24/03/2026
घर मे चाहे 10 कमरे हो लेकिन सबसे ज्यादा रौनक, उस कमरे मे होती है जिस कमरे मे "माँ" होती है..
भारतीय रुपये पर लगातार दबाव बढ़ते जा रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण 23 मार्च, दिन सोमवार को भारतीय करेंसी अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई। डॉलर के मुकाबले रुपया आज 41 पैसे टूटकर 93.94 पर आ गया। लगातार कमजोर होती रुपये की वैल्यू के बाद यह आशंका बढ़ती जा रही है कि कहीं रुपया 100 प्रति डॉलर के पार न चला जाए। यदि ऐसा हुआ तो भारत की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित होगी और आम जनता पर भी इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।
रुपये में गिरावट का कारण
विदेशी फंड की लगातार निकासी और शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट रुपये में गिरावट का कारण बनी है। दरअसल, मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के कारण कच्चे तेल की कीमत ऊंचाई पर जा रही है। जिससे डॉलर इंडेक्स मजबूत हो रहा है।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच चुकी है। जब से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग की शुरुआत हुई है तब से लेकर अब तक कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50% की गिरावट आ चुकी है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में आज डॉलर के मुकाबले रुपया 93.84 पर ओपन हुआ था। लेकिन बाद में गिरकर 93.94 पर आ गया। इसके पहले शुक्रवार को भी रुपये में बड़ी गिरावट देखी गई थी। 64 पैसे की गिरावट के बाद भारतीय करेंसी 93.53 के ऑल टाइम लो लेवल पर क्लोज हुई थी।
भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट
20 मार्च को ही आरबीआई के द्वारा यह जानकारी दी गई की 13 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 7.052 बिलियन डॉलर की गिरावट आई। जिसके बाद यह 709.759 बिलियन डॉलर हो गया। रुपये में बड़ी गिरावट को रोकने के लिए आरबीआई बीच-बीच में हस्तक्षेप कर रहा है।
रुपये में गिरावट का असर
आयात :
जब डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है तो सबसे पहले आयात महंगा हो जाता है। यानी जो भी चीज हम विदेशों से मंगवाते हैं उसके लिए हमें ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। जैसे एलपीजी, कच्चा तेल , पेट्रोल डीजल, विदेशी दवाइयां, सोना, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि। इसके अलावा विदेशी यात्रा और विदेशी पढ़ाई भी महंगी हो जाती है।
निर्यात
रुपये में गिरावट से निर्यात सस्ता हो जाता है। यानी विदेशी खरीदारों के लिए भारतीय सामानों की कीमत कम हो जाती है। जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं है। हालांकि कुछ इस सेक्टर जैसे आईटी, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स आदि की कमाई बढ़ जाती है। इसके अलावा विदेश से भारत पैसे भेजने वाले लोगों को भी फायदा होगा।
आम आदमी की जेब पर क्या असर होगा?
भारतीय अर्थव्यवस्था आयात पर काफी ज्यादा निर्भर करती है। रुपए का महंगा होना यानी महंगाई बढ़ने का खतरा और बढ़ जाना। आम आदमी के लिए पेट्रोल डीजल के साथ ही एलपीजी की कीमतों में भी तेजी हो सकती है। इसके अलावा मोबाइल, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक आइटम भी महंगे हो सकते हैं। जो लोग विदेश में घूमने जाने का प्लान बना रहे हैं या जिनके बच्चे विदेश में पढ़ते हैं उनके लिए भी खर्चा बढ़ सकता है।
100 प्रति डॉलर पार जाएगा रुपया
बाजार के कई जानकार यह संभावना जता चुके हैं कि यदि अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच जारी यह जंग लंबे समय तक बनी रहती है तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी देखने को मिलेगी, डॉलर इंडेक्स मजबूत होगा और रुपये में बड़ी गिरावट देखी जा सकती है। रुपया 100 प्रति डॉलर पर जा सकता है। हालांकि आरबीआई इस गिरावट को रोकने के लिए बीच में हस्तक्षेप करते रहता है।रुपया गिरता रहा,
पर सवाल उठाने वाले कहाँ खो गए? 이
₹60 पर हंगामा था, ₹94 पर खामोशी क्यों?रुपया जाएगा 100 प्रति डॉलर के पार? 41 पैसे टूटकर 93.94 के ऑल टाइम निचले स्तर पर पहुंचा, आम आदमी पर क्या होगा प्रभाव?