Saraswati Vidya Mandir Polytechnic College Lalganj Pratapgarh

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Saraswati Vidya Mandir Polytechnic College Lalganj Pratapgarh जमाने की भीड़ में।
बस खुद को पाने निकला हूं।

23/11/2025

Pratapgarh mein shyam bihari gali mein Godaam ya dukaan rent par lene ke liye sampark kare 8317058036

सरस्वती विद्या मंदिर पॉलिटेक्निक कॉलेज लालगंज प्रतापगढ़।Mob- 8317058036Whatsapp 9389450404तकनीकी शिक्षा---प्रौद्योगिकी ज...
01/06/2020

सरस्वती विद्या मंदिर पॉलिटेक्निक कॉलेज लालगंज प्रतापगढ़।
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तकनीकी शिक्षा---

प्रौद्योगिकी जीवन और समाज के हर पहलू को छू रही है। आजादी के बाद से, हमारे देश में तकनीकी शिक्षा प्रणाली काफी बड़े आकार की प्रणाली में उभरी है, जो देश भर में संस्थानों में प्रमाण पत्र, डिप्लोमा, डिग्री, स्नातकोत्तर डिग्री और डॉक्टरेट स्तर पर विभिन्न प्रकार के व्यापारों और विषयों में शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करती है।
तकनीकी शिक्षा के मानक को बनाए रखने के लिए, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की स्थापना 1945 में हुई थी। एआईसीटीई मानदंडों और मानकों की योजना, निर्माण और रखरखाव, मान्यता के माध्यम से गुणवत्ता आश्वासन, प्राथमिक क्षेत्रों में वित्त पोषण के लिए जिम्मेदार है। निगरानी और मूल्यांकन, प्रमाणीकरण और पुरस्कारों की समानता बनाए रखना और देश में तकनीकी शिक्षा के समेकित और एकीकृत विकास और प्रबंधन को सुनिश्चित करना।

यह महत्वपूर्ण क्यों है?

भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उम्र देख रहा है। आधुनिक युग में तकनीकी शिक्षा की भारी मांग है। उम्र में विकसित जीवन का पैटर्न कुछ पचास साल पहले हमारे समाज में मिलने वाले व्यक्ति से बहुत अलग है।

कई मामलों में पेशेवर तकनीकी शिक्षा द्वारा सामान्य शिक्षा को प्रतिस्थापित किया गया है। तकनीकी शिक्षा रोजगार और सफल करियर के लिए अच्छा अवसर प्रदान करती है।

तकनीकी शिक्षा समग्र शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा हिस्सा योगदान देती है और हमारे देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में, तकनीकी शिक्षा को विभिन्न स्तरों पर प्रदान किया जाता है, जैसे कि शिल्प कौशल, डिप्लोमा और डिग्री, स्नातकोत्तर और विशेष क्षेत्रों में अनुसंधान, तकनीकी विकास और आर्थिक प्रगति के विभिन्न पहलुओं को पूरा करना।

इसके अलावा, बेरोजगारी की इस उम्र में, केवल तकनीकी शिक्षा नौकरी और आरामदायक रहने का आश्वासन दे सकती है, जो लोग अभी भी पारंपरिक संस्थानों में हैं, परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं, जिनके पास आधुनिक प्रणालियों में थोड़ी प्रासंगिकता है, उन्हें रोजगार के अवसर नहीं मिलते हैं और, स्वाभाविक रूप से, वे निराशा के पीड़ित बनने के लिए खत्म हो जाते हैं और खुद को आधुनिक दुनिया के मुख्यधारा से अलग कर पाते हैं। किसी भी विशेषज्ञता और पेशेवर कौशल के बिना उनके स्टीरियो टाइप की गई सामान्य शिक्षा के साथ वे मानव समाज की प्रगति और समृद्धि में योगदान करने के लिए कुछ भी हासिल नहीं करते हैं। वे इस बारे में काफी जानते हैं और यह जागरूकता उन्हें निराशाजनक छोड़ देती है।

यह सिर्फ एक अंत नहीं था, यह आधुनिक भारत का सपना था और उस सपने को साकार करने के लिए तकनीकी शिक्षा को उचित महत्व दिया गया था।

