MASOD

MASOD The MASOD is a dream land of every on who born Hear and neer by it. Every One who have complete their Study from Govt. Higher Secondary School are always W

भारत माँ के सपूतों का इंदौर में हुआ सम्मान,मासोद में बना है देश का एक मात्र भारत माता का मन्दिर. The MASOD is a dream land of every one who born Hear and neer by it. Higher Secondary School are always

https://www.impactguru.com/fundraiser/help-vardaan-dhadseइस लिंक पर जाए आपको उनकी अकाउंट details है । OrVardaan DhadseA/...
20/03/2018

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PRAMOD DHADSE needs your help today! Help my son Vardaan for his treatment of Acute Leukaemia - Hi My name is PRAMOD DHADSE and I am raising funds for my son, Vardaan. He is a student at 4th standard. He has been fighting Acute Leukaemia He is going for intense chemotherapy for the next six months.....

भारत माँ के सपूतो का इंदौर में हुआ सम्मान,मासोद में बना है देश का एक मात्र भारत माता का मंदिर http://kalkanews.com/news....
09/01/2018

भारत माँ के सपूतो का इंदौर में हुआ सम्मान,मासोद में बना है देश का एक मात्र भारत माता का मंदिर

http://kalkanews.com/news.php?post_id=116151&title=%

भारत माँ के सपूतो का इंदौर में हुआ सम्मान,मासोद में बना है देश का एक मात्र भारत माता का मंदिर

 #मासोद #प्रभात_पटट्न_तहसीलग्राम मासोद मे हिन्दु सम्मेलन आयोजन समिति द्वारा राम मन्दिर मे भारतमाता की आरती की आयोजक_ #हि...
27/12/2016

#मासोद
#प्रभात_पटट्न_तहसील
ग्राम मासोद मे हिन्दु सम्मेलन आयोजन समिति द्वारा राम मन्दिर मे भारतमाता की आरती की
आयोजक_ #हिन्दु सम्मेलन आयोजन समिति प्रभातं पटट्न तहसील

03/12/2016

कहानी - किस्से आपने खूब पढ़े होंगे मगर जो बात इस कहानी के माध्यम से कही गई है वह अगर आपके मर्म को छू जाए तो अपने बच्चों को अवश्य बताएं : -

पढ़ाई पूरी करने के बाद एक छात्र किसी बड़ी कंपनी में नौकरी पाने की चाह में इंटरव्यू देने के लिए पहुंचा....

छात्र ने बड़ी आसानी से पहला इंटरव्यू पास कर लिया...

अब फाइनल इंटरव्यू
कंपनी के डायरेक्टर को लेना था...

और डायरेक्टर को ही तय
करना था कि उस छात्र को नौकरी पर रखा जाए या नहीं...

डायरेक्टर ने छात्र का सीवी (curricular vitae) देखा और पाया कि पढ़ाई के साथ- साथ यह छात्र ईसी (extra curricular activities) में भी हमेशा अव्वल रहा...

डायरेक्टर- "क्या तुम्हें पढ़ाई के दौरान
कभी छात्रवृत्ति (scholarship) मिली...?"

छात्र- "जी नहीं..."

डायरेक्टर- "इसका मतलब स्कूल-कॉलेज की फीस तुम्हारे पिता अदा करते थे.."

छात्र- "जी हाँ , श्रीमान ।"

डायरेक्टर- "तुम्हारे पिताजी क्या काम करते है?"

छात्र- "जी वो लोगों के कपड़े धोते हैं..."

यह सुनकर कंपनी के डायरेक्टर ने कहा- "ज़रा अपने हाथ तो दिखाना..."

छात्र के हाथ रेशम की तरह मुलायम और नाज़ुक थे...

डायरेक्टर- "क्या तुमने कभी कपड़े धोने में अपने पिताजी की मदद की...?"

छात्र- "जी नहीं, मेरे पिता हमेशा यही चाहते थे
कि मैं पढ़ाई करूं और ज़्यादा से ज़्यादा किताबें
पढ़ूं...

हां , एक बात और, मेरे पिता बड़ी तेजी से कपड़े धोते हैं..."

डायरेक्टर- "क्या मैं तुम्हें एक काम कह सकता हूं...?"

छात्र- "जी, आदेश कीजिए..."

डायरेक्टर- "आज घर वापस जाने के बाद अपने पिताजी के हाथ धोना...
फिर कल सुबह मुझसे आकर मिलना..."

