21/06/2025
मोहब्बत में इंसान जुदा तब ही होता है, जब उन दोनों में से कोई एक मुनाफिक निकल जाए, फिर वो चाहे, बीबी- शौहर हो, या महबूब - महबूबा,क्योंकि जब दो इंसान मुख्लिस ( ईमानदार, सच्चा, वफादार, निष्ठावान) के साथ मोहब्बत करते हैं, तो वो खुदा जो 70 ममताओ का मालिक है, वो एक कर देता हैं, क्योंकि वही तो कहता है,अगर सारी दुनिया तुम्हें फायदा पहुँचाना चाहे, तो नहीं पहुँचा सकती, जब तक अल्लाह न चाहे।
और अगर सारी दुनिया तुम्हें नुकसान पहुँचाना चाहे, तो नहीं पहुँचा सकती, जब तक अल्लाह न चाहे, मोहब्बत और ईबादत का एक ही वसूल है, मुख्लिस रहोगे, तो खुदा भी मिलेगा और महबूब भी, शिर्क करने पर उतरोगे, तो खुदा को भी गवां बैठोगे और महबूब को भी, क्योंकि शिर्क न खुदा माफ़ करता है, और न ही मोहब्बत में उसकी कोई जगह है।
18/06/2025
अकलमंद इंसान तो वही है, जिसको प्राकृतिक ने जो भी दी है, जैसी भी दिया है,उसे बेहतर से बेहतरीन इंसान बना ले, नही तो बेवकूफों की कमी थोड़ी न है, बेहतरीन की तलाश में बेहतर भी खो बैठते हैं, इंसान जो भी फैसला लेता है, वो सही या गलत नही होता, उसे अपनी ताकत से, अपनी समझदारी से, अपने हुनर से, अपने मेहनत से, अपनी हिम्मत से,उस फैसले को सही बनाना पड़ता है, दुनिया तो बैठी ही है कमियां निकलने के लिए, अगर हम भी अपने फैसले में कमियां निकालने लगे, तो दुनिया और हम में फर्क ही क्या रह जाएगा।
17/06/2025
रिश्ते, मजबूरियों और दबाव पे टिकें हो तो, अगर खरीददार मिल जाएं तो बिक जातें हैं, इसलिए रिश्तो में ईमानदारी, सच्चाई, वफादारी, एक दूसरे पे मर मिटने का जुनून, किसी भी हद से गुजरने का साहस, ये सब हैं तो, सात समुंदर पार बैठा इंसान भी सिर्फ और सिर्फ आपका ही है, अगर नही है, तो साथ बैठने वाला इंसान भी आपका नही, और ये इंसान भी अजीब है, सोचता है कि सामने वाला पहले अफोर्ड करे तो हम भी करें, ऐ इब्न आदम, पहले ये सब तू तो अफोर्ड कर ले, इंसान को उम्मीद खुद से रखनी चाहिए, की मै सामने वाले को क्या क्या दे सकता हूं।
05/06/2025
🔹 अपराध में संलिप्तता पाई गई
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🔹 पुलिस ने रिपोर्ट/चार्जशीट कोर्ट में दायर की
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🔹 मजिस्ट्रेट ने प्रथम दृष्टया अपराध पाया
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🔹 आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हुआ या फरार है
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🔹 मजिस्ट्रेट ने **Arrest Warrant (CrPC Sec 70)** जारी किया
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🔹 वारंट संबंधित थाना / SHO को भेजा गया
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🔹 पुलिस ने आरोपी को ट्रेस किया
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🔹 पुलिस ने वारंट दिखाया (CrPC Sec 75)
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🔹 आरोपी को गिरफ्तार किया गया (CrPC Sec 46)
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🔹 गिरफ्तारी के समय आरोपी को:
• गिरफ्तारी कारण बताया गया
• वकील से संपर्क की अनुमति दी गई
• परिवार को सूचना दी गई
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🔹 आरोपी को **24 घंटे के भीतर कोर्ट में पेश किया गया** (CrPC Sec 76)
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🔹 मजिस्ट्रेट ने फैसला किया:
• ज़मानत (Bail) मिलेगी या नहीं
• पुलिस/ज्यूडिशियल रिमांड दी जाएगी
30/05/2025
मेरी मोहब्बत मेरे ईमान का हिस्सा है, मेरा ईमान और मेरी मोहब्बत मुझे अपनी जान से भी ज्यादा प्यारी है, तो दुनिया को चाहिए कि इसमें दखल न दें, क्योंकि जब एक इंसान से उसकी दुनिया छीन ली जाए, तो उससे खतरनाक इस दुनिया में कोई है नही, क्योंकि अब उसके पास खोने के लिए कुछ है ही नही, और जो है वो चला भी जाए तो कोई गम नही।
22/05/2025
मैं इश्क़ का वो फकीर, जो आपके दर पड़ा रहता हूं,आपके इश्क़ के नशे में मदहोश पड़ा रहता हूं, सब्र के कैद खाने में खुद को कैद कर,आपके इंतेज़ार में पड़ा रहता हूं, अब ये जिंदगी हो चुकी है आपकी, सांसों की तरह इस रग रग में सिर्फ और सिर्फ आप बसे हो, ऐ खुदा अगर ये जिंदगी उसका हो नही सकता, तो तुझे चाहिए कि इस जिंदगी को कर दे खाक-ए सुपुर्द, क्योंकि तू जितनी भी सांसे अता करेगा, हर सांस मै उस पे लूटा बैठूंगा।