संभावनाएं और पहल

भारत उच्चतम क्षमता वाले स्नातकों के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन इसकी आबादी की तुलना में केवल कुछ ही उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा प्राप्त करते हैं। भारत ने वर्षों से तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता और उपलब्धता को काफी हद तक मजबूत किया है, जो स्नातक की रोज़गार दर को दोगुना कर रहा है, जो अब भारतीय उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बेहतर हैं।

इसलिए, पारंपरिक अध्ययन का समर्थन करने और तकनीकी शिक्षा को पढ़ाने की सख्त जरूरत है, क्योंकि इससे न केवल देश के विकास में मदद मिलेगी, बल्कि वह कौशल रखने वाले व्यक्ति भी होंगे। तकनीकी शिक्षा, शिक्षा का एक हिस्सा है, जो सीधे विनिर्माण और सेवा उद्योगों में आवश्यक जानकारी और कौशल प्राप्त करने से संबंधित है।

तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए, भारत में दो संरचनात्मक धाराएं हैं - औपचारिक और अनौपचारिक। पॉलिटेक्निक, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा माध्यमिक शिक्षा के व्यावसायिककरण की केंद्रीय प्रायोजित योजना भारत में तकनीकी शिक्षा के औपचारिक स्रोतों में से एक हैं। जबकि अल्पकालिक तकनीकी पाठ्यक्रम प्रदान करने वाले स्वयं-शिक्षण और छोटे निजी संस्थान अनौपचारिक शिक्षा के अंतर्गत आते हैं।

भारत में नए औद्योगिक और श्रमिक रुझानों ने स्पष्ट रूप से तकनीकी शिक्षा की आवश्यकता को निर्दिष्ट किया है, लेकिन माध्यमिक स्तर की शिक्षा में तकनीकी शिक्षा का आधार मजबूत होना चाहिए और छात्रों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक स्पष्ट मार्ग बनाया जाना चाहिए। तकनीकी विश्वविद्यालयों के साथ उच्च गुणवत्ता की अधिक तकनीकी डिग्री स्थापित की जानी चाहिए।

आज भारत आत्मनिर्भर बनने की राह पर अग्रसर हो चुका है तथा आने वाले समय में देश को विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न कार्य क्षम...
30/05/2020

आज भारत आत्मनिर्भर बनने की राह पर अग्रसर हो चुका है तथा आने वाले समय में देश को विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न कार्य क्षमता वाले युवाओं और कुशल व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ने वाली है तथा इन आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए डिप्लोमा इंजीनियरिंग कोर्स सबसे अच्छा विकल्प है डिप्लोमा इंजीनियरिंग में उन सभी कौशलों को पढ़ाया जाता है जो उद्योगों को आवश्यक होते हैं तथा
सरस्वती विद्या मंदिर पॉलिटेक्निक कॉलेज ऐसे ही उद्योग विकास के कार्य क्षेत्र में अधिक बल दे रहा है तथा विभिन्न उद्योगों में कौशल शिक्षा को बेहतर तैयार करने के लिए सदैव तत्पर है।
हमसे संपर्क करें सरस्वती विद्या मंदिर पॉलिटेक्निक कॉलेज लालगंज प्रतापगढ़।
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21/05/2020

कृत्रिम बुद्धिमत्ता या Artificial Intelligence क्या है और कैसे काम करता है?

क्या आप जानते हैं की कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) क्या है (What is Artificial Intelligence in Hindi)? जब से computers का आविष्कार हुआ है तब से इंसानों ने इसका इस्तमाल काफी बढ़ा दिया है. वो इन्हें अपने सारे काम करने में लगा देते हैं जिससे हमें उनपर ज्यादा depend होना पड़ता है. इससे उनकी dependancy का exponential growth हुआ है. मनुष्यों ने इन मशीनों की capability को काफी हद तक बढ़ा दिया है जैसे की उनकी speed, उनका size और उनकी कार्य करने की क्ष्य्मता जिससे की ये हमारे काम बहुत ही कम समय में कर सकें जिससे की हमारे समय की बचत होगी.
आपने भी शायद ये लक्ष्य किया होगा की आजकल जिसे देखो Artificial Intelligence की बस तारीफ किये जा रहा है. यदि आपको इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है तब आपको चिंतित होने की जरुरत नहीं है क्यूंकि आज में आप लोगों को Artificial Intelligence क्या है और ये इतना जरुरी क्यूँ है के बारे में पूरी जानकरी देने जा रहा हूँ. जिससे की आपके मन में उठ रहे सारे सवालों के जवाब इस article के समाप्त होने तक आपको मिल जायेंगे.