छात्र यह सुनकर प्रसन्न हो गया...
उसे लगा कि अब नौकरी मिलना तो पक्का है,

तभी तो डायरेक्टर ने कल फिर बुलाया है...

छात्र ने घर आकर खुशी-खुशी अपने पिता को ये सारी बातें बताईं और अपने हाथ दिखाने को कहा...

पिता को थोड़ी हैरानी हुई...
लेकिन फिर भी उसने बेटे
की इच्छा का मान करते हुए अपने दोनों हाथ उसके
हाथों में दे दिए...

छात्र ने पिता के हाथों को धीरे-धीरे धोना शुरू किया। कुछ देर में ही हाथ धोने के साथ ही उसकी आंखों से आंसू भी झर-झर बहने लगे...

पिता के हाथ रेगमाल (emery paper) की तरह सख्त और जगह-जगह से कटे हुए थे...

यहां तक कि जब भी वह कटे के निशानों पर पानी डालता, चुभन का अहसास
पिता के चेहरे पर साफ़ झलक जाता था...।

छात्र को ज़िंदगी में पहली बार एहसास हुआ कि ये
वही हाथ हैं जो रोज़ लोगों के कपड़े धो-धोकर उसके
लिए अच्छे खाने, कपड़ों और स्कूल की फीस का इंतज़ाम करते थे...

पिता के हाथ का हर छाला सबूत था उसके एकेडैमिक कैरियर की एक-एक
कामयाबी का...

पिता के हाथ धोने के बाद छात्र को पता ही नहीं चला कि उसने उस दिन के बचे हुए सारे कपड़े भी एक-एक कर धो डाले...

उसके पिता रोकते ही रह गए , लेकिन छात्र अपनी धुन में कपड़े धोता चला गया...

उस रात बाप- बेटे ने काफ़ी देर तक बातें कीं ...

अगली सुबह छात्र फिर नौकरी के लिए कंपनी के डायरेक्टर के ऑफिस में था...

डायरेक्टर का सामना करते हुए छात्र की आंखें गीली थीं...

डायरेक्टर- "हूं , तो फिर कैसा रहा कल घर पर ?
क्या तुम अपना अनुभव मेरे साथ शेयर करना पसंद करोगे....?"

छात्र- " जी हाँ , श्रीमान कल मैंने जिंदगी का एक वास्तविक अनुभव सीखा...

नंबर एक... मैंने सीखा कि सराहना क्या होती है...
मेरे पिता न होते तो मैं पढ़ाई में इतनी आगे नहीं आ सकता था...

नंबर दो... पिता की मदद करने से मुझे पता चला कि किसी काम को करना कितना सख्त और मुश्किल होता है...

नंबर तीन.. . मैंने रिश्तों की अहमियत पहली बार
इतनी शिद्दत के साथ महसूस की..."

डायरेक्टर- "यही सब है जो मैं अपने मैनेजर में देखना चाहता हूं...

मैं यह नौकरी केवल उसे देना चाहता हूं जो दूसरों की मदद की कद्र करे,
ऐसा व्यक्ति जो काम किए जाने के दौरान दूसरों की तकलीफ भी महसूस करे...

ऐसा शख्स जिसने
सिर्फ पैसे को ही जीवन का ध्येय न बना रखा हो...

मुबारक हो, तुम इस नौकरी के पूरे हक़दार हो..."

आप अपने बच्चों को बड़ा मकान दें, बढ़िया खाना दें,
बड़ा टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर सब कुछ दें...

लेकिन साथ ही अपने बच्चों को यह अनुभव भी हासिल करने दें कि उन्हें पता चले कि घास काटते हुए कैसा लगता है ?

उन्हें भी अपने हाथों से ये काम करने दें...

खाने के बाद कभी बर्तनों को धोने का अनुभव भी अपने साथ घर के सब बच्चों को मिलकर करने दें...

ऐसा इसलिए
नहीं कि आप मेड पर पैसा खर्च नहीं कर सकते,
बल्कि इसलिए कि आप अपने बच्चों से सही प्यार करते हैं...

आप उन्हें समझाते हैं कि पिता कितने भी अमीर
क्यों न हो, एक दिन उनके बाल सफेद होने ही हैं...

सबसे अहम हैं आप के बच्चे किसी काम को करने
की कोशिश की कद्र करना सीखें...

एक दूसरे का हाथ
बंटाते हुए काम करने का जज्ब़ा अपने अंदर
लाएं...

यही है सबसे बड़ी सीख..............

