिरी और उनके ड्राइवर की हत्या के दोषी धर्म की दृष्टि से हो जाते है, क्योंकि राजा का कर्तव्य होता है कि अपने राज्य में न्याय व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए राजा अपने सैनिक को राज्य के कोने-कोने में रह कर न्याय व्यवस्था रखने के आदेश देते है। सैनिक यदि राजा के आज्ञा का पालन न करें तो यह राजा की असमर्थता है।
जो समाज सत्य, धर्म और न्याय के पालन नहीं करते उस समाज के पतन होने में देर नहीं लगते। इन सबका सबसे बड़ा उदाहरण महाभारत है, जिनमें सौ करवों के सर्वनाश हुआ था।
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