एक नया domain अब सामने आया है जिसे लोग Artificial Intelligence के नाम से जानते हैं जो की मूल रूप से Computer Science का ही branch है और जिसका मुख्य काम ये है की ऐसे intelligent machine बनाएं जो की मनुष्य के जैसे ही बुद्धिमान हो और जिसकी अपनी ही decision लेने की क्ष्य्मता हो. इससे ये हमारे काम और भी आसान कर देंगे. तो फिर बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं और जानते हैं की आखिर ये आर्टिफिशल इंटेलिजेंस क्या होता है और हम मनुष्यों के लिए ये इतना जरुरी क्यूँ है.

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस क्या है (What is Artificial Intelligence in Hindi)

AI का full form है Artificial Intelligence या हिंदी में इसका अर्थ है कृत्रिम होशियारी या कृत्रिम दिमाग. ये एक ऐसा simulation है जिससे की मशीनों को इंसानी intelligence दिया जाता है या यूँ कहे तो उनके दिमाग को इतना उन्नत किया जाता है की वो इंसानों के तरह सोच सके और काम कर सके. ये खासकर computer system में ही किया जाता है. इस प्रक्रिया में मुख्यत तीन processes शामिल है और वो हैं पहला learning (जिसमें मशीनों के दिमाग में information डाला जाता है और उन्हें कुछ rules भी सिखाये जाते हैं जिससे की वो उन rules का पालन करके किसी दिए हुए कार्य को पूरा करे), दूसरा है Resoning (इसके अंतर्गत मशीनों को ये instruct किया जाता है की वो उन बनाये गए rules का पालन करके results के तरफ अग्रसर हो जिससे की उन्हें approximate या definite conclusion हासिल हो) और तीसरा है Self-Correction.
अगर हम AI की particular application की बात करें तो इसमें expert system, speech recognition और machine vision शामिल हैं. AI या Artificial Intelligence को कुछ इस प्रकार से बनाया गया है की वो इंसानों के तरह ही सोच सके, कैसे इंसानी दिमाग किसी भी problem को पहले सीखती है, फिर उसे process करती है, decide करती है की क्या करना उचित होगा और finally उसे कैसे solve करते उसके बारे में सोचती है. उसी प्रकार की artificial intelligence में भी मशीनों को भी इंसानी दिमाग की सारी विसेश्तायें दी गयी हैं /
Artificial Intelligence के बारे में सबसे पहले John McCarthy ने ही दुनिया को बताया. वो एक American Computer Scientist थे, जिन्होंने सबसे पहले इस technology के बारे में सन 1956 में the Dartmouth Conference में बताया. आज ये एक पेड़ की तरह बहुत ही बड़ा हो गया है और सारी robotics process automation से actual robotics तक सभी चीज़ें इसके अंतर्गत आती हैं. विगत कुछ वर्षों में इसने बहुत publicity gain कर ली है क्यूंकि इसमें big data की technology भी शामिल हो चुकी है और इसकी दिनबदिन बढती हुई speed, size और variety of data business से बहुत से companies इस technology को अपनाना चाहते हैं. अगर में AI की बात करूँ तो इसकी मदद से raw data में pattern को identify करना काफी आसान हो गया है वहीँ इंसानों द्वारा बहुत गलतियाँ होती हैं, इससे companies को कम समय में अपने data के ऊपर ज्यादा insight प्राप्त होती है.

Artificial Intelligence की Philosophy

जब इन्सान Computer System की असली ताकत की खोज कर रहा था, तब मनुष्य की अधिक जानने की इच्छा ने उसे ये सोचने में बाध्य किया की “क्या Machine भी हमारी तरह सोच सकते हैं ?” और इसी तरह ही Artificial Intelligence की development को शुरुवात हुई जिसका की केवल एक ही उद्देश्य था की एक ऐसी intelligent machine की संरचना की जाये जो की इंसानों की तरह ही बुद्दिमान हो और हमारे ही तरह ही सोच सके.
AI के लक्ष्य

• Expert Systems बनाना − कुछ ऐसे systems को बनाना जो की intelligent behavior प्रदर्शन कर सके, जो की learn कर सके, demonstrate, explain, और इसके साथ अपने users को advice कर सके.
• Human Intelligence को Machines में implement करना – ऐसे systems बनाना जो की इंसानों की तरह ही समझ, सोच, सिख, और behave कर सकें.