आप सभी से निवेदन है कि उक्त कहानी यदि पसंद आई हो तो अपने परिवार में सुनाएँ और अपने बच्चों को सर्वोच्च शिक्षा प्रदान करें।

गुरू तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस पर गुरू जी को कोटि कोटि नमन ।॥ वाहे गुरू जी दा खालसा ॥॥ वाहे गुरू जी दी फतह ॥
24/11/2016

गुरू तेग बहादुर जी के बलिदान दिवस पर गुरू जी को कोटि कोटि नमन ।
॥ वाहे गुरू जी दा खालसा ॥
॥ वाहे गुरू जी दी फतह ॥

16/11/2016
 #गुरु_तेग_बहादुर शहीदी दिवस #सिर_दिया_पर_सार_नहीं_दियाजुल्म से ग्रस्त कश्मीर के पंडित गुरु तेग़ बहादुर के पास आए और उन्...
11/11/2016

#गुरु_तेग_बहादुर शहीदी दिवस
#सिर_दिया_पर_सार_नहीं_दिया
जुल्म से ग्रस्त कश्मीर के पंडित गुरु तेग़ बहादुर के पास आए और उन्हें बताया कि किस प्रकार ‍इस्लाम को स्वीकार करने के लिए अत्याचार किया जा रहा है, यातनाएँ दी जा रही हैं। हमें मारा जा रहा है। कृपया आप हमारे धर्म को बचाइए। गुरु तेग़ बहादुर जब लोगों की व्यथा सुन रहे थे, उनके 9 वर्षीय पुत्र बाला प्रीतम (गुरु गोविंदसिंह) वहाँ आए और उन्होंने पिताजी से पूछा-

'पिताजी, ये सब इतने उदास क्यों हैं? आप क्या सोच रहे हैं?'
गुरु तेग़ बहादुर ने कश्मीरी पंडितों की सारी समस्याएं बाला प्रीतम को बताईं तो उन्होंने पूछा- 'इसका हल कैसे होगा?'
गुरु साहिब ने कहा- 'इसके लिए बलिदान देना होगा।'
बाला प्रीतम ने कहा-' आपसे महान पुरुष कोई नहीं है। बलिदान देकर आप इन सबके धर्म को बचाइए।'
उस बच्चे की बातें सुनकर वहाँ उपस्थित लोगों ने पूछा- 'यदि आपके पिता बलिदान देंगे तो आप यतीम हो जाएँगे। आपकी माँ विधवा हो जाएगीं।'
बाला प्रीतम ने उत्तर दिया- 'यदि मेरे अकेले के यतीम होने से लाखों बच्चे यतीम होने से बच सकते हैं या अकेले मेरी माता के विधवा होने जाने से लाखों माताएँ विधवा होने से बच सकती है तो मुझे यह स्वीकार है।'

तत्पश्चात गुरु तेग़ बहादुर जी ने पंडितों से कहा कि आप जाकर औरंगज़ेब से कह ‍दें कि यदि गुरु तेग़ बहादुर ने इस्लाम धर्म ग्रहण कर लिया तो उनके बाद हम भी इस्लाम धर्म ग्रहण कर लेंगे और यदि आप गुरु तेग़ बहादुर जी से इस्लाम धारण नहीं करवा पाए तो हम भी इस्लाम धर्म धारण नहीं करेंगे'। औरंगज़ेब ने यह स्वीकार कर लिया।

गुरु तेग़ बहादुर दिल्ली में औरंगज़ेब के दरबार में स्वयं गए। औरंगज़ेब ने उन्हें बहुत से लालच दिए, पर गुरु तेग़ बहादुर जी नहीं माने तो उन पर ज़ुल्म किए गये, उन्हें कैद कर लिया गया, दो शिष्यों को मारकर गुरु तेग़ बहादुर जी को ड़राने की कोशिश की गयी, पर वे नहीं माने। उन्होंने औरंगजेब से कहा- 'यदि तुम ज़बर्दस्ती लोगों से इस्लाम धर्म ग्रहण करवाओगे तो तुम सच्चे मुसलमान नहीं हो क्योंकि इस्लाम धर्म यह शिक्षा नहीं देता कि किसी पर जुल्म करके मुस्लिम बनाया जाए।'

बलिदान
औरंगजेब यह सुनकर आगबबूला हो गया। उसने दिल्ली के चाँदनी चौक पर गुरु तेग़ बहादुर जी का शीश काटने का हुक्म ज़ारी कर दिया और गुरु जी ने 24 नवम्बर 1675 को हँसते-हँसते बलिदान दे दिया। गुरु तेग़ बहादुरजी की याद में उनके 'शहीदी स्थल' पर गुरुद्वारा बना है, जिसका नाम गुरुद्वारा 'शीश गंज साहिब' है।
शहीदी दिवस शत शत नमन

आप सभी को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें जय श्री कृष्ण....!!!
24/08/2016

आप सभी को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें

जय श्री कृष्ण....!!!

