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27/11/2024
05/11/2024

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03/11/2024

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03/11/2024

पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और एक बुजुर्ग औरत की कहानी

यह कहानी पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की दया, सहनशीलता और उनके चरित्र की महानता को दर्शाती है। मक्का में इस्लाम के प्रचार के शुरुआती दिनों में, पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का विरोध करने वाले कई लोग थे। उनमें से एक एक बुजुर्ग महिला थीं, जिन्हें पैगंबर से बहुत नफरत थी।

वह पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का मज़ाक उड़ाती और उनके खिलाफ झूठी बातें फैलाती थीं। जब भी पैगंबर उस गली से गुजरते, तो वह उन पर कचरा फेंक देती थीं। लेकिन पैगंबर ने कभी गुस्सा नहीं किया और न ही कोई शिकायत की।

एक दिन पैगंबर ने देखा कि वह बुजुर्ग औरत बाहर नहीं हैं और उन पर कचरा नहीं फेंका गया। पैगंबर को चिंता हुई, इसलिए वे उसकी हालत जानने के लिए उसके घर गए। उन्होंने देखा कि वह बीमार है और उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। पैगंबर ने उसकी सेवा की और उसकी तबीयत का हालचाल लिया। उस औरत ने जब देखा कि वह वही हैं जिन पर वह कचरा फेंका करती थी, तो उसे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई।

पैगंबर के इस आचरण ने उस महिला के दिल को छू लिया, और उसने महसूस किया कि इस्लाम में सच्चाई और अच्छाई है। उसकी नफरत, पैगंबर के दयालु व्यवहार के कारण, प्रेम में बदल गई, और उसने इस्लाम को स्वीकार कर लिया।

इस कहानी का संदेश: यह कहानी हमें यह सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और दया बनाए रखना चाहिए।

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