Artificial Technique क्या है?

अगर हम real world की बात करें तब, ज्ञान की कुछ अजीबोगरीब विसेश्ताएं हैं जैसे की
• इसकी volume बहुत ही ज्यादा है, या यूँ कहे तो अकल्पनीय है.
• ये पूरी तरह से well-organized or well-formatted नहीं है.
• इसके साथ साथ ये निरंतर बदलता रहता है.
अब बात आता है की तब AI Technique क्या है. तो में आपको बता दूँ की Artificial Technique एक ऐसा technique हैं जिससे की हम ज्ञान या knowledge को ऐसे organized way में रखेंगे की जैसे हम इसका इस्तमाल बहुत ही efficiently कर सकते हैं जैस की −
• ये पढने और समझने योग्य होना चाहिए जो लोग इसे provide करते हैं.
• ये आसानी से modify करने योग्य होना चाहिए जिससे की इसकी errors को आसानी से सुधारा जा सके.
• ये बहुत से जगहों में useful होना चाहिए हालाँकि ये incomplete और inaccurate हो.

AI techniques को अगर कोई comlpex programs के साथ equip किया जाये तो उसकी speed of ex*****on को बहुत हद तक बढाया जा सकता है.

Artificial intelligence के types या प्रकार

Artificial Intelligence को बहुत से प्रकारों में divide किया जा सकता है, लेकिन उनमें से जो सबसे मुख्य हैं वो हैं 1) Weak AI

2) Strong AI

Weak AI: –

इस प्रकार के AI को narrow AI भी कहा जाता है, इन AI system को कुछ इस प्रकार से design किया गया है की ये केवल एक particular task ही करें. उदहारण के तोर पर इसमें Virtual Personal Assistants such as Apple’s Siri weak AI का बहुत बढ़िया उदहारण है.

Strong AI :-

इस प्रकार के artificial intelligence को general artificial intelligence भी कहा जाता है. इस प्रकार के AI System में generalized मनुष्य की बुद्धिमता होती है जिससे की ये समय आने पर अगर इसे कोई difficult सा task दिया जाये तो ये आसानी से उसका solution निकाल सकता है. Turing Test को mathematician Alan Turing द्वारा सन 1950 में develop किया गया था जिसका इस्तमाल ये जानने के लिए किया गया था की क्या Computers भी इंसानों के तरह सोच सकते हैं की नहीं.

Arend Hintze, जो की एक assistant professor भी हैं of integrative biology and computer science and engineering, Michigan State University में. उन्होंने ही AI को चार हिस्सों में Categorize किया है जो की कुछ इसप्रकार हैं.

• Type 1: Reactive machines.
इसका एक उदहारण है Deep Blue, जो की एक IBM chess program है और जिसने Garry Kasparov को सन 1990s में हराया था. Deep Blue को कुछ इसप्रकार से design किया गया है की ये chess board के pieces को identify कर सकता है और उसके हिसाब से prediction कर सकता है. लेकिन इसकी अपनी कुछ memory नहीं है जिससे ये अपने past move के बारे में याद नहीं रख सकता जो की ये future में इस्तमाल कर सके. ये possible moves को analyze करता है – इसके खुद की और इसके opponent की – और फिर ये उस हिसाब से सबसे बेहतर strategic move को चुनता है. Deep Blue और Google’s AlphaGO को narror purposes के लिए design किया गया है और इसे आसानी से दुसरे situations में apply नहीं किया जा सकता.

• Type 2: Limited memory.
इस प्रकार के AI systems अपने past experiences को इस्तमाल कर अपने future decisions को तय करते हैं. कुछ decision-making functions को जो की autonomous vehicles में इस्तमाल किये जाते हैं उन्हें इसी प्रकार से design किया गया है. ऐसे ही Observations को इस्तमाल कर भविष्य में होने वाले हादसों को कुछ हद तक रोका जा सकता है, जैसे की car को दुसरे lane में change करना. ये Observations permanently store नहीं होते.

