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क्या हर माँ बच्चे से ऐसा बर्ताव करती है ?  माँ ने पहली बार आरव को अकेले दुकान भेजा था। हाथ में ₹100 देते हुए बोलीं,**“सा...
22/08/2026

क्या हर माँ बच्चे से ऐसा बर्ताव करती है ? माँ ने पहली बार आरव को अकेले दुकान भेजा था।

हाथ में ₹100 देते हुए बोलीं,
**“सामान ले आना… और पैसे संभालकर रखना।”**

आरव बहुत खुश था। पहली बार उसे अकेले दुकान भेजा गया था।

वह सामान लेकर घर लौट आया।

दरवाजे पर पहुँचकर उसने जेब में हाथ डाला…

पैसे नहीं थे।

आरव का चेहरा एकदम उतर गया।

उसने दूसरी जेब देखी। फिर सामान देखा। फिर रास्ते की तरफ देखने लगा।

उसे याद आया—शायद रास्ते में कहीं पैसे हाथ से गिर गए थे।

वह डरते-डरते माँ के पास गया।

**“माँ… वो पैसे…”**

माँ ने पूछा,
**“क्या हुआ?”**

आरव ने सिर नीचे कर लिया।

**“मुझसे पैसे रास्ते में गिर गए।”**

माँ एक पल के लिए चुप हो गईं।

**“कहाँ गिर गए?”**

आरव ने पूरा रास्ता बताया।

माँ ने कहा,
**“चलो, एक बार ढूँढकर आते हैं।”**

दोनों वापस उसी रास्ते पर गए।

काफी देर तक ढूँढा, लेकिन पैसे नहीं मिले।

आरव बहुत उदास था।

घर लौटते हुए उसने धीरे से कहा,
**“माँ, अब आप मुझे कभी अकेले दुकान मत भेजना… मुझसे फिर गलती हो जाएगी।”**

माँ ने उसकी तरफ देखा।

फिर बोलीं,

**“गलती इसलिए हुई क्योंकि तुमने पैसे हाथ में रखे थे। अगली बार जेब में रखना।”**

आरव चुप रहा।

माँ ने उसके सिर पर हाथ रखा और कहा,

**“लेकिन एक गलती हो गई तो क्या अब तुम काम करना ही छोड़ दोगे?”**

आरव ने माँ की तरफ देखा।

अगली सुबह माँ ने फिर उसके हाथ में ₹100 रखे।

**“चलो, आज फिर दुकान तुम ही जाओ।”**

आरव ने पैसे इस बार सीधे अपनी जेब में रखे।

दुकान से सामान लिया और वापस आ गया।

घर पहुँचकर उसने पैसे माँ के हाथ में रखे।

माँ मुस्कुराईं।

आरव भी मुस्कुरा दिया।

माँ चाहतीं तो पहली गलती के बाद उसे अकेले दुकान भेजना बंद कर सकती थीं।

लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

क्योंकि उस दिन उन्हें सिर्फ पैसे बचाने वाला बच्चा नहीं बनाना था…

**उन्हें ऐसा बच्चा बनाना था जो गलती होने के बाद भी अगली बार कोशिश करने से न डरे।**

आपके हिसाब से क्या करना चाहिए ऐसे स्थिति में ? कमेंट करें ? किसी विषय पर आपको स्टोरी चाहिए वो भी लिखे
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#माँ #परवरिश #ज़िंदगीकीसीख

यही माँ बाप जीत जाते हैं - “बेटा… गैस के पैसे कहाँ से आए?” मम्मी घर लौटीं, किचन में नया गैस सिलेंडर रखा था। वह हैरान होक...
19/08/2026

यही माँ बाप जीत जाते हैं - “बेटा… गैस के पैसे कहाँ से आए?” मम्मी घर लौटीं, किचन में नया गैस सिलेंडर रखा था। वह हैरान होकर बोलीं, आयुष चुप रहा। फिर उसने धीरे से अपनी टूटी हुई गुल्लक माँ के सामने रख दी।
कैसे और कौन सी वजह है बच्चे में क्या चेंज हुआ --->>>

