KURMI BOYS YOUTH

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Photos from KURMI BOYS YOUTH's post 01/08/2024

पटना शहर में कुर्मी समाज के कुछ प्रमुख हॉस्पिटल:

1 (a) . श्री साईं हॉस्पिटल, कंकरबाग (राजेंद्र नगर फ्लाईओवर् के नजदीक)
डॉ अखिलेश कुमार सिंह
1 (b) . श्री साईं हार्ट हॉस्पिटल, मलाही पकड़ी, कंकडबाग
डॉ अखिलेश कुमार सिंह
(इनका एक पारा- मेडिकल कॉलेज भी है, श्री साईं पारा मेडिकल कॉलेज, लोहिया नगर)

2. फोर्ड हॉस्पिटल, बाई पास
डॉ अरुण कुमार, डॉ संतोष कुमार, डॉ बी बी भारती
(इनका बिहार शरीफ में भी हॉस्पिटल है)

3. कुमार हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, बाई पास
डॉ अनिल कुमार

4. फ्लोरेंस हॉस्पिटल, बाई पास
डॉ सुभाष चंद्रा

5. जगदीश मेमोरियल अस्पताल, कंकरबाग
डॉ अरुण सिंह

6. मेडिजोन हॉस्पिटल, कंकरबाग (शालीमार स्वीट्स के नजदीक), 4 पर्टनर

7. प्रकाश हॉस्पिटल, कंकरबाग
(शालीमार स्वीट्स के नजदीक)
डॉ प्रतिभा प्रकाश

8. डॉ S K Sinha मेमोरियल हॉस्पिटल, राजेंद्र नगर

9. पटना हड्डी अस्पताल, राजेंद्र नगर फ्लाओवर् के नजदीक, राजेंद्र नगर

10. आस्था लोक हॉस्पिटल, प्रोफेसर कॉलोनी, कंकरबाग
डॉ महेश प्रसाद

11. नोबेल हॉस्पिटल,कांटी फैक्ट्री रोड, कंकरबाग
डॉ प्रदीप कुमार
इनका इसी नाम से बिहार शरीफ में भी हॉस्पिटल है।

12. C N S हॉस्पिटल, बोरिंग रोड
डॉ अशोक कुमार सिन्हा

13. मॉडर्न हॉस्पिटल, तिवारी बेचर के नजदीक, कंकरबाग

14. सिद्धी हॉस्पिटल, हनुमान नगर

15. उमा हॉस्पिटल, डॉ अनिल सिंह, सचिवालय पार्क के नजदीक, कंकरबाग

16. श्री राम हॉस्पिटल, डॉ लाल बाबु सिंह, कंकरबाग
पटना के नामी और पुराने हॉस्पिटल में से एक

17. नेकटर हॉस्पिटल, डॉ नितीश कुमार, चंदन ऑटो के नजदीक, बैंकर्स कॉलोनी, कंकरबाग

18. आयुष हॉस्पिटल, दसरथा
डॉ R P सिंह मेमोरियल नर्सिंग कॉलेज भी इन्ही का है।

19. ऑर्किड हॉस्पिटल, कंकरबाग मैन रोड, डॉ कमल कांत कुमार

20. कृष्णा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लोयोला स्कूल के पास, कुर्जी

21. आरोही नर्सिंग होम, शेखपुरा

22. (a) हाई टेक हॉस्पिटल
(b) केशव हड्डी अस्पताल
डॉ अशोक कुमार सिन्हा
दानापुर खगौल रोड
भाजपा MLC श्रीमति अनामिका सिंह इसी परिवार से हैं।

23. खुशी हॉस्पिटल, कांटी फैक्ट्री रोड, डॉ देवव्रत कुमार

24. अभिनंदन हॉस्पिटल, कंकरबाग

25. पटलीपुत्रा हॉस्पिटल, डॉ पंकज कुमार, ज़कारियापुर, कृष्णा निकेतन के दक्षिण

26. क्युरिस् हॉस्पिटल, डॉ राजीव रंजन सिन्हा, दानापुर

ये कुछ प्रमुख हॉस्पिटल के नाम है। पटना शहर का हर तीसरा हॉस्पिटल और नर्सिंग होम कुर्मी समाज का है।