• Type 3: Theory of mind.
ये एक psychology term है. ये एक hypothetical concept है. इसमें ये दर्शाता है की दूसरों का अपना beliefs, desires and intentions होता है जो की उनके decisions में impact डालते हैं. इस प्रकार के AI अभी इस दुनिया में मेह्जुद नहीं हैं.

• Type 4: Self-awareness.
इस category के अंतर्गत AI systems की खुद की self awareness होती है, अपनी एक consciousness होती हैं. Machines जिनकी self-awareness होती हैं वो अपने current state को समझते हैं और उसी information को इस्तमाल कर ये समझते हैं की दुसरे क्या feel करते हैं. इस प्रकार के AI अभी इस दुनिया में मेह्जुद नहीं हैं.

AI technology के उदहारण

• Automation एक ऐसी प्रक्रिया जिससे की system और process function को automatic कर दिया जाता है. उदहारण के तोर पे Robotic process automation, को programmed किया जाता है ताकि वो high volume, repeatable tasks को आसानी से कर सकें. RPA और IT Automation में ये अंतर है की RPA में वो circumstances के हिसाब से adapt होता है वहीँ IT Automation में ऐसा नहीं होता है.

• Machine Learning एक ऐसा विज्ञान है जिसमें computer बिना programming के काम करता है. Deep Learning Machine Learning का ही एक भाग है जिसमें predictive analytics को automation किया जाता है. Machine learning के मुख्यत तीन algorithms हैं : supervised learning, जहाँ की data sets को patterns कहा जाता है और जिसे की नए data sets को lebel करने में काम आता है, दूसरा है unsupervised learning, जहाँ की data sets को lebel नहीं किया जाता बल्कि उन्हें sort किया जाता है उनके समानता और असामनता के आधार पर. तीसरा है reinforcement learning, जहाँ data sets को lebel नहीं किया जाता पर कुछ action और ज्यादा action करने के बाद, AI system को feedback दिया जाता है.

• Machine vision एक ऐसा विज्ञानं है जिसकी मदद से हम computer को देखने के काबिल कर सकते हैं. Machine Vision में computer visual infomations को camera की मदद से capture करती है और analyze करती है, इसके साथ साथ analog-to-digital conversion और digital signal भी करती है. इसके इंसानी आँखों के साथ भी तुलना की जाती है, लेकिन machine vision की कोई limitation नहीं है और ये दीवारों के पार भी देख सकते हैं. इसी लिए इनका काफी इस्तमाल medical में भी होता है.

• Natural language processing (NLP) एक ऐसा process है जिसमें computer program की मदद से किस इंसानी भाषा को मशीन के द्वारा समझा जाता है. उदहारण के तोर पे आप SPAM detection को ही ले सकते हैं जिसमे computer की program ही ये decide कर लेता है की कोन सी text original emain है और कोन सी Spam email है. NLP के कामों में मुख्यत text translation, sentiment analysis and speech recognition आता है.

• Pattern recognition एक ऐसा branch है machine learning का जो की data में patterns को identify करता है और जिसका इस्तमाल बाद में data analysis में होता है

• Robotics एक ऐसा field है जिसमें की Robots की design और manufacturing में ज्यादा focus किया जाता है. ऐसे काम जो की हम इंसानों के लिए बहुत ही मुस्किल हैं वहां हम robots को इस्तमाल में लाते हैं. क्यूंकि वो कठिन से कठिन काम बड़ी आसानी से कर लेते हैं और वो भी बिना किसी गलती के. उदाहंरण के तोर में हम उनका इस्तमाल Car Production के Assembly line में करते हैं.

AI के Applications

• AI in healthcare.
AI का सबसे बड़ा इस्तमाल Healthcare industry में होता है. यहाँ सबसे बड़ा challenge ये है की कैसे हम patients का बेहतर इलाज कर सकें और वो भी कम से कम लागत में. इसीलिए अब companies AI का इस्तमाल hospitals में कर रही है जिससे की बेहतर और जल्दी मरीजों का इलाज सुचारू रूप से हो सके. ऐसे ही एक बहुत ही famous healthcare technology है और जिसका नाम है IBM Watson. इसके साथ साथ अब common बीमारियों के लिए Health assistants भी आ चुके हैं जिसकी मदद से अब आम लोग अपने बिमार्रियों का इलाज करवा सकते हैं.इन सभी मशीनों के इस्तमाल से अब Healthcare industry में एक बहुत ही बड़ी क्रांति आने वाली है.