मम्मी कुछ पल उस गुल्लक को देखती रहीं।
लेकिन उन्हें अभी यह नहीं पता था कि कुछ देर पहले उनके छोटे से बेटे ने घर की एक बड़ी परेशानी खुद संभाल ली थी।

उस दिन घर में गैस लगभग खत्म हो चुकी थी।

मम्मी जल्दी से बाजार चली गई थीं और पापा ऑफिस में थे। तभी गैस वाला सिलेंडर लेकर घर आ गया। “बेटा, पैसे दे दो… सिलेंडर रख दूँ।”

आयुष ने कहा,
“मम्मी अभी बाहर गई हैं… पापा भी घर पर नहीं हैं।”

गैस वाला जाने लगा।

आयुष जानता था कि इन दिनों गैस आसानी से मिल नहीं रही थी।
अगर आज सिलेंडर चला गया, तो पता नहीं अगली बार कब मिलेगा।

वह कुछ देर दरवाजे पर खड़ा सोचता रहा।
फिर उसकी नजर अपनी गुल्लक पर पड़ी।
उसे पापा की बात याद आई—

“पैसे मिलें तो सारे खर्च मत कर देना। थोड़ा बचाकर रखना… जरूरत के समय यही काम आएंगे।”

आयुष ने गुल्लक उठाई। कुछ पल उसे देखा… फिर गुल्लक तोड़ दी।
उसने गैस वाले को पैसे दे दिए और सिलेंडर किचन में रखवा लिया।

थोड़ी देर बाद मम्मी वापस आईं। उन्होंने वही सवाल पूछा था— “बेटा… गैस के पैसे कहाँ से आए?” आयुष ने बस अपनी टूटी हुई गुल्लक दिखा दी।

बच्चे को बचत करना सिखाना सिर्फ पैसे बचाना सिखाना नहीं था। वे उसे धीरे-धीरे यह सिखा रहे थे कि जरूरत के समय सही फैसला कैसे लिया जाता है।

और जब बच्चा आपकी गैरमौजूदगी में भी आपकी सिखाई हुई बात को सही जगह इस्तेमाल करने लगे…
यही माँ-बाप की असली जीत होती है।

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आज उन सभी वीरों को नमन, जिनके त्याग और साहस ने हमें आज़ाद भारत दिया। स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🇮🇳   आइए, अप...
15/08/2026

आज उन सभी वीरों को नमन, जिनके त्याग और साहस ने हमें आज़ाद भारत दिया। स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🇮🇳 आइए, अपने बच्चों को ऐसा भारत बनाने की सीख दें जहाँ वे खुलकर सीखें, अपने सपने देखें और उन्हें पूरा करने का साहस रखें। ❤️ जय हिन्द! 🇮🇳

🇮🇳 Heartiest wishes on Independence Day! 🇮🇳
Today, we salute all the brave souls whose sacrifice and courage gave us a free India. Let us teach our children to build a India where they can learn freely, dream big, and have the courage to make those dreams come true. ❤️ Jai Hind! 🇮🇳

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“पापा, आज़ादी क्या होती है?” क्या मुझे खेलने की आज़ादी है ? आप कहते —पहले पढ़ाई करो?  पापा ने समझाया, “आज़ादी का मतलब है ...
14/08/2026

