SK Memorial Foundation Of India

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SK Memorial Foundation Of India is a NGO for Education that provides free education to poor children in India.

22/06/2026

CBSE Class 12 री-इवैल्यूएशन 2026: 'No Change' से न हों परेशान, ये 5 मुख्य बातें आपके लिए जानना जरूरी है

सीबीएसई कक्षा 12 के री-इवैल्यूएशन के परिणाम घोषित होने के साथ ही, हम छात्रों और अभिभावकों के बीच की स्वाभाविक बेचैनी को गहराई से महसूस कर सकते हैं। एक शैक्षणिक परामर्शदाता के तौर पर, मैं समझता हूँ कि आपकी उम्मीदों और भविष्य के सपनों का बोझ कितना भारी होता है। 21 जून, 2026 को बोर्ड ने लगभग 87% आवेदनों के परिणाम डिजिलॉकर पर जारी कर दिए हैं। यदि आपके परिणाम में 'No Change' (कोई बदलाव नहीं) दिख रहा है, तो इसे अंत न मानें। बोर्ड ने इस बार पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में कुछ ऐसे क्रांतिकारी कदम उठाए हैं, जो आपके आत्मविश्वास को पुनः बहाल करने में मदद करेंगे।

आईआईटी (IIT) विशेषज्ञों की निगरानी में 'फुल-प्रूफ' सिस्टम

इस वर्ष पुनर्मूल्यांकन की पूरी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया को अभूतपूर्व रूप से सुरक्षित बनाया गया है। डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के साथ-साथ आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) और आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के विशेषज्ञों ने इस पूरी प्रणाली की निगरानी की है। एक पॉलिसी एनालिस्ट के तौर पर मैं बताना चाहूँगा कि इन शीर्ष संस्थानों का मुख्य कार्य सीबीएसई टीम के साथ मिलकर सिस्टम को किसी भी 'अनधिकृत या दुर्भावनापूर्ण पहुंच' (unauthorized access) से सुरक्षित रखना था, ताकि परिणामों की अखंडता (integrity) पर कोई आंच न आए। इस निष्पक्षता को लेकर बोर्ड का आधिकारिक रुख स्पष्ट है:

"सीबीएसई आश्वासन देता है कि निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए हर आवेदन को एक मजबूत और सावधानीपूर्वक मॉनिटर किए गए सिस्टम के माध्यम से संसाधित किया गया है।"

'No Change' का मतलब अंत नहीं: खुद अपनी कॉपी देखने का मौका

अक्सर छात्र 'No Change' स्टेटस देखकर हताश हो जाते हैं, लेकिन सीबीएसई की नई गाइडलाइन आपको सशक्त बनाती है। बोर्ड उन छात्रों को, जिन्होंने सत्यापन (Verification) के लिए आवेदन किया था और जिनका स्टेटस नहीं बदला, संबंधित सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) में जाकर अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का व्यक्तिगत निरीक्षण (Physical Inspection) करने का अवसर दे रहा है।

Watch Full Video on it: https://youtu.be/f9rnRGRIcNg
यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि छात्रों के लिए आत्म-संतोष (self-satisfaction) का मार्ग है। डिजिटल स्क्रीन से हटकर जब आप अपनी मेहनत को 'कागज पर स्याही' के रूप में खुद देखते हैं, तो वह आपको एक मानसिक संतोष और स्पष्टता प्रदान करता है। परामर्श: जब आप क्षेत्रीय कार्यालय में निरीक्षण के लिए जाएं, तो अपना मूल एडमिट कार्ड और संबंधित विषय की मार्किंग स्कीम की एक प्रति साथ अवश्य रखें। इससे आप यह बेहतर समझ पाएंगे कि बोर्ड के मानकों के अनुसार आपके उत्तरों का मूल्यांकन कैसे किया गया है।

दोधारी तलवार: अंक बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं

पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करना एक बड़ा निर्णय है। एक पॉलिसी एनालिस्ट के नजरिए से, 'अंक घटने' का नियम अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मूल्यांकन के मानकों को उच्च बनाए रखता है और 'तुच्छ आवेदनों' (frivolous applications) को हतोत्साहित करता है। छात्रों को मानसिक रूप से इन तीन परिणामों के लिए तैयार रहना चाहिए:

* अंकों में बढ़ोतरी (Increase): यदि मूल्यांकन के दौरान कोई मानवीय या तकनीकी त्रुटि रह गई थी।
* अंकों में कमी (Decrease): यदि पूर्व में किसी प्रश्न पर मार्किंग स्कीम से अधिक अंक दे दिए गए थे।
* कोई बदलाव नहीं (No Change): यदि प्रारंभिक मूल्यांकन बोर्ड के मानकों के अनुरूप पूरी तरह सटीक था।

याद रखें, संशोधित अंक (चाहे वे कम ही क्यों न हों) अंतिम माने जाएंगे और पुरानी मार्कशीट अमान्य हो जाएगी।

