17/08/2025
बचपन की दौर की जिंदगानियां ही कुछ अलग थी चंद पैसों में खुशियां खरीदा करता था दोस्तों के साथ सुकून का वो पल जहां जिम्मेदारी की आकांक्षा ही नहीं थी वक्त के साथ हम भी बदले तो सब कुछ बदल गया
अब ना वो दोस्त है ना खुशियां है ना वो वक्त है बस खो गया हूं खुद में कही फंसकर
बस कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है 🥺🥺