बिहार के गया में जन्मे दशरथ मांझी बहुत गरीब परिवार से थे। सही समय पर डॉक्टरी सहायता नहीं मिल पाने के कारन पत्नी फाल्गुनी...
18/08/2016

बिहार के गया में जन्मे दशरथ मांझी बहुत गरीब परिवार से थे। सही समय पर डॉक्टरी सहायता नहीं मिल पाने के कारन पत्नी फाल्गुनी देवी का निधन कम उम्र में हो गया था। तभी मांझी ने अकेले ही गेहलौर पहाड़ काट कर रास्ता बनाना शुरू किया। 22 साल बाद मांझी का सपना पूरा हुआ, उसने उस पहाड़ी की छाती चीर के 360 फुट लम्बा, 25 फुट गहरा और 30 फुट मीटर चौड़ा रास्ता बना डाला। पर्वत तोड़ने के बाद शहर से गांव तक की 70 KM दूरी केवल 7 KM रह गयी ।

युवा देश बुलन्द हौसले वाले 'पर्वतपुरुष' दशरथ मांझी को भावभीनी श्रद्धांजलि देता है।

15 अगस्त दहलीज़ पर हैतिरंगे के साथ भगवा फहराना मत भूलियेगा ......हम सभ्यता और संस्कृति के संघर्ष के दौर से गुज़र रहे है ...
14/08/2016

15 अगस्त दहलीज़ पर है
तिरंगे के साथ
भगवा फहराना मत भूलियेगा ......
हम सभ्यता और संस्कृति के संघर्ष
के दौर से गुज़र रहे है ...... 🚩🚩🚩..
कल तक तिरंगे को अपमानित करने वाले
आज भगवा से भयभीत हो
तिरंगे की महिमा गाने लगे
गोडसे से डर गाँधी की जयकार लगा रहे है ... 🚩🚩🚩...
कल भगवा के सामने भी नत होंगे
तिरंगा हमारी आज़ादी तो भगवा
हमारी सांस्कृतिक स्वाधीनता का नायक है ....🚩🚩🚩
आगे बढ़िये ... ...
भारत बदल रहा है ........
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

 #मासोद में पहली बार हुआ 75 यूनिट रक्तदान बैतूल ।  जिला रक्तदाता समूह,रेडक्रास सोसायटी के संयुक्त प्रयास से आज मासोद में...
01/08/2016

#मासोद में पहली बार हुआ 75 यूनिट रक्तदान
बैतूल । जिला रक्तदाता समूह,रेडक्रास सोसायटी के संयुक्त प्रयास से आज मासोद में रक्त जागरूकता और रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया ।पहली बार आयोजित शिविर में 75 रक्तदाताओ ने रक्तदान किया ।
मासोद लोकेश झरबड़े ने बताया की
बैतूल जिला रक्तदाता समूह और रेडक्रास सोसायटी के निवेदन पर मासोद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहली बार रक्त जागरूकता और रक्तदान शिविर आयोजित किया गया जिसमे मासोद सहित आस पास के 100 युवाओ ने अपना ग्रुप परीक्षण करवाया और तीन महिलाओ सहित 75 युवाओं ने रक्तदान कर एक मिसाल कायम की है ।
रक्त जागरूकता तथा रक्तदान शिविर का शुभारंभ भारत भारती शिक्षा समिति के सचिव मोहन नागर ने फीता काटकर और माँ भारती के चरणों में पुष्प अर्पित कर किया गया ।इसी कार्यक्रम मे व्रहद स्तर पर पौधा रोपण की शुरुआत भी मोहन नागर ने की जिसमे पंचायत क्षेत्र में 1000 पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया ।इस अवसर पर मोहन नागर ने रक्तदान तथा पेड़ों का महत्व भी कार्यक्रम में उपस्थित लोगो को समझाया ।
कार्यक्रम में बैतूल जिला रक्त दाता सामूह के सदास्य ,रेड क्रास सोसायटी के सचिव ,सदस्य ग्राम के गण मान्य नागरिक समेत स्कूली छात्र छात्राये उपस्थित थे ।

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