• AI in business.
Robotic process automation की मदद से अब highly repetitive tasks को अब मशीनों के द्वारा किया जा रहा है. Machine learning algorithms को अब analytics and CRM platforms के साथ integrate किया जा रहा है जिससे की ये पता चल सके की कैसे companies अपने customers को बेहतर मदद कर सके. Chatbots को websites के सकत incorporate किया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द customers को service दी जा सके.

• AI in education.
AI की मदद से अब automate grading किया जा सकता है जिससे की educators को ज्यादा time मिल सके बच्चों को पढ़ने में. AI की मदद से कोई भी छात्र को अच्छी तरह से inspect किया जा सकता है, क्या उसकी जरुरत है, किन किन subjects में वो wealk हैं इत्यदि ताकि उस छात्र का सही तरीके से मदद की जा सके. आजकल AI Tutors की मदद से Students घर बैठे ही सभी चीज़ों का हल ढूंड ले रहे हैं. इससे उनकी पढ़ने में interest भी काफी बढ़ रही है.

• AI in finance.
AI की मदद से financial institutions को काफी लाभ मिल रहा है. क्यूंकि companies को पहले data anylasis में पहले खूब पैसे और समय invest करना पड़ता था पर अब ऐसा नहीं होता अब तो AI ही सब कुछ बहुत ही कम समय में कर देती है.

• AI in law.
पहले ये documents की processing बहुत ही चिंता पैदा करने वाली काम थी पर अब AI के मदद से अब ये documents की processing बड़ी आसानी से कर दी जाती है इससे काम बड़े ही efficient तरीके से चलता है.

• AI in manufacturing.
AI का इस्तमाल Manufacturing Industry में भी खूब जोरों से है. पहले जिस काम को करने के लिए सेकड़ों लोग लगते थे वहीँ आज एक मशीन के मदद से वही काम बहुत जल्दी और बेहतर किया जा पा रहा है.

Artificial Intelligence और हमारा भविष्य

दिनबदिन Artificial Intelligence का इस्तमाल बढ़ते ही जा रहा है. हम मनुष्य धीरे धीरे ऐसे मशीनों के ज्यादा आदि बनते जा रहे हैं. हम हमारी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश में Artificial Intelligence को और भी ज्यादा शक्तिशाली और ज्यादा advance कर रहे हैं ताकि ये हमारे कठिन से कठिन काम कर सके. ऐसा होने से हमारे जाने अनजाने में ये मशीन और भी ज्यादा ताकतवर बन जा रहे हैं. और इनमें सोचने की शक्ति भी धीरे धीरे बढ़ रही है जिससे ये किसी भी परिस्तिथि में खुद को ढाल सकते हैं और ये हमारे लिए अच्छी बात नहीं है.

वो दिन दूर नहीं जब ये हमारे आदेश का पालन भी न करें और अपने मन मुताबक ही काम करें. ऐसे में मनुष्य समाज को काफी नुकशान उठाना पड़ सकता है. ये हमारे सभी industries में अपना जड़ पहले से ही गाड़ चुके हैं और हम उनके बहुत आदि बन चुके हैं जिससे उनके बिना हमारा काम हमें करने में भी तकलीफ हो रही है. सुनने में भले ही ये बात थोडा अटपटा लगे लेकिन ये 100% सही है. मेरा मानना ये है की भले ही हम Artificial Intelligence का इस्तमाल अपने जीवन में अच्छाई के लिए करें लेकिन हमें ये बात ध्यान में रखना बहुत ही जरुरी है की कुछ चीज़ें जो की Control के ऊपर है उनकी चाबी हमें हमारे पास ही रखनी चाहिए. ताकि समय आने पर हम उसका सही इस्तमाल कर सकें.

मुझे पूर्ण आशा है की मैंने आप लोगों को Artificial Intelligence क्या है के बारे में पूरी जानकारी दी और में आशा करता हूँ आप लोगों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (What is Artificial Intelligence in Hindi) के बारे में समझ आ गया होगा. मेरा आप सभी पाठकों से गुजारिस है की आप लोग भी इस जानकारी को अपने आस-पड़ोस, रिश्तेदारों, अपने मित्रों में Share करें, जिससे की हमारे बिच जागरूकता होगी और इससे सबको बहुत लाभ होगा. मुझे आप लोगों की सहयोग की आवश्यकता है जिससे मैं और भी नयी जानकारी आप लोगों तक पहुंचा सकूँ.