“पापा, आज़ादी क्या होती है?” क्या मुझे खेलने की आज़ादी है ? आप कहते —पहले पढ़ाई करो? पापा ने समझाया, “आज़ादी का मतलब है कि हमारा देश अब किसी दूसरे देश की गुलामी में नहीं है। हम अपने फैसले खुद ले सकते हैं।”
आरव कुछ देर सोचता रहा।
फिर उसने पूछा—
“तो क्या मैं भी आज़ाद हूँ?”
पापा मुस्कुराए।
“हाँ बेटा, तुम भी आज़ाद हो।”
आरव ने तुरंत अगला सवाल किया—
“फिर जब मैं अपनी पसंद का खेल खेलना चाहता हूँ, तो आप कहते हैं—पहले पढ़ाई करो?”
पापा चुप हो गए।
आरव ने फिर पूछा—
“जब मैं अपनी बात बताना चाहता हूँ, तो आप कहते हैं—‘बड़े बोल रहे हैं, चुप रहो’?” पापा अब भी मुस्कुरा रहे थे।
उन्हें समझ आ गया था कि आरव सिर्फ सवाल नहीं कर रहा… वह आज़ादी का मतलब समझने की कोशिश कर रहा है।
पापा ने थोड़ा रुककर कहा—
“बेटा, तुम्हें अपनी बात कहने की आज़ादी है। तुम्हें सवाल पूछने की भी आज़ादी है। तुम्हें अपनी पसंद बताने की भी आज़ादी है।”
आरव ध्यान से पापा को देखने लगा।
पापा ने कहा—
“लेकिन आज़ादी का मतलब यह नहीं कि हम हर समय वही करें जो हमारा मन कहे।” आरव ने पूछा— “तो फिर आज़ादी का मतलब क्या है?”
पापा मुस्कुराए और बोले—
“आज़ादी का मतलब है—तुम्हें अपनी बात कहने का हक है, सवाल पूछने का हक है, अपनी पसंद रखने का हक है… लेकिन साथ ही यह समझने की जिम्मेदारी भी है कि कब क्या करना सही है।”
आरव कुछ देर चुप रहा।
फिर उसने पूछा— “तो सवाल पूछने की भी आज़ादी है?”
पापा हँस पड़े। “हाँ… सबसे ज्यादा।”
फिर पापा ने उसके सिर पर हाथ रखा और कहा—
“मैं तुम्हें हर फैसला लेने से रोकना नहीं चाहता, आरव।
मैं चाहता हूँ कि एक दिन तुम अपने फैसले खुद ले सको…
और सही फैसला लेने की समझ भी तुम्हारे पास हो।”

बच्चे को आज़ादी दीजिए, लेकिन आज़ादी के साथ जिम्मेदारी और सही निर्णय लेने की समझ भी सिखाइए।

देश की आज़ादी हमें अपने फैसले लेने का अधिकार देती है।
और बच्चों की आज़ादी उन्हें अपने फैसले लेना सीखने का अवसर देती है।

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“मम्मी… मुझे समझ नहीं आता किसकी बात मानूँ।” माँ चुप हो गईं। एक दिन स्कूल में आरव को कोई काम करना था। उसने पहले teacher क...
10/08/2026

“मम्मी… मुझे समझ नहीं आता किसकी बात मानूँ।” माँ चुप हो गईं। एक दिन स्कूल में आरव को कोई काम करना था। उसने पहले teacher की तरफ देखा, फिर अपने दोस्त की तरफ… और फिर चुप हो गया।
Teacher ने उसकी माँ से कहा, “आपका बेटा खुद फैसला लेने से डरता है।”
माँ हैरान थीं। उस रात उन्होंने आरव को अपने पास बैठाया और बहुत प्यार से पूछा, “बेटा… तुम इतना सोचते क्यों हो?” आरव कुछ बोलता, उससे पहले ही उसके दिमाग में चार आवाज़ें गूंजने लगीं। माँ की आवाज़— “पहले पढ़ाई, फिर खेलना।” दादी की आवाज़— “अरे बच्चा है… खेलने दो।” पापा की आवाज़— “उसे खुद फैसला लेने दो।” दादा की आवाज़— “हमारे समय में बच्चों से पूछा नहीं जाता था… जो कहा जाता था, वही करना पड़ता था।” चारों उसे प्यार करते थे। चारों चाहते थे कि आरव अच्छा इंसान बने। लेकिन… चारों उसे अलग-अलग तरीके से बड़ा कर रहे थे। आरव ने कुछ देर माँ को देखा। फिर धीरे से बोला, “मम्मी… मुझे समझ नहीं आता किसकी बात मानूँ।” माँ चुप हो गईं।

