Amit Pradhan

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A premier coaching institute for class VI,VII,VIII,IX,X,XI&XII. A unique institute with a difference based on CBSE curriculum and indian culture.

29/09/2017

"आत्मकथा एक शिक्षक "
- अमित प्रधान
जब में एक शिक्षक बना तो मुझे लगा में एक महत्पूर्ण व्यक्ति हूँ , में अपने ज्ञान, धैर्य , और प्यार से विद्यार्थी के जीवन को एक मजबूत आकार दे सकता हूँ । विद्यार्थी के जीवन को सफल बनाने के लिए में पूरी तरह से दक्ष होता हूँ । पढ़ाई के दौरान में रचनात्मकता का इस्तेमाल करता हूँ , जिससे विद्यार्थी एकाग्र हो सके ।
एक शिक्षक के तौर पर में अपने धैर्य और विश्वाश से बच्चो के भविष्य का जिम्मेदारी लेता हूँ । बच्चें अबोध होते है, उनके क्षमता का अवलोकन कर में उसी के अनुसार उस बच्चे को पढणे मे मदद करता हूँ ।
सदैव मेरा प्रयास रहता है।विद्यार्थी को अकादमिक रूप से बेहतरीन बनाऊ और वो अपने जीवन में हमेशा अच्छा करे उसके लिए में प्रोत्तसाहीत भी करता हूँ । मुझे पता है शिक्षक अपने साकारात्मक व्यवहार से बच्चों के मानशिक , सामाजिक और बौद्धिक रूप में विकाश करने में मदत करते है।
आतिसम्बेदनशील बच्चों के जीवन को बनाने का महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक शिक्षक पर होता है। इस लिए मेरा प्रयास रहता है , रोचक और रचनात्मकता तरीके से में आपने विद्यार्थियों को सकारात्मक रूप से प्रेरित करून ।
एक शिक्षक के तौर पर में अपना धैर्य कभी नही खोता। में हर बच्चो को उसी के अनुसार पढ़ाता हूँ । मुझे इस बात हमेशा ज्ञान रहता है , की में ढेर सारे विद्यार्थिओं को निर्देशित शिक्षित कर अच्छे समाज का निर्माण करने का महान कार्य कर रहा हूँ । ऐ पी जे अब्दुल कलाम के ऑटोबायोग्राफी में उन्हों ने लिखा है , " गाँधी जी कहा करते थे देश भक्ति के लिए शहीद होने की जरुरत नही है , आप बस अपना काम उस प्रकार से कीजिये की लगे आप देश के लिए कुछ कर रहे है " ।
जब हम मंदिर में जाते है और घंटी की आवाज सुनते है , तो हमें सकून और ईश्वर के उपस्थित होने का अहसास होता है , उसी प्रकार जब में विद्या के मंदिर में जाता हूँ और चारों ओर से गुड मॉर्निंग सर , की आवाजें मेरे कानों में गूंजने लगते है , मनो ऐसा लगता है जिस प्रकार ईश्वर पुरे ब्रम्हांड का निर्माता होता है , उसी प्रकार में एक अच्छे राष्ट्रा का निर्माता हूँ , इन अबोध बच्चों के भविष्य का निर्माता हूँ ।
मेरे विद्यार्थी मेरे से कहते है सर , आप कभी सख्त होते है , कभी दयालु बन जाते है , कभी पापा की तरह डाँटते है और समझते है , कभी माँ की तरह प्यार करते है , आप मेरे आदर्श शिक्षक है ।
मै यह सब सुन कभी भाबुक भी हो जाता हूँ । इंजीनियर अनुदर्शन कुमार सही कहते है " शिक्षक स्वार्थी होता है वो जो नही कर सका अपने जीवन में वो चाहता है उन के विद्यार्थी वो करे वह अपने विद्यार्थियों को I.A.S, I.P.S, JUDGE और डॉक्टर बनते देखना चाहता है " ।

29/09/2017

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1776920962608184&id=1446125035687780

"आत्मकथा एक शिक्षक "
- अमित प्रधान

जब में एक शिक्षक बना तो मुझे लगा में एक महत्पूर्ण व्यक्ति हूँ , में अपने ज्ञान, धैर्य , और प्यार से विद्यार्थी के जीवन को एक मजबूत आकार दे सकता हूँ । विद्यार्थी के जीवन को सफल बनाने के लिए में पूरी तरह से दक्ष होता हूँ । पढ़ाई के दौरान में रचनात्मकता का इस्तेमाल करता हूँ , जिससे विद्यार्थी एकाग्र हो सके ।
एक शिक्षक के तौर पर में अपने धैर्य और विश्वाश से बच्चो के भविष्य का जिम्मेदारी लेता हूँ । बच्चें अबोध होते है, उनके क्षमता का अवलोकन कर में उसी के अनुसार उस बच्चे को पढणे मे मदद करता हूँ ।
सदैव मेरा प्रयास रहता है।विद्यार्थी को अकादमिक रूप से बेहतरीन बनाऊ और वो अपने जीवन में हमेशा अच्छा करे उसके लिए में प्रोत्तसाहीत भी करता हूँ । मुझे पता है शिक्षक अपने साकारात्मक व्यवहार से बच्चों के मानशिक , सामाजिक और बौद्धिक रूप में विकाश करने में मदत करते है।
आतिसम्बेदनशील बच्चों के जीवन को बनाने का महत्वपूर्ण जिम्मेदारी एक शिक्षक पर होता है। इस लिए मेरा प्रयास रहता है , रोचक और रचनात्मकता तरीके से में आपने विद्यार्थियों को सकारात्मक रूप से प्रेरित करून ।
एक शिक्षक के तौर पर में अपना धैर्य कभी नही खोता। में हर बच्चो को उसी के अनुसार पढ़ाता हूँ । मुझे इस बात हमेशा ज्ञान रहता है , की में ढेर सारे विद्यार्थिओं को निर्देशित शिक्षित कर अच्छे समाज का निर्माण करने का महान कार्य कर रहा हूँ । ऐ पी जे अब्दुल कलाम के ऑटोबायोग्राफी में उन्हों ने लिखा है , " गाँधी जी कहा करते थे देश भक्ति के लिए शहीद होने की जरुरत नही है , आप बस अपना काम उस प्रकार से कीजिये की लगे आप देश के लिए कुछ कर रहे है " ।
जब हम मंदिर में जाते है और घंटी की आवाज सुनते है , तो हमें सकून और ईश्वर के उपस्थित होने का अहसास होता है , उसी प्रकार जब में विद्या के मंदिर में जाता हूँ और चारों ओर से गुड मॉर्निंग सर , की आवाजें मेरे कानों में गूंजने लगते है , मनो ऐसा लगता है जिस प्रकार ईश्वर पुरे ब्रम्हांड का निर्माता होता है , उसी प्रकार में एक अच्छे राष्ट्रा का निर्माता हूँ , इन अबोध बच्चों के भविष्य का निर्माता हूँ ।
मेरे विद्यार्थी मेरे से कहते है सर , आप कभी सख्त होते है , कभी दयालु बन जाते है , कभी पापा की तरह डाँटते है और समझते है , कभी माँ की तरह प्यार करते है , आप मेरे आदर्श शिक्षक है ।
मै यह सब सुन कभी भाबुक भी हो जाता हूँ । इंजीनियर अनुदर्शन कुमार सही कहते है " शिक्षक स्वार्थी होता है वो जो नही कर सका अपने जीवन में वो चाहता है उन के विद्यार्थी वो करे वह अपने विद्यार्थियों को I.A.S, I.P.S, JUDGE और डॉक्टर बनते देखना चाहता है " ।

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