01/08/2024

अक्सर आप लालू यादव के भाषणो मे सुना करते है की मैने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बना दिया, इतना तो सब लोग सुन लिए पर आपने कभी ये जानने की कोशिश की है की लालू को लालू यादव बनाना वाले और उन्हे राजनिति में स्थापित करने वाले कौन थे... वो थे माननीय नीतीश कुमार जी! पर नीतीश कुमार जी ने इस बात का जिक्र कभी नही किया क्योकि हम करने में यकीन करते हैं ना की अहसान जताने मे पर आज मजबूरी वश नीतीश जी थोडी से कहानी बयां ही कर दी! यह बिल्कुल उसी कहानी की तरह है की जैसे उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव को स्थापित करने वाले बेनी प्रसाद वर्मा जी थे! पर बेनी वर्मा जी ने भी कभी एहसान जताने की कोशिश नहीं की और अंत में वो राजनिति के गलियारे में गुम हो गये! काश कुर्मी समाज ने अपने स्वाभिमान को थोडा सा किनारे करके अपने अहसान को जताने की कोशिश की होती तो आज बिहार में लालू यादव ना होते और उत्तर प्रदेश की राजनिति में बेनी प्रसाद वर्मा जी ही होते!
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज लालू यादव के अहंकारी बताया और उन पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने लालू यादव का नाम लिये बिना कहा, “अक्सर कहते थे कि मैंने नीतीश को सीएम बना दिया। 80 विधायक थे फिर भी नीतीश को सीएम बना दिया। नीतीश ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि लालू यादव ने मेरे लिए क्या किया ? मुझे तो मजबूरी में लालू जी ने चुनावी चेहरा बनाया था।“
“जब महागठबंधन बनाने की बात चल रही थी तब जदयू की तरफ से मेरा नाम आगे किया गया था। लेकिन उस वक्त तो लालू यादव चुप रहे। कई महीनों तक सोच विचार करते रहे। देर होते देख कर मैंने तो यहां तक कह दिया था कि गठबंधन की बात छोडिए, सीटों का बंटवारा ही कर लेते हैं। लेकिन बाद में उन्हें लगने लगा कि अगर कहीं जदयू और कांग्रेस में गठबंधन हो जाएगा तो वे पीछे छूट जाएंगे। नीतीश ने कहा, मैं तो पटना में था, लेकिन दिल्ली में बैठ कर लालू जी और मुलायम सिंह ने मेरे नाम का एलान किया था। मेंने तो नहीं कहा था ऐसा करने के लिए। लालू जी ने तो अपने गर्ज में ऐसा किया था।“
“ जब विवाद चल रहा था उस समय राजद की तरफ 80 और 71 का फर्क समझाया जा रहा था। लेकिन में अब बताता हूं कि ऐसा क्यों हुआ। लालू जी अपने साथ एक बड़े वोट बैंक होने का दावा करते हैं लेकिन वे तो अपना वोट ट्रांसफर ही नहीं करा पाए।
जदयू के अधिकतर उम्मीदवार उनके इलाके में हारे। जदयू के वोट तो राजद को मिल गये लेकिन राजद के वोट जदयू को नहीं मिले। अब उनकी नीयत क्या थी कह नहीं सकता।“
“1985 में मैं पहली बार विधायक बना। 1989 में पहली बार सांसद बना। क्या लालू यादव ने मुझे जीत दिला दी ? आखिर लालू जी ने मेरे लिए किया क्या ?”
नीतीश कुमार ने कहा,लालू जी 1973 में जब पटना विश्वविद्यालय में छात्र संघ का चुनाव लड़ रहे थे तब उनके खिलाफ इंजीनियरिंग कॉलेज के एक चर्चित विद्यार्थी चुनाव में उतरे थे। वे लालू के मुकाबले ज्यादा काबिल और प्रभावशाली थे। मैं भी उस समय इंजीनियरिंग का छात्र था। छात्रों के मुद्दे पर मैं अक्सर आवाज उठाता था। यूनिवर्सिटी में मेरी एक प्रतिष्ठा थी। उस समय 500 छात्रों का समूह मेरे साथ था। मैंने उस समय अपने कॉलेज के छात्र की बजाय लालू यादव का समर्थन किया था। मेरे 500 समर्थकों में से 450 छात्रों ने लालू को वोट दिये थे। तब जा कर लालू यादव छात्र संघ का अध्यक्ष बन पाये थे।
1988 में जब जननायक कर्पूरी ठाकुर का निधन हुआ तो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चुनाव का सवाल सामने आया। उस समय मैं भी विधायक था और लालू यादव भी विधायक थे। तब लालू यादव की पार्टी में बहुत कमजोर स्थिथि थी। केवल एक विधायक ही उनके साथ थे। तब मैंने सभी गैरयादव विधायकों से सम्पर्क किया और उन्हें समझाया कि एक यादव नेता, लालू यादव का समर्थन किया जाए क्यों कि वक्त की यही मांग है। लेकिन लोग बात नहीं मान रहे थे। उस समय लोकदल (ब) में कर्पूरी ठाकुर को बहुत तंग किया गया था। यादव नेता पर लोग विश्वास नहीं कर पा रहे थे। लेकिन मैंने गैर यादव विधायकों को किसी तरह एकजुट किया और लालू यादव को समर्थन दिलाया। इसके बाद ही लालू यादव 1988 में नेता प्रतिपक्ष बन सके थे। इतना कहने के बाद नीतीश कुमार ने पत्रकारों से पूछा कि अब आप ही बताइए कि मैंने लालू यादव को बनाया कि लालू यादव ने मुझे बनाया।

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