मेरा हमेशा से यही कोशिश रहा है की मैं हमेशा अपने readers या पाठकों का हर तरफ से हेल्प करूँ, यदि आप लोगों को किसी भी तरह की कोई भी doubt है तो आप मुझे बेझिजक पूछ सकते हैं. मैं जरुर उन Doubts का हल निकलने की कोशिश करूँगा. आपको यह लेख Artificial Intelligence क्या है कैसा लगा हमें comment लिखकर जरूर बताएं ताकि हमें भी आपके विचारों से कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिले.

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ELECTRICAL ENGINEERING
PRAKHAR SHRIVASTAVA
SARASWATI VIDYA MANDIR POLYTECHNIC COLLEGE LALGANJ PRATAPGARH

12/02/2020
Admission open in Saraswati Vidya Mandir Polytechnic college lalganj pratapgarh. Code 4498Mob: 8317058036 ,  9389450404
12/07/2019

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हीलियम-3 800 करोड़ रुपये है भारत के मिशन की लागत3445 करोड़ रुपये प्रति टन है हीलियम-3 की कीमत10 लाख टन हीलियम-3 होने का ...
12/07/2019

हीलियम-3

800 करोड़ रुपये है भारत के मिशन की लागत

3445 करोड़ रुपये प्रति टन है हीलियम-3 की कीमत

10 लाख टन हीलियम-3 होने का अनुमान चांद पर

एजेंसियां, वॉशिंगटन : मंगलयान की कामयाबी के बाद अब इसरो का अगला मिशन चांद है। बताया जा रहा है कि इसरो चांद पर खोदाई का काम जल्द शुरू करने जा रहा है। चांद के दक्षिणी सिरे पर हीलियम-3 की खोज करने के लिए इसरो इस साल अक्टूबर में मिशन लॉन्च करेगा। इस न्यूक्लियर फ्यूल की कीमत खरबों डॉलर में है। एजेंसी ने दावा किया है कि अगर उसे चांद पर हीलियम मिल जाता है तो दुनिया में 250 साल तक ऊर्जा की कमी नहीं होगी।

एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया की कई एजेंसियां चांद पर हीलियम-3 की खोज कर रही हैं। इसरो का कहना है कि जिस किसी भी देश में चांद से हीलियम-3 लाने पाने की ताकत होगी, वह इस प्रोसेस पर अपना वर्चस्व कायम करेगा।

इसरो अक्टूबर में एक रोवर और जांच मिशन लॉन्च करेगा। इस मिशन में चांद की अछूती सतह पर मिट्टी और पानी के नमूने इकट्ठा किए जाएंगे। इन नमूनों को आगे की जांच के लिए धरती पर लाया जाएगा। 800 करोड़ रुपये के खर्च वाले इस मिशन को नासा के तुलनामत्क मिशन से काफी सस्ता बताया जा रहा है।

नासा का दावा

नासा का दावा है कि चांद पर 10 लाख मीट्रिक टन हीलियम-3 मौजूद है। इसका एक चौथाई हिस्सा धरती पर लाया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि अभी अपार न्यूक्लियर एनर्जी वाले हीलियम का ये आइसोटोप धरती पर सीमित मात्रा में है। क्योंकि ये सूरज से उसकी सौर वायु में उत्सर्जित होता है। हमारा मैग्नेटिक फील्ड एरिया इसे धरती की सतह पर पहुंचने से रोकता है। वहीं, चांद का ऐसा कोई मैग्नेटिक फील्ड एरिया नहीं है। इसलिए नासा के साइंटिस्ट्स का मानना है कि चांद की सतह हीलियम-3 को सोख रही है।