20/05/2025
म से मोहब्बत और म से मौत, इन दोनों में से किसी एक का भी तकाजा आ जाए,तो इंसान
को सबको और सब कुछ छोड़ कर गले लगना पड़ता है, इसलिए तैयार रहा करें, क्योंकि अगर सच में मौत और मोहब्बत होगी न, तो ना ही कोई रोक पाता है और ना ही इंसान खुद रोक पाता है, अगर रुक जाए तो कुछ भी हो लेकिन मौत और मोहब्बत तो नही हो सकती।
17/05/2025
दुआ कुबूल हो या न हो, इबादत में रत्ती बराबर भी कमी नही होनी चाहिए, और आशिक या माशूक मिले या न मिले,ये वक्त की बात है लेकिन इश्क़ में रत्ती बराबर भी कमी नही होनी चाहिए, दुनिया की सबसे बड़ी गलत फहमी ये है की उन्हें लगता है कि आपको हमसे दूर कर दे तो हमारी इश्क़ मर जाएगी, अरे इश्क़ रूह है, और रूह कभी मरती है क्या? इनफैक्ट जब भी आप हमसे दूर जाती हैं,तो हमारे इश्क़ में शिद्दत और बढ़ जाती है, और सब्र इस कदर आ जाती हैं की इस जहान से लेकर उस जहान तक इंतजार, सिर्फ और सिर्फ इंतज़ार, इंतजार, और आपसे इश्क़ में और इजाफा हो जाता है, ये बकवास लाइन है कि दूरियां मोहब्बत खा जाती हैं, अगर सच में इश्क़ हो तो,दूरियां तो इश्क़ में और इजाफा कर देती हैं।
17/05/2025
मौत तो हर हाल में आनी और मरना तो सब को है, फिर क्या फर्क पड़ता है कोई आज मरे या कल, लेकिन हिम्मत है तो जीकर दिखाओ न, जो इस जिंदगी को हर सेकंड मौत देती है, हिम्मत है, तो जिससे मोहब्बत है उसका साथ और उसके साथ चलकर दिखाओ न, हिम्मत है तो हर हाल से लड़कर, हर हद पार करके के एक होकर दिखाओ न, पता है मौत से ज्यादा तकलीफ जिंदगी देती है, जिंदगी के हर कदम पे एक मौत का फरिश्ता तैनात होता है, जो रूह तो नही निकालता, लेकिन मौत से भी बत्तर तकलीफ देता है,जिंदगी से आसान तो मौत है, जिंदगी हर पल तकलीफ देती है, लेकिन मौत हर तकलीफ से अजाद कर देती है, कहते हैं कि मोहब्बत बुझदिलों के लिए बनी ही नही, मोहब्बत तो वही करते हैं, और जब तक है इस जिस्म में जान ,निभाते भी वही हैं,जिनमें हिम्मत होती है, दिलेरी होती है, जिगर होता है, अगर हिम्मत के साथ अपनी मंजिल की ओर बढ़ते रहें, तो इंसान एक हो जाता हैं, वक्त और हालात के आगे अपना रास्ता बदलने वाले कभी एक हो सकते हैं क्या?
16/05/2025
मोहब्बत में मजबूरियां नही होती, मोहब्बत में कुर्बान होना, खुद को समर्पण करना, किसी भी हद तक त्याग के लिए हर वक्त तैयार रहना, क्योंकि मोहब्बत में इंसान तो खुदा से लड़ जाता है, फिर ये दुनिया और इस दुनिया के लोग क्यो हैं, मोहब्बत में दुनियां दबाव तो बनाती ही है, अब आप उस दबाव में आकर, उस दबाव को मजबूरियां का नाम दे दें,और जिससे मोहब्बत का दावा किया है आपने उसे बीच राह में ही छोड़ जाएं, तो वो मोहब्बत थोड़ी न हुई, वो तो आपने टाइम पास के लिए एक बंदा चुना था, जब दबाव बना तो आपने मजबूरियों के नाम पे अपना पल्ला झाड़ लिया और साथ देने के बजाए खुद को दूर कर दिया, अगर ऐसा है तो वो कभी मोहब्बत था ही नही बस वक्त का तकाजा था, क्योंकि जहां मोहब्बत होती है, वहा जिस्म और रूह की तरह होती है, किसी एक भी जुदा करोगे, तो सीधे मौत, मोहब्बत का दावा तो हर कोई कर लेता है बात तब हो न, जब मोहब्बत में कोई हद ही न हो, और जिस मोहब्बत हद हो, वो मोहब्बत कहां, मोहब्बत के राहों में अपने ही हर कदम पे दीवार बनेंगे, बात तब हो न जब उस दीवार से रस्ता बनाकर आगे बढ़े, नही तो दीवार को मजबूरियां बताकर वही से लौट जाना वो मोहब्बत थोड़ी न है।
11/04/2025
अपनी दर्द व तकलीफों को सरे आम कहने से,क्या उनसे निजात मिल जाती क्या?, तो फिर, ख्याल रहें, एक लाश के लिए कब्रिस्तान से बेहतरीन जगह कोई हो सकती है क्या, मै जानता हूं, बल्कि मैं उस हाल में हूं, जो दर्द व तकलीफ कहना मुश्किल हो, उसे कहने के लिए अल्फ़ाज़ ही न मिले तो वो दर्द व तकलीफ कयामत से कम नही, दुनिया समझने का दावा तो करती है लेकिन सच ये है कि जिस पे जो गुजरती है उसके अलावा कोई समझ ही नही सकता, लेकिन ख्याल रहे, खुदा कभी भूलता नही, उसे हर चीज का इल्म होता है।