फीस में भारी कटौती और रिफंड की नई नीति

सीबीएसई ने इस बार छात्रों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए शुल्क संरचना में भारी कटौती (Massive Reduction) की है, जो बोर्ड के छात्र-हितैषी दृष्टिकोण को दर्शाता है। एक विवरणात्मक तुलना के रूप में देखें तो: जहाँ पहले स्कैन की गई प्रतियों के लिए छात्रों को ₹700 देने पड़ते थे, अब उसे घटाकर मात्र ₹100 कर दिया गया है। इसी प्रकार, सत्यापन (Verification) का शुल्क भी ₹500 से कम करके ₹100 कर दिया गया है, और पुनर्मूल्यांकन अब प्रति प्रश्न मात्र ₹25 के शुल्क पर उपलब्ध है।

रिफंड पॉलिसी: बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि री-इवैल्यूएशन के बाद आपके अंकों में थोड़ी भी वृद्धि होती है, तो जमा किया गया पूरा शुल्क छात्र के स्रोत खाते (source account) में वापस कर दिया जाएगा। साथ ही, तकनीकी कारणों से हुए किसी भी अतिरिक्त भुगतान को भी स्वचालित रूप से वापस किया जाएगा।

पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) और कंपार्टमेंट (Compartment): फर्क समझना है जरूरी

छात्रों के बीच इन दो प्रक्रियाओं को लेकर अक्सर भ्रम होता है, जिसे स्पष्ट करना अनिवार्य है। पुनर्मूल्यांकन मौजूदा उत्तर पुस्तिका की समीक्षा है, जबकि कंपार्टमेंट एक नई परीक्षा है।

पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation): यह उन छात्रों के लिए है जो परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं लेकिन अंकों से संतुष्ट नहीं हैं। ध्यान दें कि यह प्रक्रिया किसी 'फेल' छात्र को 'पास' नहीं कर सकती, यह केवल अंकों के सूक्ष्म सुधार के लिए है। कंपार्टमेंट परीक्षा (Compartment Exam): यह उन छात्रों के लिए एक 'नया अवसर' (Fresh Attempt) है जो एक या दो विषयों में अनुत्तीर्ण रहे हैं। यह परीक्षा 15 जुलाई को निर्धारित है।

संक्षेप में: पास हुए छात्र जो अपने नंबरों में सुधार चाहते हैं, वे 'पुनर्मूल्यांकन' (Re-evaluation) के विकल्प को अपनाएं, जबकि एक या दो विषय में फेल हुए छात्र 15 जुलाई की 'कंपार्टमेंट परीक्षा' की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करें।

निष्कर्ष

री-इवैल्यूएशन के परिणाम केवल अंकों का जोड़-घटाव नहीं हैं, बल्कि यह बोर्ड की जवाबदेही और आपकी मेहनत के बीच का एक सेतु है। यदि परिणाम आपकी अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, तो निराश न हों; भविष्य के रास्ते बहुत व्यापक हैं। बोर्ड ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए 24x7 फ्री टेली-हेल्पलाइन (1800-11-8004) की सुविधा प्रदान की है, जहाँ आप विशेषज्ञों से परामर्श ले सकते हैं।

क्या बोर्ड की यह नई 'पारदर्शिता क्रांति' छात्रों के परीक्षा के प्रति नजरिए को बदलने और उनके मानसिक तनाव को कम करने में वास्तव में सफल होगी?

17/05/2026

CBSE Result 2026 Update

CBSE द्वारा लागू किए गए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम के बाद evaluation process में बड़े बदलाव किए गए हैं।

✅ Scanned Answer Sheet केवल ₹100 में
✅ Re-evaluation Fees कम
✅ Students अब अपनी checked copy देख सकेंगे
✅ Transparency & Fair Evaluation पर ज़ोर

यह बदलाव छात्रों के अधिकारों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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12/05/2026

Many schools are currently facing confusion regarding the “Mandatory Public Disclosure Website Link” on the CBSE SARAS Portal.

As a CBSE Resource Person, I have observed that several institutions are unable to find the exact option for uploading the MPD link, leading to uncertainty during compliance updates and OASIS verification.

To simplify the process, I created this detailed infographic explaining:
✔️ Where to update the MPD website link
✔️ How CBSE verifies disclosure details
✔️ Step-by-step SARAS & OASIS navigation
✔️ Mandatory Appendix IX documents required on school websites
✔️ Important compliance points schools must not ignore

One important clarification:
CBSE generally does not ask schools to upload the MPD PDF directly on SARAS. Instead, schools must ensure that the “Mandatory Public Disclosure” section is clearly available on their official website homepage with all required documents publicly accessible.

I hope this guidance helps school leaders, principals, administrators, and educators manage CBSE compliance more effectively.

— Dr. Alok Srivastava
CBSE Resource Person | Trainer | Educationist
15 Years of Experience in Education & School Leadership

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