एक नजर में हीलियम-3

चांद पर हीलियम-3 होने की पुष्टि मशहूर भूविज्ञानी हैरिसन श्मिट ने 1972 में अपोलो-17 मिशन से चांद से लौटने के बाद की थी। हीलियम-3 न्यूक्लियर फ्यूजन के लिए एक अनमोल और स्वच्छ ईंधन है, जिसे धरती पर प्राप्त नहीं किया जा सका है। हालांकि हीलियम-3 की सीमित मात्रा में माइनिंग और सस्ती दरों पर परिवहन किया जा सके तो यह फ्यूजन एक अच्छा ऑप्शन भी हो सकता है।

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Symphony in CCarbon is by no means the most abundant element in the cosmos, but it is undoubtedly the most important to ...
11/07/2019

Symphony in C

Carbon is by no means the most abundant element in the cosmos, but it is undoubtedly the most important to life as we know it. For every 1,000 hydrogen atoms in the universe, there are only five or so carbon atoms. But every cell in the human body — indeed, every living cell on Earth — relies on carbon as the chemical backbone of all organic molecules.

In Symphony in C, geophysicist Robert Hazen provides a deep dive into the history, culture and science surrounding carbon. And that history is far longer than cosmologists once presumed. Although the vast majority of the universe’s carbon is forged inside stars, about a trillionth of today’s carbon was assembled from subatomic particles almost 13.8 billion years ago, just 15 to 20 minutes after the Big Bang. This means that a fraction of the carbon in your body is not “star stuff,” as astronomer Carl Sagan once exclaimed — it’s even older than the universe’s first stars.

Carbon is not just important for living things. Its unusual chemistry gives it an unmatched ability to react with other atoms to form both small, simple molecules and large, complex ones, making it a building block for everything from polymers to pharmaceuticals and nanomaterials. As Hazen describes, carbon’s chemical diversity yields materials that include the darkest surfaces and the brightest pigments, as well as the slipperiest lubricants and stickiest glues.Like many musical symphonies, Hazen’s book is arranged in four parts, paralleling the Greeks’ basic elements of earth, air, fire and water. Individual tales in carbon’s story explore its presence in our planet’s minerals (SN: 10/15/16, p. 22), the role of carbon-bearing gases in keeping our early planet warm under a faint young sun (SN: 5/4/13, p. 30), carbon’s ubiquitous presence in fossil fuels that we burn and its role in the origin and evolution of life in Earth’s ancient oceans.

Symphony in C is chock-full of facts, but Hazen admits there’s much we don’t know about carbon, including exactly how much Earth holds, how the element moves from the atmosphere into the depths of the mantle and then back to the surface, and whether those movements, which help regulate climate, have changed substantially since our planet was young.

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GSLV Mk III is a three-stage heavy lift launch vehicle developed by ISRO. The vehicle has two solid strap-ons, a core li...
09/07/2019

GSLV Mk III is a three-stage heavy lift launch vehicle developed by ISRO. The vehicle has two solid strap-ons, a core liquid booster and a cryogenic upper stage.

GSLV Mk III is designed to carry 4 ton class of satellites into Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) or about 10 tons to Low Earth Orbit (LEO), which is about twice the capability of GSLV Mk II.

The two strap-on motors of GSLV Mk III are located on either side of its core liquid booster. Designated as ‘S200’, each carries 205 tons of composite solid propellant and their ignition results in vehicle lift -off . S200s function for 140 seconds. During strap-ons functioning phase, the two clustered Vikas liquid Engines of L110 liquid core booster will ignite 114 sec after lift -off to further augment the thrust of the vehicle. These two engines continue to function after the separation of the strap-ons at about 140 seconds after lift -off.

The first experimental flight of LVM3, the LVM3-X/CARE mission lifted off from Sriharikota on December 18, 2014 and successfully tested the atmospheric phase of flight. Crew module Atmospheric Reentry Experiment was also carried out in this flight. The module reentered, deployed its parachutes as planned and splashed down in the Bay of Bengal.

The first developmental flight of GSLV Mk III, the GSLV-Mk III-D1 successfully placed GSAT-19 satellite to a Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) on June 05, 2017 from SDSC SHAR, Sriharikota.

GSLV MkIII-D2, the second developmental flight of GSLV MkIII successfully launched GSAT-29, a high throughput communication satellite on November 14, 2018 from Satish Dhawan Space Centre SHAR, Sriharikota
Height: 43.43 mVehicle Diameter: 4.0 mHeat Shield (Payload Fairing) Diameter: 5.0 mNumber of Stages: 3Lift Off Mass: 640 tonnes

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