उस दिन उन्हें पहली बार समझ आया कि आरव को प्यार की कमी नहीं थी। उसे तो चार लोगों का प्यार मिला था। कमी थी तो सिर्फ… एक जैसी दिशा की।

बच्चे के सामने अगर माँ कुछ कहे और पिता उसका उल्टा कर दें, दादी उसकी हर गलती बचा लें और दादा हर बात पर अपने समय का नियम लगा दें… तो बच्चा सिर्फ यह नहीं सीखता कि क्या सही है।

वह यह सीखने लगता है— “किसके सामने क्या करना है।” और शायद यहीं से एक बच्चा धीरे-धीरे अपना निर्णय लेना भूलने लगता है।

बच्चे को चार लोगों का प्यार दीजिए। लेकिन कोशिश कीजिए कि उसके सामने दिशा चार न हो।

क्योंकि बच्चे को बड़ा करने के लिए सिर्फ एक घर काफी नहीं…
एक साझा सोच भी चाहिए।
इस बात पर जरूर सोचिए— क्या हम बच्चे को अलग-अलग संदेश तो नहीं दे रहे? और अगर आपको लगता है कि यह बात किसी parent तक पहुँचना जरूरी है, तो इसे शेयर जरूर कीजिए।

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“मैं कर देती हूँ... इससे जल्दी और अच्छा बन जाएगा।”मीना ने हाथ आगे बढ़ाया...फिर अचानक रुक गई।उसने आरव से कहा—“ठीक है... त...
08/08/2026

“मैं कर देती हूँ... इससे जल्दी और अच्छा बन जाएगा।”
मीना ने हाथ आगे बढ़ाया...
फिर अचानक रुक गई।
उसने आरव से कहा—
“ठीक है... तुम कोशिश करो। मैं यहीं हूँ।”
आरव ने फिर कोशिश की।
पहली बार फिर गलती हुई।
उसने उसे ठीक किया।
दूसरी बार थोड़ा बेहतर हुआ।
धीरे-धीरे उसका प्रोजेक्ट तैयार हो गया।
आरव ने अपने बनाए हुए प्रोजेक्ट को देखा...
फिर माँ की तरफ देखकर मुस्कुराया—
“मम्मी... ये मैंने किया।”
मीना भी मुस्कुरा दी।
उस दिन प्रोजेक्ट शायद बहुत सुंदर नहीं बना था...
लेकिन आरव ने उससे कहीं बड़ी चीज़ बना ली थी—
अपने ऊपर थोड़ा और भरोसा। ❤️
क्योंकि...
कभी-कभी बच्चे को हमारी मदद से ज्यादा...
हमारा भरोसा चाहिए होता है।

💬 एक सवाल माता-पिता से...
जब आपका बच्चा कोई काम बार-बार गलत करता है...
तो क्या आप—
❤️ उसकी मदद करते हैं?
या
🙂 उसे खुद कोशिश करने देते हैं?
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इंग्लिश में अनुवाद:-
“I’ll do it... it will be faster and better this way.”
Meena reached out her hand...
Then suddenly stopped.
She said to Aarav—
“Okay... you try. I’m right here.”
Aarav tried again.
The first time, he made another mistake.
He corrected it.
The second time, it was a little better.
Slowly, his project began to take shape.
Aarav looked at the project he had made...
Then looked at his mother and smiled—
“Mummy... I did this.”
Meena smiled too.
That day, the project may not have been perfect...
But Aarav had built something much more important—
a little more belief in himself. ❤️
Because...
Sometimes, what a child needs more than our help...
is our trust in them.
💬 A question for parents...
When your child keeps making mistakes while doing something...
What do you do?
❤️ Help them?
or
🙂 Let them keep trying on their own?

