21/06/2025
मोहब्बत में इंसान जुदा तब ही होता है, जब उन दोनों में से कोई एक मुनाफिक निकल जाए, फिर वो चाहे, बीबी- शौहर हो, या महबूब - महबूबा,क्योंकि जब दो इंसान मुख्लिस ( ईमानदार, सच्चा, वफादार, निष्ठावान) के साथ मोहब्बत करते हैं, तो वो खुदा जो 70 ममताओ का मालिक है, वो एक कर देता हैं, क्योंकि वही तो कहता है,अगर सारी दुनिया तुम्हें फायदा पहुँचाना चाहे, तो नहीं पहुँचा सकती, जब तक अल्लाह न चाहे।
और अगर सारी दुनिया तुम्हें नुकसान पहुँचाना चाहे, तो नहीं पहुँचा सकती, जब तक अल्लाह न चाहे, मोहब्बत और ईबादत का एक ही वसूल है, मुख्लिस रहोगे, तो खुदा भी मिलेगा और महबूब भी, शिर्क करने पर उतरोगे, तो खुदा को भी गवां बैठोगे और महबूब को भी, क्योंकि शिर्क न खुदा माफ़ करता है, और न ही मोहब्बत में उसकी कोई जगह है।