Maa Sangita Vidya Mandir school Bishunpurwa Lauriya, reopens on 16 august 2021
Maa Sangita Vidya Mandir school
We give Education, manner and culture to our students.
आप सभी देशवासियों को त्याग की पर्व ईद-उल-अज़हा की हार्दिक शुभकामनाएं।
फ्यूज बल्ब।
शहर में बसे एक क्षेत्र में एक बड़े आईएएस अफसर रहने के लिए आए जो हाल ही में सेवानिवृत्त हुए थे।
ये बड़े वाले रिटायर्ड आईएएस अफसर हैरान परेशान से रोज शाम को पास के पार्क में टहलते हुए अन्य लोगों को तिरस्कार भरी नज़रों से देखते और किसी से भी बात नहीं करते थे।
एक दिन एक बुज़ुर्ग के पास शाम को गुफ़्तगू के लिए बैठे और फिर लगातार उनके पास बैठने लगे लेकिन उनकी वार्ता का विषय एक ही होता था-मैं इतना बड़ा आईएएस अफ़सर था कि पूछो मत, यहां तो मैं मजबूरी में आ गया हूं।
मुझे तो दिल्ली या जयपुर में अमीरजादो के इलाके में बसना चाहिए था और वो बुजुर्ग प्रतिदिन शांतिपूर्वक उनकी बातें सुना करते थे।
परेशान होकर एक दिन जब बुजुर्ग ने उनको समझाया-आपने कभी फ्यूज बल्ब देखे हैं?
बल्ब के फ्यूज हो जाने के बाद क्या कोई देखता है कि बल्ब किस कम्पनी का बना हुआ था या कितने वाट का था या उससे कितनी रोशनी या जगमगाहट होती थी?
बल्ब के फ्यूज़ होने के बाद इनमें से कोई भी बात बिलकुल ही मायने नहीं रखती है।
लोग ऐसे बल्ब को कबाड़ में डाल देते हैं।
है कि नहीं? फिर जब उन रिटायर्ड आईएएस अधिकारी महोदय ने सहमति में सिर हिलाया तो बुजुर्ग फिर बोले - रिटायरमेंट के बाद हम सब की स्थिति भी फ्यूज बल्ब जैसी हो जाती है।
हम कहां काम करते थे, कितने बड़े/छोटे पद पर थे, हमारा क्या रुतबा था, यह सब कुछ भी कोई मायने नहीं रखता।
मैं सोसाइटी में पिछले कई वर्षों से रहता हूं और आज तक किसी को यह नहीं बताया कि मैं दो बार संसद सदस्य रह चुका हूं।
वो जो सामने वर्मा जी बैठे हैं, रेलवे के महाप्रबंधक थे।
वे सामने से आ रहे सिंह साहब सेना में ब्रिगेडियर थे।
वो मेहरा जी इसरो में चीफ थे।
ये बात भी उन्होंने किसी को नहीं बताई है, मुझे भी नहीं पर मैं जानता हूं सारे फ्यूज़ बल्ब करीब-करीब एक जैसे ही हो जाते हैं, चाहे जीरो वाट का हो या 50 या 100 वाट हो।
कोई रोशनी नहीं तो कोई उपयोगिता नहीं।
उगते सूर्य को जल चढ़ा कर सभी पूजा करते हैं।
पर डूबते सूरज की कोई पूजा नहीं करता।
कुछ लोग अपने पद को लेकर इतने वहम में होते हैं कि रिटायरमेंट के बाद भी उनसे अपने अच्छे दिन भुलाए नहीं भूलते।
वे अपने घर के आगे नेम प्लेट लगाते हैं - रिटायर्ड आइएएस/रिटायर्ड आईपीएस/रिटायर्ड पीसीएस/ रिटायर्ड जज आदि - आदि।
अब ये रिटायर्ड IAS/IPS/PCS/तहसीलदार/ पटवारी/ बाबू/ प्रोफेसर/ प्रिंसिपल/ अध्यापक कौन-सी पोस्ट होती है भाई?
माना कि आप बहुत बड़े आफिसर थे, बहुत काबिल भी थे, पूरे महकमे में आपकी तूती बोलती थी पर अब क्या?
अब यह बात मायने नहीं रखती है बल्कि मायने रखती है कि पद पर रहते समय आप इंसान कैसे थे...
आपने कितनी जिन्दगी को छुआ...
आपने आम लोगों को कितनी तवज्जो दी...
समाज को क्या दिया...
कितने लोगों की मदद की...
पद पर रहते हुए कभी घमंड आये तो बस याद कर लीजिए कि एक दिन सबको फ्यूज होना है।
10/02/2021
Free admission is going on for new session in class NC to Eight.
23/01/2021
समस्त देशवासियों को मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं |
आप सभी मित्रों, अभिभावकों और अनुजो को दीपावली एवं बाल दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं |
मुझे ठीक से याद नहीं है कि मैने कब पढा था *पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय *ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय*
अब पता लगा ये ढाई अक्षर क्या है-
*ढाई अक्षर के ब्रह्मा और ढाई अक्षर की सृष्टि*
*ढाई अक्षर के विष्णु और ढाई अक्षर की लक्ष्मी*
*ढाई अक्षर के कृष्ण और ढाई अक्षर की कान्ता।(राधा रानी का दूसरा नाम)*
*ढाई अक्षर की दुर्गा और ढाई अक्षर की शक्ति*
*ढाई अक्षर की श्रद्धा और ढाई अक्षर की भक्ति*
*ढाई अक्षर का त्याग और ढाई अक्षर का ध्यान*
*ढाई अक्षर की तुष्टि और ढाई अक्षर की इच्छा*
*ढाई अक्षर का धर्म और ढाई अक्षर का कर्म*
*ढाई अक्षर का भाग्य और ढाई अक्षर की व्यथा*
*ढाई अक्षर का ग्रन्थ और ढाई अक्षर का सन्त*
*ढाई अक्षर का शब्द और ढाई अक्षर का अर्थ*
*ढाई अक्षर का सत्य और ढाई अक्षर की मिथ्या*
*ढाई अक्षर की श्रुति और ढाई अक्षर की ध्वनि*
*ढाई अक्षर की अग्नि और ढाई अक्षर का कुण्ड*
*ढाई अक्षर का मन्त्र और ढाई अक्षर का यन्त्र*
*ढाई अक्षर की श्वांस और ढाई अक्षर के प्राण*
*ढाई अक्षर का जन्म ढाई अक्षर की मृत्यु*
*ढाई अक्षर की अस्थि और ढाई अक्षर की अर्थी*
*ढाई अक्षर का प्यार और ढाई अक्षर का युद्ध*
*ढाई अक्षर का मित्र और ढाई अक्षर का शत्रु*
*ढाई अक्षर का प्रेम और ढाई अक्षर की घृणा*
*जन्म से लेकर मृत्यु तक हम बंधे हैं ढाई अक्षर में।*
*हैं ढाई अक्षर ही वक़्त में और ढाई अक्षर ही अन्त में।*
*समझ न पाया कोई भी है रहस्य क्या ढाई अक्षर में।*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
21/10/2020
20/10/2020
अपने हाथ में एक बच्चे के साथ एक प्रवासी मां की मिट्टी की मूर्ति और उसके पीछे उसके तीन बच्चे हैं, जिन्हें कोलकाता में देवी दुर्गा के रूप में पूजा जाएगा|
यह विषय लॉकडाउन से प्रभावित लाखों प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा को बयां करता है!
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