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03/08/2026


👬friendship begins with a Smile and grows with kindness. 💜Our little learners Celebrated the Special bond of friendship with fun, laughter, and unforgettable moments.
✨Happy Friendship Day!
Friendship Day Besties

यहीं  माता-पिता की बड़ी परीक्षा शुरू होती है... आज उसके बेटे आरव का रिपोर्ट कार्ड मिलने वाला था। वह मन ही मन सोच रही थी....
29/07/2026

यहीं माता-पिता की बड़ी परीक्षा शुरू होती है... आज उसके बेटे आरव का रिपोर्ट कार्ड मिलने वाला था। वह मन ही मन सोच रही थी... "अगर अच्छे नंबर आए, तो उसकी पसंद की आइसक्रीम खिलाऊँगी..." "लेकिन अगर कम नंबर आए...?" क्या उसे डाँटना चाहिए? या... प्यार से समझाना चाहिए? उधर... आरव भी पूरे दिन एक ही बात सोच रहा था... "अगर मेरे कम नंबर आए..." "तो क्या मम्मी मुझसे नाराज़ हो जाएँगी?" स्कूल की छुट्टी हुई... रिपोर्ट कार्ड हाथ में था। कम नंबर देखकर आरव का चेहरा उतर गया। घर पहुँचकर... वह दरवाज़े के बाहर कुछ देर तक खड़ा रहा। हिम्मत ही नहीं हो रही थी दरवाज़ा खटखटाने की। मीना ने जैसे ही दरवाज़ा खोला... उसने सबसे पहले रिपोर्ट कार्ड नहीं देखा... उसने अपने बेटे का चेहरा देखा। वह समझ गई... आज उसके सामने रिपोर्ट कार्ड नहीं... एक डरा हुआ बच्चा खड़ा है। उसने मुस्कुराकर कहा— "आओ बेटा..." "पहले पानी पीते हैं..." "फिर आराम से साथ बैठकर देखते हैं कि कहाँ कठिनाई हुई।" उस दिन आरव ने एक बात सीखी... गलती छिपानी नहीं... सुधारनी है। और मीना ने भी एक बात समझी... बच्चे को डराकर कुछ दिनों के लिए नंबर बढ़ाए जा सकते हैं... लेकिन भरोसा देकर पूरी ज़िंदगी सीखने की आदत बनाई जा सकती है। क्योंकि... बच्चे को सबसे पहले एक सुरक्षित घर चाहिए... जहाँ वह अपनी सफलता ही नहीं, अपनी असफलता भी बिना डर के बता सके। ❤️ 💬 अंत में एक सवाल... अगर बच्चा कम नंबर लेकर घर आए... तो सबसे पहले क्या देखेंगे? ❤️ रिपोर्ट कार्ड... या... 👦 अपने बच्चे का चेहरा?
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अंग्रेजी में अनुवाद :

This is where every parent's biggest test begins...
Since morning, Meena had been thinking about just one thing...
Today was the day her son Aarav would bring home his report card.
She kept wondering...
"If he gets good grades, I'll take him out for his favourite icecream..."
"But what if his grades are low?"
Should she scold him?
Or...
Should she gently help him understand?
Meanwhile...
Aarav had been thinking about only one thing all day...
"What if my grades are poor..."
"Will Mom be upset with me?"
School was over...
The report card was in his hands.
The moment he saw his marks...
His face fell.
When he reached home...
He stood quietly outside the door for a while.
He simply didn't have the courage to knock.
As soon as Meena opened the door...
She didn't look at the report card first...
She looked at her son's face.
She understood instantly...
Standing before her wasn't just a report card...
It was a frightened little boy.
She smiled and said—
"Come in, sweetheart..."
"Let's have some water first..."
"Then we'll sit together and figure out where things became difficult."
That day...
Aarav learned something important...
Mistakes aren't meant to be hidden... they're meant to be improved.
And Meena learned something too...
You may be able to improve a child's grades for a few days through fear...
But you build a lifelong love for learning through trust.
Because...
Every child deserves a home where they feel safe...
A place where they can share not only their successes...
But also their failures... without fear. ❤️

💬 A question for every parent...
If your child came home with low grades...
What would you look at first?
❤️ The report card...
Or...
👦 Your child's face?
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29/07/2026

Celebrating Guru Purnima with love, respect and adorable moments 🌼📚 Small voices big gratitude! ❤️

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Rajendra Nagar Colony, Zeromile, Barari
Bhagalpur
812003

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